# एबीएन एमरो ने बढ़ाया यूरोज़ोन की वृद्धि दर का अनुमान, महंगाई तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची

> एबीएन एमरो के मुताबिक जर्मनी के सहारे यूरोज़ोन की वृद्धि दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, लेकिन ऊर्जा की कीमतों में आए नए झटके ने महंगाई को तीन साल के उच्चतम स्तर 3.3 प्रतिशत पर पहुंचा दिया है, और अब वेतन वृद्धि में भी तेजी की आशंका बढ़ गई है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/abn-amro-ne-barhaya-eurozone-ki-vriddhi-dara-ka-anumana-mahngai-tina-sala-ke-uchchatama-stara-para-pahunchi-29045 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरोज़ोन अर्थव्यवस्था, एबीएन एमरो, महंगाई दर, आर्थिक वृद्धि, जर्मनी, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, वेतन वृद्धि, ऊर्जा संकट

यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था उतनी कमज़ोर नहीं पड़ी, जितना कुछ महीने पहले तक आशंका जताई जा रही थी, लेकिन ऊर्जा की कीमतों में आए नए उछाल ने महंगाई को तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। यह आकलन डच बैंक एबीएन एमरो ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में दिया है।

## वृद्धि दर उम्मीद से बेहतर, जर्मनी बना सहारा
एबीएन एमरो का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में भी यूरोज़ोन की यह मजबूती बनी रहेगी, भले ही ऊर्जा की कीमतों में नया झटका अर्थव्यवस्था में असर दिखाना शुरू कर चुका हो। हालांकि उपभोक्ता खर्च में सुधार की रफ्तार पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि महंगी ऊर्जा ने लोगों की असली आमदनी पर चोट पहुंचाई है। जब वेतन उतनी तेजी से नहीं बढ़ता जितनी तेजी से कीमतें बढ़ती हैं, तो लोगों के पास बाकी चीजों पर खर्च करने के लिए कम पैसा बचता है, और इसी वजह से उपभोक्ता खर्च के दम पर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

यूरोज़ोन की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी को लेकर एबीएन एमरो को भरोसा है कि वह पूरे क्षेत्र को सहारा देती रहेगी। बैंक के मुताबिक जर्मनी में सरकारी खर्च लगातार जारी रहने से वहां की रिकवरी को मदद मिलेगी, और यही खर्च पूरे यूरोज़ोन की वृद्धि दर के लिए एक अहम स्तंभ बना रहेगा। पिछले एक साल में जर्मनी में इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा क्षेत्र पर सरकारी खर्च बढ़ा है, और एबीएन एमरो के अनुमान बताते हैं कि यह सहारा जल्द खत्म होने वाला नहीं है।

दूसरी तिमाही के मजबूत आंकड़ों और जर्मनी की वृद्धि दर में हुए ऊपर की तरफ संशोधन के चलते एबीएन एमरो अब फिर से अपने पुराने अनुमान पर लौट आया है, यानी 2026 के लिए यूरोज़ोन की वृद्धि दर 0.8 प्रतिशत रहने का अनुमान। मतलब बैंक ने बीच में इससे कम अनुमान लगाया था, लेकिन ताज़ा आंकड़ों की मजबूती ने उस सतर्कता को पलट दिया। 2027 के लिए बैंक ने अपना अनुमान 1.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।

## महंगाई तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची
एबीएन एमरो के मुताबिक असली चिंता वृद्धि दर से ज्यादा महंगाई को लेकर है, जहां ऊर्जा के नए झटके का असर कहीं ज्यादा गहरा दिखने वाला है। यूरोज़ोन की हेडलाइन महंगाई जून के 2.8 प्रतिशत के निचले स्तर से उछलकर अगस्त में 3.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले तीन साल का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। यानी सिर्फ दो महीनों में महंगाई आधा प्रतिशत अंक बढ़ गई।

इस बढ़ोतरी की लगभग पूरी वजह ऊर्जा की कीमतें रहीं, जिनका असर परिवहन, हीटिंग और उत्पादन लागत में सबसे पहले दिखता है और फिर धीरे-धीरे बाकी चीजों की कीमतों में भी झलकता है। लेकिन एबीएन एमरो ने यह भी बताया कि वस्तुओं की महंगाई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिसका जिक्र बैंक ने गर्मियों की शुरुआत से पहले अपनी मासिक रिपोर्ट में पहले ही कर दिया था। इसका मतलब है कि महंगाई का दबाव सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है, और इसका कुछ हिस्सा उतनी आसानी से नहीं उतरेगा जितनी आसानी से सिर्फ ऊर्जा के झटके से जुड़ी महंगाई उतर जाती है।

## 3.5 प्रतिशत के पार जा सकती है महंगाई, अब वेतन पर नजर
एबीएन एमरो का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई 3.5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है, उसके बाद ही इसमें नरमी आने की उम्मीद है। 2026 के पूरे साल के लिए औसत महंगाई दर अब 3.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो बैंक के जून के अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि साल के मध्य के बाद से ऊर्जा से जुड़ा महंगाई का दबाव कितनी तेजी से बढ़ा है।

महंगाई के गर्म होने के साथ ही एबीएन एमरो का कहना है कि अब सबकी नजर तथाकथित सेकंड राउंड इफेक्ट पर होगी, यानी क्या कर्मचारी बढ़ती कीमतों की भरपाई के लिए ज्यादा वेतन की मांग करना शुरू करेंगे, और क्या कंपनियां इस बढ़ी हुई वेतन लागत को आगे ग्राहकों पर डाल देंगी। अगर ऐसा हुआ तो यह एक ऐसा चक्र बन सकता है जो मूल झटका खत्म होने के बाद भी महंगाई को ऊंचा बनाए रखे। एबीएन एमरो ने साफ कहा है कि वह वेतन महंगाई पर सबसे ज्यादा नजर रखे हुए है।

इसके शुरुआती संकेत पहले से दिखने लगे हैं। जुलाई के लिए इनडीड के मासिक वेतन आंकड़ों में वेतन वृद्धि की रफ्तार तेज होने के पहले संकेत मिले हैं। इसके अलावा यूरोपीय सेंट्रल बैंक का आगे की दिशा बताने वाला ट्रैकर, जो सामूहिक रूप से तय किए गए वेतन को मापता है, हाल के महीनों में खुद भी ऊपर की तरफ बढ़ा है। एबीएन एमरो इन दोनों संकेतों को इस बात के शुरुआती सबूत मानता है कि ऊर्जा का झटका सिर्फ एक बार का उछाल बनकर नहीं रह जाएगा, बल्कि यह व्यापक और लंबे समय तक टिकने वाले महंगाई के दबाव में बदल सकता है।

केंद्रीय बैंक, खासकर यूरोपीय सेंट्रल बैंक, निगोशिएटेड वेतन जैसे आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखते हैं, क्योंकि इनसे यह अंदाजा मिलता है कि बढ़ी हुई कीमतें अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप से जड़ें जमा रही हैं या फिर ऊर्जा के झटके के साथ ही अपने आप कम हो जाएंगी। अगर वेतन में बढ़ोतरी लगातार जारी रहती है, तो महंगाई से निपटना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इसका सीधा असर दुकानदारों से लेकर सेवा देने वाली कंपनियों तक की लागत पर पड़ता है, जिन्हें फिर तय करना होता है कि वे बढ़ी हुई वेतन लागत खुद वहन करें या इसे ग्राहकों की जेब पर डाल दें।

फिलहाल एबीएन एमरो की रिपोर्ट का सार यही है कि यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था दो अलग-अलग गति से चल रही है, एक तरफ वृद्धि दर उम्मीद से ज्यादा मजबूत बनी हुई है, जिसे जर्मनी का सरकारी खर्च और बाकी क्षेत्रों की स्थिर रिकवरी सहारा दे रही है, तो दूसरी तरफ महंगाई की तस्वीर तेजी से बिगड़ी है और अब इस बात पर करीबी नजर रखी जा रही है कि कहीं यह वेतन तक न फैल जाए।

## इसका आप पर असर
यूरोज़ोन में महंगाई बढ़ने और वृद्धि दर मजबूत बने रहने का मतलब है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रह सकता है, और इसका असर यूरोप की सीमाओं से बाहर भी महसूस किया जा सकता है।

- **करेंसी और यात्रा खर्च:** महंगाई ऊंची रहने और अर्थव्यवस्था मजबूत रहने पर यूरो की कीमत अन्य करेंसी के मुकाबले मजबूत बनी रह सकती है। यूरोप घूमने, वहां पढ़ाई करने या यूरो में पैसे भेजने वालों को इसका असर अपने खर्च में दिखाई दे सकता है।
- **भारत का निर्यात कारोबार:** जर्मनी के सरकारी खर्च और यूरोज़ोन की मांग बनी रहने से भारत के उन कारोबारियों को फायदा मिल सकता है जो मशीनरी, कपड़ा या दवाइयां यूरोप को निर्यात करते हैं, क्योंकि यूरोज़ोन भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजारों में शामिल है।
- **निवेशकों के लिए संकेत:** महंगाई का अनुमान ऊंचा होने से यूरोपीय सेंट्रल बैंक लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रख सकता है, जिसका असर वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भारत जैसे उभरते बाजारों में आने वाले विदेशी निवेश पर भी पड़ सकता है।
- **यूरोप के आम लोगों की जेब पर असर:** ऊर्जा की महंगी कीमतों से असली आमदनी पहले से दबाव में है, इसलिए यूरोज़ोन के उपभोक्ता आने वाले महीनों में खर्च करने में सावधानी बरत सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. 2026 के लिए यूरोज़ोन की वृद्धि दर को लेकर एबीएन एमरो का ताज़ा अनुमान क्या है?
0.8 प्रतिशत, जो दूसरी तिमाही के मजबूत आंकड़ों और जर्मनी की वृद्धि दर में हुए संशोधन के बाद पुराने अनुमान पर वापसी है।

### 2. 2027 के लिए वृद्धि दर का अनुमान कितना है?
1.2 प्रतिशत, जो पहले जैसा ही बरकरार रखा गया है।

### 3. अगस्त में यूरोज़ोन की महंगाई कितनी बढ़ी?
यह जून के 2.8 प्रतिशत के निचले स्तर से बढ़कर अगस्त में 3.3 प्रतिशत हो गई, जो तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है।

### 4. महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
मुख्य वजह ऊर्जा की कीमतों में आया नया झटका है, साथ ही वस्तुओं की महंगाई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

### 5. महंगाई आगे कितनी बढ़ सकती है और 2026 का औसत अनुमान क्या है?
आने वाले महीनों में महंगाई 3.5 प्रतिशत के पार जा सकती है, और 2026 का पूरे साल का औसत अनुमान 3.0 प्रतिशत है, जो जून के अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

### 6. क्या वेतन वृद्धि में भी तेजी आ रही है?
हां, जुलाई के इनडीड आंकड़ों और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के निगोशिएटेड वेतन ट्रैकर, दोनों में वेतन वृद्धि तेज होने के शुरुआती संकेत मिले हैं।

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