अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से चांदी में लौटी चमक, क्या 60 डॉलर के पार टिकेगी तेजी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स में आई नरमी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब दो प्रतिशत की छलांग लगाकर 60.40 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। हालांकि तकनीकी स्तर पर मंदी का दबाव और मध्य पूर्व में तनाव के चलते निवेशक आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में सफेद धातु यानी चांदी की कीमतों में शुक्रवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान जोरदार रिकवरी देखी गई। गुरुवार को आई बिकवाली के झटके से पूरी तरह उबरते हुए चांदी की दरें लगभग 2 प्रतिशत की मजबूती के साथ 60.40 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गईं। हालिया समय में अमेरिकी सरकारी बॉन्डों की यील्ड में आई आक्रामक तेजी पर अचानक ब्रेक लगने से कीमती धातुओं में नए सिरे से लिवाली देखने को मिली है, जिससे सर्राफा बाजारों में ट्रेडिंग धारणा को कुछ सहारा मिला है। ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट का असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार में 10 साल की मैच्योरिटी वाले ट्रेजरी नोट की यील्ड 0.17 प्रतिशत बढ़कर 2.44 प्रतिशत के करीब दर्ज की गई। हालांकि, इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को यील्ड में भारी गिरावट आई थी, जब वह दो दशकों के अपने उच्चतम स्तर 5.36 प्रतिशत को पार करने में नाकाम रही। ट्रेजरी यील्ड में इस रुकावट ने अमेरिकी मुद्रा की गति को भी धीमा कर दिया है। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य का आकलन करने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) शुरुआती यूरोपीय कारोबार में 0.1 प्रतिशत कमजोर होकर 102.00 के आसपास कारोबार करता दिखा। तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से जब डॉलर में नरमी आती है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज जैसे चांदी (XAG/USD) का सौदा अधिक आकर्षक बन जाता है, जिससे निवेश का रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात बेहतर होता है। भू-राजनीतिक खींचतान और मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर टिकी नजरें बाजार के जानकारों का मानना है कि डॉलर और बॉन्ड यील्ड में आई इस नरमी को लंबे समय तक जारी रहने वाला रुझान मान लेना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञ इस सुस्ती को महज एक अस्थायी करेक्शन मान रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बना हुआ भू-राजनीतिक टकराव है, जो किसी भी वक्त बाजार में नई उथल-पुथल पैदा कर सकता है। आईएनजी के रणनीतिकारों ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि ट्रेजरी यील्ड के ठहरने से डॉलर ने थोड़ी जमीन जरूर गंवाई है, लेकिन व्यापक तौर पर डॉलर में किसी बड़े करेक्शन के ठोस संकेत नहीं दिख रहे हैं। वैश्विक परिदृश्य पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर सैन्य हमला नहीं करेगा। इसके बावजूद तेल बाजार भू-राजनीतिक प्रीमियम को छोड़ने को तैयार नहीं है, जिसके चलते खाड़ी देशों से आपूर्ति में सुधार के बावजूद कच्चे तेल के भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने हुए हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में निवेशक अब सितंबर के अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो भविष्य की ब्याज दरों की दिशा तय करेगा। दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो XAG/USD का भाव 60.40 डॉलर पर होने के बावजूद अल्पावधि में मंदी की ओर झुकाव बना हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि स्पॉट कीमतें 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 62.14 डॉलर के नीचे स्थिर हैं। 20-दिवसीय मूविंग एवरेज एक्सपोनेंशियल (20, क्लोज, 0) लगातार ऊपरी स्तरों पर कड़ा प्रतिरोध खड़ा कर रहा है। इसके साथ ही रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI-14) 41.86 पर बना हुआ है, जो 50 के मध्य रेखा से नीचे होने के कारण यह संकेत देता है कि बिकवाली का दबाव खत्म नहीं हुआ है, भले ही वह अत्यधिक आक्रामक न हो। ऊपर की ओर, चांदी के लिए पहला और सबसे महत्वपूर्ण प्रतिरोध 20-दिवसीय EMA यानी 62.14 डॉलर पर स्थित है। जब तक इस बाधा को पार कर टिकाऊ बढ़त नहीं बनती, तब तक मौजूदा मंदी का रुख पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। वहीं नीचे की ओर, दो महीने का निचला स्तर 58.50 डॉलर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो कीमतों में नई कमजोरी देखी जा सकती है। लाइव मार्केट डेटा और तकनीकी मैट्रिक्स ताजा लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, चांदी (SI=F) क्लोज-बेल सत्र में 60.65 डॉलर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले 59.06 डॉलर के बंद स्तर के मुकाबले 2.69 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। चांदी का 52 हफ्तों का ट्रेडिंग दायरा 45.85 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है। आज का कारोबारी वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के मुकाबले 13.32 गुना अधिक दर्ज किया गया, जो भारी ट्रेडिंग गतिविधि को दर्शाता है। लाइव ओपन, हाई, लो और क्लोज स्तरों से गणना किए गए तकनीकी संकेतकों में RSI (14) 43 पर है। एमएसीडी (MACD) -1.34 पर है जबकि इसका सिग्नल स्तर -1.05 है (हिस्टोग्राम -0.28, जो मंदी के रुझान की पुष्टि करता है)। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय EMA 62.09 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 63.44 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 67.34 डॉलर पर है। सिंपल मूविंग एवरेज में 50-दिवसीय SMA 64.11 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 72.49 डॉलर पर है। 50-दिवसीय EMA के 200-दिवसीय EMA से नीचे जाने के कारण चार्ट पर डेथ क्रॉस बना हुआ है, जिससे दीर्घकालिक मंदी का दबाव दिखता है। बोलिंगर बैंड (20,2) का दायरा 57.94 डॉलर से 67.19 डॉलर है (मध्य स्तर 62.56 डॉलर)। 14-दिवसीय एडीएक्स 22 पर स्थिर और कमजोर दायरे का संकेत दे रहा है। स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 24 और सिग्नल लाइन 10 पर है। वोलैटिलिटी बफर के लिए 14-दिवसीय एटीआर 1.44 पर है। प्रमुख स्तरों में पिवट पॉइंट 60.33 डॉलर, पहला रेजिस्टेंस 61.21 डॉलर, दूसरा रेजिस्टेंस 61.77 डॉलर है, जबकि पहला सपोर्ट 59.77 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 58.89 डॉलर पर आंका गया है। निवेश और वैश्विक मांग के आधार पर चांदी का व्यवहार ऐतिहासिक रूप से चांदी का इस्तेमाल धन के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में होता रहा है। हालांकि यह सोने जितनी व्यापक रूप से चर्चित नहीं रहती, फिर भी ट्रेडर अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, आंतरिक मूल्य को सुरक्षित रखने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव यानी हेज के लिए चांदी का रुख करते हैं। निवेशक इसे सिक्कों और सिल्लियों के रूप में भौतिक तौर पर खरीद सकते हैं या अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मूल्य को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के माध्यम से ट्रेड कर सकते हैं। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई कारकों पर निर्भर करता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या आर्थिक मंदी की आशंकाएं चांदी की सेफ-हेवन मांग को बढ़ाती हैं, हालांकि सोने की तुलना में इसका प्रभाव कुछ सीमित रहता है। चूंकि चांदी पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलता, इसलिए केंद्रीय बैंकों की कम ब्याज दरों के माहौल में यह तेजी से ऊपर चढ़ती है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती चांदी की बढ़त को रोकती है, जबकि कमजोर डॉलर इसे रफ्तार देता है। खनन आपूर्ति, रीसाइक्लिंग दरें और सोने की तुलना में चांदी की अधिक उपलब्धता भी कीमतों को प्रभावित करती है। औद्योगिक जरूरतें और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका सोने के विपरीत, चांदी का एक बड़ा हिस्सा उद्योगों में इस्तेमाल किया जाता है। तांबे और सोने की तुलना में सबसे अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा यानी सोलर पैनल निर्माण में चांदी अनिवार्य धातु है। औद्योगिक मांग में उछाल कीमतों को सीधे ऊपर धकेलता है, जबकि विनिर्माण में गिरावट इसे नीचे लाती है। अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक स्थितियां भी इस पर गहरा प्रभाव डालती हैं। अमेरिका और चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न रासायनिक व तकनीकी प्रक्रियाओं में चांदी की भारी खपत करते हैं। वहीं भारत में आभूषणों और पारंपरिक उपहारों के लिए चांदी की भारी उपभोक्ता मांग बाजार का संतुलन तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसके अलावा, गोल्ड-सिल्वर रेशियो (सोने-चांदी का अनुपात) भी दोनों धातुओं के मूल्यांकन को परखने में मदद करता है। यदि यह अनुपात काफी ऊंचा हो जाए, तो कई निवेशक चांदी को अंडरवैल्यूड मानकर खरीदारी बढ़ाते हैं, जबकि अनुपात घटने पर सोने की सापेक्ष मांग बढ़ती है। अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का ताजा परिदृश्य वित्तीय बाजारों के अन्य हिस्सों में भी बॉन्ड यील्ड की सुस्ती का असर देखा गया। एशियाई कारोबार के दौरान शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) अपने साप्ताहिक निचले स्तर से उबरते हुए 0.7000 के स्तर की ओर अग्रसर हुआ। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने डॉलर को उसके 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे रखा, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को बल मिला, जबकि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी आक्रामक नीतिगत उम्मीदों ने भी इसे सहारा दिया। दूसरी तरफ, जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) 158.00 के करीब अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा। जापान में शुक्रवार को आए आंकड़ों से पता चला कि घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई है, जिससे येन पर दबाव बढ़ गया। सोने की बात करें तो वह दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए शुक्रवार को 4,200 डॉलर के स्तर को फिर से छूने में कामयाब रहा, क्योंकि तेल की कीमतों और ट्रेजरी यील्ड में नरमी से कीमती धातुओं को राहत मिली है। इसके अतिरिक्त, स्टेटिस्टिक्स कनाडा शुक्रवार को सितंबर का लेबर फोर्स सर्वे जारी करने जा रहा है, जहां अगस्त की भारी गिरावट के बाद रोजगार में मामूली सुधार की उम्मीद है। यह रिपोर्ट 22 अगस्त से लागू हुए नए अमेरिकी टैरिफ के पहले पूर्ण प्रभाव को भी दर्शाएगी। इसका आप पर असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में गिरावट के कारण अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर चांदी की कीमतों में तात्कालिक उछाल आया है। • भारत में आभूषण खरीदार: वैश्विक स्तर पर चांदी में तेजी के चलते भारतीय सर्राफा बाजारों में चांदी के जेवर और बर्तनों की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं। त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी करने वाले ग्राहकों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ सकती है। • कमोडिटी ट्रेडर्स और निवेशक: अल्पावधि में चांदी 60 डॉलर के ऊपर टिकने की कोशिश कर रही है, लेकिन 62.14 डॉलर पर मजबूत प्रतिरोध बना हुआ है। यदि ट्रेडर लॉन्ग पोजीशन बना रहे हैं, तो 58.50 डॉलर के स्टॉप लॉस का ध्यान रखना जरूरी होगा। • सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग: औद्योगिक विनिर्माताओं के लिए कच्चे माल की लागत में मामूली बढ़ोतरी देखी जा सकती है। यदि डॉलर में और कमजोरी आई, तो सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को खरीदारी की लागत बढ़ानी होगी। • मुद्रास्फीति और बचतकर्ता: महंगाई से बचाव के लिए चांदी और सोने में निवेश करने वालों के लिए यह एक राहत भरा संकेत है। बॉन्ड यील्ड में ठहराव गैर-ब्याज वाली संपत्तियों में सुरक्षित निवेश की मांग को बनाए रखेगा। ऐसा क्यों हुआ चांदी की कीमतों में यह तेजी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के दो दशक के शिखर से फिसलने और अमेरिकी डॉलर में आए तात्कालिक करेक्शन के कारण आई है। • बॉन्ड यील्ड में रुकावट: 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.36 प्रतिशत के 20 साल के उच्च स्तर को पार करने में विफल रही और नीचे आ गई। यील्ड में इस गिरावट से बिना ब्याज वाली कीमती धातुओं को रखने की अवसर लागत तुरंत कम हो गई। • डॉलर इंडेक्स में नरमी: डॉलर इंडेक्स 0.1 प्रतिशत गिरकर 102.00 के करीब आ गया, जिससे अन्य मुद्राओं वाले विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में बिकने वाली चांदी सस्ती हो गई। डॉलर के कमजोर पड़ने से कमोडिटी में लिवाली को गति मिली। • भू-राजनीतिक अनिश्चितता: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। हालांकि चुनाव से पहले अमेरिकी हमले की आशंका कम है, फिर भी सेफ-हेवन संपत्तियों में निवेशकों की रुचि बनी रही। • आगामी आर्थिक आंकड़े: सितंबर महीने के अमेरिकी सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले ट्रेडर्स अपनी शॉर्ट पोजीशन को कवर कर रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में किसी बड़े बदलाव से पहले स्थिति का आकलन जरूरी है। सवाल-जवाब 1. चांदी की कीमतों में अचानक यह तेजी क्यों आई है? अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के 102.00 के स्तर पर फिसलने से चांदी को मजबूती मिली और इसका भाव 60.40 डॉलर के करीब पहुंच गया। 2. दैनिक चार्ट पर चांदी के लिए प्रमुख रेजिस्टेंस और सपोर्ट स्तर क्या हैं? दैनिक चार्ट पर 20-दिवसीय ईएमए 62.14 डॉलर का स्तर प्राथमिक रेजिस्टेंस है, जबकि 58.50 डॉलर का दो महीने का निचला स्तर मुख्य सपोर्ट का काम कर रहा है। 3. क्या बाजार विशेषज्ञ डॉलर में इस गिरावट को स्थायी मान रहे हैं? नहीं, आईएनजी रणनीतिकारों के अनुसार डॉलर और बॉन्ड यील्ड में आई इस सुस्ती को एक अस्थायी करेक्शन माना जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव अब भी बना हुआ है। 4. सोने-चांदी के अनुपात (गोल्ड/सिल्वर रेशियो) का क्या महत्व है? यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने के बराबर मूल्य के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी, जिससे यह तय करने में मदद मिलती है कि दोनों में से कौन सी धातु अपेक्षाकृत सस्ती या महंगी है। 5. चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य औद्योगिक क्षेत्र कौन से हैं? चांदी की उच्च विद्युत चालकता के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) उद्योग इसके सबसे बड़े औद्योगिक उपभोक्ता हैं। https://trendkia.com/market/ameriki-bonda-yilda-men-giravata-se-silver-men-lauti-chamaka-kya-60-dolara-ke-para-tikegi-teji-45330 TrendKia — Har trend, sabse pehle.