95.77 पर पहुंचकर रुपये ने पकड़ी रफ्तार, ये 5 फैक्टर बने डॉलर की कमजोरी की वजह बुधवार को रुपया लगातार चौथे सत्र में मजबूत रहकर 5 पैसे चढ़कर 95.77 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. कच्चे तेल की नरमी से लेकर रिजर्व बैंक के दखल तक, पांच बड़ी वजहों ने डॉलर की पकड़ ढीली कर दी है. भारतीय करेंसी ने बीते कुछ हफ्तों की सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है. बुधवार को फॉरेक्स बाजार में रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूत रहा और सुबह के कारोबार में 5 पैसे चढ़कर 95.77 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया. जो करेंसी अब तक दबाव में कराह रही थी, वह अचानक कैसे संभल गई, यह सवाल हर आम भारतीय के मन में उठ रहा है. दरअसल इसके पीछे पांच बड़ी वजहें काम कर रही हैं, जिन्होंने डॉलर की पकड़ ढीली कर दी है. बुधवार सुबह अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.70 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान 95.77 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 5 पैसे की बढ़त है. घरेलू शेयर बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार खरीदारी से बना सकारात्मक माहौल भी रुपये की इस मजबूती को हवा दे रहा है. पिछले सत्रों में कितनी चढ़ी करेंसी आंकड़ों पर नजर डालें तो मंगलवार को रुपया 17 पैसे उछलकर 95.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. इससे पहले के दो कारोबारी सत्रों में इसमें कुल मिलाकर 74 पैसे की जोरदार मजबूती दर्ज की गई थी. उधर छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.12 फीसदी लुढ़ककर 101.14 पर आ गया. शेयर बाजार का मूड भी शानदार रहा, जहां सेंसेक्स 682.57 अंक की छलांग के साथ 77,448.49 पर और एनएसई निफ्टी 186.85 अंक चढ़कर 24,172.20 पर पहुंच गया. वो 5 कारण जिन्होंने रुपये में भरी जान कच्चे तेल की नरमी: ब्रेंट क्रूड फिलहाल करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि कुछ समय पहले यह 100 डॉलर के पार निकल गया था. तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल घटा और करेंसी पर पड़ने वाला दबाव भी काफी हद तक हल्का हो गया. रिजर्व बैंक का दखल: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बीते कुछ समय से विदेशी मुद्रा बाजार में लगातार डॉलर बेचकर रुपये की खरीद की है. बाजार में अरबों डॉलर झोंकने की इस रणनीति ने भारतीय करेंसी को सीधा सहारा दिया. विदेशी मुद्रा की आवक: रिजर्व बैंक और सरकार के कदमों की बदौलत FCNR(B) जैसी विदेशी मुद्रा जमा और विदेशी निवेश दोनों में इजाफा हुआ है. इससे घरेलू बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ी और रुपये को मजबूती मिली. डॉलर की बिकवाली: निर्यातकों और बैंकों ने पिछले कुछ दिनों में जमकर डॉलर बेचे हैं. इसका सीधा असर यह हुआ कि बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ गई और रुपया चढ़ने लगा. एफपीआई का भरोसा: शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी एफपीआई भी बीते कुछ दिनों से मजबूत होता दिख रहा है. विदेशी पूंजी के इस प्रवाह ने भी भारतीय करेंसी की पीठ थपथपाई और उसे और दमदार बनाया. कुल मिलाकर घरेलू और वैश्विक, दोनों मोर्चों पर बने सकारात्मक हालात ने मिलकर रुपये को यह ताकत दी है. अगर कच्चे तेल के दाम काबू में रहे और विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहा, तो आने वाले सत्रों में भी करेंसी का यह रुख बना रह सकता है. इसका आप पर असर • भारत में: रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की नरमी से आयातित सामान और ईंधन का बोझ घट सकता है, जिससे समय के साथ रोजमर्रा की कीमतों में राहत मिल सकती है. • विदेश जाने वालों के लिए: मजबूत रुपया विदेश में पढ़ाई, यात्रा और डॉलर में किए जाने वाले भुगतान को थोड़ा सस्ता कर देता है. • निवेशकों के लिए: बढ़ते विदेशी निवेश और चढ़ते सेंसेक्स-निफ्टी से भारतीय शेयर बाजार में लौटे भरोसे का संकेत मिलता है. सवाल-जवाब 1. रुपया अभी डॉलर के मुकाबले किस भाव पर है? बुधवार सुबह के कारोबार में रुपया 5 पैसे चढ़कर 95.77 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया. 2. रुपया कितने सत्रों से लगातार मजबूत हो रहा है? यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है जब रुपये में मजबूती देखी गई है. 3. मंगलवार को रुपया किस स्तर पर बंद हुआ था? मंगलवार को रुपया 17 पैसे उछलकर 95.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. 4. रुपये की मजबूती के पीछे कौन से 5 कारण हैं? कच्चे तेल की नरमी, रिजर्व बैंक का डॉलर बेचना, विदेशी मुद्रा की आवक, निर्यातकों-बैंकों की डॉलर बिकवाली और एफपीआई का निवेश. 5. ब्रेंट क्रूड अभी किस स्तर पर है? ब्रेंट क्रूड फिलहाल करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जबकि पहले यह 100 डॉलर के पार चला गया था. 6. शेयर बाजार का हाल कैसा रहा? सेंसेक्स 682.57 अंक चढ़कर 77,448.49 पर और एनएसई निफ्टी 186.85 अंक बढ़कर 24,172.20 पर पहुंच गया. https://trendkia.com/market/95-77-para-pahunchakara-rupee-ne-pakari-raphtara-ye-5-phaiktara-bane-dollar-ki-kamajori-ki-vajaha-11726 TrendKia — Har trend, sabse pehle.