अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त बयानों से ब्रिटिश पाउंड पर दबाव, अहम तकनीकी स्तरों पर टिकी नजरें फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी के संकेतों के बीच ब्रिटिश पाउंड 1.3400 के स्तर से नीचे फिसल गया है। वैश्विक अनिश्चितता और तकनीकी दबावों के कारण मुद्रा बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की नीतिगत मजबूती के चलते ब्रिटिश पाउंड अपनी बढ़त बनाए रखने में असमर्थ साबित हो रहा है। GBP/USD की जोड़ी 1.3400 के स्तर से पीछे हट गई है, क्योंकि फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के हालिया बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को थामने के लिए सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। सामान्य तौर पर जब वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल होता है, तब ब्रिटिश पाउंड को मजबूती मिलती है, लेकिन शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी के कड़े रुख ने स्टर्लिंग में निवेशकों की दिलचस्पी को सीमित कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं कुछ हद तक कम जरूर की हैं, लेकिन इसका कोई खास सहारा ब्रिटिश मुद्रा को नहीं मिल सका। ऑस्टन गूल्सबी ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि फेडरल रिजर्व लगातार और बार-बार सामने आ रहे सप्लाई झटकों को अनदेखा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक को इस तरह से अपनी नीतिगत प्रतिक्रिया देनी होगी, जिससे भले ही कुछ आर्थिक मुश्किलें पैदा हों, लेकिन मुद्रास्फीति को वापस 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाना आसान या दर्दरहित नहीं होने वाला है। फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक बाजार अमेरिकी केंद्रीय बैंक की हालिया बैठक में नीति निर्माताओं ने तीन वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में इजाफा करते हुए उन्हें 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया था। इस फैसले के साथ ही भविष्य में दरों को और सख्त करने के रास्ते खुले रखे गए हैं। फेड अध्यक्ष केविन वार्श ने यह भी कहा कि उन्होंने नीतिगत ढील को आंशिक रूप से घटाया है, जिससे सख्त लहजे में कुछ नरमी आई, लेकिन मुद्रा बाजारों में अभी भी 2026 में अतिरिक्त ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदें लगाई जा रही हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ही देशों के आर्थिक आंकड़े काफी सीमित रहने वाले हैं। इस दौरान निवेशकों का मुख्य ध्यान फ्लैश पीएमआई आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के वक्तव्यों पर रहेगा। इसके अलावा, वैश्विक एजेंडे में अमेरिका में गुरुवार से शुरू होने जा रहा ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन भी शामिल है, जिस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। GBP/USD का तकनीकी विश्लेषण और अहम स्तर लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD वर्तमान में 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.34 की तुलना में 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना पर दर्ज किया गया है। आरएसआई (14) वर्तमान में 35 के स्तर पर है, जो मंदी के दबाव को दर्शाता है। एमएसीडी -0.00 पर अपने सिग्नल -0.00 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है। मूविंग एवरेज की बात करें तो ईएमए 20 1.35, ईएमए 50 1.35 और ईएमए 200 1.34 पर स्थित है, जबकि एसएमए 50 1.35 और एसएमए 200 1.35 पर है। हालांकि ईएमए 50 का ईएमए 200 से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस दर्शाता है, लेकिन कीमत दीर्घकालिक डाउनट्रेंड में बनी हुई है। बोलिंजर बैंड्स (20,2) 1.34 से 1.37 के बीच फैले हैं और कीमत बैंड्स के भीतर है। एडीएक्स (14) 22 पर होने से रेंज-बाउंड स्थिति दिखती है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 15 और सिग्नल लाइन 14 पर है। दैनिक अस्थिरता एटीआर (14) 0.01 पर दर्ज की गई है। चार्ट पर ऊपरी स्तरों की ओर नजर डालें तो तत्काल प्रतिरोध 1.3450 के करीब डाउनवर्ड-स्लोपिंग ट्रेंड लाइन के ब्रेक पर दिखाई देता है। इसके बाद 1.3482 के पास एसएमए का घना समूह बना हुआ है। अगला अवरोध 1.3500 पर पूर्व राइजिंग सपोर्ट ट्रेंड लाइन पर है, जबकि 1.3710 पर एक मजबूत ढांचागत सीमा मौजूद है। इसके विपरीत, नीचे की ओर पहला उल्लेखनीय समर्थन 1.3338 के करीब स्थित है, जहां खरीदारी करने वाले निवेशक गिरावट को संभालने की कोशिश कर सकते हैं। 20 दिनों का सपोर्ट 1.33 और रेजिस्टेंस 1.37 पर आंका गया है। मुद्राओं की स्थिति और अन्य प्रमुख संपत्तियां मुद्रा बाजार के दैनिक रुझानों में ब्रिटिश पाउंड ने जापानी येन के मुकाबले सबसे अधिक मजबूती दर्ज की। वहीं एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7100 से ऊपर टिका रहा। अमेरिकी डॉलर की हालिया गिरावट के थमने और पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट्स पर यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव रहा, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दर वृद्धि के दांव ने इसे सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY 157.00 से नीचे कारोबार करता दिखा, क्योंकि बैंक ऑफ जापान के रेट चेक के बाद संभावित हस्तक्षेप के जोखिम और जापानी छुट्टी के चलते व्यापारी सतर्क बने रहे। सोने की कीमतों में भी दबाव देखने को मिला और यह 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास स्थिर रहा। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बावजूद डॉलर की मजबूती ने सोने में सुधार की गुंजाइश को सीमित कर दिया। वित्तीय बाजार तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में एक विचित्र स्थिति में हैं, जहां अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके साथ ही, बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। इसका आप पर असर अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्रा विनिमय और निवेश लागत प्रभावित हो सकती है। • मुद्रा विनिमय दरें: डॉलर के मजबूत होने से अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। विदेश यात्रा या शिक्षा के लिए मुद्रा बदलने वाले लोगों को दरों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। • आयात और वस्तु लागत: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर आधारित लेनदेन महंगा होने से कच्चे माल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। कंपनियों और व्यापारियों को अपने आयात खर्चों की बेहतर योजना बनानी होगी। • वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो: ब्याज दरों के ऊंचे रहने की संभावना से बांड और डेट फंडों के रिटर्न पर असर पड़ता है। निवेशकों को अपने विदेशी परिसंपत्ति आवंटन की समीक्षा करनी पड़ सकती है। • व्यापारियों के लिए तकनीकी स्तर: पाउंड के लिए 1.3338 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट और 1.3450 एक अवरोध बना हुआ है। अल्पकालिक ट्रेडर्स इन स्तरों के आधार पर अपने स्टॉप-लॉस निर्धारित कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं द्वारा सख्त रुख अपनाए जाने और आर्थिक अनिश्चितता के चलते पाउंड में गिरावट आई है। • फेडरल रिजर्व के सख्त संकेत: शिकागो फेड के अध्यक्ष द्वारा सप्लाई झटकों और मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत पर लाने के लिए कड़े कदम उठाने की चेतावनी से डॉलर को मजबूती मिली। इसके चलते पाउंड पर नकारात्मक दबाव बना। • ब्याज दरों में इजाफा: फेडरल रिजर्व द्वारा हाल ही में दरों को 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने और 2026 में अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावनाओं ने अमेरिकी नीतिगत लाभ को बनाए रखा है। • कच्चे तेल और आपूर्ति दबाव: तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद वैश्विक सप्लाई बाधाओं की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, जिससे नीति निर्माताओं का ध्यान महंगाई नियंत्रण पर बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. GBP/USD में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है? शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी के कड़े बयानों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी के संकेतों के कारण पाउंड पर दबाव बना है। 2. फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दरों को किस स्तर पर पहुंचाया है? फेडरल रिजर्व ने तीन वर्षों में पहली बार ब्याज दरों को बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में कर दिया है। 3. GBP/USD के लिए कौन से प्रमुख तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हैं? ऊपर की तरफ 1.3450 और 1.3500 पर प्रतिरोध है, जबकि नीचे की ओर 1.3338 पर पहला महत्वपूर्ण समर्थन स्तर स्थित है। 4. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। https://trendkia.com/market/ameriki-fed-ke-sakhta-bayanon-se-british-pound-para-dabava-ahama-takaniki-staron-para-tiki-najaren-35918 TrendKia — Har trend, sabse pehle.