अमेरिका-ईरान टकराव फिर भड़का, कच्चा तेल 74 डॉलर के पार, होर्मुज पर मंडराया संकट सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच नई मिसाइल कार्रवाई के बाद WTI कच्चा तेल सोमवार को एशियाई कारोबार में करीब 74.20 डॉलर पर पहुंच गया, और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर खतरे की आशंका फिर गहरा गई। हफ्ते की शुरुआत में कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल देखने को मिला है। लगातार दो दिन की गिरावट के बाद WTI यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल सोमवार को एशियाई कारोबार के दौरान करीब 74.20 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इस बढ़त की सीधी वजह सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच हुई नई मिसाइल कार्रवाई है, जिसने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे अहम रास्तों में से एक माना जाता है, और यहीं से कोई भी अड़चन तेल की कीमतों को तुरंत हिला देती है। सप्ताहांत के हमलों ने कीमतें चढ़ाईं तेल में आई इस ताजा तेजी की तात्कालिक वजह सैन्य टकराव का दोबारा भड़कना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने रविवार शाम कुछ और निशाना साधकर हमले किए, जिनका मकसद जलमार्ग से गुजर रहे आम व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना बताया गया। तीन रातों के दौरान अमेरिकी बलों ने ईरान के 300 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया, जिनमें अकेले शनिवार को 140 ठिकाने शामिल थे। इस बीच वॉशिंगटन और तेहरान की ओर से यह बात परस्पर विरोधी रूप से कही गई कि होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री आवाजाही के लिए खुला है या नहीं। इसी अनिश्चितता ने बाजार में घबराहट को और बढ़ा दिया। पिछले हफ्ते की शांति से तीखा पलटाव टकराव के इस नए दौर ने बीते हफ्ते तेल बाजार में दर्ज हुए नुकसान का एक हिस्सा उलट दिया है। पिछले हफ्ते कीमतों में गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम शांति समझौते की वजह से आई थी। उस समझौते से शुरू में यह उम्मीद बंधी थी कि मध्य-पूर्व से ऊर्जा की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे दाम नीचे आए थे। लेकिन अचानक सैन्य तनाव भड़कने के साथ ही वह उम्मीद कमजोर पड़ गई और कीमतें फिर ऊपर की ओर लौट आईं। बातचीत ठप, तेहरान अपने रुख पर अड़ा इस अचानक बढ़े सैन्य तनाव ने आगे की कूटनीति की गुंजाइश को भी बुरी तरह कमजोर कर दिया है। तेहरान अब अपने रुख पर अड़ गया है और उसने भविष्य की बातचीत को तब तक के लिए रोक दिया है, जब तक वॉशिंगटन जहाजों की आवाजाही और ईरानी तेल निर्यात को सामान्य बनाने से जुड़ी अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह नहीं निभाता। यानी जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, कोई नई बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। WTI कच्चा तेल आखिर है क्या WTI कच्चा तेल दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकने वाला एक प्रकार का क्रूड ऑयल है। WTI का पूरा नाम वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है और यह दुनिया के तीन प्रमुख किस्मों में से एक है, बाकी दो ब्रेंट और दुबई क्रूड हैं। इसे अक्सर 'लाइट' और 'स्वीट' भी कहा जाता है, क्योंकि इसका घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है और इसमें सल्फर की मात्रा भी बेहद कम रहती है। यही वजह है कि इसे उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसकी रिफाइनिंग आसानी से हो जाती है। यह अमेरिका में निकाला जाता है और कुशिंग हब के जरिए इसकी आपूर्ति होती है, जिसे 'दुनिया का पाइपलाइन चौराहा' कहा जाता है। तेल बाजार के लिए यह एक बेंचमार्क है और मीडिया में इसकी कीमत का जिक्र बार-बार होता रहता है। WTI की कीमत किन बातों से तय होती है बाकी सभी संपत्तियों की तरह WTI तेल की कीमत का सबसे बड़ा आधार मांग और आपूर्ति है। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूत ग्रोथ मांग को बढ़ाती है, जबकि कमजोर ग्रोथ इसका उलटा असर डालती है। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति में बाधा डालकर दाम पर सीधा असर डाल सकते हैं, और मौजूदा हालात इसकी साफ मिसाल हैं। तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक के फैसले भी कीमत तय करने वाला एक अहम कारण होते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की कीमत भी WTI क्रूड को प्रभावित करती है, क्योंकि तेल का ज्यादातर कारोबार डॉलर में ही होता है। ऐसे में कमजोर डॉलर तेल को सस्ता बना देता है और मजबूत डॉलर इसे महंगा। भंडार के आंकड़े क्यों मायने रखते हैं अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और ऊर्जा सूचना एजेंसी (EIA) की ओर से हर हफ्ते जारी होने वाली तेल भंडार रिपोर्ट WTI के दाम पर असर डालती है। भंडार में बदलाव मांग और आपूर्ति के उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं। अगर आंकड़े भंडार में गिरावट दिखाते हैं, तो यह मांग बढ़ने का संकेत होता है और इससे तेल की कीमत ऊपर चढ़ती है। वहीं ऊंचा भंडार आपूर्ति बढ़ने की ओर इशारा करता है, जिससे दाम नीचे आते हैं। API की रिपोर्ट हर मंगलवार को आती है और EIA की उसके अगले दिन। दोनों के नतीजे आमतौर पर एक जैसे होते हैं और 75 प्रतिशत मौकों पर आपस में 1 प्रतिशत के दायरे में रहते हैं। EIA के आंकड़ों को ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि यह एक सरकारी एजेंसी है। ओपेक और ओपेक+ की भूमिका ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में मिलकर सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। इनके फैसले अक्सर WTI तेल की कीमतों पर असर डालते हैं। जब ओपेक कोटा घटाने का फैसला करता है, तो आपूर्ति सख्त होती है और दाम ऊपर चढ़ जाते हैं। वहीं जब ओपेक उत्पादन बढ़ाता है, तो इसका ठीक उलटा असर पड़ता है। ओपेक+ इसी का एक बड़ा रूप है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें सबसे अहम रूस है। इन देशों के साझा फैसले वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि होर्मुज को लेकर आगे तनाव और बढ़ता है या कोई राहत मिलती है, क्योंकि इसी पर तेल की अगली चाल निर्भर करेगी। इसका आप पर असर • भारत में: कच्चा तेल महंगा होने का असर देर-सबेर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ सकता है, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी होने का दबाव बढ़ता है। • निवेशकों के लिए: तेल में उछाल से ऊर्जा और तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में हलचल रह सकती है, इसलिए बाजार पर नजर रखने वालों को होर्मुज के हालात पर ध्यान देना जरूरी है। सवाल-जवाब 1. सोमवार को WTI कच्चा तेल किस स्तर पर पहुंचा? एशियाई कारोबार के दौरान WTI कच्चा तेल करीब 74.20 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। 2. तेल की कीमत में उछाल की मुख्य वजह क्या है? सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच हुई नई मिसाइल कार्रवाई, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। 3. अमेरिकी बलों ने कितने ठिकानों पर हमला किया? तीन रातों के दौरान 300 से ज्यादा ईरानी ठिकानों पर हमला किया गया, जिनमें अकेले शनिवार को 140 ठिकाने शामिल थे। 4. सेंटकॉम के हमलों का मकसद क्या बताया गया? जलमार्ग से गुजर रहे आम व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना। 5. तेहरान ने बातचीत को लेकर क्या रुख अपनाया है? तेहरान ने भविष्य की बातचीत तब तक रोक दी है जब तक वॉशिंगटन जहाजों की आवाजाही और ईरानी तेल निर्यात को सामान्य बनाने की अपनी पुरानी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता। 6. पिछले हफ्ते तेल के दाम क्यों गिरे थे? अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम शांति समझौते से मध्य-पूर्व की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बंधी थी, जिससे कीमतें नीचे आई थीं। 7. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम है? यह दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे अहम रास्तों में से एक है, और यहां किसी भी अड़चन से तेल की कीमतें तुरंत प्रभावित होती हैं। https://trendkia.com/market/america-iran-takarava-phira-bharaka-kachcha-tela-74-dolara-ke-para-hormuz-para-mndaraya-snkata-7229 TrendKia — Har trend, sabse pehle.