# ऐतिहासिक जॉब डेटा के बाद अमेरिकी डॉलर में उछाल, जापानी येन 163 के पार लुढ़का

> अमेरिका में बेरोजगारी भत्ते की मांग 1969 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचने से अमेरिकी डॉलर में भारी मजबूती आई है, जिसके चलते जापानी येन कई दशकों के निचले स्तर पर आ गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-07-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/aitihasika-joba-deta-ke-bada-us-dollar-men-uchhala-japanese-yen-163-ke-para-lurhaka-10280 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, जापानी येन, फेडरल रिज़र्व, बैंक ऑफ जापान, फॉरेक्स मार्केट, महंगाई दर, क्रिप्टोकरेंसी, finance

अमेरिकी डॉलर (USD) जापानी येन (JPY) के मुकाबले जबरदस्त मजबूती दिखा रहा है, जिसके चलते USD/JPY करेंसी पेयर कई दशकों के उच्चतम स्तर 164.00 के करीब पहुंच गया है। डॉलर में आई इस हालिया शानदार तेजी की मुख्य वजह अमेरिका के बेहद मजबूत लेबर मार्केट के आंकड़े हैं। इन आंकड़ों ने बाजार के सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है और यह साबित किया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी बेहद मजबूत स्थिति में है। जहां एक तरफ इस तेजी ने डॉलर को ऊपर बनाए रखा है, वहीं लाइव मार्केट डेटा के अनुसार यह पेयर फिलहाल 163.74 पर ट्रेड कर रहा है। यह आंकड़ा शुरुआती 4-घंटे के चार्ट में देखे गए 163.95 के स्तर से थोड़ा नीचे है। फेडरल रिज़र्व और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों के बीच का भारी अंतर लगातार बाजार की दिशा तय कर रहा है, जिससे जापानी येन बेहद कमजोर स्थिति में आ गया है और निवेशक दोनों देशों के बीच बढ़ते यील्ड गैप का फायदा उठा रहे हैं।

## लेबर मार्केट की ऐतिहासिक मजबूती
अमेरिकी डॉलर में आई इस ताजा उछाल का सबसे बड़ा कारण अमेरिका के इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स (Initial Jobless Claims) में आई भारी गिरावट है। 18 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते के लिए बेरोजगारी भत्ते की शुरुआती मांग गिरकर सिर्फ 187K रह गई। यह आंकड़ा 212K के बाजार अनुमान और पिछले हफ्ते के 209K के संशोधित आंकड़े से बहुत कम है। वास्तव में, यह 1969 के बाद से जॉबलेस क्लेम्स का सबसे निचला स्तर है। इस डेटा के ऐतिहासिक महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आधी सदी से भी ज्यादा समय के इस निचले स्तर का मतलब यह है कि कॉरपोरेट सेक्टर में नई भर्तियों की रफ्तार धीमी होने की खबरों के बावजूद, कंपनियों में छंटनी (layoffs) बहुत ही कम हो रही है। नियोक्ता अपने मौजूदा कर्मचारियों को बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं, जिससे लेबर मार्केट में काफी कड़ापन आ गया है। करेंसी मार्केट के नजरिए से, यह मजबूत डेटा इस उम्मीद को और पुख्ता करता है कि फेडरल रिज़र्व लंबे समय तक अपनी ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखेगा। मंदी का खतरा टलने के बाद, फेड के पास दरों में कटौती की कोई जल्दी नहीं है। इसके परिणामस्वरूप, जापानी येन जैसी कम यील्ड वाली करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का आकर्षण काफी बढ़ गया है।

## जापान के सीपीआई (CPI) आंकड़ों पर टिकी नजरें
जैसे-जैसे अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती दिखा रहा है, बाजार के जानकारों का ध्यान अब प्रशांत महासागर के पार जापान पर केंद्रित हो गया है। वहां जून महीने के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े जल्द ही जारी होने वाले हैं। पूर्वानुमानों के अनुसार, जापान की कोर महंगाई दर में मामूली उछाल आ सकता है और यह साल-दर-साल आधार पर 1.6% तक पहुंच सकती है। इस आने वाले आर्थिक आंकड़े को जापानी येन के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, खास तौर पर बैंक ऑफ जापान (BoJ) के उस इतिहास को देखते हुए जिसमें वे अपनी नीतियों में बदलाव करने से कतराते रहे हैं। अगर महंगाई दर उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो यह बाजार की इस उम्मीद को बढ़ा सकता है कि बैंक ऑफ जापान अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। इस तरह का सख्त रुख जापानी येन को बहुत जरूरी सपोर्ट दे सकता है और इसमें एक मजबूत रिवर्सल देखने को मिल सकता है। दूसरी तरफ, अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं, तो यह BoJ के सतर्क रवैये को सही ठहराएगा और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को काफी कम कर देगा। इस कमजोर स्थिति में, USD/JPY पेयर को जापानी नीतियों से कोई खास रुकावट नहीं मिलेगी, और यह लंबे समय तक 164.00 के स्तर के करीब बना रह सकता है।

## टेक्निकल एनालिसिस: तेजी, लेकिन ओवरबॉट स्थिति
टेक्निकल नजरिए से देखा जाए तो, USD/JPY पेयर में साफ तौर पर शॉर्ट-टर्म तेजी का रुझान बना हुआ है, हालांकि ट्रेडर्स के लिए ओवरएक्सटेंशन के संकेत भी स्पष्ट रूप से चमक रहे हैं। 4-घंटे के चार्ट की शुरुआती समीक्षा में यह देखा गया कि यह पेयर 163.97 के इमीडिएट हॉरिजॉन्टल रेजिस्टेंस लेवल पर दबाव बना रहा है। साथ ही, यह अपने 20-पीरियड सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 162.97 और 100-पीरियड SMA 162.28 से काफी ऊपर बना हुआ है। हालांकि, मोमेंटम इंडिकेटर्स अत्यधिक ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं, जो आमतौर पर एक कंसोलिडेशन फेज से पहले देखे जाते हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 80 के निशान के आसपास मंडरा रहा था, जो कि एक भारी ओवरबॉट स्थिति का संकेत है। मौजूदा लाइव मार्केट डेटा इस खिंचाव की पुष्टि करता है, जहां RSI 72 पर है (जो अभी भी ओवरबॉट जोन में है), और MACD रीडिंग 0.55 के सिग्नल के मुकाबले 0.60 पर बुलिश बनी हुई है।

अगर तेजी का यह स्ट्रक्चर बना रहता है, तो 163.97 के रेजिस्टेंस लेवल को पार करने पर पेयर के लिए आगे की बढ़त का रास्ता खुल जाएगा, जो लाइव रेजिस्टेंस लेवल R1 (164.15) और R2 (164.57) को टारगेट कर सकता है। लेकिन, ज्यादा खिंचाव वाले मोमेंटम का मतलब है कि किसी भी ऊपरी चाल में एक अचानक गिरावट (pullback) का खतरा बना रहेगा। नीचे की तरफ, शुरुआती सपोर्ट 163.65 पर उभरता है। अगर बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो 163.49 और 163.29 पर मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। एक गहरा करेक्शन इस बुलिश स्ट्रक्चर को 162.97 और 162.28 के मूविंग एवरेज के करीब टेस्ट करेगा, जो कि 163.57 के लाइव डेटा पिवट पॉइंट और 0.69 के डेली वोलाटिलिटी ATR के साथ मेल खाता है।

## वैश्विक करेंसियों पर भारी पड़ा डॉलर
मजबूत होते अमेरिकी डॉलर का असर केवल जापानी येन पर ही नहीं पड़ रहा है; यूरोप की प्रमुख करेंसी भी इसके भारी दबाव में टूट रही हैं। अमेरिकी ट्रेडिंग सेशन के दौरान गुरुवार को GBP/USD पेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 1.3300 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गया। ब्रिटिश पाउंड को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है: एक तरफ सीधे तौर पर डॉलर की मजबूती का दबाव है, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बन गया है। ऐसे माहौल में निवेशक आम तौर पर सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर भागते हैं।

इसी तरह, यूरो के चार्ट पर भी भारी गिरावट का दबाव देखा जा रहा है। गुरुवार के सेशन के दूसरे हिस्से में EUR/USD पेयर भारी बिकवाली के दबाव में रहा और 1.1370 के स्तर से नीचे गिरकर अपने तीन सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट की एक बड़ी वजह यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) का वह सतर्क बयान है जिसमें निकट भविष्य में पॉलिसी सख्त करने की कोई स्पष्ट बात नहीं कही गई है। फेडरल रिज़र्व के लंबे समय तक दरें ऊंची रखने के रुख के विपरीत, ECB की इस हिचकिचाहट ने निवेशकों को डॉलर की तरफ मोड़ा है, जिससे यूरोपीय करेंसी में बड़े पैमाने पर गिरावट आई है।

## कमोडिटीज और क्रिप्टो: जियोपॉलिटिक्स और इंस्टीट्यूशनल इनफ्लो
कमोडिटी सेक्टर में, व्यापक आर्थिक माहौल और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण काफी अलग-अलग परिणाम सामने आ रहे हैं। गोल्ड की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है और यह अमेरिकी सेशन की शुरुआत में $4,100 के स्तर से काफी नीचे ट्रेड कर रहा था। बिना यील्ड वाले एसेट के रूप में, कीमती धातुएं बढ़ती ब्याज दरों के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं, और अमेरिका के शानदार जॉब डेटा के कारण फेडरल रिज़र्व द्वारा दरें बढ़ाने की उम्मीदों ने गोल्ड की मांग पर भारी असर डाला है। दूसरी ओर, एनर्जी मार्केट में भारी उछाल देखा जा रहा है। अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमतें $90 प्रति बैरल के स्तर को पार करते हुए छह सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। यह तेजी सीधे तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से जुड़ी है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें एक साथ वैश्विक महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जो बदले में फेड की ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों को और हवा दे रही हैं।

इस बीच, क्रिप्टोकरेंसी मार्केट की अपनी अलग ही चाल देखने को मिल रही है, जो आम बाजार के रुझानों से मेल नहीं खाती। बिटकॉइन (BTC) में करेक्शन का दौर जारी है, और यह बुधवार की मामूली गिरावट के बाद $65,800 के स्तर से नीचे ट्रेड कर रहा है। हालांकि कीमतों में कमजोरी और मजबूत डॉलर के दबाव के बावजूद, बड़े संस्थानों की दिलचस्पी इसमें अभी भी बरकरार है। अमेरिका में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में बुधवार को भी भारी निवेश आया। फंड्स में बढ़त का यह लगातार सातवां दिन है, जो इस बात का संकेत है कि बड़े वित्तीय खिलाड़ी डॉलर की मजबूती की परवाह किए बिना मौजूदा गिरावट को एक बेहतरीन खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

## इसका आप पर असर
- **फॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए:** फेडरल रिज़र्व के सख्त रुख और मजबूत डॉलर के कारण USD/JPY पेयर में लगातार तेजी का रुझान बना हुआ है, जिससे शॉर्ट-सेलर्स को सतर्क रहने की जरूरत है।
- **क्रिप्टो और कमोडिटी निवेशकों के लिए:** मजबूत डॉलर सोने की कीमतों पर भारी दबाव डाल रहा है, जबकि बिटकॉइन में गिरावट के बावजूद संस्थागत निवेशकों की भारी खरीदारी एक लंबी अवधि का सकारात्मक संकेत है।

## सवाल-जवाब

### 1. USD/JPY करेंसी पेयर में तेजी का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिका में इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स 1969 के बाद सबसे निचले स्तर (187K) पर आ गए हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखे जाने की उम्मीद मजबूत हुई है।

### 2. जापान के सीपीआई डेटा का येन पर क्या असर हो सकता है?
अगर जापान की महंगाई दर उम्मीद (1.6%) से ज्यादा आती है, तो बैंक ऑफ जापान ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिससे जापानी येन को सपोर्ट मिलेगा।

### 3. गोल्ड की कीमतों में गिरावट क्यों आ रही है?
मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिज़र्व के सख्त रुख के कारण बिना यील्ड वाले एसेट (गोल्ड) की मांग घट रही है।

### 4. बिटकॉइन में गिरावट के बावजूद क्या सकारात्मक रुख है?
कीमतें गिरने के बावजूद अमेरिका में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ (ETFs) में लगातार सातवें दिन भारी निवेश दर्ज किया गया है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._