101.60 के अहम सपोर्ट पर टिके अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट के बीच खरीदारी के संकेत अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 18 महीने के उच्च स्तर से लगातार दूसरे दिन सुस्त पड़ने के बावजूद 101.60 के तकनीकी स्तर पर मजबूत बना हुआ है। फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव डॉलर में भारी गिरावट को रोक रहे हैं। वैश्विक मुद्रा बाजार में छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की चाल मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 18 महीने के उच्चतम स्तर से लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में नीचे खिसकता दिखा है। शुक्रवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत में बिकवाली का दबाव बनने के बावजूद यह सूचकांक 101.60 के अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर से ऊपर मजबूती से टिका हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट में मंदी की आक्रामकता की कमी है, जिससे निचले स्तरों पर नए खरीदारों के उभरने की प्रबल संभावना बन रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और वैश्विक स्तर पर बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं डॉलर को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सहारा दे रही हैं। तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर चार्ट विश्लेषण के लिहाज से डॉलर इंडेक्स का 101.60 के स्तर से ऊपर बने रहना बेहद महत्वपूर्ण है। यह स्तर पहले एक मजबूत रेजिस्टेंस हुआ करता था, जो टूटने के बाद अब अहम सपोर्ट में तब्दील हो चुका है। सितंबर के मासिक निचले स्तर से शुरू हुई तेज बढ़त का यह 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर भी है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 47.7 के आसपास देखा गया, जो हालिया गिरावट के बाद मोमेंटम के न्यूट्रल होने का संकेत देता है। दूसरी तरफ मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) शून्य से नीचे हल्की नकारात्मक रीडिंग दिखा रहा है, जिससे साफ होता है कि ओवरऑल बुलिश स्ट्रक्चर बरकरार है लेकिन ऊपर की ओर चढ़ने की रफ्तार फिलहाल कुछ धीमी पड़ी है। यह तकनीकी स्थिति उन ट्रेडर्स के लिए सतर्क रहने की चेतावनी है जो डॉलर में भारी मंदी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक डॉलर इंडेक्स 102.03 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 102.14 के बंद भाव से 0.11 प्रतिशत कम है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 95.55 से 102.54 के बीच दर्ज किया गया है। लाइव आंकड़ों में 14-दिवसीय RSI 66 पर है और MACD 0.63 पर सिग्नल लाइन 0.55 के मुकाबले 0.08 के हिस्टोग्राम के साथ बुलिश रुख बनाए हुए है। 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 101.25, 50-दिवसीय EMA 100.58 और 200-दिवसीय EMA 99.57 पर है, जिसमें 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से ऊपर रहना एक गोल्डन क्रॉस और लंबी अवधि का अपट्रेंड दिखाता है। 20-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 100.11 और 200-दिवसीय SMA 99.37 पर है। बॉलिंजर बैंड 99.43 से 102.84 के बीच हैं जिनका मध्य स्तर 101.14 है और कीमत बैंड के भीतर ही चल रही है। औसत दिशात्मक सूचकांक (ADX) 42 के साथ मजबूत ट्रेंड की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 77 और सिग्नल लाइन 82 पर है, जबकि औसत वास्तविक दायरा (ATR) 0.47 दर्ज हुआ है जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। वर्तमान में पिवट 102.03 पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 102.14 और दूसरा रेजिस्टेंस 102.25 है, वहीं पहला सपोर्ट 101.92 और दूसरा सपोर्ट 101.81 पर स्थित है। 20 दिनों का दायरा 99.07 के सपोर्ट और 102.54 के रेजिस्टेंस के बीच बंधा है। वैश्विक वित्तीय तंत्र में अमेरिकी डॉलर की भूमिका अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, लेकिन यह दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक मुद्रा के तौर पर भी स्वतंत्र रूप से चलन में रहता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया के विदेशी मुद्रा विनिमय टर्नओवर में इसकी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक रही है, जो प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेनदेन के बराबर बैठती है। दूसरे विश्व युद्ध के समापन के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह ली और विश्व की प्राथमिक रिजर्व करेंसी बन गया। अपने लंबे इतिहास में डॉलर को सोने का आधार प्राप्त था, लेकिन 1971 में हुए ब्रेटन वुड्स समझौते के खात्मे के साथ गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त कर दिया गया और इसके बाद से यह एक फिएट मुद्रा के रूप में वैश्विक व्यापार की धुरी बना हुआ है। फेडरल रिजर्व की नीतियां और ब्याज दरों का प्रभाव अमेरिकी डॉलर के मूल्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला अकेला कारक फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के सामने मुख्य रूप से दो वैधानिक जिम्मेदारियां होती हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी महंगाई पर नियंत्रण पाना और अर्थव्यवस्था में अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना। इन दोनों लक्ष्यों की पूर्ति के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में समायोजन करना होता है। जब वस्तुओं और सेवाओं के दाम तेजी से बढ़ने लगते हैं और महंगाई दर फेडरल रिजर्व के तय 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है। ऊंची ब्याज दरें विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं जिससे डॉलर की कीमत में मजबूती आती है। इसके विपरीत जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या देश में बेरोजगारी दर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तब फेडरल रिजर्व आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता चुनता है, जिससे डॉलर पर बिकवाली का दबाव पड़ता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का असर अत्यधिक वित्तीय संकट की परिस्थितियों में जब ब्याज दरों में कटौती का पारंपरिक उपाय भी काम नहीं करता, तब फेडरल रिजर्व नए डॉलर जारी कर क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा लेता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग एक गैर-मानक नीतिगत कदम है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक संकट में फंसे वित्तीय सिस्टम में नकदी और कर्ज के प्रवाह को तेजी से बढ़ाता है। यह कदम तब उठाया जाता है जब बैंक एक-दूसरे के डिफॉल्ट होने के डर से कर्ज देना बंद कर देते हैं और बाजार में नकदी सूख जाती है। वर्ष 2008 के भीषण वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जब बैंकों के बीच कर्ज का प्रवाह थम गया था, तब फेडरल रिजर्व ने इसी रणनीति को मुख्य हथियार बनाया था। इसके तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है और सिस्टम में भारी मात्रा में डॉलर झोंकता है। बड़े पैमाने पर नकदी प्रवाह बढ़ने के कारण क्वांटिटेटिव ईजिंग आमतौर पर अमेरिकी डॉलर को कमजोर करती है। इसके ठीक उलट प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) कहा जाता है। इसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है और अपने पास रखे बॉन्ड के परिपक्व होने पर मिलने वाली मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता। इससे बाजार से अतिरिक्त नकदी वापस खिंच जाती है, जो आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक साबित होती है। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों की स्थिति डॉलर के 18 महीने के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे आने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर हुई गिरावट का सीधा असर अन्य वैश्विक संपत्तियों पर भी नजर आया है • ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान साप्ताहिक निचले स्तर से संभलकर 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश करता दिखा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की नरमी ने इस जोड़ी को सहारा दिया, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त रुख बने रहने की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की। • जापानी येन (USD/JPY): जापानी येन के मुकाबले डॉलर 158.00 के करीब अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा। शुक्रवार को आए आंकड़ों के अनुसार जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने येन पर गहरा दबाव बनाया। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बीच इस जोड़ी में गिरावट की गुंजाइश सीमित नजर आ रही है। • सोना और जिंस बाजार: सोने की कीमतों में भी मजबूती देखी गई और यह दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए शुक्रवार को 4,200 डॉलर के स्तर को दोबारा छूता नजर आया। कच्चे तेल की कीमतों और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के साथ डॉलर के नरम पड़ने से सोने को बल मिला। हालांकि दैनिक चार्ट पर सोने का RSI अभी भी मंदी के क्षेत्र में बना हुआ है, जबकि बाजार अब अमेरिका के आगामी सेंटीमेंट आंकड़ों के इंतजार में है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर के उच्च स्तर पर बने रहने से वैश्विक व्यापार, आयात लागत और अंतरराष्ट्रीय खर्चों पर सीधा असर पड़ता है। • भारत में: डॉलर की मजबूती से भारतीय रुपया दबाव में रह सकता है, जिससे कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात महंगा होने की संभावना बनी रहती है। आयात लागत बढ़ने से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों पर महंगाई का असर देखने को मिल सकता है। • वैश्विक स्तर पर: दुनिया भर में डॉलर आधारित व्यापार करने वाले देशों और कारोबारियों के लिए कर्ज चुकाना और जरूरी सामान खरीदना महंगा साबित होगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेश में पढ़ाई और तकनीकी सेवाओं के खर्च में भी बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। • सोना और जिंस खरीदार: डॉलर में किसी भी तरह की तकनीकी गिरावट से सोने और चांदी की कीमतों में तात्कालिक राहत और उछाल देखने को मिल सकता है। धातु और जिंस निवेशकों को केंद्रीय बैंक के बयानों और ब्याज दर निर्णयों पर नजर रखकर ही नई खरीदारी की योजना बनानी चाहिए। • विदेशी मुद्रा निवेशक: 101.60 के तकनीकी सपोर्ट के ऊपर बने रहने से फॉरेक्स ट्रेडर्स को संभलकर काम करने और स्टॉप-लॉस लगाने की जरूरत है। ट्रेडर्स को 0.47 के एटीआर बफर को ध्यान में रखकर ही नई पोजीशन बनानी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ डॉलर इंडेक्स में हालिया सुस्ती पिछले कई हफ्तों की एकतरफा तेजी के बाद आई सामान्य तकनीकी मुनाफावसूली का नतीजा है, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर की गिरावट ने इसे और बढ़ावा दिया। • तकनीकी मुनाफावसूली: इंडेक्स 18 महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने के बाद ट्रेडर्स द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से सुस्त पड़ा है। यह रिट्रेसमेंट 101.60 के 23.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर पर थमता दिख रहा है। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रात भर आई हल्की गिरावट ने डॉलर पर तात्कालिक दबाव बनाया। बॉन्ड यील्ड में गिरावट से विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर की अल्पकालिक आकर्षण क्षमता कुछ घटी है। • फेड का सख्त रुख और भू-राजनीति: केंद्रीय बैंक द्वारा दरों को सख्त बनाए रखने के संकेत और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने डॉलर की गिरावट को सीमित रखा है। सुरक्षित पनाहगाह होने के कारण निवेशक अनिश्चितता के माहौल में डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के लिए 101.60 का स्तर क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है? यह स्तर पहले का एक बड़ा रेजिस्टेंस ब्रेकपॉइंट है और सितंबर के निचले स्तर से आई तेजी का 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर भी है, जो अब मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है। 2. डॉलर इंडेक्स में गिरावट के बावजूद मंदी के संकेत कमजोर क्यों हैं? फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत रुख और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव डॉलर को सुरक्षित निवेश विकल्प बनाए रखे हुए हैं, जिससे भारी बिकवाली नहीं आ रही है। 3. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें डॉलर को कैसे प्रभावित करती हैं? जब महंगाई बढ़ने पर फेड ब्याज दरें बढ़ाता है तो डॉलर मजबूत होता है, जबकि आर्थिक मंदी या कम महंगाई में दरें घटाने पर डॉलर कमजोर होता है। 4. जापान के घरेलू खर्च में गिरावट का डॉलर-येन जोड़ी पर क्या असर हुआ? जापान में घरेलू खर्च लगातार नौवें महीने घटने से येन कमजोर हुआ है, जिसके चलते USD/JPY जोड़ी 158.00 के मजबूत स्तर के आसपास बनी हुई है। 5. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में फेड बॉन्ड खरीदकर बाजार में नकदी बढ़ाता है जिससे डॉलर कमजोर होता है, जबकि टाइटनिंग में बॉन्ड पुनर्निवेश रोककर नकदी घटाई जाती है जिससे डॉलर मजबूत होता है। https://trendkia.com/market/101-60-ke-ahama-saporta-para-tike-us-dollar-index-men-giravata-ke-bicha-kharidari-ke-snketa-45285 TrendKia — Har trend, sabse pehle.