# अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोने की कीमतों में गिरावट, फेडरल रिजर्व की दरें बढ़ाने की उम्मीदें तेज

> सोने की कीमत 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसली है, जिसका मुख्य कारण ईरान के साथ संघर्ष और मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। बाजार अब फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं का आकलन कर रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-07-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/amerika-irana-tanava-ke-bicha-sone-ki-kimaton-men-giravata-phedarala-rijarva-ki-daren-barhane-ki-ummiden-teja-5981 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, फेडरल रिजर्व, मुद्रास्फीति, अमेरिका, ईरान, बाजार, निवेश

गुरुवार को एशियाई बाजार की शुरुआत में सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, जिससे यह 4,075 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। कीमती धातु के मूल्य में यह गिरावट मुख्य रूप से भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण है। निवेशक वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं, लेकिन मौजूदा तनाव ने बाजार की धारणाओं को प्रभावित किया है।

## तनाव का बढ़ता स्तर और मुद्रास्फीति की आशंका
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए किया गया अंतरिम समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर बमबारी करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को फिर से लागू करने की धमकी दी है। इस स्थिति ने ऊर्जा संबंधी मुद्रास्फीति के डर को और बढ़ा दिया है। हाई रिज फ्यूचर्स के मेटल्स ट्रेडिंग निदेशक डेविड मेगर का कहना है कि आज की गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। संभावित संघर्षविराम के विफल होने के साथ ही, सोने सहित सभी जोखिम वाले परिसंपत्तियों में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।

## फेडरल रिजर्व की नीतियां और ब्याज दरों पर बहस
सीएनई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, स्वैप ट्रेडर अब फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को 30 फीसदी से अधिक मान रहे हैं, जो पिछले गुरुवार को 20 फीसदी से कम थी। हाल ही में जारी फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स से पता चला है कि नीति-निर्माताओं के बीच ब्याज दरों के भविष्य को लेकर मतभेद थे। हालांकि अधिकांश ने दरों को स्थिर रखने का समर्थन किया, लेकिन कुछ अधिकारियों ने दरों में वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया था। इन मिनट्स ने बाजार में मुद्रास्फीति के प्रति फेड अधिकारियों की बढ़ती चिंता को उजागर किया है, जबकि श्रम बाजार को लेकर चिंताएं कुछ कम होती दिख रही हैं।

## सोने का ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के भंडार और विनिमय के माध्यम के रूप में एक केंद्रीय भूमिका निभाई है। आज के समय में, आभूषणों के निर्माण के अलावा, सोना एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता है, जिसे अस्थिर समय के दौरान एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जाता है। यह मुद्रास्फीति के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच (हेज) के रूप में कार्य करता है, क्योंकि इसकी कीमत किसी विशिष्ट सरकार या जारीकर्ता पर निर्भर नहीं होती।

## केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीदारी
केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। कठिन समय में अपनी मुद्राओं को सहारा देने के लिए, केंद्रीय बैंक अपने भंडार में विविधता लाते हैं और अर्थव्यवस्था की मजबूती प्रदर्शित करने के लिए सोना खरीदते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने 2022 में 1,136 टन सोना खरीदा, जिसका मूल्य करीब 70 अरब डॉलर था। यह रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से सबसे बड़ी वार्षिक खरीदारी है। चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार को तेजी से बढ़ा रहे हैं।

## बाजार का सहसंबंध और सोने की चाल
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ उल्टा सहसंबंध (इनवर्स कोरिलेशन) होता है। जब डॉलर की कीमत गिरती है, तो सोना अक्सर बढ़ता है, जिससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, शेयर बाजार की तेजी सोने की कीमतों को कमजोर कर सकती है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में गिरावट सोने के लिए फायदेमंद होती है। सोने की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक मंदी का डर शामिल है। चूंकि सोना डॉलर में आंका जाता है, इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी सोने की कीमतों को सीधे प्रभावित करती है। एक मजबूत डॉलर सोने को नियंत्रित रखता है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों में उछाल लाता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** सोने की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का सीधा असर भारतीय सराफा बाजार पर पड़ता है, जिससे स्थानीय स्तर पर सोने के गहने खरीदने की लागत बढ़ सकती है।

**निवेशकों के लिए:** वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते तनाव के बीच, निवेशकों को पोर्टफोलियो में विविधता रखने और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदें हैं।

### 2. क्या सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है?
हाँ, सोना एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता है, विशेष रूप से आर्थिक अस्थिरता और मुद्रास्फीति के दौरान क्योंकि यह किसी सरकारी नीति पर निर्भर नहीं करता है।

### 3. केंद्रीय बैंक सोना क्यों खरीदते हैं?
केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा को सहारा देने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीदते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था की मजबूती का भरोसा बना रहता है।

### 4. डॉलर का सोने की कीमत पर क्या असर पड़ता है?
सोना डॉलर में आंका जाता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने पर सोने की कीमतें आम तौर पर नियंत्रित रहती हैं, जबकि डॉलर के कमजोर होने पर सोने की कीमतें बढ़ने की संभावना रहती है।

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