100-दिन के एसएमए पर अटकी चांदी की चाल, तकनीकी दायरे में सीमित हुई कीमतें चांदी की कीमतों में 100-दिन के सरल मूविंग एवरेज पर कड़ा प्रतिरोध देखने को मिल रहा है, जिसके चलते बाजार 63.15 डॉलर और 66.39 डॉलर के दायरे में सिमट गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों को 100-दिन के सरल मूविंग एवरेज यानी एसएमए पर कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिससे तेजी का रुख सीमित हो गया है। तकनीकी चार्ट पर 100-दिवसीय एसएमए के स्तर 66.39 डॉलर को पार करने में नाकाम रहने के बाद सफेद धातु में मामूली गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही फ्लैट आरएसआई इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि यह कीमती धातु अहम मूविंग एवरेजेस के बीच कड़े कंसॉलिडेशन दौर में फंस चुकी है। यदि लिवाल 66.39 डॉलर के स्तर को सफलतापूर्वक भेदने में कामयाब होते हैं, तो अगला लक्ष्य 70.00 डॉलर और फिर 200-दिवसीय एसएमए का स्तर 73.19 डॉलर हो सकता है। मौजूदा वक्त में चांदी 100-दिवसीय एसएमए 66.39 डॉलर और 50-दिवसीय एसएमए 63.15 डॉलर के बीच एक सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आ रही है। तकनीकी ढांचा और प्रमुख स्तर चांदी के बाजार ढांचे में लगातार निचले निचले स्तर और निचले ऊंचे स्तर बनने का सिलसिला उस समय थम गया, जब यह धातु 3 अगस्त के 56.57 डॉलर के निचले स्तर का परीक्षण करने में असफल रही। यदि 56.57 डॉलर का स्तर टूटता, तो बिकवाली का दबाव चांदी को 17 जुलाई के स्विंग लो 54.77 डॉलर तक खींच सकता था। हालांकि, उस गिरावट के टलने के बाद अब यह बिना यील्ड वाली धातु अपने तकनीकी दायरे के ऊपरी छोर के करीब कारोबार कर रही है। ऐसे में 100-दिन के एसएमए के ऊपर एक स्पष्ट ब्रेकआउट तेजी के एक नए दौर का रास्ता तैयार कर सकता है। अगर कीमतें इस 100-दिवसीय एसएमए को पार करती हैं, तो पहला बड़ा अवरोध 70.00 डॉलर के स्तर पर आएगा, जिसके बाद 200-दिन का एसएमए 73.19 डॉलर पर अहम रेजिस्टेंस साबित होगा। इसके विपरीत, कमजोरी बढ़ने की स्थिति में पहला सहारा 50-दिन का एसएमए 63.15 डॉलर पर मिलेगा। यदि दबाव बना रहता है, तो 60.00 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम करेगा, और इसके नीचे फिसलने पर अगला अहम पड़ाव 17 जुलाई का चक्र निचला स्तर 54.77 डॉलर होगा। लाइव तकनीकी संकेतक और बाजार की चाल लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सत्र के क्लोज-बेल तक चांदी 66.53 डॉलर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव 66.56 डॉलर के मुकाबले 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाती है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी का दायरा 43.30 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है, जबकि मौजूदा वॉल्यूम 20-दिन के औसत का 10.72 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी गणनाओं में 14-दिवसीय आरएसआई 55 के स्तर पर है, जो तटस्थ से हल्का सकारात्मक संकेत देता है। एमएसीडी 0.28 पर है जबकि सिग्नल लाइन 0.42 पर है, जिससे -0.14 का हिस्टोग्राम मंदी की स्थिति दर्शाता है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज पर नजर डालें तो 20-दिन का ईएमए 65.43 डॉलर, 50-दिन का ईएमए 65.05 डॉलर और 200-दिन का ईएमए 66.78 डॉलर पर स्थित है। वहीं 50-दिन का एसएमए 63.07 डॉलर और 200-दिन का एसएमए 72.53 डॉलर पर दर्ज किया गया है। ईएमए50 का ईएमए200 से नीचे होना डेथ क्रॉस की स्थिति बनाता है, जो दीर्घकालिक डाउनट्रेंड का संकेत है। बोलिंजर बैंड्स 62.66 डॉलर से 69.63 डॉलर के बीच फैले हैं और मध्य बैंड 66.14 डॉलर पर है। 14-दिवसीय एडीएक्स 15 पर होने के कारण ट्रेंड कमजोर और सीमित दायरे का बना हुआ है। स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 69 और सिग्नल लाइन 56 पर है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 1.70 डॉलर दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है। 20-दिवसीय सपोर्ट 63.02 डॉलर और रेजिस्टेंस 71.16 डॉलर के करीब है। दैनिक पिवट 66.76 डॉलर पर है, जिसके ऊपर आर1 67.32 डॉलर और आर2 68.12 डॉलर पर रेजिस्टेंस है, जबकि नीचे एस1 65.97 डॉलर और एस2 65.41 डॉलर पर सपोर्ट स्तर हैं। मूल्य संचलन और सुरक्षित निवेश के पहलू ऐतिहासिक रूप से चांदी को मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। सोने की तुलना में इसका व्यापार भले ही अलग अंदाज में होता हो, लेकिन निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य का लाभ उठाने या महंगाई के दौर में बचाव के साधन के रूप में चांदी की ओर रुख करते हैं। निवेशक इसे सिक्कों और सिल्लियों के रूप में भौतिक रूप से खरीद सकते हैं, या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसके भाव को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ जैसे माध्यमों से कारोबार कर सकते हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी आर्थिक मंदी की आशंकाएं चांदी के भाव को बढ़ा सकती हैं क्योंकि इसे भी सेफ-हेवन माना जाता है, हालांकि इसका असर सोने की तुलना में कुछ कम रहता है। चूंकि यह धातु कोई नियमित ब्याज या यील्ड नहीं देती, इसलिए ब्याज दरों में कमी के दौर में इसकी मांग बढ़ती है। डॉलर में कीमत तय होने के कारण अमेरिकी डॉलर के रुख का भी इस पर सीधा प्रभाव पड़ता है। मजबूत डॉलर चांदी की कीमतों पर लगाम लगाता है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों को उछाल देता है। खनन से आने वाली आपूर्ति, जहां चांदी सोने की तुलना में काफी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, और रीसाइक्लिंग की दरें भी भाव तय करने में मददगार होती हैं। औद्योगिक उपयोग और वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं चांदी की एक बड़ी खासियत इसका व्यापक औद्योगिक इस्तेमाल है। सभी धातुओं में सबसे अधिक विद्युत चालकता होने के कारण, जो तांबे और सोने से भी अधिक है, इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारी पैमाने पर होता है। सौर पैनलों और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मांग बढ़ने पर इसकी कीमतें सीधे प्रभावित होती हैं। अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाओं की परिस्थितियां भी कीमतों में उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह बनती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में चांदी की भारी खपत करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत में आभूषणों और पारंपरिक इस्तेमाल के लिए उपभोक्ताओं की मजबूत मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है। जब आभूषणों और निवेश की मांग एक साथ बढ़ती है, तो भौतिक बाजारों में आपूर्ति की स्थिति काफी संवेदनशील हो जाती है। सोने के साथ संबंध और गोल्ड-सिल्वर अनुपात चांदी की कीमतें आमतौर पर सोने के रुख का अनुसरण करती हैं। जब सोने में तेजी आती है, तो समान सुरक्षित निवेश श्रेणी के कारण चांदी भी उसी दिशा में आगे बढ़ती है। दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को समझने के लिए गोल्ड-सिल्वर अनुपात एक अहम पैमाना माना जाता है, जो यह दर्शाता है कि एक औंस सोने की कीमत के बराबर पहुंचने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। बाजार विश्लेषक और निवेशक अक्सर इस ऊंचे अनुपात को इस संकेत के रूप में देखते हैं कि चांदी अपने वास्तविक मूल्य से कम आंकी गई है, या फिर सोना जरूरत से ज्यादा महंगा हो चुका है। इसके विपरीत, जब यह अनुपात काफी नीचे गिर जाता है, तो यह माना जाता है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता हो सकता है। यह संतुलन दीर्घकालिक कमोडिटी रणनीतियों में बड़ा महत्व रखता है। व्यापक वित्तीय बाजारों का परिदृश्य वैश्विक वित्तीय बाजार तिमाही के अंतिम हफ्तों में अनिश्चितता और भारी उतार-चढ़ाव के बीच एक विचित्र स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। जहां एक ओर कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं, वहीं यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ खुलने की तैयारी में हैं। वित्तीय बाजारों का तनाव विशेष रूप से सरकारी बॉन्डों में केंद्रित है, जहां यूरोपीय और अमेरिकी यील्ड्स में तेजी देखी गई। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जिसे 7-2 के बहुमत से मंजूरी मिली। मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते सोने की चाल 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास सुस्त बनी हुई है, जबकि यूएस ट्रेजरी यील्ड्स में नरमी दर्ज की गई थी। इसके अलावा, डॉलर के मजबूत रुख के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दबाव में आकर 0.7140 के स्तर से फिसलकर 0.7100 के निचले दायरे में स्थिर होने की कोशिश कर रहा है। डॉलर-येन की जोड़ी भी 157.00 के नीचे आ गई है, जहां बैंक ऑफ जापान के संभावित हस्तक्षेप के जोखिम और मध्य पूर्व व रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर रखा है। इसका आप पर असर तकनीकी स्तरों पर चांदी के दायरे में रहने से खुदरा खरीदारों और कमोडिटी निवेशकों के लिए तात्कालिक उतार-चढ़ाव सीमित रहने के आसार हैं। • खुदरा खरीदारों के लिए: आभूषण और चांदी के बर्तनों की कीमतों में फिलहाल भारी उछाल की संभावना कम नजर आ रही है। खरीदार आगामी त्योहारों या शादियों के लिए 63.15 डॉलर से 66.39 डॉलर के तकनीकी दायरे को ध्यान में रखकर योजना बना सकते हैं। • कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए: 100-दिन का एसएमए 66.39 डॉलर पर एक मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है और 50-दिन का एसएमए 63.15 डॉलर पर सहारा दे रहा है। ट्रेडर्स को किसी भी तरफ स्पष्ट ब्रेकआउट होने तक सख्त स्टॉप-लॉस के साथ सीमित दायरे की रणनीति अपनानी चाहिए। • औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए: इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा उपकरण निर्माताओं के लिए कच्चे माल की लागत फिलहाल स्थिर बनी रह सकती है। विनिर्माता कीमतों के इस कंसॉलिडेशन दौर का लाभ उठाकर अपनी अग्रिम खरीद की हेजिंग कर सकते हैं। • पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए: महंगाई से बचाव के लिए चांदी ईटीएफ या डिजिटल रूप में निवेश करने वालों को स्पष्ट दिशा का इंतजार करना होगा। 70 डॉलर का स्तर टूटने पर ही नए निवेश में आक्रामक पूंजी लगाने की सलाह तकनीकी विश्लेषक देते हैं। ऐसा क्यों हुआ चांदी की कीमतों में ठहराव तकनीकी प्रतिरोध, प्रमुख मूविंग एवरेजेस के दबाव और मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के संयोजन के कारण आया है। • तकनीकी मूविंग एवरेज का अवरोध: चांदी 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज के स्तर 66.39 डॉलर को पार करने में विफल रही। तकनीकी ट्रेडर्स द्वारा इस स्तर पर मुनाफावसूली करने से तेजी की गति रुक गई और बिकवाली का दबाव बढ़ा। • डॉलर की मजबूती का दबाव: अमेरिकी डॉलर में व्यापक मजबूती आने से डॉलर में मूल्यांकित होने वाली संपत्तियों पर दबाव बना। मजबूत डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए चांदी को महंगा बना देता है, जिससे मांग में सुस्ती दर्ज की जाती है। • मंदी के निचले स्तरों का न छूना: कीमतों ने 3 अगस्त के 56.57 डॉलर और 17 जुलाई के 54.77 डॉलर के निचले स्तरों का परीक्षण नहीं किया, जिससे गहरी गिरावट भी टल गई। इसके परिणामस्वरूप बाजार दोनों तरफ की सीमाओं के बीच एक सीमित दायरे में फंस गया। सवाल-जवाब 1. तकनीकी चार्ट पर चांदी के लिए तात्कालिक रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं? चांदी के लिए पहला अहम रेजिस्टेंस 100-दिवसीय एसएमए 66.39 डॉलर पर है। इसके पार जाने पर कीमतें 70.00 डॉलर और फिर 200-दिवसीय एसएमए 73.19 डॉलर की ओर बढ़ सकती हैं। 2. चांदी के लिए नीचे की ओर मुख्य सपोर्ट स्तर कौन से हैं? गिरावट की स्थिति में पहला सपोर्ट 50-दिवसीय एसएमए 63.15 डॉलर पर है, जिसके बाद 60.00 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर और 17 जुलाई का निचला स्तर 54.77 डॉलर अहम सहारा हैं। 3. सोने-चांदी का अनुपात क्या दर्शाता है? गोल्ड-सिल्वर अनुपात यह बताता है कि एक औंस सोने के बराबर मूल्य के लिए कितने औंस चांदी चाहिए। ऊंचा अनुपात यह संकेत देता है कि चांदी कम आंकी गई है या सोना अधिक मूल्यांकित है। 4. अमेरिकी डॉलर का चांदी की कीमत पर क्या असर पड़ता है? चांदी का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने पर चांदी पर दबाव रहता है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों को बढ़ावा देता है। 5. चांदी का औद्योगिक क्षेत्रों में क्या महत्व है? उच्चतम विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, जिससे औद्योगिक मांग सीधे इसकी कीमतें प्रभावित करती है। https://trendkia.com/market/100-dina-ke-sma-para-ataki-silver-ki-chala-takaniki-dayare-men-simita-hui-kimaten-35975 TrendKia — Har trend, sabse pehle.