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  "type": "article",
  "title": "मणिपुर म्यांमार सीमा पर 2028 तक पूरी होगी 398 किलोमीटर की बाड़बंदी, गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने विधानसभा में दी जानकारी",
  "summary": "मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने विधानसभा को बताया कि म्यांमार से लगी 398 किलोमीटर सीमा में से 55 किलोमीटर पर बाड़ लगाने का काम पूरा हो चुका है और 2028 तक पूरी सीमा को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।",
  "content": "मणिपुर सरकार ने म्यांमार के साथ अपनी 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य को वर्ष 2028 तक पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। बुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि सुरक्षा दृष्टिकोण से सीमा सुरक्षा को मजबूत करना बेहद आवश्यक हो चुका है और अब तक 55 किलोमीटर हिस्से में बाड़बंदी का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।\n\nबाड़बंदी की प्रगति और सामग्री परिवहन में चुनौतियां\nगृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने सीमा पर चल रहे बुनियादी ढांचे के निर्माण की स्थिति का ब्योरा देते हुए बताया कि बॉर्डर पिलर संख्या 32 से 130 के बीच अब तक 55 किलोमीटर की दूरी पर बाड़ लगाई जा चुकी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस परियोजना की गति में कुछ रुकावटें आई हैं, जिसका मुख्य कारण दुर्गम सीमावर्ती इलाकों तक निर्माण सामग्री पहुँचाने में होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयाँ हैं। इसके साथ ही सरकार उन अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों का सीमांकन करने में भी जुटी हुई है जो फिलहाल गैर-चिह्नित हैं।\n\nसंवेदनशील इलाकों की पहचान और सुरक्षा प्राथमिकताएं\nपूर्वोत्तर राज्य में सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील करना एक अनिवार्य कदम बन गया है। मंत्री ने मोरे क्षेत्र में बॉर्डर पिलर संख्या 75 और 79 के बीच स्थित हिस्से को पूरी सीमा के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक बताया। इस प्रकार के संवेदनशील क्षेत्रों को बाड़बंदी के दायरे में लाना अवैध गतिविधियों को रोकने तथा निगरानी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।\n\nभूमि हस्तांतरण की चर्चाओं पर सरकार का स्पष्टीकरण\nयह पूरा मामला कांग्रेस विधायक के रंजीत सिंह द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बाद चर्चा में आया, जिसमें भारत और म्यांमार के बीच संभावित भूमि अदला-बदली (लैंड-स्वैप) से जुड़ी रिपोर्टों पर चिंता जताई गई थी। इन आशंकाओं का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को विदेश मंत्रालय से ऐसे किसी भी भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव के बारे में कोई आधिकारिक पत्र या सूचना प्राप्त नहीं हुई है, जिससे इन खबरों का खंडन होता है।\n\nइसका आप पर असर\nमणिपुर सीमा पर बाड़बंदी के इस प्रोजेक्ट से सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• भारत में: अंतरराष्ट्रीय सीमा सील होने से घुसपैठ और सीमा पार अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।\n• मणिपुर में: मोरे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाड़ लगने से स्थानीय निवासियों की सुरक्षा बढ़ेगी और सीमावर्ती इलाकों में शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मणिपुर और म्यांमार के बीच कुल कितनी लंबी सीमा है?\nमणिपुर और म्यांमार के बीच कुल 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है।\n\n2. अब तक कितने किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है?\nबॉर्डर पिलर संख्या 32 से 130 के बीच अब तक लगभग 55 किलोमीटर सीमा पर बाड़बंदी पूरी की जा चुकी है।\n\n3. पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का क्या लक्ष्य तय किया गया है?\nमणिपुर सरकार ने पूरी 398 किलोमीटर सीमा पर बाड़बंदी का काम वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।\n\n4. म्यांमार सीमा का सबसे संवेदनशील इलाका कौन सा बताया गया है?\nमोरे क्षेत्र में बॉर्डर पिलर संख्या 75 और 79 के बीच का हिस्सा सबसे संवेदनशील माना गया है।\n\n5. क्या भारत और म्यांमार के बीच भूमि हस्तांतरण की कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है?\nगृह मंत्री के अनुसार राज्य सरकार को विदेश मंत्रालय से भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।",
  "url": "https://trendkia.com/manipur/manipur-myanmar-sima-para-2028-taka-puri-hogi-398-kilomitara-ki-barabndi-griha-mntri-govindas-konthoujam-ne-di-janakari-26535",
  "category": "मणिपुर",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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    "मणिपुर म्यांमार सीमा",
    "गोविंददास कोंथौजाम",
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    "भारत म्यांमार सीमा"
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