# आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हार्डवेयर का आयात बना व्यापार घाटे की दूसरी सबसे बड़ी वजह, भारतीय रुपये पर बढ़ा दबाव

> भारत में सेमीकंडक्टर और नेटवर्किंग हार्डवेयर के बढ़ते आयात से व्यापार घाटा जीडीपी के 2 प्रतिशत यानी 77 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जिससे सोने को पीछे छोड़कर यह कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा कारक बन गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/ai-hardware-imports-second-biggest-deficit-driver-after-oil-pressuring-rupee-35859 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रुपया, व्यापार घाटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था में आधुनिक तकनीक अपनाने की तेज रफ्तार अब देश के बाहरी व्यापार आंकड़ों में भी स्पष्ट रूप से दिखने लगी है। घरेलू स्तर पर हाई-टेक कंप्यूटिंग उपकरणों के विशाल आयात के चलते व्यापार घाटे का दायरा काफी बढ़ गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों का व्यापार घाटा अब देश के कुल व्यापार घाटे में कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। इस तेज विस्तार ने पारंपरिक रूप से दूसरे स्थान पर रहने वाले सोने के आयात घाटे को भी पीछे छोड़ दिया है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।

## एआई हार्डवेयर आयात का बढ़ता आकार और आंकड़े
तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरणों के आयात में बीते एक साल के दौरान रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 12 महीनों के रोलिंग आधार पर एआई-सक्षम उत्पादों का व्यापार घाटा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 2.0 प्रतिशत पर पहुंच गया। मूल्य के हिसाब से यह घाटा 77 अरब डॉलर दर्ज किया गया है। एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा भारत की जीडीपी का 1.5 प्रतिशत था। इस मद में आयात बिल का इस स्तर तक पहुंचना यह दर्शाता है कि आधुनिक डेटा और कंप्यूटिंग अवसंरचना तैयार करने के लिए भारत की विदेशी कलपुर्जों पर निर्भरता कितनी गहरी है।

इस घाटे के अंतर्गत शामिल श्रेणियों में मुख्य रूप से एडवांस सेमीकंडक्टर, हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर, आधुनिक मेमोरी चिप्स, डेटा-प्रोसेसिंग यूनिट्स यानी डीपीयूस और जटिल नेटवर्किंग हार्डवेयर शामिल हैं। इन तमाम उपकरणों की घरेलू मांग में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन घरेलू उत्पादन की सीमित क्षमता के कारण इनका एक बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाना पड़ रहा है।

## मात्रा से ज्यादा कीमतों में उछाल बना घाटे की वजह
आयात से जुड़े इस व्यापक विस्तार का गहन विश्लेषण बताता है कि यह गिरावट केवल सामानों की संख्या या मात्रा में वृद्धि के कारण नहीं हुई है। वास्तव में, एआई-सक्षम सामानों के व्यापार घाटे का यह हालिया दबाव मात्रा-आधारित होने के बजाय मूल्य-आधारित अधिक प्रतीत होता है। वैश्विक स्तर पर आधुनिक चिप्स, सर्वर पार्ट्स और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े उन्नत घटकों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी ऊंची बनी हुई हैं। हाई-एंड हार्डवेयर की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रीमियम कीमतों के चलते भारत का आयात खर्च तेजी से बढ़ा है, जिसने कुल व्यापार अंतर को और चौड़ा कर दिया है।

## रुपये को सहारा देने वाले कारक और पूंजी प्रवाह
व्यापार घाटे में आए इस भारी उछाल के बावजूद भारतीय रुपये को तात्कालिक रूप से कुछ महत्वपूर्ण कारकों से सहारा मिल रहा है। हाल के हफ्तों में देश में पूंजी का अंतर्वाह मजबूत रहा है। अनिवासी जमा यानी एनआरआई डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए पेश किए गए नीतिगत प्रोत्साहनों ने इस पूंजी प्रवाह को रफ्तार दी है। यह स्थिर पूंजी आवक निकट भविष्य में भारत के बाहरी वित्तीय संतुलन और भारतीय मुद्रा को आवश्यक स्थिरता प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रही है, जिससे व्यापार घाटे का तात्कालिक असर कुछ हद तक संतुलित हो रहा है।

## वैश्विक बाजारों में अन्य मुद्राओं और परिसंपत्तियों की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और जिंस बाजारों में भी इस समय व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना रहा। अमेरिकी डॉलर में जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर से आई मामूली गिरावट थोड़ी थमती दिखी, क्योंकि दुनिया भर में भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बरकरार हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना यानी पीबीओसी द्वारा लोन प्राइम रेट्स पर यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव रहा, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं और आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले इसे समर्थन भी मिला।

दूसरी तरफ, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 157.00 के नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा रेट चेक किए जाने के बाद संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों से येन में मामूली मजबूती देखी गई। जापान में छुट्टी के माहौल के बीच रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी कारोबारियों को सतर्क रखा है। केंद्रीय बैंक की नीतिगत दिशा के तहत, बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के मतदान से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम है और व्यापक रूप से बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा।

## सोने के भाव और बॉन्ड बाजारों में तनाव
जिंस बाजार की बात करें तो सोना इस हफ्ते की शुरुआत में मंदी के रुख के साथ खुला और इसकी दो दिनों की तेजी का सिलसिला थम गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा। वहीं वित्तीय बाजारों में तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं, जबकि यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ खुलने की तैयारी में दिखे। वित्तीय तनाव सबसे ज्यादा सॉवरेन बॉन्ड बाजार में देखा गया, जहां शुक्रवार देर रात यूरोपीय और अमेरिकी यील्ड में एक बार फिर तेज उछाल दर्ज किया गया।

## इसका आप पर असर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरणों के बढ़ते आयात बिल से विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर सीधा दबाव पड़ सकता है, जिसका असर तकनीकी लागत और विदेशी फंडिंग पर दिखाई देगा।

- **घरेलू टेक कंपनियों पर असर:** आधुनिक चिप्स और सर्वर उपकरण आयात करने वाली भारतीय तकनीकी कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ सकती है। कंपनियों को डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी होगी।
- **विदेशी पूंजी प्रवाह की भूमिका:** अनिवासी जमा को आकर्षित करने के लिए बनाई गई नीतिगत पहलों से देश में आने वाली पूंजी रुपये को तात्कालिक सहारा दे सकती है। यह आवक कम अवधि में बाहरी संतुलन को स्थिरता प्रदान करेगी।
- **आयात लागत में वृद्धि:** डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव रहने से इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर उत्पादों की खुदरा कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इससे तकनीकी गैजेट्स और सर्वर आधारित सेवाएं महंगी होने की संभावना बनी रहती है।
- **व्यापार संतुलन की निगरानी:** जुलाई 2026 में एआई हार्डवेयर घाटा 77 अरब डॉलर तक पहुंचने के कारण नीतिगत स्तर पर घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर ध्यान बढ़ सकता है। सरकार स्थानीय चिप निर्माण और हार्डवेयर आपूर्ति श्रृंखला को गति देने के नए उपाय तलाश सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारत के बाहरी व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ने का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े हाई-टेक उपकरणों की लगातार बढ़ती मांग और उनकी वैश्विक कीमतों में आया उछाल है। देश में आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए आवश्यक कलपुर्जों के आयात में अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

- **तकनीकी उपकरणों की कीमतों में भारी उछाल:** भारत में एआई से जुड़े सामानों के व्यापार घाटे में आया यह उछाल मात्रा की तुलना में कीमतों में बढ़ोतरी के कारण अधिक हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्नत चिप्स और हार्डवेयर महंगे होने से आयात बिल तेजी से बढ़ा है।
- **आयात बास्केट में बदलाव:** देश के कुल व्यापार घाटे में तेल के बाद अब एआई से जुड़े सामान दूसरे स्थान पर आ गए हैं और इन्होंने सोने के आयात से होने वाले घाटे को भी पीछे छोड़ दिया है। आधुनिक डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों ने इस श्रेणी में विदेशी निर्भरता को अत्यधिक बढ़ा दिया है।
- **वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता:** अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विभिन्न केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों से जुड़े कदमों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे आयात लागत और अधिक दबाव पैदा कर रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत के व्यापार घाटे में एआई हार्डवेयर का कितना योगदान है?
जुलाई 2026 में 12 महीनों के रोलिंग आधार पर एआई उपकरणों का व्यापार घाटा बढ़कर जीडीपी का 2.0 प्रतिशत यानी 77 अरब डॉलर हो गया है, जो एक साल पहले 1.5 प्रतिशत था।

### 2. एआई से जुड़े व्यापार घाटे में कौन-कौन से उत्पाद शामिल हैं?
इसमें उन्नत सेमीकंडक्टर्स, प्रोसेसर्स, मेमोरी चिप्स, डेटा-प्रोसेसिंग यूनिट्स यानी डीपीयूस और नेटवर्किंग हार्डवेयर शामिल हैं।

### 3. क्या एआई घाटा सोने से बड़ा हो गया है?
हां, एआई से जुड़े उत्पादों का व्यापार घाटा अब कच्चे तेल के बाद भारत के कुल व्यापार घाटे में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है और इसने सोने के घाटे को पीछे छोड़ दिया है।

### 4. क्या यह व्यापार घाटा मांग बढ़ने से बढ़ा है या कीमतों की वजह से?
आंकड़ों के अनुसार, एआई से जुड़े सामानों के व्यापार घाटे में यह गिरावट आयात की मात्रा की तुलना में बढ़ती कीमतों के कारण अधिक हुई है।

### 5. निकट भविष्य में भारतीय रुपये को क्या सहारा दे रहा है?
अनिवासी जमा को आकर्षित करने के लिए शुरू किए गए नीतिगत प्रोत्साहनों और हालिया पूंजी प्रवाह से भारतीय रुपये और बाहरी संतुलन को निकट भविष्य में सहारा मिलने की संभावना है।

### 6. बैंक ऑफ जापान ने अपनी नीतिगत ब्याज दर में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

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