मणिपुर के चूड़ाचंदपुर में अप्रैल से अब तक डेंगू के 3,713 मामले दर्ज, चार लोगों की पुष्टि मणिपुर के चूड़ाचंदपुर जिले में इस साल अप्रैल से 20 अक्टूबर के बीच डेंगू के 3,713 मामले सामने आए हैं, जिनमें से चार मरीजों की मौत की पुष्टि एलाइसा टेस्ट के जरिए हुई है। मणिपुर के चूड़ाचंदपुर जिले में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है, जहां पिछले कुछ महीनों में डेंगू के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस साल 1 अप्रैल से 20 अक्टूबर के बीच जिले में कुल 3,713 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से चार मरीजों की मौत डेंगू के कारण होने की पुष्टि एलाइसा जांच के माध्यम से की गई है, जबकि पांच अन्य मौतों के मामलों की अभी जांच और पुष्टि होना बाकी है। पिछले साल के मुकाबले मामलों में भारी बढ़ोतरी इस बार के आंकड़े पिछले साल की तुलना में बेहद चौंकाने वाले हैं। पूरे वर्ष 2025 के दौरान इस जिले में डेंगू के महज 332 मामले सामने आए थे, जो मौजूदा वर्ष के मुकाबले बेहद कम हैं। इस बार संक्रमण की रफ्तार में तेजी पिछले कुछ महीनों के दौरान देखने को मिली है। अगस्त के आखिर तक जिले में कुल मामले 750 के आसपास थे और दो मौतें दर्ज हुई थीं, लेकिन अक्टूबर के आते-आते यह आंकड़ा 3,700 के पार पहुंच गया, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक बिगड़ते हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। हाल ही में उपायुक्त सम्मेलन कक्ष में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस बैठक में चूड़ाचंदपुर के उपायुक्त कृष्णा कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेंखोनेग मेट और जिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सानिया मोनिका ने संयुक्त रूप से मीडिया को जिले की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति से अवगत कराया। रोकथाम और साफ-सफाई पर विशेष जोर पत्रकारों को संबोधित करते हुए उपायुक्त कृष्णा कुमार ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पानी के ठहराव को हर हाल में रोकें, नियमित रूप से लार्वा सर्वे करवाएं और पूरे क्षेत्र में जागरूकता अभियानों का विस्तार करें। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन पिछले कई महीनों से लगातार मामलों की समीक्षा कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को मुफ्त फॉगिंग, स्रोत घटाने के उपाय और जागरूकता कार्यक्रम जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इसके अलावा अस्पतालों में डेंगू की जांच पूरी तरह मुफ्त की जा रही है और मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अलग से बेड आरक्षित किए गए हैं। कूड़ा प्रबंधन और आगे की रणनीति कूड़ेदान और कचरे के प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन ने जनता से अपील की है। अधिकारियों ने बताया कि कई लोग कचरा तय स्थानों पर डालने के बजाय यहां-वहां फेंक रहे हैं और कचरा संग्रहण सेवा का इस्तेमाल भी नहीं कर रहे हैं। जिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सानिया मोनिका ने जानकारी दी कि इस साल अप्रैल से अब तक लगभग 910 डेंगू मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेंखोनेग मेट ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर प्रकोप पर काबू पाने के लिए लगातार निगरानी, उचित इलाज और अन्य जरूरी कदम उठा रहा है। इसका आप पर असर मणिपुर के चूड़ाचंदपुर में डेंगू के मामलों में भारी बढ़ोतरी से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों के लिए अस्पतालों में विशेष इंतजाम करने पड़ रहे हैं। • चूड़ाचंदपुर में: स्थानीय नागरिकों को अपने आसपास पानी जमा न होने देने और स्वच्छता बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में मुफ्त जांच और आरक्षित बेड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। • भारत में: मानसून और उसके बाद के मौसम में वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे देश के अन्य हिस्सों में भी स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहना पड़ता है। • दैनिक जीवन: लोगों को अपने घरों के आसपास सफाई रखने और कचरा प्रबंधन नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है ताकि संक्रमण के फैलने का जोखिम कम हो सके। • स्वास्थ्य सेवाएं: स्वास्थ्य विभाग मुफ्त फॉगिंग और लार्वा सर्वे जैसी गतिविधियां चला रहा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों की पहचान और इलाज तेजी से हो सके। • जागरूकता: प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे जन जागरूकता अभियानों से आम जनता को बीमारी के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में समय पर जानकारी मिल रही है। ऐसा क्यों हुआ चूड़ाचंदपुर में डेंगू के मामलों में आई इस भारी तेजी के पीछे मानसून के मौसम में जलभराव और मच्छरों के पनपने के अनुकूल परिस्थितियां मुख्य वजह रही हैं। • जलभराव और स्वच्छता: बारिश के मौसम में खुले में पानी जमा होने और कचरा प्रबंधन ठीक से न होने के कारण मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बना। • प्रशासनिक समीक्षा: स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने शुरुआती महीनों से ही स्थिति की निगरानी की और मामलों के बढ़ने पर मुफ्त जांच व फॉगिंग तेज की। • जागरूकता की कमी: कुछ इलाकों में कचरे का अनुचित निपटान और निवासियों द्वारा कचरा संग्रहण सेवाओं का उपयोग न करने से संक्रमण का जोखिम और बढ़ा। • जांच क्षमता: अस्पतालों में एलाइसा परीक्षण की उपलब्धता बढ़ने और मुफ्त सुविधाएं मिलने से अधिक मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो पाई है। सवाल-जवाब 1. चूड़ाचंदपुर में अप्रैल से 20 अक्टूबर के बीच डेंगू के कितने मामले दर्ज किए गए? इस अवधि के दौरान चूड़ाचंदपुर जिले में कुल 3,713 डेंगू के मामले दर्ज किए गए। 2. डेंगू से कितनी मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है? एलाइसा परीक्षण के माध्यम से चार मौतों की पुष्टि डेंगू से होने के रूप में की गई है। 3. वर्ष 2025 में जिले में कुल कितने मामले सामने आए थे? पूरे वर्ष 2025 के दौरान जिले में केवल 332 मामले दर्ज किए गए थे। 4. अस्पतालों में डेंगू की जांच का क्या शुल्क है? अस्पतालों में डेंगू की जांच पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। 5. प्रेस कॉन्फ्रेंस में किन अधिकारियों ने भाग लिया? इस बैठक में उपायुक्त कृष्णा कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेंखोनेग मेट और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सानिया मोनिका शामिल हुए। 6. कितने डेंगू मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है? इस साल अप्रैल से अब तक लगभग 910 डेंगू मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। https://trendkia.com/manipur/manipur-ke-churachandpur-me-april-se-ab-tak-dengue-ke-3713-mamle-darj-char-logo-ki-pushti-50559 TrendKia — Har trend, sabse pehle.