अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से यूरो में मजबूती, लेकिन मंदी का दबाव अब भी हावी अमेरिकी डॉलर में नरमी के चलते यूरो-डॉलर जोड़ी 1.1230 के करीब पहुंची, लेकिन तकनीकी कमजोरी और भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़त को सीमित कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन अपनी बढ़त का सिलसिला जारी रखा और विनिमय दर 1.1225 से 1.1230 के दायरे तक पहुंच गई। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में रात भर दर्ज की गई गिरावट के कारण डॉलर पर मुनाफावसूली का दबाव बना, जिससे यूरो को सहारा मिला। इसके बावजूद मुद्रा जोड़ी चालू महीने की शुरुआत से ही एक सीमित दायरे में फंसी हुई है, जिसके चलते तेजी के पक्षधर ट्रेडर्स के लिए तकनीकी सतर्कता बेहद जरूरी बनी हुई है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD की वर्तमान कीमत 1.12 के स्तर पर है, जो पिछले बंद भाव 1.12 से 0.30 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.12 से 1.20 के बीच बना हुआ है। डॉलर पर दबाव और भू-राजनीतिक समीकरणों का असर अमेरिकी मुद्रा में हालिया कमजोरी के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान मुख्य वजह रहा जिसमें उन्होंने कहा कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका ईरान पर सैन्य हमले दोबारा शुरू करने से बचेगा। इस घोषणा ने बाजार में तात्कालिक रूप से डॉलर में मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया। हालांकि, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन और ईरान के बीच बना गतिरोध पूरी तरह शांत नहीं हुआ है, जिससे भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बाजार में सक्रिय बना हुआ है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त मौद्रिक रुख डॉलर में किसी भी गहरी गिरावट को रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है। केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रणनीति के चलते अमेरिकी डॉलर को अंतर्निहित समर्थन मिलता रहता है, जो अंततः यूरो में तेज उछाल पर लगाम कसने का काम करता है। वहीं दूसरी ओर, यूरोप में फ्रांस का बढ़ता कर्ज संकट भी साझा मुद्रा यूरो की बढ़त को सीमित करने वाला एक बड़ा कारक साबित हो रहा है। तकनीकी संकेतक और चार्ट पर मंदी का ढांचा अगस्त के मासिक स्विंग हाई स्तर से आई तेज गिरावट के बाद वर्तमान सीमित दायरे की ट्रेडिंग को तकनीकी तौर पर मंदी के समेकन के चरण के रूप में देखा जा रहा है। दैनिक चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 50.4 के आसपास रहकर ओवरसोल्ड स्तरों से उबरने के बाद तटस्थ गति का संकेत दे रहा था, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस मामूली रूप से सकारात्मक हुआ था। हालांकि, लाइव तकनीकी डेटा के अनुसार 14-दिवसीय RSI गिरकर 28 पर आ चुका है, जो ओवरसोल्ड स्थिति दर्शाता है। वहीं MACD का स्तर -0.01 पर है (सिग्नल -0.01 और हिस्टोग्राम -0.00), जो स्पष्ट रूप से मंदी का रुख दिखा रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर स्थिति और भी कमजोर नजर आती है। 20-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज 1.14, 50-दिवसीय EMA 1.15 और 200-दिवसीय EMA 1.16 पर स्थित हैं। इसके अतिरिक्त 50-दिवसीय SMA 1.15 और 200-दिवसीय SMA 1.16 पर दर्ज हैं, जहां 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से नीचे जाना एक डेथ क्रॉस बनाता है, जो दीर्घकालिक मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बॉलिंजर बैंड 1.11 से 1.16 के दायरे में फैला है जिसका मध्य स्तर 1.14 है और भाव इसके भीतर कारोबार कर रहा है। 49 के स्तर पर मौजूद 14-दिवसीय ADX एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार को रेखांकित करता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 23 और सिग्नल लाइन 21 पर है। स्टॉप लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल होने वाली 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज 0.01 पर बनी हुई है। अहम रेजिस्टेंस और सपोर्ट स्तर तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी संभावित तेजी को ट्रेडिंग रेंज की ऊपरी सीमा 1.1280 के पास कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। यदि खरीदार इस बाधा को पार करने में सफल होते हैं, तो अगला अहम पड़ाव 1.1300 का मनोवैज्ञानिक स्तर होगा। 1.1300 के ऊपर लगातार टिकने पर शॉर्ट-कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है, जो भाव को 1.1355 से 1.1360 के रेजिस्टेंस जोन तक ले जा सकती है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के प्रति अंतर्निहित सकारात्मक धारणा को देखते हुए इस तरह के किसी भी उछाल को बिकवाली के मौके के रूप में लिया जा सकता है और यह तेजी जल्द समाप्त होने का जोखिम रखती है। लाइव तकनीकी स्तरों के संदर्भ में पिवट पॉइंट 1.12 पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस R1 1.12 और दूसरा रेजिस्टेंस R2 1.13 पर स्थित है। नीचे की ओर, यदि कीमत 1.1200 के स्तर से नीचे फिसलती है, तो 1.1160 के ट्रेडिंग रेंज सपोर्ट का परीक्षण हो सकता है। लाइव डेटा के मुताबिक पहला सपोर्ट S1 और दूसरा सपोर्ट S2 दोनों 1.12 पर स्थित हैं, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट लगभग 1.12 और रेजिस्टेंस लगभग 1.16 पर है। यदि 1.1160 का सुरक्षात्मक स्तर टूटता है, तो यह मंदी के ट्रेडर्स के लिए एक नया उत्प्रेरक बनेगा और इससे गिरावट का दायरा और गहरा हो सकता है। यूरोपीय संघ की साझा मुद्रा और वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा था। मुद्रा जोड़ियों की बात करें तो EUR/USD दुनिया में सबसे ज्यादा सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाली जोड़ी है, जिसकी हिस्सेदारी सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा सौदों में लगभग 30 प्रतिशत आंकी गई है। इसके बाद अन्य जोड़ियों में EUR/JPY 4 प्रतिशत, EUR/GBP 3 प्रतिशत और EUR/AUD 2 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखती हैं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की भूमिका और मौद्रिक नीतियां जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोज़ोन का मुख्य केंद्रीय बैंक है, जो ब्याज दरें तय करने और मौद्रिक नीति का प्रबंधन करने का कार्य करता है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या आर्थिक विकास को गति देना है। इस कार्य के लिए बैंक का सबसे प्रमुख उपकरण नीतिगत ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची होती हैं या दरें बढ़ने की उम्मीद होती है, तो यह आम तौर पर यूरो को मजबूती प्रदान करती है, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा कमजोर होती है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार आयोजित होने वाली बैठकों में मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले लेती है। ये निर्णय यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्यों द्वारा मिलकर लिए जाते हैं। महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े और यूरो पर उनका प्रभाव हार्मनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज द्वारा मापी जाने वाली यूरोज़ोन की महंगाई दर यूरो के मूल्यांकन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक पैमाना है। यदि मुद्रास्फीति अनुमान से अधिक बढ़ती है और विशेष रूप से यूरोपीय सेंट्रल बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक को इसे नियंत्रण में लाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है। अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को अपनी पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो की मांग बढ़ती है। इसके अलावा, सकल घरेलू उत्पाद, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई, रोजगार आंकड़े और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण भी मुद्रा की दिशा तय करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश को आकर्षित करती है और केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे यूरो को ताकत मिलती है। आर्थिक दृष्टिकोण से यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यानी जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आंकड़े विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि ये चारों मिलकर यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। एक अन्य प्रमुख संकेतक व्यापार संतुलन है, जो एक निश्चित अवधि में किसी देश के निर्यात से होने वाली कमाई और आयात पर किए गए खर्च के अंतर को मापता है। जब कोई देश ऐसे उत्पादों का निर्यात करता है जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन वस्तुओं को खरीदने के लिए संबंधित मुद्रा की अतिरिक्त मांग पैदा होती है, जिससे वह मजबूत होती है। इसलिए एक सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत देता है, जबकि नकारात्मक संतुलन इसे कमजोर बनाता है। अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने का हाल विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों के अन्य हिस्सों में भी डॉलर की कमजोरी का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया। AUD/USD ने साप्ताहिक निचले स्तर से अपनी उछाल को बढ़ाते हुए एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर की ओर रुख किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। साथ ही, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से सख्त रुख की उम्मीदों ने भी इसे सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी 158.00 के करीब बनी रही। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन पर दबाव डाला। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच के संतुलन ने डॉलर-येन जोड़ी में किसी भी बड़ी गिरावट को सीमित रखा। कमोडिटी बाजार में सोना दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए शुक्रवार को 4,200 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ता नजर आया। कच्चे तेल की कीमतों और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के कमजोर पड़ने से सोने को बल मिला, जबकि बाजार अब अमेरिकी उपभोक्ता धारणा से जुड़े आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। हालांकि सोने के पक्ष में सुधार देखा जा रहा है, लेकिन इसका दैनिक RSI अभी भी मंदी के रुझान का संकेत दे रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और मुद्रा कारोबारियों पर सीधा असर पड़ रहा है। • मुद्रा कारोबारियों पर प्रभाव: विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय भारतीय और वैश्विक ट्रेडर्स को वर्तमान स्तरों पर कड़े स्टॉप-लॉस का उपयोग करना चाहिए। बाजार में तकनीकी संकेतक मंदी का संकेत दे रहे हैं, इसलिए बिना पुष्टि के लंबी अवधि के सौदे जोखिम भरे हो सकते हैं। • यूरोप यात्रा और पढ़ाई का खर्च: यूरो में आई हालिया मजबूती से यूरोप जाने वाले पर्यटकों और वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों के खर्च में मामूली वृद्धि हो सकती है। विनिमय दरों पर नजर रखकर समय पर विदेशी मुद्रा खरीदना समझदारी होगी। • आयात-निर्यात क्षेत्र: यूरोप को निर्यात करने वाले व्यापारियों को यूरो की मजबूती से लाभ मिल सकता है, जबकि वहां से आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। कंपनियों को करेंसी हेजिंग रणनीतियों की समीक्षा करनी चाहिए। • निवेश पोर्टफोलियो: अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों या अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को यील्ड में उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहना चाहिए। फेडरल रिजर्व की नीतियों के चलते डॉलर में किसी भी समय दोबारा तेजी आ सकती है। ऐसा क्यों हुआ यूरो-डॉलर में आई तात्कालिक बढ़त अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और वाशिंगटन के कूटनीतिक रुख के कारण डॉलर में हुई मुनाफावसूली का सीधा परिणाम है। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रात भर आई नरमी ने डॉलर पर दबाव बनाया। यील्ड कम होने से विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर आधारित संपत्तियों का तात्कालिक आकर्षण कम हुआ और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू की। • ईरान पर सैन्य कार्रवाई टलने का बयान: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने बाजार को राहत दी जिसमें उन्होंने 3 नवंबर के चुनावों से पहले ईरान पर नए हमलों से बचने की बात कही। इससे डॉलर की सेफ-हेवन मांग में तात्कालिक कमी आई। • फ्रांस का वित्तीय संकट: यूरोप में फ्रांस के बढ़ते सार्वजनिक कर्ज को लेकर बनी चिंताएं यूरो की बढ़त पर अंकुश लगा रही हैं। व्यापक यूरोज़ोन अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता साझा मुद्रा को मजबूत गति पकड़ने से रोक रही है। • फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियां: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आक्रामक मौद्रिक नीति ने डॉलर के गिरने की गुंजाइश को सीमित कर रखा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच फेड का यह रुख डॉलर को मजबूत समर्थन देता है। सवाल-जवाब 1. शुक्रवार को EUR/USD में बढ़त की मुख्य वजह क्या रही? अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर में मुनाफावसूली के कारण EUR/USD 1.1225 से 1.1230 के दायरे तक चढ़ने में सफल रहा। 2. क्या यूरो में तेजी आगे भी जारी रहने की संभावना है? तकनीकी संकेतकों पर मंदी का ढांचा बना हुआ है और 1.1280 तथा 1.1300 पर कड़ा प्रतिरोध है, जिससे तेजी के टिकने पर अनिश्चितता बनी हुई है। 3. डोनाल्ड ट्रंप के बयान का बाजार पर क्या असर पड़ा? ट्रंप द्वारा 3 नवंबर के चुनावों से पहले ईरान पर नए सैन्य हमलों से बचने की बात कहने पर डॉलर में सेफ-हेवन खरीदारी कम हुई और मुनाफावसूली देखी गई। 4. यूरो के लिए प्रमुख डाउनसाइड सपोर्ट स्तर कौन से हैं? यदि कीमत 1.1200 से नीचे फिसलती है, तो 1.1160 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट होगा, जिसके टूटने पर और गहरी गिरावट आ सकती है। 5. वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो का कितना दबदबा है? यूरो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुद्रा है, जिसकी 2022 में दैनिक विदेशी मुद्रा कारोबार में 31 प्रतिशत और EUR/USD जोड़ी की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। https://trendkia.com/market/ameriki-bond-yield-men-giravata-se-euro-men-majabuti-lekina-mndi-ka-dabava-aba-bhi-havi-45176 TrendKia — Har trend, sabse pehle.