अमेरिकी डॉलर में नरमी और भूराजनीतिक तनाव के बीच ब्रिटिश पाउंड में उछाल अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और आगामी रोजगार डेटा से पहले ब्रिटिश पाउंड में मामूली तेजी दर्ज की गई है। हालांकि, ईरान के साथ तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में आए उछाल और फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बाजार में बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर के कमजोर रुख और आगामी अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के इंतजार के बीच ब्रिटिश पाउंड में मामूली बढ़त देखने को मिल रही है। इसके साथ ही भूराजनीतिक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और मुद्रास्फीति तथा केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर चिंताएं फिर से ताजा हो गई हैं। निवेशक इस सप्ताह आने वाले महत्वपूर्ण आंकड़ों और बैंक ऑफ इंग्लैंड की सुनवाइयों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। ऊर्जा बाजार में उबाल और मुद्रास्फीति की चिंताएं मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी क्रूड ऑयल का प्रमुख वैश्विक मानक, बढ़कर 85.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान यह 86.79 डॉलर के ऊंचे स्तर को छूने के बाद लगभग 2.50 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार कर रहा था। ऊर्जा के मोर्चे पर यह दबाव इस बात को रेखांकित करता है कि भूराजनीतिक जोखिम अभी टले नहीं हैं, जो केंद्रीय बैंकों के सामने मुद्रास्फीति को काबू में रखने की चुनौती को और बढ़ा देते हैं। फेडरल रिजर्व का रुख और रोजगार बाजार की स्थिति फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने स्वीकार किया है कि मुद्रास्फीति अभी भी केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और इसे नियंत्रित करना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि देश का रोजगार बाजार अभी भी काफी मजबूत स्थिति में है। इस बयान के बाद निवेशकों का ध्यान पूरी तरह से आने वाले अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठाएगा। तकनीकी विश्लेषण और पाउंड-डॉलर की चाल दैनिक चार्ट के आधार पर ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की यह जोड़ी 1.3550 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जिससे निकट अवधि में इसका रुझान तेजी का बना हुआ है। यह मुद्रा जोड़ी अपने उन प्रमुख ढांचागत स्तरों से ऊपर टिकी हुई है जिन्हें इसने हाल ही में फिर से हासिल किया था। 50, 100 और 200 के ट्रिपल सिंपल मूविंग एवरेज लगभग 1.3429 के आसपास हैं, जिनसे ऊपर यह जोड़ी बनी हुई है। इसके अलावा, पूर्व की गिरती हुई प्रतिरोध रेखा जिसे 1.3385 पर एक प्रमुख संदर्भ के रूप में देखा जाता था और 1.3482 के पास बढ़त को रोकने वाली मंदी की रेखा को पार करना यह दर्शाता है कि खरीदार बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं। आरएसआई और महत्वपूर्ण समर्थन व प्रतिरोध स्तर इस जोड़ी का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी 14-अवधि का आरएसआई लगभग 54 के पास है, जो इस बात का संकेत देता है कि बाजार में गति स्थिर तो है लेकिन यह अत्यधिक ओवरस्ट्रेच नहीं हुई है। यदि बाजार में गिरावट आती है, तो तत्काल समर्थन 1.3550 के हालिया पिवट क्षेत्र के पास मौजूद है। इसके बाद पूर्व की ट्रेंड-लाइन बाधाएं जो अब समर्थन का काम कर रही हैं, 1.3482 और 1.3385 के स्तर पर स्थित हैं। साथ ही, 1.3409 से 1.3429 के दायरे में ट्रिपल एसएमए और एक बढ़ती हुई समर्थन रेखा मध्यम अवधि के आधार को और मजबूत करती हैं। ऊपरी स्तरों पर बाधाएं और व्यापक मुद्रा प्रदर्शन ऊपरी मोर्चे पर अगली उल्लेखनीय बाधा 1.3644 के आसपास टूटी हुई बढ़ती ट्रेंड-लाइन के पास है, जहां से किसी भी तरह की अस्वीकृति बाजार में समेकन का संकेत देगी। हालांकि, यदि इस स्तर से ऊपर लगातार तेजी बनी रहती है, तो यह व्यापक तेजी के सिलसिले को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर देगी। अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है और विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत मुद्रा के रूप में उभरा है। अन्य प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों की स्थिति विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और डॉलर की जोड़ी ने भी प्रमुख 1.1600 के अवरोध को पार कर लिया है, क्योंकि अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में शुक्रवार की भारी गिरावट के बाद थोड़ा सुधार देखा गया है, हालांकि यह अभी भी 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के निचले दायरे में संघर्ष कर रहा है। इसके अलावा, बिटकॉइन 78,000 डॉलर से ऊपर अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है, जबकि एथेरियम 2,400 डॉलर से ऊपर टिककर अपने तकनीकी ढांचे को बेहतर कर रहा है और रिपल 1.37 डॉलर के पास सुधार के संकेत दे रहा है। इसका आप पर असर मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर की चाल का सीधा असर आयात लागत, विदेशी यात्राओं और वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है। • भारत में: विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से आयातित जिंसों और ऊर्जा की कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव घरेलू स्तर पर ईंधन और महंगाई पर देखा जा सकता है। • वैश्विक स्तर पर: मुद्रा बाजार के निवेशकों और ट्रेडर को अमेरिकी रोजगार डेटा और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि इनसे ब्याज दरों और परिसंपत्ति के मूल्यों में फेरबदल हो सकता है। सवाल-जवाब 1. ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी किस स्तर पर कारोबार कर रही है? यह जोड़ी 1.3550 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है। 2. कच्चे तेल के बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई की कीमत क्या रही? वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल बढ़कर 85.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। 3. फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने मुद्रास्फीति के बारे में क्या कहा? उन्होंने स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति अभी भी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर है और उनकी प्राथमिकता है। 4. इस मुद्रा जोड़ी का आरएसआई स्तर कितना है? इस जोड़ी का 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स लगभग 54 के पास है। 5. यूरो और डॉलर की जोड़ी ने कौन सा प्रमुख स्तर पार किया? यूरो-डॉलर की जोड़ी ने 1.1600 के महत्वपूर्ण अवरोध को पार कर लिया है। https://trendkia.com/market/ameriki-dolara-men-narami-aura-bhurajanitika-tanava-ke-bicha-british-pound-men-uchhala-25352 TrendKia — Har trend, sabse pehle.