अमेरिकी डॉलर के सामने 0.7000 पर थमी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त, वैश्विक करेंसी बाजारों में मिला-जुला रुख रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरों पर नरम पड़ती उम्मीदों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के स्तर से नीचे सीमित बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अपनी मजबूती बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही रुका हुआ है। कारोबारी सत्र के दौरान मामूली गिरावट के साथ खुलने के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने वापसी की, हालांकि छुट्टियों के कारण पतले कारोबार और सीमित नकदी प्रवाह के बीच इसमें बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला। पिछले सप्ताह के कारोबारी रुझानों पर नजर डालें तो यह मुद्रा 0.6958 और 0.6989 के दायरे में घूमने के बाद 0.31 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 0.6981 पर बंद हुई थी। तकनीकी रूप से बुनियादी गति मजबूत बनी हुई है और छोटी अवधि में इसके थोड़ा और ऊपर जाने की गुंजाइश दिख रही है, लेकिन 0.7000 की सीमा को पार करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तर बाजार के तकनीकी ढांचे को देखें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए नीचे की तरफ 0.6970 का स्तर पहला तात्कालिक सहारा प्रदान कर रहा है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो इसके बाद 0.6960 का स्तर अगले मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा। इससे पहले शुक्रवार को बाजार विश्लेषकों ने संकेत दिया था कि यह मुद्रा 0.6945 से 0.6985 के दायरे में रह सकती है। वहीं एक से तीन सप्ताह के मध्यम अवधि के नजरिए से देखें तो 07 अक्टूबर को जब हाजिर भाव 0.6980 पर था, तब से इस करेंसी को लेकर तटस्थ रुख बना हुआ है। आने वाले दिनों में इसके 0.6935 से लेकर 0.7020 के व्यापक दायरे में कारोबार करने की संभावना जताई जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तेजी पर ब्रेक लगने का एक प्रमुख कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी मौद्रिक नीति भी है। नवंबर के महीने में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाएं काफी कमजोर पड़ चुकी हैं। जब तक ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत नहीं होतीं, तब तक इस मुद्रा के लिए ऊपरी स्तरों पर टिक पाना आसान नहीं होगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से आई हल्की गिरावट के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने निचले स्तरों से उबरने की कोशिश की है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित रह गई। जापानी येन और 158.00 के पार डॉलर का दबाव डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी एक सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल रहा है। यह मुद्रा जोड़ी 158.00 के अहम स्तर से ऊपर बनी हुई है। जापानी मुद्रा बाजार में इस समय काफी सतर्कता बरती जा रही है क्योंकि निवेशकों को यह आशंका सता रही है कि येन में तेज गिरावट को थामने के लिए सरकारी अधिकारी या बैंक ऑफ जापान सीधे बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी ने डॉलर के खरीदारों को थोड़ा पीछे धकेला है, जिससे इस जोड़ी की ऊपरी रफ्तार थमी है। इसके साथ ही जापान और अमेरिका दोनों देशों में सार्वजनिक अवकाश होने के कारण बाजार में लिक्विडिटी की भारी कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बने रहने से सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर को निचली सतहों पर सहारा मिल रहा है, जिससे इसकी गिरावट काफी सीमित दायरे में बनी हुई है। सोने की कीमतों में गिरावट और फेडरल रिजर्व का रुख कमोडिटी बाजार में सोने की चाल पर भी डॉलर की चाल का सीधा असर देखा गया। पीली धातु अपने एक सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलते हुए शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान 4,170 डॉलर प्रति औंस के नए दैनिक निचले स्तर तक आ गई। फेडरल रिजर्व के सख्त और आक्रामक नीतिगत रुख के कारण अमेरिकी डॉलर में निचले स्तरों से दोबारा खरीदारी लौट आई। गैर-उपज वाली संपत्ति होने की वजह से सोने पर इस बढ़ती डॉलर मांग और नीतिगत सख्ती का नकारात्मक दबाव साफ दिखाई दे रहा है। क्रिप्टो बाजार में पाई नेटवर्क पर दबाव डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में पाई नेटवर्क में लगातार बिकवाली का माहौल बना हुआ है। पाई टोकन 0.0800 डॉलर के स्तर के ठीक ऊपर कारोबार कर रहा है। सोशल मीडिया पर इसके बारे में चर्चाएं और बातचीत भले ही तेजी से बढ़ रही हों, लेकिन टोकन के लिए सट्टा मांग लगातार कमजोर पड़ रही है। इसका ओपन इंटरेस्ट 9 मिलियन डॉलर से नीचे आ चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया की हलचल निवेशकों के घबराहट भरे रुख से प्रेरित है। तकनीकी दृष्टिकोण से पाई टोकन में मंदी का रुख बना हुआ है और इसके 0.0800 डॉलर के महत्वपूर्ण सपोर्ट को तोड़कर नीचे जाने का जोखिम बना हुआ है। भारतीय रुपये की चाल और रिजर्व बैंक के उपाय घरेलू मुद्रा बाजार की बात करें तो भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के खिलाफ मजबूती के साथ खुला और 95.80 के करीब अपनी रिकवरी बढ़त को बनाए रखने में सफल रहा। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अमेरिकी डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए नए कदमों से घरेलू मुद्रा को जरूरी राहत मिली है। केंद्रीय बैंक के इन उपायों से डॉलर की एकतरफा मांग पर लगाम लगी है, जिससे भारतीय रुपये को अपनी स्थिति स्थिर करने में काफी मदद मिली है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर और प्रमुख मुद्राओं के इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आयात लागत और निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ता है। • भारत में आयातकों और छात्रों के लिए: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 95.80 के पास रुपये को संभालने से विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और आयातकों को डॉलर की तेज महंगाई से थोड़ी राहत मिलेगी। हालांकि विनिमय दर पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि डॉलर की वैश्विक मजबूती आगे चलकर आयातित सामान महंगा कर सकती है। • सोने के खरीदारों और आभूषण प्रेमियों के लिए: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के 4,170 डॉलर तक फिसलने से घरेलू बाजार में भी कीमतों में हल्की स्थिरता या नरमी देखने को मिल सकती है। त्योहारी सीजन या शादी-ब्याह के लिए खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए यह स्तर आकर्षक हो सकता है। • क्रिप्टो और डिजिटल एसेट ट्रेडर्स के लिए: पाई नेटवर्क के 0.0800 डॉलर के समर्थन स्तर पर टिके रहने के संघर्ष के बीच छोटे निवेशकों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। 9 मिलियन डॉलर से नीचे ओपन इंटरेस्ट गिरना यह दर्शाता है कि बाजार में नई पूंजी आने के बजाय घबराहट की बिकवाली हो रही है। • वैश्विक यात्रियों और एनआरआई के लिए: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का 0.7000 के नीचे सीमित रहना ऑस्ट्रेलिया यात्रा करने वालों या वहां से पैसे भेजने वाले प्रवासियों के लिए विनिमय दरों को स्थिर दायरे में बनाए रखेगा। आने वाले दिनों में ब्याज दरों के फैसलों से पहले ही करेंसी एक्सचेंज की योजना बनाना बेहतर होगा। ऐसा क्यों हुआ मुद्रा और कमोडिटी बाजार में यह गतिशीलता केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बदलाव और छुट्टियों के कारण कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के संयोजन से उत्पन्न हुई है। • ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की नीतिगत उम्मीदें: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में ठहराव का मुख्य कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों का तेजी से घटना है। जब अतिरिक्त दरों की संभावना कमजोर हुई, तो खरीदारों का भरोसा 0.7000 के ऊपर खरीदारी करने में डगमगा गया। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड की सख्ती: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से हल्की गिरावट के बावजूद फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख ने डॉलर को सहारा दिया। इस मजबूती ने सोने और अन्य प्रतिस्पर्धी मुद्राओं पर निरंतर दबाव बनाए रखा। • जापान और अमेरिका में छुट्टियों का असर: दोनों बड़े वित्तीय केंद्रों में अवकाश होने से ट्रेडिंग वॉल्यूम बेहद कम रहा, जिसके चलते बड़ी मुद्राओं में ब्रेकआउट होने के बजाय सीमित दायरे में ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। • आरबीआई द्वारा डॉलर मांग पर नियंत्रण: भारतीय रुपये में मजबूती भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का सीधा नतीजा है, जिससे बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगी। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए तात्कालिक समर्थन स्तर क्या हैं? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए पहला सहारा 0.6970 पर है, जिसके नीचे 0.6960 का स्तर अगला समर्थन प्रदान करता है। 2. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के पार जाने में क्यों असमर्थ रहा? नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कमजोर पड़ती संभावनाओं और अमेरिकी डॉलर के सुधार के कारण यह मुद्रा 0.7000 के नीचे रुकी हुई है। 3. सोने की कीमत में हालिया गिरावट का क्या कारण है? फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और डॉलर में निचले स्तरों से आई रिकवरी के चलते सोना 4,170 डॉलर प्रति औंस के नए दैनिक निचले स्तर तक फिसल गया। 4. पाई नेटवर्क टोकन के सामने क्या तकनीकी जोखिम है? पाई टोकन 0.0800 डॉलर के समर्थन स्तर के पास कारोबार कर रहा है और ओपन इंटरेस्ट 9 मिलियन डॉलर से नीचे गिरने के कारण इसके इस स्तर से नीचे टूटने का जोखिम बना हुआ है। 5. भारतीय रुपये में किस वजह से मजबूती देखी गई? भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अमेरिकी डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए नए कदमों से रुपये को राहत मिली और यह 95.80 के करीब संभला। 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