मणिपुर जेल विभाग ने मनाया पहला स्थापना दिवस, 134 साल के इतिहास में सुधार और पुनर्वास पर जोर मणिपुर जेल एवं सुधार सेवा विभाग ने अपनी स्थापना के 134 साल पूरे होने पर पहला स्थापना दिवस आयोजित किया। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने जेलों को केवल सजा तक सीमित न रखकर नैतिक सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाने का आह्वान किया। मणिपुर जेल एवं सुधार विभाग ने अपनी स्थापना के 134 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार को अपना पहला स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया। इंफाल स्थित मणिपुर सेंट्रल जेल परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विभाग के लंबे सफर को याद किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने जेल प्रशासन को नई दिशा देने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेलों की भूमिका केवल बंदियों को कैद रखने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन्हें सामाजिक और नैतिक सुधार के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सजा से आगे सुधार और पुनर्वास की जरूरत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक कानून के तहत किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक हिरासत में रखे गए लोगों को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना था कि जेलों को नैतिक सुधार, व्यक्तिगत बदलाव और सामाजिक पुनर्वास के संस्थानों के तौर पर कार्य करना चाहिए, जिससे कैदी रिहाई के बाद एक बेहतर नागरिक बनकर समाज में लौट सकें। कर्मचारियों की कमी दूर करने और आधुनिक ढांचे का भरोसा जेल प्रशासन के कामकाज की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने विभाग में मानव संसाधन की कमी का संज्ञान लिया। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को उपयुक्तता के अनुसार डाई-इन-हार्नेस योजना या सीधी भर्ती के माध्यम से शीघ्र भरा जाना चाहिए। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जेलों के बुनियादी ढांचे को वर्तमान मानकों के अनुसार उन्नत और आधुनिक बनाने के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएगी। गृह मंत्री ने रेखांकित किया विभाग का ऐतिहासिक महत्व कार्यक्रम में मौजूद गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने पहले स्थापना दिवस को विभाग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि पहले उचित पहचान और मान्यता न मिलने के कारण विभाग अपनी स्वर्ण जयंती नहीं मना सका था। हालांकि, अब आवश्यक मान्यता प्राप्त होने के बाद विभाग इस महत्वपूर्ण आयोजन को संभव बना पाया है। गृह मंत्री ने यह भी जोड़ा कि जनता की सेवा और सरकारी कामकाज में प्रत्येक विभाग की भूमिका समान रूप से अहम होती है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में जेलों की समग्र स्थिति में सुधार लाने के लिए सक्रियता से काम कर रही है और उन्होंने कठिन परिस्थितियों में कर्तव्य निभाने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों के समर्पण की सराहना की। उत्कृष्ट सेवा के लिए मेडल से नवाजे गए जेल अधीक्षक समारोह के दौरान मणिपुर सेंट्रल जेल, इंफाल के अधीक्षक एस.के. भद्रिका को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता दिवस 2024 के अवसर पर उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति सुधारात्मक सेवा पदक से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी, जिसे इस समारोह में विधिवत प्रदान किया गया। इस गौरवपूर्ण आयोजन में नागालैंड के पुलिस महानिदेशक रूपिन शर्मा, मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (कारागार) अरविंद कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आई.के. मुइवा सहित जेल एवं सुधार सेवा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम राज्य में कानूनी व्यवस्था, बंदी अधिकारों और जेल प्रशासन में सुधार के व्यावहारिक कदमों को दर्शाता है। • भारत में: देश भर के सुधारात्मक संस्थानों में विचाराधीन कैदियों के अधिकारों और संस्थागत सुधारों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित हो रहा है। इससे कानूनी सहायता और मानवाधिकार मानकों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। • मणिपुर में: राज्य में खाली पड़े जेल पदों को भरने से सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी में सुधार होगा। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण से कैदियों के पुनर्वास और जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा। • रोजगार के अवसर: डाई-इन-हार्नेस और सीधी भर्ती के जरिए रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू होने से योग्य उम्मीदवारों को सरकारी रोजगार मिल सकेगा। आवेदन प्रक्रिया की अधिसूचना जारी होने पर स्थानीय युवाओं को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। • न्यायिक सुधार: विचाराधीन कैदियों को दोषी न मानने के सिद्धांत पर जोर देने से कानूनी प्रक्रियाओं में संवेदनशीलता बढ़ेगी। इससे कैदियों के पुनर्वास कार्यक्रमों को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ मणिपुर जेल एवं सुधार सेवा विभाग ने अपने 134 वर्षों के इतिहास में पहली बार स्थापना दिवस का आयोजन किया, क्योंकि विभाग को लंबे समय बाद औपचारिक मान्यता मिली है। • देरी से मिली मान्यता: गृह मंत्री के अनुसार विभाग को पूर्व में औपचारिक मान्यता नहीं मिली थी, जिसके चलते वह अपनी स्वर्ण जयंती भी नहीं मना पाया था। प्रशासनिक पहचान मिलने के बाद ही पहली बार स्थापना दिवस मनाना संभव हो सका। • संस्थागत सुधार की आवश्यकता: जेलों में कर्मचारियों की भारी कमी और पुराने बुनियादी ढांचे के कारण प्रबंधन में चुनौतियां आ रही थीं। इस ऐतिहासिक अवसर पर सरकार ने प्रणालीगत समस्याओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई। • पुनर्वास पर नया फोकस: आधुनिक न्यायशास्त्र में जेलों को सजा के स्थान से बदलकर सुधार गृह बनाने की मांग बढ़ रही है। इसी नीति के तहत हिरासत में बंद लोगों के अधिकारों और पुनर्वास पर जोर दिया गया। सवाल-जवाब 1. मणिपुर जेल विभाग ने कितने वर्षों के बाद अपना पहला स्थापना दिवस मनाया? मणिपुर जेल एवं सुधार विभाग ने अपनी स्थापना के 134 वर्ष पूरे होने के बाद अपना पहला स्थापना दिवस मनाया। 2. यह कार्यक्रम कहाँ आयोजित किया गया था? यह समारोह इंफाल स्थित मणिपुर सेंट्रल जेल परिसर में आयोजित किया गया था। 3. मुख्यमंत्री ने जेलों की भूमिका के बारे में क्या कहा? मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों को केवल कैद रखने की जगह नहीं, बल्कि नैतिक सुधार और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए। 4. जेल विभाग में कर्मचारियों की कमी को कैसे दूर किया जाएगा? मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों को डाई-इन-हार्नेस योजना या सीधी भर्ती के माध्यम से भरने का सुझाव दिया है। 5. विभाग अपनी स्वर्ण जयंती पहले क्यों नहीं मना सका था? गृह मंत्री के अनुसार, उस समय विभाग को उचित मान्यता नहीं मिली थी, इसलिए वह स्वर्ण जयंती नहीं मना पाया था। 6. समारोह में किस अधिकारी को पदक से सम्मानित किया गया? मणिपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक एस.के. भद्रिका को स्वतंत्रता दिवस 2024 के राष्ट्रपति सुधारात्मक सेवा पदक से सम्मानित किया गया। https://trendkia.com/manipur/manipur-jela-vibhaga-ne-manaya-pahala-sthapana-divasa-134-sala-ke-itihasa-men-sudhara-aura-punarvasa-para-jora-35885 TrendKia — Har trend, sabse pehle.