# अक्टूबर ब्याज दरों पर फेडरल रिजर्व के रुख से फिसला डॉलर इंडेक्स, विदेशी मुद्रा बाजार में लौटी हलचल

> बैंकॉक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख की अनिश्चित टिप्पणियों के बाद डॉलर इंडेक्स 101.75 के स्तर से नीचे लुढ़क गया, जिससे आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाएं काफी घट गई हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/aktubara-byaja-daron-para-federal-reserve-ke-rukha-se-phisala-dollar-index-videshi-mudra-bajara-men-lauti-halachala-48376 · **Language:** Hindi
**Tags:** डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, विदेशी मुद्रा, मुद्रास्फीति, सोना, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव गहरा गया है, क्योंकि केंद्रीय बैंक ने आने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा को लेकर किसी भी तरह के पूर्व अनुमान लगाने से साफ मना कर दिया है। बैंकॉक में आयोजित एक वित्तीय परिचर्चा के दौरान फेडरल रिजर्व के प्रमुख वॉर्श ने यह स्पष्ट किया कि वे अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों के संबंध में फैसला ठीक उसी समय लेंगे जब वे तिथियां नजदीक आएंगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अब निर्णयों का पहले से पूर्वावलोकन पेश करने की परंपरा से दूरी बना रहा है। इस बयान के सार्वजनिक होते ही वित्तीय बाजारों में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली और डॉलर इंडेक्स अक्टूबर 1 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक टूट गया।

 

## अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावनाओं में भारी गिरावट

फेड प्रमुख के इस बयान से पहले निवेशक अक्टूबर महीने की समीक्षा बैठक को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे थे। गुरुवार तक बाजार में अक्टूबर 27-28 की बैठक में दरें बढ़ाए जाने के पक्ष में करीब 28 प्रतिशत दांव लगे हुए थे। हालांकि, जैसे ही बैंकॉक से आधिकारिक बयान सामने आया, यह संभावना अचानक घटकर लगभग 16 प्रतिशत के आसपास सिमट गई। उल्लेखनीय है कि हाल ही में बुधवार को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों से ठीक पहले भी बाजार में अक्टूबर की दर वृद्धि की संभावना इसी स्तर पर आंकी जा रही थी। सीपीआई रिपोर्ट आने के बाद केंद्रीय बैंक के अलावा लगभग हर निवेशक और विश्लेषक ने यह मान लिया था कि सख्ती जारी रहेगी, लेकिन फेड के ताजा बयान ने उन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है।

अब शनिवार से फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की अनिवार्य मौन अवधि यानी ब्लैकआउट पीरियड शुरू हो रहा है, जो अक्टूबर 27-28 की नीतिगत बैठक समाप्त होने तक जारी रहेगा। इस अवधि में केंद्रीय बैंक का कोई भी नीति निर्माता सार्वजनिक मंच पर भाषण नहीं देगा और न ही नीतिगत मुद्दों पर टिप्पणी करेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि आगामी बैठक से पहले बाजार की उम्मीदों को तय करने का पूरा जिम्मा अब केवल आर्थिक आंकड़ों पर ही निर्भर रहेगा। जहां अक्टूबर के लिए दर वृद्धि की संभावना गिरकर 16 प्रतिशत रह गई है, वहीं दिसंबर बैठक में दर बढ़ाए जाने की संभावना अभी भी करीब 90 प्रतिशत के आसपास मजबूती से टिकी हुई है। इस बीच निवेशक शुक्रवार को 18:00 जीएमटी पर जारी होने वाले अमेरिकी मासिक बजट विवरण पर भी पैनी नजर बनाए हुए हैं।

 

## तकनीकी स्तरों पर डॉलर इंडेक्स का प्रदर्शन

डॉलर इंडेक्स शुक्रवार को कारोबार के दौरान 101.75 के उस निचले दायरे को तोड़ते हुए नीचे फिसल गया, जिसे उसने 5 अक्टूबर से लेकर बुधवार के उछाल तक सुरक्षित रखा था। हालांकि सत्र के दौरान इसमें मामूली सुधार दिखा और यह दोबारा उस दायरे की सीमा के भीतर लौटने की कोशिश करता नजर आया। ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 101.79 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 102.00 के बंद भाव की तुलना में 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इंडेक्स 95.55 से 102.95 के दायरे में रहा है और वर्तमान में यह अपने 20 दिनों के औसत वॉल्यूम पर बना हुआ है।

तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स सितंबर की शुरुआत के बाद से अपनी पहली साप्ताहिक गिरावट दर्ज करने की कगार पर पहुंच गया है। इसका 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए 100.88 के आसपास स्थित है, जो मौजूदा स्तर से लगभग एक अंक नीचे है। 20-दिवसीय ईएमए 101.63 पर और 200-दिवसीय ईएमए 99.69 पर है। हालांकि लंबी अवधि के लिहाज से यह चार्ट पर गोल्डन क्रॉस यानी 50 ईएमए का 200 ईएमए से ऊपर रहने के साथ अपट्रेंड में दिखता है, लेकिन अल्पावधि गति कमजोर हुई है। 14-दिवसीय आरएसआई 56 पर स्थित है, जबकि एमएसीडी 0.55 पर है जो अपने 0.59 के सिग्नल से नीचे होने के कारण मंदी का संकेत दे रहा है। बोलिंजर बैंड 100.50 से 102.92 के बीच फैला है और एडीएक्स 44 के स्तर पर एक सक्रिय ट्रेंड का समर्थन करता है। दिन के अहम स्तरों में पिवट प्वाइंट 101.82, पहला सपोर्ट 101.55, दूसरा सपोर्ट 101.31 और रेजिस्टेंस 102.06 तथा 102.33 पर बने हुए हैं।

 

## वैश्विक वित्तीय तंत्र में अमेरिकी डॉलर की भूमिका

अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य संप्रभु देशों में समानांतर रूप से इस्तेमाल होने वाली वास्तविक मुद्रा भी है। यह दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा मानी जाती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा कारोबार के कुल टर्नओवर में इसकी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से भी अधिक रही है, जिसका औसत दैनिक लेनदेन 6.6 ट्रिलियन डॉलर बैठता है। दूसरे विश्व युद्ध के समापन के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेकर दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का रुतबा हासिल किया था। अपने लंबे इतिहास के दौरान डॉलर लंबे समय तक सोने के भंडार से समर्थित रहा, लेकिन 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ गोल्ड स्टैंडर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था।

अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व द्वारा संचालित मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के पास दो प्रमुख संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं, जिनमें पहला लक्ष्य कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना है, और दूसरा लक्ष्य देश में अधिकतम रोजगार के अवसर पैदा करना है। इन दोनों ही लक्ष्यों को साधने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में समायोजन करना होता है। जब उपभोक्ता कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और महंगाई दर फेड के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य को पार कर जाती है, तब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। दरों में यह बढ़ोतरी पूंजी को आकर्षित कर डॉलर की कीमत को मजबूती प्रदान करती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या देश में बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ने लगती है, तब अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, जिसका सीधा नकारात्मक असर डॉलर पर पड़ता है।

 

## क्वांटिटेटिव ईजिंग और टाइटनिंग का मुद्रा पर असर

गंभीर आर्थिक संकट या असाधारण मंदी के दौर में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त मुद्रा छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है। यह एक गैर-पारंपरिक नीतिगत उपाय है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब बैंकिंग प्रणाली में ऋण का प्रवाह सूख जाता है और वित्तीय संस्थान काउंटरपार्टी डिफॉल्ट के डर से आपस में कर्ज बांटना बंद कर देते हैं। जब केवल ब्याज दरों को घटाने से संकट दूर नहीं होता, तब केंद्रीय बैंक अंतिम उपाय के रूप में इसे लागू करता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय फैले लिक्विडिटी संकट से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का इस्तेमाल किया था। इसके तहत केंद्रीय बैंक अतिरिक्त डॉलर छापकर वाणिज्यिक वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे व्यवस्था में नकदी बढ़ती है। इस प्रक्रिया का सामान्य परिणाम यह होता है कि मुद्रा बाजार में डॉलर कमजोर हो जाता है।

दूसरी तरफ क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी इसकी ठीक विपरीत प्रक्रिया है। इसके तहत केंद्रीय बैंक बाजार से वित्तीय संस्थानों के बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है और अपने पोर्टफोलियो में परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन को दोबारा नई सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश नहीं करता। इस प्रक्रिया से बाजार में मौजूद अतिरिक्त तरलता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जो आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के लिए सकारात्मक और मजबूती लाने वाली मानी जाती है।

 

## अन्य मुद्राओं, सोने और डिजिटल संपत्तियों पर प्रभाव

डॉलर में आई इस अचानक कमजोरी ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं और कमोडिटी बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में अच्छी रिकवरी देखने को मिली और यह उछलकर 0.6950 के स्तर की तरफ बढ़ गया। वॉर्श की टिप्पणियों ने अमेरिकी मुद्रा पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया, जिसका सीधा लाभ ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मिला। हालांकि फेड प्रमुख ने दोहराया कि वे कीमतों में स्थिरता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन भविष्य की दर वृद्धि पर कोई ठोस संकेत न देने से निवेशकों ने डॉलर में मुनाफावसूली की।

इसी तरह अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) पर भी नया बिकवाली दबाव बना और एशियाई सत्र में यह जोड़ी 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे खिसक गई। सख्त रुख की संभावनाओं पर ब्रेक लगने से डॉलर को झटका लगा। वहीं कमोडिटी बाजार में सोने के भाव में उतार-चढ़ाव बना रहा और शुक्रवार को यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे सीमित दायरे में घटता-बढ़ता रहा। डॉलर में आई गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली सुधार के बीच सोने के निवेशकों ने सतर्क रुख बनाए रखा। दूसरी तरफ क्रिप्टो बाजार पर अक्टूबर के महीने में दबाव बना रहा है, जहां प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन इस हफ्ते की शुरुआत में 80,000 डॉलर से नीचे खिसक गई थी, हालांकि शुक्रवार को यह सुधरकर 82,000 डॉलर के करीब पहुंची है। कमजोर पड़ती मांग और व्यापक आर्थिक अनिश्चितताएं फिलहाल जोखिम भरी संपत्तियों के सुधार को सीमित कर रही हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी और ब्याज दरों पर छाई अनिश्चितता का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों, विदेशी व्यापार और कमोडिटी की कीमतों पर साफ देखने को मिलेगा।

- **भारतीय बाजार में:** डॉलर में नरमी आने से भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ी मजबूती मिल सकती है। इससे कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं के बिल में थोड़ी राहत मिलेगी जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव घटेगा।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी ब्याज दरों में ठहराव की उम्मीदों से वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों और इक्विटी में अपनी पूंजी बनाए रख सकते हैं। जोखिम भरी संपत्तियों से तुरंत बिकवाली का खतरा टलने से शेयर बाजारों में स्थिरता देखने को मिल सकती है।
- **सोना और कमोडिटी खरीदारों के लिए:** डॉलर इंडेक्स में गिरावट आमतौर पर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को मजबूती प्रदान करती है। निवेशकों को आने वाले दिनों में सराफा बाजार में दामों में उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता के संकेत मिल सकते हैं।
- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** जब तक अमेरिकी दर नीति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती तब तक डिजिटल संपत्तियों पर दबाव रह सकता है। बिटकॉइन जैसे प्रमुख टोकनों में तेज उछाल आने के बजाय सीमित दायरे में ही उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है।

## ऐसा क्यों हुआ
डॉलर इंडेक्स में गिरावट और ब्याज दर की उम्मीदों में आई कमी फेडरल रिजर्व प्रमुख के तटस्थ रुख और अनिश्चित मौद्रिक नीति संकेतों का सीधा परिणाम है।

- **फेड प्रमुख का अनिर्णीत बयान:** बैंकॉक में फेड प्रमुख वॉर्श ने अक्टूबर या दिसंबर की बैठकों के बारे में पहले से कोई भी रुख तय करने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक नीतिगत फैसलों का पूर्वावलोकन देने की नीति से पीछे हट रहा है।
- **दर वृद्धि की संभावनाओं में गिरावट:** इस बयान से ठीक पहले बाजार में अक्टूबर बैठक में दर बढ़ाए जाने की संभावना 28 प्रतिशत तक आंकी जा रही थी। केंद्रीय बैंक द्वारा कोई स्पष्ट आश्वासन न मिलने से यह संभावना घटकर 16 प्रतिशत रह गई जिससे डॉलर की मांग कम हो गई।
- **आने वाला ब्लैकआउट पीरियड:** शनिवार से फेडरल रिजर्व के अधिकारी मौन अवधि में जा रहे हैं जिसके कारण नीतिगत स्तर पर कोई नई जानकारी नहीं मिलेगी। इस संचार शून्यता के चलते निवेशकों ने पहले से लगाई गई आक्रामक पोजीशन में मुनाफावसूली की है।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉलर इंडेक्स में हालिया गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
फेडरल रिजर्व के प्रमुख वॉर्श द्वारा अक्टूबर बैठक में दर वृद्धि पर कोई पूर्व निर्णय लेने से मना करने के बाद डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई है।

### 2. अक्टूबर में अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ने की संभावना अब कितनी रह गई है?
फेड प्रमुख के बयान के बाद अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना 28 प्रतिशत से गिरकर लगभग 16 प्रतिशत रह गई है।

### 3. फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की मौन अवधि कब से शुरू हो रही है?
अधिकारियों की मौन अवधि शनिवार से शुरू होकर अक्टूबर 27-28 की नीतिगत बैठक तक चलेगी, जिस दौरान कोई भी अधिकारी भाषण नहीं देगा।

### 4. डॉलर में गिरावट का अन्य मुद्राओं और संपत्तियों पर क्या असर हुआ?
डॉलर में कमजोरी से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में तेजी आई, जबकि सोना 4,200 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करता दिखा।

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