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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट: चिप शेयरों में बिकवाली और मिडिल ईस्ट तनाव से नैस्डैक 561 अंक टूटा",
  "summary": "अमेरिकी शेयर बाजार में सोमवार 13 जुलाई 2026 को बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जहां सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते नैस्डैक सूचकांकों में 400 से 600 अंकों की भारी गिरावट आई।",
  "content": "अमेरिकी शेयर बाजारों में सोमवार, 13 जुलाई 2026 को भारी गिरावट देखने को मिली, जिसमें टेक-हैवी नैस्डैक कंपोजिट और नैस्डैक 100 सूचकांकों में 400 से 600 अंकों की तेज गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की मुख्य वजह सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में हुई आक्रामक बिकवाली और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल थी। इसके साथ ही, निवेशकों में यह चिंता भी बढ़ गई है कि लगातार बनी हुई महंगाई के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर 2026 की नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। मंगलवार को बाजार के सभी भागीदारों की नजरें जुलाई 2026 के लिए आने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई के आंकड़ों पर टिकी रहेंगी, जिससे अर्थव्यवस्था की भविष्य की दिशा का अंदाजा लगाया जा सके।\n\nमिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल में उछाल\nकच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) और एसएंडपी 500 जैसे बड़े सूचकांकों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह बनी। सोमवार को अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग $80 प्रति बैरल के पास पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत $85 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। ऊर्जा की कीमतों में हुई इस तेज वृद्धि ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में आपूर्ति बाधित होने और महंगाई के लंबे समय तक बने रहने की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है।\n\nट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के विश्लेषण के अनुसार, तेल बाजार में इस तेजी का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ईरानी जहाजों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के परिवहन के लिए एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण जरिया माना जाता है। इस नाकेबंदी के कारण ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई और शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशकों को अब यह डर सता रहा है कि केंद्रीय बैंकों को महंगाई पर काबू पाने के लिए लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा रखना पड़ सकता है।\n\nडाउ जोंस और एसएंडपी 500 पर भी दिखा दबाव\nसोमवार को डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) 138.37 अंक यानी 0.3% गिरकर लगभग 52,498.64 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट में दिग्गज औद्योगिक और वित्तीय कंपनियों की भूमिका सबसे प्रमुख रही, जिनके शेयरों में 1% से लेकर 3% तक की कमजोरी दर्ज की गई। गिरावट का सामना करने वाली कंपनियों में विमान निर्माता कंपनी बोइंग, हैवी इक्विपमेंट बनाने वाली कैटरपिलर इंक, औद्योगिक क्षेत्र की हनीवेल इंटरनेशनल, रिटेल दिग्गज होम डिपो, नेटवर्किंग कंपनी सिस्को, स्पोर्ट्सवियर ब्रांड नाइके, तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज अल्फाबेट और दिग्गज वित्तीय संस्थान गोल्डमैन सैक्स शामिल रहे।\n\nदूसरी ओर, व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला एसएंडपी 500 सूचकांक भी 60.05 अंक या 0.8% की गिरावट के साथ 7,515.34 के स्तर पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में अलग-अलग क्षेत्रों में देखी गई इस गिरावट से स्पष्ट है कि बाजार ऊंचे ब्याज दरों के लंबे दौर और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को लेकर चिंतित है।\n\nचिप शेयरों में बिकवाली से नैस्डैक में भारी गिरावट\nहालांकि डाउ जोंस और एसएंडपी 500 में सीमित गिरावट दर्ज की गई, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान तकनीकी क्षेत्र को उठाना पड़ा। नैस्डैक 100 सूचकांक 561.01 अंक यानी 1.9% की भारी गिरावट के साथ 29,264.10 पर बंद हुआ। इसी तरह, नैस्डैक कंपोजिट सूचकांक भी 408.43 अंक यानी 1.6% फिसलकर 25,873.18 के स्तर पर आ गया।\n\nतकनीकी क्षेत्र में आई इस सुनामी के पीछे सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर निर्माताओं के शेयरों में हुई ताबड़तोड़ बिकवाली थी। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, चिप निर्माताओं के शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह यह चिंता थी कि बड़ी AI हाइपरस्केलर्स कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुनियादी ढांचे पर अपने भारी-भरकम पूंजीगत खर्च को कम कर सकती हैं। पिछले कई महीनों से बाजार में AI हार्डवेयर की मांग को लेकर भारी उत्साह था, लेकिन अब निवेशक यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या यह खर्च आगे भी इसी रफ्तार से जारी रहेगा।\n\nनुकसान उठाने वाले प्रमुख चिप शेयरों में सैंडिस्क सबसे आगे रहा, जिसके शेयर में 12.6% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य दिग्गज कंपनियों के शेयर भी लुढ़क गए, जिसमें इंटेल में 6.1%, माइक्रोन में 4.3%, एएमडी में 4.2% और एनवीडिया में 3.5% की कमजोरी देखी गई।\n\nमहंगाई में नरमी का भ्रम और फेडरल रिजर्व का रुख\nअब निवेशकों की नजरें मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को जारी होने वाले अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों पर टिकी हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि जून 2026 में महंगाई दर में मामूली नरमी देखने को मिल सकती है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक महीने के आंकड़ों में सुधार अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अपनी नीति से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर पाएगा।\n\nट्रेडिंग प्लेटफॉर्म आईजी यूके के विश्लेषण के अनुसार, जून के दौरान जिस युद्धविराम की वजह से ईंधन की कीमतों में कमी आई थी, वह 8 जुलाई को समाप्त हो गया। इसके बाद, सप्ताहांत में अमेरिका द्वारा किए गए ताजा हवाई हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के ईरान के दावों ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। ऐसे में, जून महीने की ऊर्जा कीमतों में गिरावट के आधार पर आने वाले CPI आंकड़े केवल बीते समय की तस्वीर पेश करेंगे, जो वर्तमान परिस्थितियों में सही नहीं बैठती। जुलाई के महंगाई आंकड़े, जो अगस्त में जारी होंगे, काफी अलग और चिंताजनक हो सकते हैं।\n\nआईजी यूके के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जो निवेशक जून के आंकड़ों में आई मामूली नरमी को महंगाई में स्थाई सुधार या ब्याज दरों में कटौती का संकेत मानकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वे बड़ी गलती कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व अस्थायी रूप से ईंधन की कीमतों में आई गिरावट से प्रभावित नहीं होगा, खासकर तब जब वह युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है।\n\nप्रमुख बैंकों के नतीजों पर रहेगी नजर\nमैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों के अलावा, निवेशकों का ध्यान कॉर्पोरेट अर्निंग्स के सीजन पर भी केंद्रित है। मंगलवार को अमेरिका के तीन सबसे बड़े बैंकिंग दिग्गजों—JPM, BAC और WFC—के तिमाही नतीजे घोषित होने वाले हैं। वित्तीय विश्लेषक इन नतीजों को बहुत करीब से देखेंगे ताकि उपभोक्ता ऋण की स्थिति, बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन और उच्च ब्याज दरों के बीच अमेरिकी वित्तीय प्रणाली की मजबूती का आकलन किया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\n• निवेशकों के लिए: अमेरिकी और वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भी नकारात्मक दबाव देखने को मिल सकता है, जिससे निवेशकों को अधिक सतर्कता बरतनी होगी।\n• महंगाई और ईंधन दरें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से भारत सहित कई देशों में आयातित सामान और परिवहन लागत बढ़ सकती है, जो घरेलू महंगाई को प्रभावित कर सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सोमवार, 13 जुलाई 2026 को अमेरिकी बाजार में नैस्डैक की क्या स्थिति रही?\nसोमवार को अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई, जिसके चलते नैस्डैक 100 सूचकांक 561.01 अंक (1.9%) गिरकर 29,264.10 पर बंद हुआ और नैस्डैक कंपोजिट भी 408.43 अंक (1.6%) टूट गया।\n\n2. कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी की क्या वजह है?\nमिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ईरानी जहाजों पर फिर से नाकेबंदी लगाने के फैसले के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।\n\n3. चिप बनाने वाली किन कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई?\nचिप शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिसमें सैंडिस्क में 12.6%, इंटेल में 6.1%, माइक्रोन में 4.3%, एएमडी में 4.2% और एनवीडिया में 3.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई।\n\n4. बाजार विशेषज्ञ जून 2026 के CPI महंगाई आंकड़ों को लेकर क्या चेतावनी दे रहे हैं?\nविशेषज्ञों का कहना है कि जून के ऊर्जा दामों में गिरावट के चलते आने वाले आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं, क्योंकि हालिया तनाव से कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ चुकी हैं। फेडरल रिजर्व अस्थायी नरमी के झांसे में नहीं आएगा।\n\n5. मंगलवार को किन प्रमुख अमेरिकी बैंकों के तिमाही वित्तीय नतीजे घोषित होने वाले हैं?\nमंगलवार को अमेरिका के बड़े वित्तीय संस्थानों जेपी मॉर्गन (JPM), बैंक ऑफ अमेरिका (BAC) और वेल्स फारगो (WFC) के तिमाही नतीजे घोषित होने वाले हैं।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-07-14",
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