# अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने से ब्रिटिश पाउंड में गिरावट, अहम सपोर्ट लेवल टूटे

> फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और सख्त रुख के बाद ब्रिटिश पाउंड 1.3400 के नीचे फिसल गया है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत फैसले से पहले डॉलर की मजबूती ने वैश्विक करेंसी बाजारों पर दबाव बना दिया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/ameriki-fed-ke-byaja-daren-barhane-se-british-pound-men-giravata-ahama-saporta-levala-tute-33750 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिटिश पाउंड, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड, विदेशी मुद्रा बाजार, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरें, वित्त

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर दबाव गहरा गया है। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) करेंसी जोड़ी महत्वपूर्ण 1.3400 के स्तर से नीचे फिसल गई है और इसने अपने 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) को भी तोड़ दिया है। फेडरल रिजर्व ने उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों (बीपीएस) का इजाफा किया है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर में चौतरफा मजबूती देखने को मिल रही है। इस फैसले के बाद अमेरिकी उधारी लागत अब ब्रिटेन की मुख्य ब्याज दर से आगे निकल गई है, जिससे पाउंड स्टर्लिंग पर नकारात्मक असर पड़ा है।

ब्रिटेन में बैंक ऑफ इंग्लैंड अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में गुरुवार को 11:00 जीएमटी पर ब्याज दरों को लेकर मतदान करने वाला है। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि समिति के छह सदस्य दरों को मौजूदा स्तर पर स्थिर रखने के पक्ष में वोट देंगे, जबकि तीन सदस्य दरों में बढ़ोतरी का समर्थन कर सकते हैं। ब्रिटेन की मुख्य नीतिगत ब्याज दर, जिसे बैंक रेट कहा जाता है, दिसंबर 2025 से 3.75% पर बनी हुई है और बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी पिछली बैठकों में इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। फेडरल रिजर्व की ताजा बढ़ोतरी के बाद दोनों केंद्रीय बैंकों की दरों के बीच का फासला भले ही केवल एक-आठवां प्रतिशत अंक हो, लेकिन दरों का यह अंतर अब पाउंड के प्रतिकूल हो गया है।

## फेडरल रिजर्व का रुख और आर्थिक अनुमान
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के आर्थिक अनुमान दर्शाते हैं कि अमेरिका और ब्रिटेन के बीच ब्याज दरों का यह अंतर आने वाले समय में और बढ़ सकता है। फेडरल रिजर्व की समिति का अनुमान है कि उसकी बेंचमार्क ब्याज दर इस वर्ष के अंत में 4.1% रहेगी और 2027 के अंत तक भी 4.1% के स्तर पर ही बनी रहेगी। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व ने अपने श्रम बाजार के आकलन में कहा है कि अमेरिका में बेरोजगारी दर 2029 तक 4.1% पर स्थिर रहने की संभावना है। यह स्तर केंद्रीय बैंक के 4.2% के सामान्य मानक से भी कम है। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे कम से कम एक साल तक दरों में कटौती करने की कोई जल्दबाजी नहीं देखते, और पाउंड स्टर्लिंग इसी नीतिगत फासले के दबाव में कारोबार कर रहा है।

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने नीतिगत घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में काफी सख्त टिप्पणियां कीं। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने महंगाई को लेकर चिंता जताई है, जिससे वित्तीय बाजारों में यह धारणा मजबूत हुई है कि साल के अंत से पहले फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। इन बयानों के बाद अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले तेजी से मजबूत हुआ है।

## तकनीकी विश्लेषण और अहम प्राइस लेवल्स
चार्ट्स पर जीबीपी/यूएसडी का तकनीकी ढांचा 1.3400 के नीचे मंदी की ओर झुका हुआ है। बुधवार को पाउंड इस स्तर के नीचे कारोबार कर गया था। ऊपर की ओर, पाउंड के लिए पहला बड़ा रेजिस्टेंस 1.3400 का स्तर है। इसके बाद 200-दिवसीय ईएमए (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) का क्षेत्र आता है जो 1.3450 से ठीक नीचे स्थित है, और फिर 1.3500 का स्तर रेजिस्टेंस का काम करेगा जहां हालिया महंगाई आंकड़ों के बाद आई तेजी थम गई थी। जब तक पाउंड 1.3450 के ऊपर दैनिक क्लोजिंग नहीं देता, तब तक तकनीकी रुझान मंदी का ही बना रहेगा।

नीचे की ओर, पाउंड के लिए पहला सपोर्ट बुधवार का निचला स्तर है जो 1.3350 के ठीक ऊपर दर्ज किया गया था। इसके बाद दूसरा प्रमुख सपोर्ट 1.3300 के स्तर पर है, जो अगस्त की शुरुआत में बनी मजबूत आधार रेखा थी। दैनिक चार्ट पर मोमेंटम संकेतक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (स्टोच आरएसआई) 16 के स्तर पर दर्ज किया गया है और पिछले कुछ दिनों से इसी निचले दायरे में सपाट बना हुआ है। यह स्थिति दर्शाती है कि बिकवाली का दबाव काफी खिंच चुका है और ओवरसोल्ड स्थिति बन रही है। ऐसे में यदि 1.3400 की ओर कोई मामूली पुलबैक आता भी है, तो उससे समग्र मंदी का ढांचा नहीं बदलेगा।

लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, जीबीपी/यूएसडी 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.34 के मुकाबले 0.28% की बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों पर 14-अवधि का आरएसआई 38 पर है। एमएसीडी -0.00 बनाम सिग्नल -0.00 पर मंदी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेजेस में 20-दिवसीय ईएमए 1.35, 50-दिवसीय ईएमए 1.35 और 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए और 200-दिवसीय एसएमए दोनों 1.35 पर स्थित हैं। लंबी अवधि का रुझान नीचे की ओर बना हुआ है, हालांकि 50 ईएमए और 200 ईएमए के बीच गोल्डन क्रॉस मौजूद है। बोलिंगर बैंड्स (20, 2) 1.34 से 1.37 के दायरे में हैं, और कीमत बैंड्स के भीतर है। एडीएक्स 22 पर सीमित दायरे का संकेत दे रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 25 और सिग्नल लाइन 18 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर है। पिवट 1.34 पर है, जबकि रेजिस्टेंस आर1 और आर2 1.34 पर और सपोर्ट एस1 और एस2 1.34 पर हैं।

## पाउंड स्टर्लिंग की वैश्विक स्थिति और मूल्य निर्धारक कारक
पाउंड स्टर्लिंग (जीबीपी) विश्व की सबसे पुरानी मुद्रा है, जिसका इतिहास 886 ईस्वी से जुड़ा है, और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा (एफएक्स) बाजार में यह दुनिया की चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है, जिसकी कुल वैश्विक लेन-देन में 12% हिस्सेदारी है और रोजाना औसतन 630 अरब डॉलर का कारोबार होता है। इसके प्रमुख ट्रेडिंग पेअर्स में जीबीपी/यूएसडी (जिसे ट्रेडर 'केबल' कहते हैं) शामिल है जो पूरे एफएक्स बाजार का 11% हिस्सा बनाता है। इसके बाद जीबीपी/जेपीवाई (जिसे ट्रेडर्स 'ड्रैगन' कहते हैं) 3% और ईयूआर/जीबीपी 2% हिस्सेदारी रखता है। पाउंड स्टर्लिंग को जारी करने का अधिकार बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास है।

पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण घटक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। बैंक ऑफ इंग्लैंड अपने फैसले इस आधार पर तय करता है कि क्या उसने 2% के करीब मुद्रास्फीति बनाए रखने के अपने प्राथमिक लक्ष्य, यानी मूल्य स्थिरता, को हासिल किया है या नहीं। इस लक्ष्य को पाने के लिए उसका मुख्य साधन ब्याज दरों का समायोजन है। जब मुद्रास्फीति अत्यधिक ऊंची होती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण को महंगा करता है, जिससे अर्थव्यवस्था में खपत और उधारी कम होती है। यह आम तौर पर पाउंड के लिए सकारात्मक होता है क्योंकि ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को यूके में पूंजी निवेश के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई बहुत नीचे गिर जाती है तो यह धीमी आर्थिक वृद्धि का संकेत होता है, और ऐसे में बैंक ऑफ इंग्लैंड विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करता है।

इसके अतिरिक्त, आर्थिक आंकड़े जैसे जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई और रोजगार रिपोर्ट भी पाउंड की दिशा तय करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था पाउंड को सहारा देती है क्योंकि यह विदेशी निवेश आकर्षित करती है और केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकती है। वहीं, व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) भी एक अहम संकेतक है, जो एक निश्चित अवधि में किसी देश द्वारा निर्यात से अर्जित आय और आयात पर किए गए खर्च के अंतर को मापता है। यदि किसी देश के निर्यात की वैश्विक स्तर पर भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा आवश्यक मुद्रा खरीदने से उस मुद्रा की मांग और मूल्य दोनों में वृद्धि होती है। सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूती देता है, जबकि नकारात्मक संतुलन कमजोरी लाता है।

## अन्य वैश्विक बाजारों और संपत्तियों पर प्रभाव
फेडरल रिजर्व की नीतिगत घोषणा का असर केवल पाउंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं और कमोडिटीज पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। एशियाई सत्र में शुरुआती कारोबार के दौरान एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) जोड़ी 0.7100 के नीचे कारोबार कर रही थी, क्योंकि डॉलर इंडेक्स में जबरदस्त उछाल देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर अमेरिकी दरों में आगे भी बढ़ोतरी होने की संभावनाओं का दबाव बना हुआ है।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी भारी कमजोरी देखी गई। यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) जोड़ी गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 156.00 के करीब नए साप्ताहिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेशों के लिए खरबों डॉलर के वित्तपोषण में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह मौद्रिक नीति को सख्त करने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे यह स्थिति नए चरण में प्रवेश कर सकती है। जहां अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने पहले ही ब्याज दरें बढ़ा दी थीं, वहीं जापान लंबे समय तक अपवाद बना रहा था।

कमोडिटी बाजार में सोने ने अपनी इंट्राडे बढ़त गंवा दी और नकारात्मक दायरे में आ गया। एक्सएयू/यूएसडी (XAU/USD) जोड़ी संक्षेप में 4,360 डॉलर के स्तर को पार करने के बाद फिसल गई और 4,250 डॉलर के प्राइस जोन की ओर तेजी से गिरती नजर आई। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन द्वारा दिए गए सख्त बयानों ने सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ा दिया है क्योंकि साल के अंत से पहले अमेरिकी ब्याज दरों में अतिरिक्त वृद्धि की संभावनाओं ने सरकारी बॉन्ड यील्ड और डॉलर को मजबूत सहारा दिया है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी और पाउंड में कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय, आयात लागत और विदेश यात्रा पर सीधा असर पड़ेगा।

- **मुद्रा विनिमय:** यूके में पढ़ाई करने वाले छात्रों और वहां यात्रा करने वालों के लिए डॉलर के मुकाबले पाउंड थोड़ा सस्ता हुआ है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से डॉलर में होने वाले खर्च और आयात महंगे हो जाएंगे।
- **वैश्विक निवेशक:** ब्याज दरों में बढ़ोतरी से अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर संपत्तियों का आकर्षण बढ़ गया है। निवेशकों के लिए उभरते बाजारों और गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर रिटर्न का दबाव देखने को मिल सकता है।
- **आयात और व्यापार:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत रहने से कच्चे तेल और अन्य जरूरी आयातित वस्तुओं के बिल बढ़ सकते हैं। व्यापारिक कंपनियों को अपनी विदेशी मुद्रा हेजिंग रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा।
- **ऋण लागत:** वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची बने रहने के संकेत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाणिज्यिक उधारी महंगी रहेगी। विदेशी ऋण लेने वाली कंपनियों को ब्याज भुगतान के रूप में अधिक लागत उठानी पड़ेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और भविष्य में भी सख्त नीति बनाए रखने के रुख के कारण ब्रिटिश पाउंड में गिरावट आई है। ब्रिटेन और अमेरिका के बीच मौद्रिक नीति में बढ़ता अंतर इस मुद्रा दबाव का मुख्य कारण है।

- **नीतिगत दर में बढ़ोतरी:** फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 आधार अंकों का इजाफा किया है। इसके साथ ही अमेरिकी दरें ब्रिटेन के 3.75% के बैंक रेट से अधिक हो गई हैं, जिससे पूंजी का प्रवाह डॉलर की ओर बढ़ गया है।
- **सख्त भविष्योन्मुखी मार्गदर्शन:** फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने मुद्रास्फीति को लेकर चिंता जताई और दरों को लंबे समय तक 4.1% पर बनाए रखने का संकेत दिया। इस रुख ने बाजार को यह संदेश दिया कि दर कटौती निकट भविष्य में संभव नहीं है।
- **बैंक ऑफ इंग्लैंड का ठहराव:** ब्रिटेन का केंद्रीय बैंक दिसंबर 2025 से अपनी दरों को 3.75% पर बनाए हुए है और आगामी बैठक में भी दरों में बदलाव न होने का अनुमान है। दोनों देशों की नीतिगत दरों में इस असंतुलन ने पाउंड के आकर्षण को घटाया है।

## सवाल-जवाब

### 1. जीबीपी/यूएसडी में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और सख्त रुख के कारण डॉलर मजबूत हुआ और पाउंड 1.3400 के नीचे आ गया।

### 2. बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौजूदा ब्याज दर क्या है?
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मुख्य नीतिगत ब्याज दर (बैंक रेट) दिसंबर 2025 से 3.75% पर स्थिर बनी हुई है।

### 3. फेडरल रिजर्व का बेरोजगारी और दरों को लेकर क्या अनुमान है?
फेडरल रिजर्व का अनुमान है कि उसकी ब्याज दर 2027 तक 4.1% रहेगी और बेरोजगारी दर 2029 तक 4.1% पर स्थिर बनी रहेगी।

### 4. पाउंड के लिए अगले प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं?
पाउंड के लिए पहला सपोर्ट 1.3350 और दूसरा 1.3300 है, जबकि रेजिस्टेंस स्तर 1.3400 और 1.3450 पर स्थित हैं।

### 5. सोने की कीमत पर फेडरल रिजर्व के फैसले का क्या असर हुआ?
सोना 4,360 डॉलर के स्तर को पार करने के बाद फिसल गया और गिरकर 4,250 डॉलर के प्राइस जोन की ओर चला गया।

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