अक्टूबर में अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेज बढ़त, नए ऑर्डर्स और उत्पादन ने पकड़ी रफ्तार अक्टूबर के दौरान अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 55.5 पर पहुंच गया है, जिसने बाजार के 54.6 के अनुमान को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, लागत के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण कारोबारी धारणा में लगातार तीसरे महीने गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र ने अक्टूबर के दौरान अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी विस्तार गति को तेज किया है। इंस्टिट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई बढ़कर 55.5 के स्तर पर दर्ज किया गया। यह आंकड़ा सितंबर के 54.5 के मुकाबले बेहतर है और बाजार की 54.6 की उम्मीदों से भी अधिक रहा है। आर्थिक गतिविधियों के स्तर पर यह उछाल दर्शाता है कि कारखानों में मांग और उत्पादन का पहिया लगातार गति पकड़ रहा है, हालांकि इसके अंदरूनी घटकों में मिले-जुले संकेत भी देखने को मिले हैं। उत्पादन और नए ऑर्डर्स में बढ़त, लेकिन रोजगार की रफ्तार पड़ी धीमी मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स के बुनियादी घटकों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पांच प्रमुख सब-इंडेक्स में से चार में पिछले महीने की तुलना में तेज बढ़त दर्ज की गई। नए ऑर्डर्स, उत्पादन, सप्लायर डिलीवरी और इन्वेंट्रीज ने उद्योग की गतिविधि को मजबूती प्रदान की। हालांकि, रोजगार के मोर्चे पर हल्की नरमी दर्ज की गई है। रोजगार इंडेक्स गिरकर 52.4 पर आ गया, जिसमें पिछले महीने की तुलना में 0.3 प्रतिशत अंक की गिरावट देखी गई। दूसरी तरफ, महंगाई के दबाव को मापने वाला प्राइसेज पेड इंडेक्स 77.9 से घटकर 75.2 पर आ गया, जिससे इनपुट लागत में आंशिक राहत के संकेत मिलते हैं। सर्वेक्षण समिति की प्रमुख सुसान स्पेंस ने आंकड़ों का मूल्यांकन करते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिकी विनिर्माण लगातार विस्तार के दायरे में बना हुआ है। उन्होंने बताया कि समग्र पीएमआई को निर्धारित करने वाले पांच प्रमुख सब-इंडेक्स में से चार घटकों ने पिछले महीने की तुलना में तीव्र विस्तार दर्ज किया, जबकि रोजगार वृद्धि की दर में 0.3 प्रतिशत अंक की सुस्ती देखी गई। इससे पता चलता है कि कंपनियां अपने उत्पादन को तो बनाए हुए हैं, लेकिन नई नियुक्तियों को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। कारोबारी धारणा में गिरावट, टैरिफ और युद्ध को लेकर बढ़ी चिंता सकारात्मक उत्पादन आंकड़ों के बावजूद कंपनियों के भीतर समग्र कारोबारी धारणा में लगातार तीसरे महीने गिरावट दर्ज की गई। सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त टिप्पणियों में केवल 34 प्रतिशत प्रतिक्रियाएं ही सकारात्मक थीं, जबकि 66 प्रतिशत प्रतिक्रियाएं नकारात्मक रहीं। यह सकारात्मक और नकारात्मक धारणा के बीच 1 और 2 का स्पष्ट अनुपात दिखाता है। कारोबारी जगत की यह निराशा बताती है कि जमीनी स्तर पर संचालन से जुड़ी चुनौतियां अभी भी भारी बनी हुई हैं। सुसान स्पेंस ने बताया कि नकारात्मक टिप्पणियों में कीमतों की अस्थिरता का जिक्र 62 प्रतिशत प्रतिक्रियाओं में सामने आया। इसके अलावा 41 प्रतिशत कंपनियों ने ऑर्डर मिलने और डिलीवरी के बीच लंबे समय यानी लीड टाइम को समस्या बताया। 25 प्रतिशत ने टैरिफ और 21 प्रतिशत ने ईरान युद्ध को प्रमुख चिंता के रूप में रेखांकित किया। अधिकांश प्रतिभागियों ने अपनी टिप्पणियों में एक से अधिक समस्याओं का एक साथ उल्लेख किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और लागत पर कई तरफा दबाव बना हुआ है। मुद्रा बाजार की चाल और डॉलर पर दबाव पीएमआई के मजबूत आंकड़ों के बावजूद वित्तीय बाजारों में कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं देखी गई। रिपोर्ट सामने आने के समय अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी ने सोमवार को एशियाई सत्र की अपनी गिरावट को पीछे छोड़ दिया। ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत को लेकर बनी उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूती दी, जिसने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाए रखा और जोखिम के प्रति संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक आरबीए के आगामी नीतिगत फैसले से पहले कारोबारी नए दांव लगाने से बचते दिखे, जिससे कीमतें पिछले गुरुवार को बने एक महीने के उच्चतम स्तर से नीचे ही बनी रहीं। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) जोड़ी ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में सकारात्मक बढ़त बनाई। यह जोड़ी बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले के बाद शुक्रवार को 157.00 से नीचे के निचले स्तर से उबरते हुए एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के करीब पहुंच गई। जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की नई चेतावनियों के बावजूद इस जोड़ी में मजबूती का रुझान देखने को मिला। सोने में सुधार और आर्थिक वृद्धि के बीच वॉल स्ट्रीट का रुख अमेरिकी कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में भी सुधार देखा गया। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की सकारात्मक सुर्खियों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने सोने को संभलने में मदद की। शुक्रवार को सोना 3,870 डॉलर के नए वार्षिक निचले स्तर तक फिसल गया था और अक्टूबर के महीने में इसमें 6.87 प्रतिशत की कुल गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, बुनियादी आर्थिक परिस्थितियों के कारण इस ताजा उछाल में स्थिरता को लेकर बाजार में अब भी संदेह बना हुआ है। व्यापक आर्थिक मोर्चे पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था 3.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई और नैस्डैक ने मार्च 2025 के बाद का अपना सबसे खराब मासिक प्रदर्शन दर्ज करते हुए अक्टूबर का समापन किया। बाजार अब केवल इसलिए पूंजीगत व्यय की सराहना नहीं कर रहा है कि वह विकास को समर्थन दे रहा है। निवेशक अब बारीकी से यह परख रहे हैं कि कंपनियों द्वारा किया जा रहा पूंजीगत खर्च वास्तविक नकदी प्रवाह उत्पन्न कर सकता है या नहीं और पूंजी की लागत से अधिक रिटर्न देने में सक्षम है या नहीं। इसका आप पर असर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग में मजबूती वैश्विक व्यापार, मुद्रा विनिमय और निवेश रणनीतियों पर सीधा असर डालती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: मजबूत मैन्युफैक्चरिंग आंकड़े आर्थिक मंदी की आशंकाओं को कम करते हैं। हालांकि, कंपनियों के मुनाफे और नकदी प्रवाह पर निवेशकों की बढ़ती जांच से शेयर बाजारों में सतर्कता बनी रह सकती है। • मुद्रा और कमोडिटी बाजार पर: डॉलर इंडेक्स में 0.35 प्रतिशत की नरमी और सोने में 3,870 डॉलर के निचले स्तर से सुधार देखा गया है। कच्चे तेल की गिरती कीमतें और ईरान से जुड़ी बातचीत आयात लागत और खुदरा ईंधन कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। • विनिर्माण और आयातकों के लिए: इनपुट लागत के प्राइसेज पेड इंडेक्स में 75.2 तक की गिरावट आई है। यह संकेत देता है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से आंशिक राहत मिल सकती है, हालांकि डिलीवरी में लगने वाला समय अभी भी चिंता का विषय है। • वैश्विक नीतिगत फैसलों पर: ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे केंद्रीय बैंकों के निर्णयों से विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। आयात और निर्यात से जुड़े कारोबारी 158.00 के करीब पहुंचे येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल पर नजर बनाए रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी विनिर्माण सूचकांक में यह उछाल औद्योगिक उत्पादन और नए ऑर्डर्स में आई मजबूती के कारण हुआ, जबकि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नियमों ने कारोबारी धारणा को प्रभावित किया। • उत्पादन और मांग में इजाफा: कारखानों को नए ऑर्डर्स मिलने की गति तेज हुई और विनिर्माण गतिविधि में विस्तार देखा गया। पांच में से चार प्रमुख उप-सूचकांकों में तेज वृद्धि ने समग्र इंडेक्स को 55.5 तक पहुंचाया। • इनपुट लागत में आंशिक कमी: प्राइसेज पेड इंडेक्स 77.9 से घटकर 75.2 पर आने से लागत दबाव में मामूली नरमी आई। इससे उत्पादकों को अपने संचालन को गति देने में मदद मिली। • धारणा पर भू-राजनीतिक दबाव: सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद 66 प्रतिशत टिप्पणियां नकारात्मक रहीं। 62 प्रतिशत ने मूल्य अस्थिरता, 41 प्रतिशत ने डिलीवरी में देरी, 25 प्रतिशत ने टैरिफ और 21 प्रतिशत ने ईरान युद्ध को परिचालन चुनौतियों के रूप में दर्ज कराया। सवाल-जवाब 1. अक्टूबर में अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई का क्या स्तर रहा? अक्टूबर में यह इंडेक्स बढ़कर 55.5 पर पहुंच गया, जो सितंबर के 54.5 और बाजार के 54.6 के अनुमान से बेहतर रहा। 2. रोजगार और मुद्रास्फीति से जुड़े उप-सूचकांकों में क्या बदलाव दर्ज हुआ? रोजगार इंडेक्स घटकर 52.4 पर आ गया, जबकि कीमतों से जुड़ा प्राइसेज पेड इंडेक्स 77.9 से कम होकर 75.2 दर्ज किया गया। 3. कारोबारी धारणा में गिरावट की मुख्य वजहें क्या थीं? नकारात्मक टिप्पणियों में 62 प्रतिशत ने कीमतों की अस्थिरता, 41 प्रतिशत ने डिलीवरी में लंबा समय, 25 प्रतिशत ने टैरिफ और 21 प्रतिशत ने ईरान युद्ध को प्रमुख कारण बताया। 4. इस रिपोर्ट के समय अमेरिकी डॉलर और सोने का क्या रुख था? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.35 प्रतिशत गिरकर 101.60 पर आ गया, जबकि सोने ने 3,870 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर से उबरना शुरू किया। 5. अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जीडीपी वृद्धि दर कितनी दर्ज की गई? अर्थव्यवस्था में 3.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई, हालांकि नैस्डैक ने मार्च 2025 के बाद का सबसे खराब महीना देखा। https://trendkia.com/market/aktubara-men-us-manufacturing-pmi-men-teja-barhata-nae-rdarsa-aura-utpadana-ne-pakari-raphtara-55233 TrendKia — Har trend, sabse pehle.