# अगस्त में औद्योगिक उत्पादन ने पकड़ी रफ्तार, 8 फीसदी दर्ज हुई देश की IIP ग्रोथ

> मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन के दम पर अगस्त में देश के औद्योगिक उत्पादन में 8 फीसदी की जोरदार तेजी दर्ज की गई है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/agasta-men-industrial-utpadana-ne-pakari-raphtara-8-phisadi-darja-hui-desha-ki-iip-growth-40160 · **Language:** Hindi
**Tags:** औद्योगिक उत्पादन, आईआईपी, मैन्युफैक्चरिंग, अर्थव्यवस्था, एनएसओ, कैपिटल गुड्स

देश के औद्योगिक परिदृश्य में अगस्त 2026 के दौरान उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली है। आधिकारिक तौर पर जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP सालाना आधार पर 8 फीसदी की दर से बढ़ा है। इससे पिछले महीने यानी जुलाई में औद्योगिक विकास दर 7.4 फीसदी रही थी। इस पूरे उछाल में सबसे बड़ा योगदान विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ठोस गतिविधियों का रहा, जिसने समूचे उत्पादन आंकड़े को मजबूत सहारा दिया।

## सेक्टरवार स्थिति: बिजली चमकी, खनन में आई सुस्ती
नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) द्वारा साझा की गई जानकारी दर्शाती है कि अगस्त के महीने में अकेले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 9 फीसदी की शानदार वृद्धि हासिल की। इसी दौरान बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र का प्रदर्शन भी बेहद मजबूत रहा और इसमें 12.3 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। इसके विपरीत, माइनिंग और क्वॉरिंग सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जहां उत्पादन में 5.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। एक साल पहले इसी समान अवधि में खनन क्षेत्र ने 15.8 फीसदी की जोरदार बढ़त हासिल की थी। इसके साथ ही जुलाई महीने के IIP आंकड़ों में संशोधन भी किया गया है। पूर्व में जुलाई के लिए अस्थायी ग्रोथ 6.7 फीसदी आंकी गई थी, जिसे अब संशोधित कर 7.4 फीसदी कर दिया गया है।

## शुरुआती पांच महीनों में औद्योगिक रफ्तार बेहतर
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त की समयावधि पर नजर डालें तो कुल औद्योगिक उत्पादन में 6.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 4.2 फीसदी रहा था। यह तुलना स्पष्ट करती है कि चालू कारोबारी साल में कारखानों और संयंत्रों का कामकाज पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक तेज रहा है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़े कुल 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 समूहों ने अगस्त में सकारात्मक बढ़त दर्ज करने में सफलता पाई है।

## ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिकल सेगमेंट में सबसे बड़ा उछाल
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर कई विशिष्ट उद्योगों ने बेहद तेज रफ्तार दिखाई। मोटर व्हीकल, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर के विनिर्माण में 25.2 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें पैसेंजर कार, कमर्शियल व्हीकल, ऑटो पार्ट्स, स्पेयर और एक्सेसरीज निर्माण की भूमिका अहम रही। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट तैयार करने वाले उद्योगों का प्रदर्शन और भी शानदार रहा, जहां 30.9 फीसदी की मजबूत तेजी देखने को मिली। इसी तरह अन्य ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट निर्माण में 25.3 फीसदी का इजाफा हुआ, जिसके दायरे में दोपहिया वाहन, रेलवे रोलिंग स्टॉक और उनसे संबंधित कलपुर्जे शामिल रहे।

## उपयोग आधारित वर्गीकरण: कैपिटल गुड्स में जोरदार मांग
उत्पादों के उपयोग पर आधारित क्लासिफिकेशन के अनुसार, निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले कैपिटल गुड्स सेगमेंट में 16.9 फीसदी की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई। इंटरमीडिएट गुड्स के उत्पादन में भी 13.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। आम उपभोक्ताओं के टिकाऊ सामान यानी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का उत्पादन 11.1 फीसदी चढ़ा। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सामानों में 6.4 फीसदी, प्राइमरी गुड्स में 3.5 फीसदी और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स के उत्पादन में 2.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

## इसका आप पर असर
अगस्त के महीने में औद्योगिक और विनिर्माण उत्पादन में आई यह तेज रफ्तार देश में आर्थिक मजबूती और रोजगार के अवसरों में सुधार का संकेत देती है।

- **अर्थव्यवस्था पर असर:** विनिर्माण और पूंजीगत सामानों के उत्पादन में दोहरे अंकों की बढ़त दर्शाती है कि कंपनियों की तरफ से नए कारखानों और उपकरणों में निवेश बढ़ रहा है। इससे आने वाली तिमाहियों में आर्थिक विकास की दर को मजबूती मिलेगी।
- **रोजगार और कामकाज:** ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल और ट्रांसपोर्ट उपकरणों में 25 से 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि से जुड़ी हुई कंपनियों में काम के अवसर बढ़ सकते हैं। उत्पादन बढ़ने का सीधा असर तकनीकी और असेंबली लाइनों पर काम करने वाले श्रमिकों के काम पर पड़ता है।
- **उपभोक्ता मांग:** कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 11.1 फीसदी की बढ़त दिखाती है कि त्योहारी सीजन से पहले घरेलू उपकरणों और वाहनों की तैयारी तेज हो चुकी है। बाजार में उत्पादों की आपूर्ति बेहतर रहने से ग्राहकों को मांग के समय कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- **बिजली और बुनियादी ढांचा:** बिजली और गैस की आपूर्ति में 12.3 फीसदी की बढ़त से साफ है कि कारखानों और कॉमर्शियल गतिविधियों में ऊर्जा की खपत बढ़ी है। यह औद्योगिक इकाइयों के सामान्य से अधिक क्षमता पर चलने की पुष्टि करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 8 फीसदी की तेजी मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल उपकरणों और बिजली क्षेत्र की भारी मांग के कारण दर्ज हुई।

- **मैन्युफैक्चरिंग और उपकरणों की मांग:** इलेक्ट्रिकल उपकरणों में 30.9 फीसदी और मोटर वाहनों में 25.2 फीसदी का जबर्दस्त उछाल आया। कारखानों में नए ऑर्डर्स और आगामी सीजन की तैयारी ने उत्पादन के इस स्तर को मुमकिन बनाया।
- **ऊर्जा खपत में वृद्धि:** उद्योगों की तेज गतिविधियों के चलते बिजली और गैस आपूर्ति में 12.3 फीसदी का इजाफा हुआ। बढ़ते कारखानों को चलाने के लिए पावर ग्रिड और वितरण तंत्र पर मांग में तेज बढ़ोतरी देखी गई।
- **खनन में सुस्ती का कारण:** माइनिंग और क्वॉरिंग में 5.6 फीसदी की गिरावट ने कुल वृद्धि को थोड़ा सीमित किया। पिछले साल के उच्च आधार यानी 15.8 फीसदी की बढ़त के कारण इस बार इस सेक्टर के आंकड़े दबाव में नजर आए।
- **व्यापक औद्योगिक भागीदारी:** मैन्युफैक्चरिंग के 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 समूहों ने सकारात्मक वृद्धि हासिल की। यह दर्शाता है कि यह उछाल केवल किसी एक हिस्से तक सीमित न रहकर अधिकांश फैक्ट्रियों में फैला हुआ था।

## सवाल-जवाब

### 1. अगस्त 2026 में भारत का औद्योगिक उत्पादन कितना बढ़ा?
अगस्त 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़ा।

### 2. अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ दर क्या रही?
नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस के अनुसार अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।

### 3. किस सेक्टर में सबसे अधिक और किसमें गिरावट दर्ज की गई?
इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में 30.9 फीसदी और बिजली आपूर्ति में 12.3 फीसदी की तेजी आई, जबकि माइनिंग सेक्टर में 5.6 फीसदी की गिरावट रही।

### 4. चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में IIP का क्या प्रदर्शन रहा?
अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान कुल औद्योगिक उत्पादन 6.7 फीसदी बढ़ा, जो पिछले साल इसी अवधि में 4.2 फीसदी था।

### 5. जुलाई के IIP आंकड़े में क्या बदलाव हुआ है?
जुलाई के अस्थायी आंकड़े को 6.7 फीसदी से संशोधित करके 7.4 फीसदी कर दिया गया है।

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