# अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई का जोखिम बरकरार, क्लीवलैंड फेड अध्यक्ष बेथ हैमैक ने कड़े नीतिगत कदमों के दिए संकेत

> क्लीवलैंड फेडरल रिजर्व की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने चेतावनी दी है कि मजबूत मांग के बीच महंगाई ऊंची बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के लक्ष्य को हासिल करना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/ameriki-arthavyavastha-men-mahngai-ka-jokhima-barakarara-cleveland-fed-adhyaksha-beth-hammack-ne-kare-nitigata-kadamon-ke-die-snke-37879 · **Language:** Hindi
**Tags:** फेडरल रिजर्व, बेथ हैमैक, अमेरिकी डॉलर, मुद्रास्फीति, ब्याज दरें, बैंक ऑफ जापान, सोना

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार बनी हुई ऊंची मांग और मजबूत उत्पादन की वजह से मूल्य वृद्धि की रफ्तार थामने में जटिलताएं पैदा हो रही हैं। क्लीवलैंड फेडरल रिजर्व की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने मौद्रिक नीति पर अपने विचार रखते हुए आगाह किया है कि देश में कीमतें अब भी जरूरत से ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं। जब बाजार में मांग मजबूत स्तर पर टिकी रहती है, तब केंद्रीय बैंक के लिए तय किए गए दो प्रतिशत के महंगाई लक्ष्य की तरफ लौटना और अधिक पेचीदा हो जाता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मूल्य स्थिरता बनाए रखना केंद्रीय बैंकों की बुनियादी जवाबदेही है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में महंगाई के दोबारा भड़कने का जोखिम नीचे गिरने की तुलना में कहीं अधिक दिखाई देता है।

## लंबे समय तक रहने वाली महंगाई का खतरा
केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के अनुसार, अगर महंगाई को निर्धारित लक्ष्य से ऊपर लंबे समय तक बने रहने दिया गया, तो इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं। बेथ हैमैक ने चेताया कि कीमतों में बढ़त का दौर जितना अधिक समय खींचेगा, उपभोक्ताओं और कारोबारियों के बीच महंगाई की उम्मीदें उतनी ही पक्की हो जाएंगी। इसके चलते कीमतों को नीचे लाना लगातार मुश्किल होता चला जाता है। उनके बयानों के बाद विश्लेषकों ने उनके रुख को स्पष्ट रूप से आक्रामक और दरों को ऊंची रखने के पक्षधर के तौर पर आंका है। नीति निर्माताओं के हालिया संवाद को मापने वाला सेंटीमेंट इंडेक्स 0.46 अंक फिसलकर 148.18 पर आ गया, लेकिन यह स्तर तटस्थ माने जाने वाले 100 के आंकड़े से काफी ऊपर बना हुआ है। इस तरह के ऊंचे आंकड़े अमेरिकी डॉलर के पक्ष में एक सकारात्मक माहौल को बनाए रखने में मदद करते हैं।

## मुद्रा बाजारों में डॉलर का रुख और ब्याज दरों पर दांव
इन टिप्पणियों के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर मिला-जुला असर देखा गया और यूएस डॉलर इंडेक्स में बढ़त का रुझान कायम रहा। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला यह सूचकांक 0.14 प्रतिशत की मजबूती के साथ 101.25 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार सहभागियों ने आगामी नीतिगत बैठकों में ब्याज दर वृद्धि की संभावनाओं को पहले ही अपनी गणनाओं में शामिल कर लिया था, जिसकी वजह से बयानों पर तात्कालिक प्रतिक्रिया सीमित रही। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवेशक अब अक्टूबर की बैठक में एक और दर वृद्धि की लगभग 71 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। महज एक सप्ताह पहले यह अनुमान 55 प्रतिशत के आसपास दर्ज किया गया था, जो दिखाता है कि सख्त नीतिगत फैसलों को लेकर वित्तीय बाजारों में उम्मीदें कितनी तेजी से बढ़ी हैं।

## फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और नीतिगत हथियार
संयुक्त राज्य अमेरिका में पूरी मौद्रिक नीति का खाका फेडरल रिजर्व ही तैयार करता है। इस केंद्रीय बैंक को कानूनी रूप से दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और रोजगार के अधिकतम अवसरों को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों लक्ष्यों के बीच संतुलन साधने के लिए फेड मुख्य रूप से ब्याज दरों में फेरबदल का सहारा लेता है। जब उपभोक्ता सामान और सेवाओं की कीमतें अनियंत्रित होने लगती हैं और महंगाई केंद्रीय बैंक के निर्धारित 2 प्रतिशत के लक्ष्य को लांघ जाती है, तब नीति निर्माता नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करते हैं। दरों में इस इजाफे से बैंकों से कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में मांग धीमी पड़ती है। साथ ही ऊंची प्रतिफल दरों के आकर्षण में विदेशी निवेशक अमेरिकी संपत्तियों में पूंजी लगाने लगते हैं, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब आर्थिक मंदी का डर हो या बेरोजगारी दर असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो उधारी को सस्ता बनाने के लिए दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है।

## नीतिगत बैठकों का ढांचा और निर्णय प्रक्रिया
फेडरल रिजर्व पूरे साल के दौरान आठ नियमित नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जहां फेडरल ओपन मार्केट कमेटी व्यापक आर्थिक परिदृश्य का मूल्यांकन करके निर्णय लेती है। इस महत्वपूर्ण समिति में कुल बारह शीर्ष अधिकारी शामिल होकर मतदान करते हैं। इनमें फेडरल रिजर्व बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष, और ग्यारह क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों में से रोटेशन के आधार पर एक वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले चार अन्य अध्यक्ष हिस्सा लेते हैं। संकट के असाधारण दौर में जब मानक तरीके कारगर नहीं होते, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग जैसे गैर-पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय फेड ने इस प्रक्रिया के तहत नई नकदी तैयार करके वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदे थे, जिससे डॉलर आमतौर पर कमजोर पड़ता है। वहीं वर्तमान में जारी क्वांटिटेटिव टाइटनिंग इसकी ठीक उलट प्रक्रिया है, जिसमें केंद्रीय बैंक बांड खरीद बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बांड से मिले मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।

## वैश्विक मुद्राओं और जिंस बाजार में उतार-चढ़ाव
अमेरिकी नीतियों के असर के साथ-साथ दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में अन्य अहम घटनाओं का प्रभाव भी देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर की तरफ गिरता दिखा। ऑस्ट्रेलिया में अगस्त माह की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान था। हालांकि रोजगार सृजन के आंकड़े अनुमानों से बेहतर रहे और 39.5 हजार दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त जापानी येन में बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने और मुद्रा हस्तक्षेप की सुगबुगाहट के बीच मजबूती आई, जिससे यूएसडी/जेपीवाई तीन सप्ताह के उच्च स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के करीब आ गया। उधर जिंस बाजार में सोना लगातार दूसरे दिन दबाव में रहा और यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। बाजार की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक पर टिकी हैं, जहां दुर्लभ मृदा खनिजों, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार पर संभावित प्रगति की उम्मीद की जा रही है।

## वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग फैसले
इसी दौर में अन्य प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी मौद्रिक दिशा स्पष्ट की है। स्विस नेशनल बैंक ने वित्तीय विश्लेषकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को शून्य प्रतिशत पर स्थिर रखा। स्विस बैंक ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक बैंकों द्वारा उसके पास रखी गई साइट डिपॉजिट्स पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के आधार पर प्रतिफल दिया जाएगा। स्विस केंद्रीय बैंक ने साल 2026 के लिए अपने महंगाई अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 0.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पूर्व में 0.6 प्रतिशत अनुमानित था। इसके साथ ही बैंक ने चेतावनी दी कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव से जुड़ा है। दूसरी तरफ, बैंक ऑफ जापान ने दशकों की मौद्रिक शिथिलता को पीछे छोड़ते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7 के मुकाबले 2 मतों से पारित हुआ, जो जापानी मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और मुद्रा विनिमय पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयात खर्च में इजाफा हो सकता है। कच्चे तेल और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामानों के महंगे होने से घरेलू स्तर पर महंगाई की दर प्रभावित हो सकती है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स के 101.25 के स्तर पर बने रहने से सुरक्षित परिसंपत्तियों में आकर्षण बढ़ रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिकी ट्रेजरी में लगा सकते हैं।
- **सोने के खरीदारों के लिए:** ऊंची ब्याज दरों के संकेतों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,300 डॉलर के नीचे एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गई है। यदि यह कमजोरी बनी रहती है, तो आभूषण खरीदारों को कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।
- **कर्जधारकों और कारोबारियों के लिए:** वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा उधारी लागत ऊंची रखने से विदेशी वाणिज्यिक उधारी महंगी बनी रहेगी। विदेशों से कर्ज लेने वाली भारतीय कंपनियों के ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियां और उपभोक्ता मांग लगातार मजबूत बनी हुई हैं, जिससे मूल्य दबावों को नियंत्रित करना जटिल बना हुआ है।

- **मजबूत मांग और आर्थिक उत्पादन:** उपभोक्ता खर्च और औद्योगिक उत्पादन में कमी न आने की वजह से सामान और सेवाओं की कीमतें नीचे नहीं आ पा रही हैं। जब आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहती हैं, तो आपूर्ति और मांग का असंतुलन बना रहता है।
- **महंगाई की उम्मीदों का टिकना:** यदि मुद्रास्फीति लंबे समय तक 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर टिकी रहती है, तो कारोबार लागत बढ़ने की उम्मीद में अपनी कीमतें लगातार बढ़ाते रहते हैं। केंद्रीय बैंक इसी चक्र को तोड़ने के लिए ब्याज दरों में अतिरिक्त वृद्धि की संभावना तलाश रहा है।
- **वैश्विक आर्थिक नीतिगत बदलाव:** बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने और स्विस नेशनल बैंक द्वारा जोखिमों की निगरानी के बीच वैश्विक स्तर पर नकदी की तरलता कम हो रही है। केंद्रीय बैंकों का यह सम्मिलित रुख बाजार को सतर्क बनाए हुए है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्लीवलैंड फेड अध्यक्ष बेथ हैमैक ने महंगाई को लेकर क्या चेतावनी दी है?
बेथ हैमैक ने कहा कि मजबूत उत्पादन और मांग के चलते महंगाई ऊंची बनी हुई है, जिससे इसे 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर वापस लाना कठिन हो सकता है।

### 2. अक्टूबर की बैठक में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की कितनी संभावना है?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, निवेशक अक्टूबर की नीतिगत बैठक में दर वृद्धि की लगभग 71 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 4. स्विस नेशनल बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में क्या फैसला लिया है?
स्विस नेशनल बैंक ने अपनी नीतिगत ब्याज दर को 0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है और 2026 के लिए महंगाई अनुमान 0.7 प्रतिशत बताया है।

### 5. इस बयानबाजी के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा था?
यूएस डॉलर इंडेक्स 0.14 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ लगभग 101.25 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

### 6. वैश्विक बाजार में सोने की कीमत पर क्या असर पड़ा है?
सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और यह 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया।

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