मणिपुर कैबिनेट का फैसला: कीराओ में बनेगा 70 बिस्तरों वाला डायलिसिस केंद्र, बिजली ट्रांसमिशन टावरों के लिए जमीन मुआवजे की नई दरें मंजूर मणिपुर सरकार ने कीराओ स्थित स्टेट टीबी अस्पताल में 70 बेड का नया डायलिसिस केंद्र स्थापित करने और बिजली ट्रांसमिशन लाइन से प्रभावित जमीन मालिकों को 200 प्रतिशत तक मुआवजा देने का निर्णय लिया है। मणिपुर में गुर्दे की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर चिकित्सा राहत देने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण नियमों को उदार बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो बड़े नीतिगत प्रस्तावों को औपचारिक मंजूरी दी गई। सरकारी प्रवक्ता डॉ. सपम रंजन ने बैठक के उपरांत मीडिया को इन प्रशासनिक निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा की। कीराओ में स्थापित होगा 70 बिस्तरों वाला आधुनिक डायलिसिस केंद्र राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कीराओ स्थित स्टेट टीबी अस्पताल परिसर में 70 बिस्तरों वाले मणिपुर स्टेट डायलिसिस केंद्र के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस विशेष चिकित्सा केंद्र का संचालन जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) की देखरेख में किया जाएगा। डॉ. सपम रंजन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों की भारी संख्या के सामने मौजूदा क्षमता नाकाफी साबित हो रही थी। नियमित उपचार कराने वाले मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था, जिससे उन्हें भारी शारीरिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती थी। नए केंद्र के शुरू होने से डायलिसिस के लिए लगने वाली लंबी प्रतीक्षा अवधि समाप्त होगी। मुफ्त उपचार और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ाव कीराओ का यह आगामी डायलिसिस केंद्र केंद्र सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत संचालित होगा। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार की चीफ मिनिस्टर-गी हकशेलगी तेंगबांग (CMHT) योजना के पंजीकृत लाभार्थियों को इस केंद्र में पूरी तरह निशुल्क इलाज मुहैया कराया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारियों, अभियंताओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने प्रस्तावित स्थल का दौरा कर निर्माण से संबंधित प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन का कार्य पहले ही पूर्ण कर लिया है, जिससे परियोजना के निर्माण कार्य को शीघ्र गति दी जा सकेगी। ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जमीन मुआवजे का नया ढांचा स्वीकृत कैबिनेट बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के तहत बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के विस्तार से प्रभावित होने वाले भूस्वामियों के लिए संशोधित राइट ऑफ वे (RoW) मुआवजा व्यवस्था को मंजूरी दी गई। यह नई रूपरेखा भारत सरकार के संशोधित दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है। इसके तहत बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं, जैसे कि विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्तपोषित कार्यों, डिपॉजिट वर्क्स तथा रेलवे से संबंधित ट्रांसमिशन कार्यों के लिए मुआवजे की दर दोगुनी कर दी गई है। इन परियोजनाओं में टावर बेस के नीचे आने वाली जमीन के लिए भूस्वामियों को भूमि मूल्य का 200 प्रतिशत मुआवजा मिलेगा, जबकि ट्रांसमिशन कॉरिडोर के दायरे में आने वाली भूमि के लिए जमीन के मूल्य का 30 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। राज्य वित्तपोषित परियोजनाओं के लिए निर्धारित दरें राज्य सरकार द्वारा स्व-वित्तपोषित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भी पारदर्शी मुआवजा संरचना तय की गई है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, राज्य की अपनी योजनाओं के अंतर्गत टावर बेस के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के बदले मालिकों को भूमि के बाजार मूल्य का 100 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, तारों के नीचे से गुजरने वाले ट्रांसमिशन कॉरिडोर क्षेत्र की जमीन के लिए भूस्वामियों को भूमि मूल्य का 30 प्रतिशत मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इस कदम से बिजली नेटवर्क के विस्तार में आने वाले भूमि विवादों का तेजी से समाधान होने की उम्मीद है। इसका आप पर असर इस फैसले से नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीजों को सीधा आर्थिक और चिकित्सीय लाभ मिलेगा, जबकि बिजली लाइनों से प्रभावित जमीन मालिकों को दोगुना तक मुआवजा मिल सकेगा। • भारत में: केंद्र सरकार के संशोधित राइट ऑफ वे नियमों को लागू करने से राष्ट्रीय ऊर्जा और रेलवे ट्रांसमिशन परियोजनाओं को भूमि अधिग्रहण में कम बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। इससे अंतरराज्यीय पावर ग्रिड और विकास कार्यों में तेजी आएगी और भूस्वामियों के अधिकारों को संरक्षण मिलेगा। • मणिपुर में: कीराओ और आसपास के गुर्दे के मरीजों को जेएनआईएमएस के तहत 70 नए बेड मिलने से लंबी कतारों और निजी अस्पतालों के भारी खर्च से मुक्ति मिलेगी। वहीं बिजली टावर से प्रभावित स्थानीय जमीन मालिकों को परियोजना के आधार पर 100 से 200 प्रतिशत तक जमीन का मुआवजा मिलेगा। • मरीजों के लिए: सीएमएचटी कार्ड धारकों को डायलिसिस की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं पीएमजेएवाई के लाभार्थी भी इस 70 बिस्तरों वाले केंद्र में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना नियमित उपचार करा सकेंगे। • जमीन मालिकों के लिए: विश्व बैंक, एडीबी और रेलवे परियोजनाओं में टावर बेस वाली जमीन पर 200 प्रतिशत और कॉरिडोर पर 30 प्रतिशत मुआवजा मिलेगा। राज्य वित्तपोषित योजनाओं में टावर बेस के लिए 100 प्रतिशत दर तय होने से मुआवजा दावों का पारदर्शी निपटारा होगा। ऐसा क्यों हुआ मणिपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं की बढ़ती मांग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के मार्ग में आने वाली भूमि अधिग्रहण की बाधाओं को दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया। • डायलिसिस सेवाओं की कमी: राज्य के मौजूदा सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की क्षमता मरीजों की वास्तविक संख्या की तुलना में अपर्याप्त थी। इसके चलते मरीजों को अनिवार्य साप्ताहिक और मासिक सत्रों के लिए कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ता था। • जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के विवाद: बिजली ट्रांसमिशन टावर और हाई-वोल्टेज लाइनों के कारण किसानों व भूस्वामियों की जमीन के उपयोग पर स्थायी पाबंदियां लग जाती हैं। पुराने नियमों के तहत पर्याप्त मुआवजा न मिलने से विकास परियोजनाओं में देरी होती थी। • केंद्रीय दिशानिर्देशों का क्रियान्वयन: भारत सरकार ने राइट ऑफ वे के तहत भूस्वामियों के हितों की रक्षा के लिए नई नीति बनाई थी। राज्य सरकार ने इस राष्ट्रीय नीति को अपने यहां लागू करते हुए वैश्विक वित्तीय एजेंसियों की परियोजनाओं में 200 प्रतिशत मुआवजे का प्रावधान तय किया। सवाल-जवाब 1. मणिपुर में नया डायलिसिस केंद्र कहाँ स्थापित किया जाएगा? यह नया 70 बिस्तरों वाला डायलिसिस केंद्र कीराओ में स्थित स्टेट टीबी अस्पताल परिसर में स्थापित किया जाएगा। 2. इस डायलिसिस केंद्र का संचालन किस संस्थान द्वारा किया जाएगा? इस केंद्र का संचालन जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) के अंतर्गत किया जाएगा। 3. किन मरीजों को यहाँ पूरी तरह मुफ्त इलाज मिलेगा? चीफ मिनिस्टर-गी हकशेलगी तेंगबांग (CMHT) योजना के तहत पंजीकृत लाभार्थियों को निशुल्क उपचार दिया जाएगा, जबकि यह केंद्र पीएमजेएवाई के अंतर्गत भी काम करेगा। 4. विश्व बैंक और एडीबी परियोजनाओं के लिए टावर बेस पर कितना मुआवजा मिलेगा? बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं जैसे विश्व बैंक, एडीबी और रेलवे कार्यों में टावर बेस की जमीन के लिए 200 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। 5. ट्रांसमिशन लाइन कॉरिडोर के दायरे में आने वाली जमीन के लिए क्या मुआवजा तय हुआ है? ट्रांसमिशन कॉरिडोर के दायरे में आने वाली जमीन के लिए भूस्वामियों को भूमि मूल्य का 30 प्रतिशत मुआवजा प्रदान किया जाएगा। 6. राज्य वित्तपोषित बिजली परियोजनाओं में टावर बेस के लिए क्या दर होगी? राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं में टावर बेस की जमीन के लिए भूमि मूल्य का 100 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। https://trendkia.com/manipur/manipur-kaibineta-ka-phaisala-keirao-men-banega-70-bistaron-vala-dayalisisa-kendra-bijali-transamishana-tavaron-ke-lie-jamina-muav-37750 TrendKia — Har trend, sabse pehle.