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  "type": "article",
  "title": "30 साल के बॉन्ड यील्ड में 2004 के बाद सबसे बड़ा उछाल, डाउ जोन्स गिरकर 51,100 के निचले स्तर पर फिसला",
  "summary": "लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए तेज उछाल और फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीतियों के चलते डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज जून के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मॉर्गेज दरों के 7 प्रतिशत के करीब पहुंचने और ईरान युद्ध से ऊर्जा लागत बढ़ने से इक्विटी बाजारों पर चौतरफा दबाव दिख रहा है।",
  "content": "अमेरिकी शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव गहराता जा रहा है, जहां प्रमुख इक्विटी बेंचमार्क डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज करते हुए 51,100 अंक तक लुढ़क गया। यह गिरावट जून महीने के बाद का सबसे निचला स्तर दर्शाती है। इक्विटी में यह कमजोरी उस समय देखने को मिली है जब लंबी अवधि के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड, विशेष रूप से 30 साल के ट्रेजरी यील्ड में भारी उछाल आया और यह 2004 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसके विपरीत, अल्पकालिक दो साल का यील्ड लगभग स्थिर बना रहा, जिसने यील्ड कर्व के विस्तार और वित्तीय लागतों को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।\n\nफेडरल रिजर्व के अधिकारियों का सख्त रुख और ब्याज दर अनुमान\nकेंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के हालिया बयानों ने बाजार में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है। फिलाडेल्फिया फेड अध्यक्ष पॉलसन ने मौजूदा समय में 3.75 से 4.00 प्रतिशत की सीमा में चल रही ब्याज दरों में और बढ़ोतरी का स्पष्ट समर्थन किया है। अंतर्निहित मुद्रास्फीति पर उनकी सबसे अनुकूल टिप्पणी केवल इतनी रही कि चालू वर्ष में महंगाई बदतर नहीं हुई है, जिसे वित्तीय विश्लेषक आगामी दर वृद्धि के लिए एक मजबूत तर्क मान रहे हैं।\n\nइसी बीच, न्यूयॉर्क फेड अध्यक्ष विलियम्स ने लंदन में एक सम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया कि स्पष्ट फॉरवर्ड गाइडेंस का युग अब समाप्त हो चुका है। यह वही विचार है जिसे फेड अध्यक्ष वॉर्श ने भी सामने रखा है। विलियम्स ने अपने वक्तव्य में यह भी जोड़ा कि वर्ष के अंत से पहले एक और दर वृद्धि पर बाजार द्वारा लगाए जा रहे दांव उन्हें पूरी तरह से तर्कसंगत लगते हैं। फ्यूचर्स बाजार के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में होने वाली फेड बैठक में एक चौथाई प्रतिशत दर वृद्धि की संभावना काफी प्रबल है। इसके अतिरिक्त, फेडरल रिजर्व के 18 नीति निर्माताओं में से 16 ने इस वर्ष कम से कम एक और ब्याज दर बढ़ोतरी का अनुमान जताया है।\n\nऊर्जा कीमतें, सरकारी उधारी और ट्रेजरी यील्ड का दबाव\nनिवेशक 30 साल के कर्ज के लिए अब पहले से कहीं अधिक प्रतिफल की मांग कर रहे हैं। इस बदलाव की मुख्य वजह ईरान युद्ध के चलते ऊर्जा की ऊंची कीमतें, मजबूत बनी हुई आर्थिक वृद्धि और सरकारों द्वारा लगातार ली जा रही भारी उधारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड गुरुवार को 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसने लागत आधारित मुद्रास्फीति के जोखिमों को बढ़ा दिया है।\n\nसरकारी उधारी का यह दबाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों के आकलन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अमेरिकी संघीय ब्याज लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के रिकॉर्ड 3.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह 2007 के उस दौर से लगभग दोगुना है जब 10 साल का यील्ड 5 प्रतिशत के करीब था और संघीय ब्याज लागत केवल 1.7 प्रतिशत थी। वैश्विक स्तर पर भी बॉन्ड बाजारों में तनाव देखा जा रहा है। जापान में तीन दिन के सार्वजनिक अवकाश के बाद जब तोक्यो बाजार खुला, तो वहां 10 साल का यील्ड 1996 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर जा पहुंचा। उधर यूरोप में, जर्मनी की वित्त एजेंसी को 2026 में 525.5 अरब यूरो की रिकॉर्ड संघीय उधारी की उम्मीद है।\n\nबंधक दरों में उछाल और डाउ कंपनियों पर मिला-जुला प्रभाव\nलंबी अवधि के यील्ड में बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं और आवास बाजार पर पड़ा है। अमेरिका में 30 साल की फिक्स्ड मॉर्गेज दरें अब 7 प्रतिशत के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं, जो ईरान युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में पूरे एक प्रतिशत अंक अधिक है। होम लोन के इतने महंगे होने से रियल एस्टेट सेक्टर की गति धीमी पड़ रही है, क्योंकि ऊंची दरों पर बहुत कम लोग नया घर खरीदने या स्थानांतरित होने का जोखिम उठा रहे हैं।\n\nइस स्थिति से डाउ जोन्स की घटक कंपनियों पर अलग-अलग असर देखा जा रहा है। आवास क्षेत्र में कमजोरी से सीधे तौर पर होम डिपो (HD) और शेरविन-विलियम्स (SHW) जैसी कंपनियां प्रभावित हो रही हैं, जो हार्डवेयर और पेंट की आपूर्ति करती हैं। कम मकान बिकने का मतलब इन दोनों कंपनियों की बिक्री में प्रत्यक्ष गिरावट है। इसके विपरीत, बैंकिंग दिग्गज जेपी मॉर्गन चेज (JPM) जैसी वित्तीय संस्थाओं को इस माहौल से फायदा मिल सकता है। बैंक आमतौर पर कम अवधि पर पूंजी जुटाते हैं और लंबी अवधि के लिए ऋण देते हैं। ऐसे में 2 साल और 30 साल के बॉन्ड यील्ड के बीच बढ़ता अंतर बैंक के नए ऋणों पर शुद्ध ब्याज मार्जिन और आय को मजबूत बना सकता है।\n\nतकनीकी स्तर: समर्थन, प्रतिरोध और बाजार का रुझान\nचार्ट विश्लेषण के लिहाज से डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में मौजूदा समय में नकारात्मक रुझान बना हुआ है। तकनीकी स्तरों का ब्योरा इस प्रकार है\n\n• प्रतिरोध स्तर: बुधवार की क्लोजिंग 51,500 पर रही थी, और गुरुवार का सत्र इसके नीचे खुला तथा दिनभर सूचकांक इसे दोबारा हासिल नहीं कर सका। इसके ऊपर 52,000 का स्तर सबसे अहम प्रतिरोध है, जिसे सूचकांक ने मंगलवार को खो दिया था। उसके बाद के प्रत्येक सत्र में निचले स्तर के हाई बने हैं।\n• समर्थन स्तर: गुरुवार का निचला स्तर 51,100 रहा, जिसने 16 सितंबर के निचले स्तर को तोड़ दिया और यह जून के बाद सबसे निचला स्तर बना, हालांकि खरीदारों ने उस निचले स्तर से कुछ रिकवरी कराई। इसके नीचे 51,000 का स्तर अगला मनोवैज्ञानिक समर्थन है।\n• तकनीकी रुझान: 52,000 के स्तर से नीचे सूचकांक में बिकवाली का पक्ष मजबूत है। नीचे की ओर पहला लक्ष्य 51,000 और दूसरा लक्ष्य 50,250 के पास स्थित 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) है। हालांकि, दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) 19 के आसपास पहुंच गया है, जो जुलाई के अंत के बाद पहली बार 20 के नीचे आया है। यह ओवरसोल्ड स्थिति 51,500 की ओर एक अल्पकालिक उछाल दे सकती है, लेकिन जब तक दैनिक क्लोजिंग 52,000 के ऊपर नहीं आती, तब तक नकारात्मक नजरिया बना रहेगा।\n\nडाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ सिद्धांत की रूपरेखा\nडाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शेयर बाजार सूचकांकों में से एक है। इसमें अमेरिका की 30 सबसे अधिक कारोबार वाली प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारित होने वाले कई आधुनिक सूचकांकों के विपरीत, यह एक प्राइस-वेटेड इंडेक्स है। इसकी गणना घटक शेयरों की कीमतों को जोड़कर एक विशेष विभाजक से विभाजित करके की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 है। इस सूचकांक की स्थापना चार्ल्स डाउ ने की थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी स्थापना की थी। हालांकि, केवल 30 कंपनियों को ट्रैक करने के कारण कई बार इसकी आलोचना भी होती है कि यह एसएंडपी 500 की तरह व्यापक बाजार का संपूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करता।\n\nइस सूचकांक की दिशा तय करने में घटक कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे सबसे मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अमेरिकी और वैश्विक व्यापक आर्थिक आंकड़े, निवेशक धारणा और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियां अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अधिकांश कंपनियां क्रेडिट पर निर्भर हैं।\n\nचार्ल्स डाउ द्वारा विकसित डाउ सिद्धांत बाजार के प्राथमिक रुझानों की पहचान करने की एक जानी-मानी विधि है। इसका मुख्य नियम डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) और डाउ जोन्स ट्रांसपोर्टेशन एवरेज (DJTA) की दिशा की एक साथ तुलना करना है। जब दोनों एक ही दिशा में बढ़ें, तभी रुझान की पुष्टि मानी जाती है, जिसमें ट्रेडिंग वॉल्यूम एक अतिरिक्त पुष्टिकर्ता की भूमिका निभाता है। डाउ सिद्धांत के तहत बाजार के रुझान के तीन चरण होते हैं: संचय (जब समझदार निवेशक खरीदारी या बिकवाली शुरू करते हैं), सार्वजनिक भागीदारी (जब आम जनता बाजार में प्रवेश करती है), और वितरण (जब बड़े निवेशक बाहर निकलते हैं)।\n\nनिवेशक इस सूचकांक में विभिन्न वित्तीय साधनों के माध्यम से निवेश और ट्रेड कर सकते हैं। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के जरिए निवेशक सभी 30 कंपनियों को अलग-अलग खरीदने के बजाय एकल सुरक्षा के रूप में ट्रेड कर सकते हैं, जिसका प्रमुख उदाहरण एसपीडीआर डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ (DIA) है। इसके अतिरिक्त, फ्यूचर्स अनुबंधों के माध्यम से भविष्य के मूल्य पर सट्टा लगाया जा सकता है, ऑप्शंस अनुबंध पूर्व-निर्धारित मूल्य पर खरीद-बिक्री का अधिकार देते हैं, और म्यूचुअल फंड्स विविध पोर्टफोलियो के माध्यम से इस सूचकांक का एक्सपोजर प्रदान करते हैं।\n\nवैश्विक बाजारों और मुद्राओं का परिदृश्य\nअंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी अन्य परिसंपत्ति वर्गों में व्यापक हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (AUD/USD) एशियाई सत्र में गिरकर 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता दिखा। ऑस्ट्रेलिया की अगस्त रोजगार रिपोर्ट में बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, हालांकि रोजगार परिवर्तन उम्मीदों से बेहतर 39.5 हजार रहा। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले मुद्रा बाजार में सतर्कता बनी हुई है।\n\nजापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से गिरकर एशियाई सत्र में 158.00 के करीब आ गया। जापान में बॉन्ड यील्ड में तेजी और सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को समर्थन दिया है, जबकि फेड की सख्त नीतियों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण डॉलर इंडेक्स दो महीने के उच्च स्तर के करीब टिका रहा। उधर बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम है।\n\nकमोडिटी बाजार में सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखी गई। यूरोपीय सत्र के पूर्वार्द्ध में पीली धातु 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार कर रही थी। बाजार ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच संभावित वार्ता में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ्स), तकनीकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार से जुड़े घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखे हुए है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक ब्याज दरों में आई इस तेज उछाल का सीधा असर इक्विटी निवेशकों, घरेलू बजट और कर्ज की लागत पर पड़ेगा।\n\n• वैश्विक निवेशकों पर: अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी संस्थागत निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकाल सकते हैं। इसके चलते भारतीय इक्विटी बाजारों में भी अल्पकालिक अस्थिरता और दबाव देखने को मिल सकता है।\n• ऋण और ईएमआई लागत: लंबी अवधि के बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर अंतरराष्ट्रीय उधारी दरों और मॉर्गेज पर पड़ता है। जो कंपनियां विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ECB) के जरिए धन जुटाती हैं, उनकी ब्याज लागत काफी बढ़ जाएगी।\n• ऊर्जा और महंगाई का दबाव: ब्रेंट क्रूड के 105 डॉलर प्रति बैरल के पास टिके रहने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ेंगे। आयातित कच्चे तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में ईंधन की कीमतें और घरेलू महंगाई बढ़ने की आशंका रहेगी।\n• मुद्रा और विनिमय दरें: अमेरिकी डॉलर के मजबूत बने रहने से अन्य वैश्विक मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है। विदेशी यात्रा, विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों की फीस और विदेशों से आयात किए जाने वाले उत्पाद महंगे हो सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिकी इक्विटी बाजार में आई तेज गिरावट और लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड यील्ड में अप्रत्याशित उछाल कई परस्पर जुड़े आर्थिक कारणों का परिणाम है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, सरकारी बजट घाटे और केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीतियां जारी रखने के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को नकारात्मक बना दिया है।\n\n• कच्चे तेल की कीमतें और युद्ध का असर: ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। महंगे तेल ने वैश्विक महंगाई के लंबे समय तक बने रहने का जोखिम पैदा कर दिया है।\n• फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। 18 में से 16 अधिकारियों द्वारा इस साल एक और दर वृद्धि का समर्थन करने से दर कटौती की उम्मीदें पूरी तरह समाप्त हो गई हैं।\n• सरकारी उधारी का अभूतपूर्व स्तर: अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे प्रमुख देश रिकॉर्ड स्तर पर बॉन्ड जारी कर कर्ज ले रहे हैं। अमेरिका में सकल घरेलू उत्पाद के 3.3 प्रतिशत तक पहुंचे ब्याज खर्च ने लंबी अवधि के कर्जदाताओं को अधिक रिटर्न मांगने पर मजबूर किया है।\n• तकनीकी स्तरों का टूटना: डाउ जोन्स का 52,000 और फिर 51,500 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों से नीचे फिसलना बिकवाली को तेज करने वाला साबित हुआ। नए निचले स्तर बनने से संस्थागत निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए शेयर बेचे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में हालिया गिरावट का क्या स्तर रहा?\nडाउ जोन्स गिरकर 51,100 अंक के स्तर पर आ गया, जो जून के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है।\n\n2. 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में क्या बदलाव आया है?\n30 साल का अमेरिकी बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़कर 2004 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।\n\n3. फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का ब्याज दरों पर क्या रुख है?\nफिलाडेल्फिया फेड अध्यक्ष पॉलसन और न्यूयॉर्क फेड अध्यक्ष विलियम्स ने संकेत दिया है कि मौजूदा 3.75-4.00% की सीमा से आगे एक और दर वृद्धि संभव है।\n\n4. 30 साल की मॉर्गेज दरों पर इसका क्या असर हुआ है?\nअमेरिका में 30 साल की मॉर्गेज दरें लगभग 7% के करीब पहुंच गई हैं, जो युद्ध पूर्व स्तरों से पूरा एक प्रतिशत अंक अधिक है।\n\n5. इस स्थिति से डाउ जोन्स की किन कंपनियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है?\nआवास क्षेत्र में सुस्ती आने से होम डिपो (HD) और शेरविन-विलियम्स (SHW) जैसी निर्माण और पेंट सामग्री बेचने वाली कंपनियों पर सीधा दबाव है।\n\n6. किन कंपनियों को यील्ड कर्व में फैलाव से फायदा मिल सकता है?\nजेपी मॉर्गन चेज (JPM) जैसे वाणिज्यिक बैंकों को फायदा हो सकता है क्योंकि वे अल्पकालिक दरों पर पूंजी जुटाकर लंबी अवधि के लिए अधिक ब्याज पर ऋण देते हैं।\n\n7. डाउ जोन्स के लिए प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तर कौन से हैं?\nऊपर की ओर 51,500 और 52,000 मुख्य प्रतिरोध स्तर हैं, जबकि नीचे की ओर 51,100 और 51,000 महत्वपूर्ण समर्थन स्तर हैं।\n\n8. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरों में क्या फैसला लिया है?\nबैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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