# अमेरिकी डॉलर 102.20 के शिखर के करीब टिका, ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों से मिला सहारा

> सितंबर महीने के रोजगार आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.88 के आसपास मजबूती से बना हुआ है, जहां फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति ग्रीनबैक को सहारा दे रही है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/ameriki-dollar-102-20-ke-shikhara-ke-kariba-tika-byaja-daron-men-aura-barhotari-ki-ummidon-se-mila-sahara-41763 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, विदेशी मुद्रा बाजार, डॉलर इंडेक्स, मुद्रास्फीति, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने एक साल से अधिक के उच्चतम स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है। शुक्रवार को महत्वपूर्ण अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों के आने से ठीक पहले डॉलर इंडेक्स मामूली नरमी के साथ 101.88 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इससे एक दिन पहले ही इस इंडेक्स ने 102.20 का नया वार्षिक शिखर दर्ज किया था। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक आर्थिक स्थिरता और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे भी आक्रामक बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने अमेरिकी मुद्रा के प्रति निवेशकों के रुझान को बेहद मजबूत बनाए रखा है।

## फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद
मुद्रा बाजार के सहभागियों और विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती डॉलर को लगातार बढ़त दिला रही है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के रणनीतिकारों के अनुसार डॉलर इंडेक्स में सभी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले तेजी देखी जा रही है और यह अपने नए चक्रीय उच्च स्तर को छू रहा है। अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती, श्रम बाजार में मांग का लगातार बना रहना और उम्मीद से अधिक जिद्दी मुद्रास्फीति ऐसे प्रमुख कारण हैं, जिन्होंने बाजार में अगले बारह महीनों के भीतर फेडरल रिजर्व फंड्स दर में लगभग 100 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावनाओं को मजबूत कर दिया है। इसी आक्रामक नीतिगत रुख के दम पर अमेरिकी डॉलर को चौतरफा समर्थन मिल रहा है।

विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि जब तक मुद्रास्फीति फेड के दो प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से ऊपर बनी रहेगी, तब तक ब्याज दरों में कमी की कोई संभावना नहीं दिखती। इस नीतिगत अंतर के कारण विदेशी पूंजी का प्रवाह डॉलर की ओर बना हुआ है, जिससे यूरो और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मांग काफी बढ़ गई है। इस पूरे हफ्ते के कारोबारी सत्रों में अमेरिकी डॉलर ने साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो के सामने सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज कराया है।

## तकनीकी संकेत और डॉलर इंडेक्स के प्रमुख स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का मौजूदा स्तर 101.88 के करीब दर्ज किया गया है। लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक डॉलर इंडेक्स 101.89 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 102.10 से 0.20 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 95.55 से 102.21 के बीच रहा है। तकनीकी संरचना को देखें तो यह इंडेक्स अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 100.70 से काफी ऊपर बना हुआ है, जो इसके निकट अवधि के तेजी के रुख को पूरी मजबूती प्रदान करता है। लाइव आंकड़ों में 20-दिवसीय EMA 100.71 पर है, जबकि 50-दिवसीय EMA 100.24 और 200-दिवसीय EMA 99.46 पर स्थित हैं। इसके अलावा 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 100.00 और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 99.27 पर हैं, जहां गोल्डन क्रॉसओवर दीर्घकालिक तेजी की पुष्टि करता है।

तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 73.18 के स्तर पर है, जबकि लाइव तकनीकी गणना में यह 71 पर ओवरबॉट क्षेत्र में दर्ज हुआ है। यह स्थिति दर्शाती है कि मौजूदा उछाल काफी खिंच चुका है, हालांकि अभी तक इसमें किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल या कमजोरी का संकेत नहीं मिला है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) 0.58 पर है, जो सिग्नल लाइन 0.39 से ऊपर है और इसका हिस्टोग्राम 0.19 के साथ तेजी की पुष्टि करता है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 36 पर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार को दिखाता है। बोलिंगर बैंड्स 98.32 से 102.41 के दायरे में हैं और कीमत बैंड्स के भीतर बनी हुई है।

गिरावट की स्थिति में इंडेक्स के लिए शुरुआती समर्थन 100.70 के 20-दिवसीय EMA स्तर पर मौजूद है, जबकि लाइव दैनिक पिवट 101.96 पर है और तात्कालिक समर्थन S1 101.78 तथा S2 101.67 पर देखे जा रहे हैं। ऊपर की ओर, हाल ही में बना 102.20 का वार्षिक उच्च स्तर तात्कालिक प्रतिरोध बना हुआ है। यदि डॉलर इंडेक्स इस बाधा को सफलतापूर्वक पार करता है, तो अगला बड़ा तकनीकी प्रतिरोध 10 अप्रैल 2025 का उच्चतम स्तर 103.03 होगा, जिसके बीच प्रतिरोध स्तर R1 102.07 और R2 102.24 के रूप में सामने आएंगे। 0.45 का एवरेज ट्रू रेंज (ATR) दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है।

## वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की भूमिका
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों की वास्तविक यानी डिफैक्टो मुद्रा भी है, जहां यह स्थानीय बैंक नोटों के साथ प्रचलन में रहती है। वर्ष 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर दुनिया में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में इसका दैनिक लेन-देन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड को पीछे छोड़कर दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का स्थान हासिल किया था। अपने लंबे ऐतिहासिक सफर में अमेरिकी डॉलर अधिकांश समय सोने द्वारा समर्थित रहा, लेकिन वर्ष 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ ही इसका गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त हो गया और यह फिएट मुद्रा व्यवस्था में बदल गया।

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियां कैसे तय करती हैं डॉलर का मूल्य
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक को दो प्रमुख कानूनी जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता यानी मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखना और अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार की स्थिति को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेड का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों का समायोजन करना है।

जब देश में कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। अधिक ब्याज दरों से विदेशी निवेशकों को अमेरिकी संपत्तियों पर बेहतर प्रतिफल मिलता है, जिससे डॉलर की कीमत मजबूत होती है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर अत्यधिक बढ़ जाती है, तो फेड अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर के मूल्य पर दबाव पड़ता है और यह कमजोर होने लगता है।

## मात्रात्मक ढील और सख्त मौद्रिक कदमों का प्रभाव
अत्यधिक गंभीर और असाधारण आर्थिक संकटों के समय फेडरल रिजर्व वित्तीय व्यवस्था में अधिक डॉलर जारी करके मात्रात्मक ढील यानी क्वांटिटेटिव ईजिंग की नीति अपनाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से फेड ठप पड़ी वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रवाह को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब बैंकों द्वारा एक-दूसरे को डिफ़ॉल्ट के डर से उधार देना बंद करने के कारण कर्ज मिलना बंद हो जाता है। जब केवल ब्याज दरों में कटौती से राहत नहीं मिलती, तब इसे अंतिम उपाय के रूप में आजमाया जाता है।

वर्ष 2008 के महामंदी के संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का इस्तेमाल किया था। इसमें फेड नए डॉलर जारी करता है और उनसे वित्तीय संस्थानों से मुख्य रूप से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग वह प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का पुनर्निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया बाजार से नकदी को कम करती है और आमतौर पर डॉलर के लिए सकारात्मक मानी जाती है।

## रोजगार रिपोर्ट से पहले अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का रुख
शुक्रवार को अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट आने से पहले दुनिया भर की प्रमुख संपत्तियों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उछलकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ा। डॉलर के अपने 17 महीने के उच्च स्तर से मुनाफावसूली के चलते पीछे हटने से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा मिला, साथ ही वैश्विक प्रतिफल और मुद्रास्फीति जोखिमों के बीच ऑस्ट्रेलिया में नवंबर की संभावित ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों ने इसे ताकत दी।

दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर 158.00 के करीब नई दिशा तलाशने के लिए जूझता दिखा। टोक्यो के उम्मीद से ज्यादा गर्म मुद्रास्फीति आंकड़ों और डॉलर की व्यापक नरमी के चलते यह जोड़ी अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से नीचे आ गई। कमोडिटी बाजार में सोने ने अपने एशियाई सत्र की गिरावट को पाटते हुए 4,200 डॉलर के स्तर के करीब वापसी की। हालांकि, डॉलर की अंतर्निहित मजबूती के चलते सोने की किसी भी बड़ी बढ़त पर लगाम लगी हुई है, क्योंकि निवेशक रोजगार आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पूर्वानुमान के अनुसार सितंबर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में केवल 90 हजार नई नौकरियां जुड़ने की उम्मीद है, जो पिछले महीने के 162 हजार से काफी कम है। इसी बीच, डिजिटल परिसंपत्ति पाई नेटवर्क में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया और 3 प्रतिशत से अधिक की दैनिक गिरावट के बाद यह 0.0900 डॉलर के आसपास मंडरा रहा है, जहां इसके लिए 0.1000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर पार करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीति का सीधा असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, आयात लागत और आम निवेशकों पर पड़ता है।

- **भारत में प्रभाव:** मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात महंगा होने की संभावना रहती है। इसके चलते घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें और आयातित वस्तुओं के दाम प्रभावित हो सकते हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के आकर्षक होने से उभरते बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशक पूंजी निकाल सकते हैं। शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए इक्विटी निवेशकों को पोर्टफोलियो में अत्यधिक जोखिम वाले दांव से बचना चाहिए।
- **सोना और कमोडिटी खरीदारों के लिए:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों पर डॉलर की तेजी का दबाव बना रहता है, जिससे कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव रह सकता है। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी के कारण भारत में स्थानीय सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम रहती है।
- **विदेश यात्रा और शिक्षा:** जिन छात्रों को अमेरिका या विदेश में पढ़ाई के लिए फीस चुकानी है, डॉलर के मजबूत रहने से उनके खर्च में वृद्धि हो सकती है। विदेश यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को मुद्रा विनिमय दरों पर नजर रखकर समय पर हेजिंग करने पर विचार करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का अपने वार्षिक शिखर 102.20 के करीब टिके रहना मुख्य रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आक्रामक उम्मीदों का परिणाम है।

- **आर्थिक आंकड़ों में निरंतर मजबूती:** संयुक्त राज्य अमेरिका में उपभोक्ता मांग, आर्थिक गतिविधियां और श्रम बाजार का प्रदर्शन उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत बना हुआ है। इस सुदृढ़ पृष्ठभूमि ने मंदी की आशंकाओं को खारिज करते हुए डॉलर की मांग को बनाए रखा है।
- **जिद्दी मुद्रास्फीति और फेड की सख्ती:** अमेरिकी मुद्रास्फीति के फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बने रहने के कारण नीति निर्माताओं को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर होना पड़ा है। बाजार अब अगले बारह महीनों में करीब 100 आधार अंकों की अतिरिक्त दर वृद्धि का अनुमान लगा रहा है।
- **नीतिगत अंतर और डॉलर का प्रभुत्व:** यूरोप और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अमेरिकी अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर रही है, जिससे वैश्विक पूंजी डॉलर संपत्तियों की ओर आकर्षित हो रही है। यूरो और अन्य मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ऊंची प्रतिफल दर इसे दुनिया भर के निवेशकों की पहली पसंद बना रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा था?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.88 के आसपास मामूली गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जो इसके हालिया 102.20 के वार्षिक उच्च स्तर के करीब है।

### 2. फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है?
बाजार के रणनीतिकारों और निवेशकों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अगले बारह महीनों की अवधि में ब्याज दरों में लगभग 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है।

### 3. डॉलर इंडेक्स के लिए तात्कालिक तकनीकी समर्थन और प्रतिरोध स्तर क्या हैं?
डॉलर इंडेक्स के लिए 100.70 पर स्थित 20-दिवसीय ईएमए प्रमुख समर्थन है, जबकि 102.20 का हालिया शिखर तात्कालिक प्रतिरोध स्तर बना हुआ है।

### 4. सितंबर महीने के लिए अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों का अनुमान क्या है?
सितंबर महीने में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 90 हजार नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान है, जो पिछले महीने के 162 हजार के आंकड़े से कम है।

### 5. वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की कितनी हिस्सेदारी है?
वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो रोजाना लगभग 6.6 ट्रिलियन डॉलर है।

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