मणिपुर में 49 लापता लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की विशेष सहायता राशि देगी सरकार मणिपुर कैबिनेट ने मई 2023 की हिंसा के बाद से लापता 49 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की एकमुश्त मानवीय सहायता देने का फैसला किया है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों के मुआवजे और पेंशन में भी इजाफा किया गया है। मणिपुर सरकार ने राज्य में मई 2023 से भड़की हिंसा के दौरान लापता हुए नागरिकों के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए एकमुश्त विशेष मानवीय सहायता राशि को मंजूरी दे दी है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में तय किया गया कि हिंसा के बाद से अब तक लापता चल रहे 49 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। लगातार चलाए गए तलाशी अभियानों के बावजूद इन 49 व्यक्तियों का कोई सुराग नहीं मिल सका था, जिसके कारण उनके परिजन लंबे समय से गंभीर मानसिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। लापता लोगों के परिजनों को मिलेगी मृतकों के समान आर्थिक मदद गुरुवार को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गृह विभाग के इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इससे पहले राज्य में हिंसा के दौरान जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों को भी 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई थी। अब उसी तर्ज पर लापता नागरिकों के परिवारों को भी समान वित्तीय राहत दी जाएगी। इस योजना के तहत राज्य के खजाने से कुल 4.90 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाएगा, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार खुद वहन करेगी। सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों के मुआवजे में भारी वृद्धि कैबिनेट ने उग्रवादी हिंसा और सुरक्षा अभियानों के दौरान कर्तव्य निभाते हुए शहीद या घायल होने वाले सेना तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों के लिए अनुग्रह राशि (एक्स ग्रेशिया) बढ़ाने का भी निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि सेना और CAPF के जवान राज्य पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं और समान खतरों का सामना करते हैं, इसलिए उनके मुआवजे का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी। संशोधित नियमों के अनुसार, शहादत पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा स्थाई दिव्यांगता के मामले में 2 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल होने पर 1 लाख रुपये तथा सामान्य चोट लगने पर 20,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2006 में लागू नियमों के तहत शहादत पर 2 लाख रुपये और घायल होने पर 10,000 रुपये दिए जाते थे। वित्त आयोग का गठन और पत्रकारों की पेंशन में बढ़ोतरी बैठक में प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए पांचवें मणिपुर राज्य वित्त आयोग के गठन को औपचारिक मंजूरी दी। इस आयोग में एक अध्यक्ष, सार्वजनिक मामलों का अनुभव रखने वाले सदस्य और एक सचिव शामिल होंगे। इसके अलावा राज्य के सेवानिवृत्त पत्रकारों के मासिक पेंशन लाभ में भी इजाफा किया गया है। अब सेवानिवृत्त पत्रकारों की पेंशन को 8,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। वहीं, इसके लिए पात्र आश्रितों को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन की दर को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला किया गया है। इसका आप पर असर इस फैसले से हिंसा प्रभावित परिवारों, सुरक्षा कर्मियों और वरिष्ठ पत्रकारों को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा। • मणिपुर में: हिंसा के बाद से लापता लोगों के 49 परिवारों को तत्काल 10-10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे पिछले कई महीनों से अनिश्चितता और आर्थिक तंगी झेल रहे इन परिवारों को सीधे राहत पहुंचेगी। • सुरक्षा बलों के लिए: राज्य में तैनात सेना और CAPF जवानों के लिए शहादत पर मिलने वाला मुआवजा 2 लाख से बढ़कर 10 लाख रुपये हो गया है। गंभीर चोट पर 1 लाख और दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये का प्रावधान जवानों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। • पत्रकारों और पेंशनभोगियों के लिए: सेवानिवृत्त पत्रकारों की मासिक पेंशन 8,000 से बढ़कर 10,000 रुपये और पारिवारिक पेंशन 7,000 रुपये हो गई है। यह राशि सीधे पात्र लाभार्थियों के मासिक जीवन-यापन में सुधार करेगी। • भारत में: पूर्वोत्तर में आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात विभिन्न राज्यों के केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों का जोखिम कवर अब कई गुना बढ़ गया है। ड्यूटी के दौरान किसी अनहोनी की स्थिति में उनके आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से बेहतर वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ मणिपुर में 3 मई 2023 को शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद कई लोग लापता हो गए थे, जिनकी तलाश के निरंतर प्रयासों के बाद भी सफलता नहीं मिली। • लापता लोगों की स्थिति: लगातार खोज अभियानों के बावजूद 49 नागरिकों का कोई अता-पता नहीं चल सका, जिससे उनके परिवार लंबे समय से घोर संकट और अनिश्चितता का सामना कर रहे थे। • समान राहत की जरूरत: राज्य सरकार हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को पहले ही 10-10 लाख रुपये की मदद दे चुकी थी, इसलिए गृह विभाग ने लापता लोगों के परिजनों को भी मानवीय आधार पर समान वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव रखा। • पुराने मुआवजा नियमों में संशोधन: सुरक्षा बलों के लिए 2006 से लागू अनुग्रह राशि की दरें बेहद कम थीं (मृत्यु पर 2 लाख रुपये), जिसे राज्य पुलिस के समान जोखिम उठाने वाले सेना और CAPF के वर्तमान खतरे को देखते हुए बढ़ाया गया। सवाल-जवाब 1. मणिपुर कैबिनेट ने लापता लोगों के परिवारों के लिए कितनी सहायता राशि मंजूर की है? कैबिनेट ने 3 मई 2023 की हिंसा के बाद से लापता 49 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की एकमुश्त विशेष मानवीय सहायता देने की मंजूरी दी है। 2. इस सहायता योजना पर राज्य सरकार का कुल कितना खर्च आएगा? इस विशेष मानवीय सहायता पर कुल 4.90 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसे राज्य सरकार अपने कोष से वहन करेगी। 3. सेना और CAPF जवानों के लिए शहादत पर अनुग्रह राशि बढ़ाकर कितनी की गई है? शहादत पर मिलने वाली अनुग्रह राशि को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। 4. घायल होने पर सुरक्षा कर्मियों को कितना मुआवजा मिलेगा? स्थाई दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये, गंभीर चोट पर 1 लाख रुपये और सामान्य चोट पर 20,000 रुपये का मुआवजा तय किया गया है। 5. मणिपुर राज्य वित्त आयोग किस अवधि के लिए गठित किया जाएगा? पांचवें मणिपुर राज्य वित्त आयोग का गठन वर्ष 2026-27 से 2030-31 की पांच साल की अवधि के लिए किया जाएगा। 6. सेवानिवृत्त पत्रकारों और पारिवारिक पेंशन में कितनी बढ़ोतरी की गई है? सेवानिवृत्त पत्रकारों की मासिक पेंशन 8,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये और पारिवारिक पेंशन 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी गई है। https://trendkia.com/manipur/manipur-men-49-lapata-logon-ke-parijanon-ko-10-10-lakha-rupaye-ki-vishesha-sahayata-rashi-degi-sarakara-41462 TrendKia — Har trend, sabse pehle.