आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में अनिश्चितता से अमेरिकी डॉलर की शुरुआती बढ़त थमी, फ्रांस में उथल-पुथल फ्रांस में बढ़ते जीवन-यापन खर्च और 4.85 प्रतिशत तक उछली बॉन्ड यील्ड के बावजूद तकनीकी क्षेत्र में सुस्ती से अमेरिकी डॉलर अपनी शुरुआती तेजी गंवा बैठा। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी और वह सपाट स्तरों पर वापस आ गया। यूरोप में फ्रांस के वित्तीय संकट और वहां जीवन-यापन की लागत को लेकर भड़की अशांति ने शुरुआत में सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ाई थी। इसके बावजूद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में भारी पूंजीगत निवेश के भविष्य को लेकर निवेशकों में उभरी चिंताओं ने ग्रीनबैक पर भारी दबाव बना दिया, जिससे यह मुद्रा अपनी बढ़त गंवाने पर मजबूर हो गई। यूरोप में गहराता सामाजिक और वित्तीय तनाव फ्रांस में रहने की बढ़ती लागत और महंगाई के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है, जिससे वहां के वित्तीय बाजार गहरे संकट में फंस गए हैं। फ्रांस की 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड उछलकर 4.85 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जिससे सरकारी उधारी की लागत में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। पेरिस की सड़कों पर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश के नाम अपने टेलीविजन संबोधन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा को बेहद स्तब्ध करने वाला बताया। उन्होंने उपद्रवियों द्वारा की गई तोड़फोड़ की कड़े शब्दों में निंदा की, क्योंकि फ्रांस ने हाल के वर्षों में अशांति का सबसे खराब दौर देखा है। यह असंतोष सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जीवन-यापन के संकट से जुड़े ऐसे ही प्रदर्शन पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन और इटली के औद्योगिक शहर मिलान तक फैल गए हैं। आमतौर पर यूरोपीय संकट के समय सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर अमेरिकी डॉलर की खरीदारी तेज होती है, लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग दिखाई दिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम पर संशय और तकनीकी बाजार का दबाव यूरोपीय संकट के बावजूद डॉलर के कमजोर पड़ने की मुख्य वजह अमेरिकी टेक शेयरों में आई बिकवाली रही। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के बुनियादी ढांचे पर कंपनियों द्वारा किए जा रहे अरबों डॉलर के निवेश चक्र की निरंतरता को लेकर विश्लेषकों में सवाल उठने लगे हैं। टेक कंपनियों के भारी खर्च के मुकाबले उनके वास्तविक राजस्व मुनाफे को लेकर निवेशक सतर्क हो गए हैं। सिंगापुर स्थित ओसीबीसी बैंक के मुद्रा रणनीतिकारों के अनुसार, इस समय मुद्रा बाजार में एक बेहद असामान्य परिदृश्य बना हुआ है। इसमें जोखिम से बचाव, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और कमजोर अमेरिकी डॉलर एक साथ देखे जा रहे हैं। ओसीबीसी ने रेखांकित किया कि यह कोई पारंपरिक वैश्विक संकट का झटका नहीं है जहां निवेशक आंख मूंदकर अमेरिकी डॉलर में शरण लेते हैं। यदि तनाव का केंद्र स्वयं अमेरिका या वहां के वित्तीय परिसंपत्ति बाजार से जुड़ा है, तो ट्रेजरी बॉन्ड में सुरक्षित खरीदारी यील्ड को नीचे खींचती है, जबकि अमेरिकी परिसंपत्तियों पर मिलने वाला कमजोर रिटर्न डॉलर के आकर्षण को घटा देता है। विश्लेषकों का मानना है कि एआई से जुड़ी घबराहट व्यापक निवेश गाथा में एक अस्थायी रुकावट हो सकती है, लेकिन यह विदेशी मुद्रा बाजार के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि जब अमेरिकी विकास में एआई का समर्थन घटेगा, तो डॉलर सबसे अधिक प्रभावित होगा। चार्ट पर तकनीकी स्थिति और प्रमुख स्तर तकनीकी मोर्चे पर डॉलर इंडेक्स स्पॉट वर्तमान में 101.82 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 101.65 के ठीक ऊपर टिका हुआ है, जिससे इसका अल्पकालिक सकारात्मक रुझान बरकरार है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 56 के स्तर पर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि बाजार जरूरत से ज्यादा खरीदारी के क्षेत्र में जाए बिना सकारात्मक गति बनाए हुए है। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार डॉलर इंडेक्स के लिए केंद्रीय पिवट स्तर 101.87 पर स्थित है। निकट अवधि में प्रतिरोध स्तर आर1 101.97 और आर2 102.11 पर देखे जा रहे हैं। यदि डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो पहला प्रमुख समर्थन एस1 101.72 और दूसरा अहम तकनीकी समर्थन एस2 101.62 पर मौजूद है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान डॉलर इंडेक्स का निचला स्तर 95.55 और उच्चतम स्तर 102.95 दर्ज किया गया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक भूमिका अमेरिकी डॉलर विश्व की निर्विवाद आरक्षित मुद्रा बना हुआ है और दुनिया भर के विदेशी मुद्रा कारोबार में इसकी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा लेनदेन होते हैं, जिसमें अमेरिकी डॉलर की केंद्रीय भूमिका रहती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश पाउंड को पीछे छोड़कर डॉलर ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली में यह दबदबा कायम किया था। वर्ष 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के समाप्त होने और गोल्ड स्टैंडर्ड हटने तक यह मुद्रा सोने द्वारा समर्थित थी। अमेरिकी डॉलर के मूल्य को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली संस्था देश का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व है। फेडरल रिजर्व के दो प्रमुख वैधानिक उद्देश्य हैं, जिनमें मूल्य स्थिरता हासिल करना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों का समायोजन है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तब बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर कमजोर पड़ता है। मात्रात्मक ढील बनाम मात्रात्मक सख्ती अत्यधिक आर्थिक संकट के समय फेडरल रिजर्व पारंपरिक ब्याज दर कटौती से आगे बढ़कर गैर-मानक कदम उठाता है। ऐसा ही एक कदम मात्रात्मक ढील यानी क्वांटिटेटिव ईजिंग है, जिसमें केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मुद्रा जारी करता है और वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जब बैंकों ने एक-दूसरे को कर्ज देना बंद कर दिया था, तब केंद्रीय बैंक ने इस नीति का व्यापक उपयोग किया था। इस नीति से आमतौर पर डॉलर की विनिमय दर कमजोर होती है। इसके विपरीत प्रक्रिया को मात्रात्मक सख्ती यानी क्वांटिटेटिव टाइटनिंग कहा जाता है। इसमें फेडरल रिजर्व बॉन्ड की नई खरीदारी बंद कर देता है और अपनी बैलेंस शीट में परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता। इस प्रक्रिया से बाजार से अतिरिक्त नकदी घटती है, जो आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के लिए सकारात्मक और मजबूती प्रदान करने वाली मानी जाती है। वैश्विक मुद्राओं, कमोडिटी और क्रिप्टो बाजारों की चाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7000 के स्तर की ओर मजबूत हुई। चीन के बेहतर तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद और सितंबर के मजबूत गतिविधि आंकड़ों के साथ-साथ रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सहायक गवर्नर क्रिस केंट की सख्त ब्याज दर टिप्पणियों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया। दूसरी ओर, डॉलर-येन जोड़ी 158.00 के आसपास रक्षात्मक रुख बनाए हुए है। अमेरिकी यील्ड में नरमी और बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा की टिप्पणियों के बाद जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को समर्थन दिया है। कमोडिटी बाजार में कच्चा तेल नीचे फिसलने और भू-राजनीतिक तनाव में कमी की उम्मीदों के कारण सोने की कीमतें 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे बनी रहीं। डिजिटल संपत्ति बाजार में बिटकॉइन, इथेरियम और रिपल पिछले सप्ताह की भारी अस्थिरता के बाद संभलते दिखे। बिटकॉइन अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 80,607 डॉलर के स्तर से ऊपर उबरने में सफल रहा, जबकि अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी अपने महत्वपूर्ण तकनीकी समर्थन स्तरों का परीक्षण कर रही हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड में यह हलचल भारतीय आयातकों, विदेश यात्रा करने वालों और शेयर बाजार के निवेशकों को सीधे प्रभावित करती है। • भारत में आयातकों पर प्रभाव: डॉलर इंडेक्स के 101.82 पर टिके रहने से कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों के आयात बिल में अचानक तीव्र उछाल टल गया है। भारतीय तेल कंपनियों और आयातकों को अल्पावधि में विनिमय दर पर स्थिरता का लाभ मिल सकता है। • वैश्विक इक्विटी निवेशकों के लिए: एआई और अमेरिकी टेक शेयरों पर बने दबाव का सीधा असर घरेलू आईटी कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल सकता है। प्रौद्योगिकी म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों को निकट अवधि में सतर्क रुख अपनाना चाहिए। • सोने और कमोडिटी के खरीदार: डॉलर की कमजोरी और 4,200 डॉलर से नीचे स्थिर होते सोने के कारण घरेलू बाजार में कीमती धातुओं के दाम सीमित दायरे में रह सकते हैं। त्योहारी और शादियों के सीजन में खरीदारी की योजना बनाने वालों के लिए यह एक राहत भरा संकेत है। • विदेश अध्ययन और यात्रा खर्च: डॉलर की चाल सपाट रहने से ट्यूशन फीस और यात्रा विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में स्थिरता बनी रहेगी। जो छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों में आगामी सत्र की फीस जमा कर रहे हैं, उनके लिए बजट का अनुमान लगाना आसान रहेगा। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर की शुरुआती बढ़त मिटने के पीछे यूरोप में राजनीतिक तनाव के बावजूद अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र में निवेशकों का बढ़ता संशय मुख्य कारण रहा है। • एआई निवेश चक्र पर चिंताएं: तकनीकी कंपनियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे भारी खर्च के अनुपात में मुनाफे की धीमी गति ने शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ाई। टेक शेयरों में कमजोरी ने सीधे तौर पर अमेरिकी परिसंपत्तियों और डॉलर के प्रति आकर्षण को घटा दिया। • फ्रांस में सामाजिक और वित्तीय संकट: जीवन-यापन की लागत को लेकर फ्रांस में हुए हिंसक प्रदर्शनों ने बॉन्ड यील्ड को 4.85 प्रतिशत तक पहुंचा दिया, जिसका असर लिस्बन और मिलान तक दिखा। सामान्यतः ऐसे संकट से डॉलर मजबूत होता है, लेकिन अमेरिकी घरेलू चिंताओं ने इस बढ़त को निष्प्रभावी कर दिया। • अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी: जब वैश्विक अनिश्चितता का केंद्र स्वयं अमेरिकी एसेट बाजार होता है, तो निवेशक सुरक्षित ट्रेजरी की ओर भागते हैं जिससे यील्ड घटती है। यील्ड घटने से डॉलर का ब्याज दर आधारित लाभ कमजोर पड़ गया। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर की शुरुआती तेजी क्यों थम गई? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश के भविष्य और टेक शेयरों पर बने दबाव के चलते डॉलर ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी। 2. फ्रांस में बॉन्ड यील्ड 4.85 प्रतिशत तक क्यों पहुंच गई? जीवन-यापन की बढ़ती लागत और महंगाई के खिलाफ जनता के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण फ्रांस में वित्तीय और सामाजिक तनाव बढ़ गया है। 3. वर्तमान में डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? डॉलर इंडेक्स 101.82 के स्तर पर कारोबार कर रहा है और यह अपने 20-दिवसीय ईएमए 101.65 के ठीक ऊपर बना हुआ है। 4. वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी कितनी है? अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा है और वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल विदेशी मुद्रा कारोबार में 88 प्रतिशत से अधिक लेनदेन डॉलर में होते हैं। https://trendkia.com/market/ai-sektara-men-anishchitata-se-us-dollar-index-ki-shuruati-barhata-thami-france-men-uthala-puthala-49390 TrendKia — Har trend, sabse pehle.