मणिपुर के 2023 जातीय संकट पर बनी फीचर फिल्म का वैंकूवर में हुआ वर्ल्ड प्रीमियर राज्य में भड़की हिंसा की मानवीय त्रासदी पर आधारित 85 मिनट की मणिपुरी फिल्म इनूंग नगाल्लमदाई का अंतरराष्ट्रीय मंच पर भव्य प्रदर्शन हुआ। पूर्वोत्तर के संवेदनशील राज्य मणिपुर में वर्ष 2023 के दौरान भड़की जातीय हिंसा की मानवीय त्रासदी अब वैश्विक सिनेमा के पटल पर पहुंच गई है। इस जमीनी संकट और आम नागरिकों की पीड़ा को संवेदनशीलता से दर्शाने वाली मणिपुरी फीचर फिल्म ने 2026 वैंकूवर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अपना भव्य प्रीमियर दर्ज कराया। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच इस कलात्मक प्रस्तुति को पैनोरमा सिनेमाज ऑफ एशिया वर्ग के तहत प्रदर्शित किया गया। तीन समानांतर कहानियों में बुनी गई आम लोगों की पीड़ा करीब 85 मिनट की इस फिल्म का मूल शीर्षक इनूंग नगाल्लमदाई है, जिसे अंग्रेजी में फायरफ्लाइज़ इन द डार्क के नाम से जाना जाता है। पूरी कहानी तीन अलग-अलग मानवीय परिस्थितियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो उस विकट दौर की विभीषिका को रेखांकित करती हैं। • पहली कहानी एक गर्भवती महिला की है, जिसे चारों तरफ लगातार हो रही अंधाधुंध गोलीबारी के बीच बच्चे को जन्म देने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। • दूसरी कड़ी में एक नन्हा बालक अपनी बिछड़ी मां की तलाश में भटक रहा है, जिसके साथ एक बेसहारा बछड़ा भी चल रहा है। • तीसरी कहानी एक कैफे मालकिन के मानवीय रुख को दर्शाती है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर हिंसा से भाग रहे लोगों को सुरक्षित पनाह देती है। फिल्म की निर्माता जानी विश्वनाथ ने प्रोजेक्ट के संदेश पर बात करते हुए बताया कि कहानी का मकसद हिंसा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना कतई नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य यह दर्शाना है कि कैसे सब कुछ गंवा देने के बाद भी साधारण नागरिक जीने की उम्मीद नहीं छोड़ते और आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। जमीनी हकीकत और पीड़ितों से मुलाकात के बाद लिखी गई पटकथा इस फीचर फिल्म का निर्देशन योगेश लोहन ने संभाला है, जबकि पटकथा का लेखन उन्होंने चिंगसांगलाकपा के साथ मिलकर किया। निर्देशक ने इस परियोजना की यात्रा को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वह शुरुआत में केवल एक पटकथा लेखक के तौर पर टीम से जुड़े थे। दृश्य लिखने से पहले उन्होंने जमीनी हालात समझने के लिए मणिपुर का दौरा किया और वहां राहत केंद्रों में रह रहे प्रभावित परिवारों से सीधे बात की। योगेश लोहन ने कहा कि पीड़ितों के अथाह दर्द के साथ-साथ उनके भीतर बची उम्मीद और मजबूत इरादे ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। इसी प्रेरणा से प्रेरित होकर पूरी शूटिंग मणिपुर के वास्तविक संघर्ष प्रभावित स्थानों पर स्थानीय लोगों के सक्रिय सहयोग से पूरी की गई। निर्माताओं का लक्ष्य हिंसा की त्रासदी को सनसनीखेज तमाशा बनाए बिना लोगों के धैर्य को सम्मान देना था। विस्थापित शिविरों के ग्रामीणों ने भी निभाया अभिनय वैंकूवर में फिल्म के पहले प्रदर्शन को निर्माण दल ने एक बेहद भावुक उपलब्धि करार दिया, क्योंकि विषम परिस्थितियों के बीच शूटिंग पूरी करना अपने आप में एक बड़ा इम्तिहान था। पर्दे पर इस संजीदा दास्तान को साकार करने में अनुभवी कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी अहम भूमिका निभाई है। बाफ्टा पुरस्कार प्राप्त फिल्म बूंग में नजर आ चुकीं अभिनेत्री बाला हिजाम निंगथौजम इस फिल्म की मुख्य कलाकारों में शामिल हैं। उनके साथ लैशंगथेम तोंथोईंगम्बी देवी, अंगोम पमदाम्बा सिंह, अहैबम चिरंजीत, लुवांग युमलेम्बम और रतन लाई ने मुख्य किरदार निभाए हैं। इनके अलावा हिंसा प्रभावित दूरदराज के गांवों और शरणार्थी शिविरों में रह रहे कई आम नागरिकों ने पहली बार कैमरे के सामने आकर सहज अभिनय किया है। तकनीकी टीम और निर्माण पक्ष सिनेमाटोग्राफी की जिम्मेदारी रवि रंजन शर्मा ने कुशलतापूर्वक संभाली, जबकि मीना लोंगजाम ने क्रिएटिव डायरेक्टर की भूमिका निभाई। फिल्म की ध्वनियों को वास्तविक स्वरूप देने के लिए अमृत प्रीतम और देबजीत चांगमई ने साउंड डिजाइन का काम किया। डेनियल बी जॉर्ज ने इसका संगीत तैयार किया, जबकि संपादन का कार्यभार तिन्नी मित्रा ने संभाला। रजनी बसुमतारी इस पूरे प्रोजेक्ट की कार्यकारी निर्माता रहीं। इसका आप पर असर यह फिल्म पूर्वोत्तर के वास्तविक संकट और विस्थापित नागरिकों की अनसुनी कहानियों को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और सांस्कृतिक मंचों पर चर्चा का विषय बनाती है। • भारत में: देश भर के नागरिकों को मुख्यधारा के समाचारों से परे संघर्ष के जमीनी मानवीय पहलुओं को गहराई से समझने का अवसर मिलता है। इससे पूर्वोत्तर के संवेदनशील मुद्दों पर संवेदनशीलता और राष्ट्रीय विमर्श को नई दिशा मिलती है। • मणिपुर में: राज्य के विस्थापित परिवारों और स्थानीय कलाकारों को अपनी वास्तविक पीड़ा बिना किसी सनसनीखेज ड्रामे के दुनिया के सामने रखने की आवाज मिली है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय सिनेमा मंचों पर मान्यता और प्रोत्साहन प्राप्त होगा। • फिल्म जगत के लिए: कम बजट और वास्तविक संकटग्रस्त इलाकों में संवेदनशील सिनेमाई निर्माण के नए रास्ते खुलते हैं। स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को कठिन परिस्थितियों में प्रामाणिक कहानियां कहने की प्रेरणा मिलती है। • दर्शकों के लिए: आम सिनेमा प्रेमी युद्ध और जातीय संघर्ष के बीच आम परिवारों की जिजीविषा और अस्तित्व की लड़ाई से रूबरू हो सकेंगे। यह दर्शकों को विस्थापितों के मानवीय अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। ऐसा क्यों हुआ यह परियोजना मणिपुर में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के दर्दनाक दौर से उपजी, जिसने हजारों नागरिकों को बेघर कर दिया था। निर्माताओं का उद्देश्य इस अभूतपूर्व मानवीय संकट को बिना राजनीतिक पूर्वाग्रह के केवल मानवीय संवेदना के चश्मे से दर्ज करना था। • जातीय हिंसा की विभीषिका: वर्ष 2023 में राज्य भर में फैले व्यापक तनाव ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया था। इस उथल-पुथल में गर्भवती महिलाओं, बच्चों और सामान्य दुकानदारों जैसे कमजोर वर्गों को सबसे अधिक आघात सहना पड़ा। • राहत शिविरों की जमीनी पड़ताल: निर्देशक योगेश लोहन ने पटकथा लिखने से पूर्व जमीनी स्तर पर पीड़ितों और शरणार्थी शिविरों में जाकर प्रत्यक्ष आपबीती सुनी। इन वास्तविक मुलाकातों ने फिल्म को काल्पनिक कहानी के बजाय वास्तविक अनुभवों पर आधारित दस्तावेज का रूप दिया। • कलात्मक जिम्मेदारी का अहसास: स्थानीय निवासियों के गहरे आघात को देखते हुए निर्माण दल ने इसे सनसनीखेज एक्शन के बजाय मानवीय सहनशीलता की कहानी बनाने का फैसला किया। इसी मंशा से फिल्म को वास्तविक स्थानों पर स्थानीय लोगों के साथ फिल्माया गया। सवाल-जवाब 1. फिल्म इनूंग नगाल्लमदाई का अंतरराष्ट्रीय प्रीमियर कहां आयोजित किया गया? इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर वैंकूवर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में पैनोरमा सिनेमाज ऑफ एशिया सेक्शन के तहत हुआ। 2. इस मणिपुरी फीचर फिल्म का मुख्य विषय क्या है? यह फिल्म 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के दौरान आम नागरिकों के संघर्ष और जीवित रहने की मानवीय कहानियों को दर्शाती है। 3. फिल्म के निर्देशक और लेखक कौन हैं? फिल्म का निर्देशन योगेश लोहन ने किया है, और इसकी पटकथा उन्होंने चिंगसांगलाकपा के साथ मिलकर लिखी है। 4. फिल्म में किन मुख्य कलाकारों ने अभिनय किया है? इसमें बाला हिजाम निंगथौजम, लैशंगथेम तोंथोईंगम्बी देवी, अंगोम पमदाम्बा सिंह समेत कई कलाकारों और विस्थापित शिविरों के स्थानीय लोगों ने काम किया है। https://trendkia.com/manipur/manipur-ke-2023-jatiya-snkata-para-bani-phichara-philma-ka-vancouver-men-hua-varlda-primiyara-46972 TrendKia — Har trend, sabse pehle.