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  "title": "अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 में बढ़ा सकता है ब्याज दरें, 2027 तक नीतिगत बदलाव न होने का अनुमान",
  "summary": "राबोबैंक के नए आकलन के मुताबिक फेडरल रिजर्व दिसंबर 2026 में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है और 2027 तक नीति को स्थिर रखेगा। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और तेल जनित महंगाई के दबाव से वैश्विक मुद्रा…",
  "content": "अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख को लेकर वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई बहस छिड़ गई है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी के हालिया बयानों और भाषणों के बाद राबोबैंक ने अपने अनुमानों में बड़ा बदलाव किया है। वित्तीय संस्थान के ताजा आकलन के अनुसार, केंद्रीय बैंक दिसंबर 2026 में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ ही अनुमान जताया गया है कि फेडरल रिजर्व पूरे 2027 के दौरान अपनी ब्याज दरों को बिना किसी बदलाव के स्थिर रखेगा, जिसके बाद 2028 से 2030 के दौरान प्रति वर्ष केवल एक दर कटौती की संभावना बनेगी।\n\nमुद्रास्फीति और मांग पर फेडरल रिजर्व का नजरिया\nविश्लेषकों का मानना है कि नीति निर्माताओं के ताजा रुख के पीछे महंगाई की अनियंत्रित होती उम्मीदों को रोकने की सख्त मंशा है। कमेटी मुद्रास्फीति के जोखिमों को लेकर पहले से अधिक सतर्क नजर आ रही है। इसके तहत गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में मांग की कमी या मंदी को स्वीकार करने की तैयारी भी दिख रही है, भले ही इस साल का आपूर्ति संकट मूल रूप से ऊर्जा क्षेत्र से ही क्यों न शुरू हुआ हो। हालांकि, वित्तीय बाजारों में 3 से 4 अतिरिक्त बढ़ोतरी का नया चक्र आंके जाने के मुकाबले राबोबैंक का यह अनुमान अपेक्षाकृत सीमित है, जिसमें आगे केवल एक और बढ़ोतरी की बात कही गई है।\n\nमजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच प्रमुख मुद्राओं की चाल\nवैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है, जिसका सीधा दबाव अन्य प्रमुख मुद्राओं पर देखा जा रहा है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD दो महीने के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा, जहां यह 0.6900 के मध्य स्तरों पर बना रहा। अमेरिका के पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में फेड की दर वृद्धि की संभावनाओं को कुछ हद तक शांत जरूर किया है, लेकिन कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की चिंताएं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को लगातार समर्थन दे रही हैं। दूसरी तरफ, अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस आंकड़े का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बेहद सीमित असर पड़ा।\n\nइसी प्रकार, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर टिका रहा। कमजोर पीसीई आंकड़ों के बावजूद ऊर्जा क्षेत्र से पैदा हुए महंगाई जोखिमों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के करीब बनाए रखा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सेफ-हेवन के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को और बढ़ा रहा है। डॉलर की यह व्यापक मजबूती बैंक ऑफ जापान की संभावित सख्त नीति और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों पर भारी पड़ रही है।\n\nसोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर बढ़ता दबाव\nमजबूत डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में तेजी के कारण सोने की कीमतों में ठहराव देखा जा रहा है। हाजिर सोने का भाव यानी XAU/USD गुरुवार को 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग $4,167 प्रति औंस पर दर्ज किया गया, जहां पीली धातु अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने के लिए जूझती नजर आई। उच्च बॉन्ड यील्ड निवेशकों के लिए बिना ब्याज वाली संपत्तियों के आकर्षण को सीमित कर रही है।\n\nडिजिटल एसेट बाजार में भी दबाव साफ दिखाई दे रहा है। बिटकॉइन $82,500 के सपोर्ट और $85,000 के रेजिस्टेंस स्तर के बीच सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इथेरियम पर भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जो $2,700 से नीचे फिसल गया है, जबकि $2,600 का स्तर इसे तत्काल सहारा दे रहा है। इसी दौरान, रिपल भी अपने बेहद अहम $1.50 के स्तर से नीचे आ गया है।\n\nआगामी एनएफपी रिपोर्ट और यूरो का परिदृश्य\nअमेरिकी डॉलर अपने वार्षिक उच्च स्तरों के करीब बना हुआ है और निवेशकों की निगाहें सितंबर के गैर-कृषि पेरोल यानी एनएफपी आंकड़ों पर टिकी हैं। बाजार विश्लेषक इस रिपोर्ट को लेकर समान रूप से बंटे हुए हैं; आधे विश्लेषकों का मानना है कि रिपोर्ट जारी होने तक डॉलर में तेजी जारी रह सकती है और यह ऊपर की ओर ब्रेकआउट दिखा सकता है, जबकि बाकी का मानना है कि डॉलर की यह तेजी जरूरत से ज्यादा खिंच चुकी है।\n\nदूसरी ओर, यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर यानी EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। हालांकि, यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति का कोई नया झटका साझा मुद्रा यूरो को अप्रत्याशित सहारा भी दे सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने और मजबूत डॉलर से वैश्विक वित्तीय बाजारों, कमोडिटी की कीमतों और ऋण लागत पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।\n\n• भारत में: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण विदेशी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव आ सकता है और आयात महंगा होने से व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में आयातित वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक्स की लागत में बढ़ोतरी की संभावना बनी रहती है।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के लंबे समय तक उच्च स्तर पर रहने से जोखिम वाली संपत्तियों में पूंजी का प्रवाह सीमित हो सकता है। निवेशक इक्विटी और गैर-उपज वाली संपत्तियों के बजाय सुरक्षित बॉन्ड प्रतिफल की ओर आकर्षित हो सकते हैं।\n• कमोडिटी खरीदारों के लिए: सोने की कीमतों का $4,167 के आसपास सीमित दायरा भौतिक खरीदारों और निवेशकों को कीमतों में स्थिरता का संकेत देता है। हालांकि डॉलर की निरंतर मजबूती भविष्य में सोने की कीमतों में बड़ी उछाल को रोकने का काम करेगी।\n• क्रिप्टोकरेंसी धारकों के लिए: बिटकॉइन का $82,500 से $85,000 के बीच फंसना और इथेरियम का $2,700 से नीचे फिसलना डिजिटल एसेट में कम तरलता को दर्शाता है। जब तक मौद्रिक नीति में ढील का रुख साफ नहीं होता, तब तक क्रिप्टो बाजार में बड़ा उछाल आना मुश्किल रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह नीतिगत बदलाव और बाजार का उतार-चढ़ाव लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनावों के संयोजन के कारण पैदा हुआ है।\n\n• मुद्रास्फीति की अनियंत्रित उम्मीदें: नीति निर्माताओं को अंदेशा है कि उपभोक्ता और बाजार मुद्रास्फीति के दीर्घकालिक उच्च स्तर को स्वीकार कर सकते हैं। इस मनोवैज्ञानिक जोखिम को खत्म करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक सख्त रखने का रुख अपनाया जा रहा है।\n• ऊर्जा आपूर्ति संकट का फैलाव: चालू वर्ष में ऊर्जा क्षेत्र में हुए आपूर्ति झटकों के कारण अन्य गैर-ऊर्जा उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर भी दबाव पड़ा है। इस व्यापक मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक समग्र मांग को नियंत्रित करने के लिए तैयार दिख रहा है।\n• भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता ने डॉलर की मांग और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल को ऊंचा बनाए रखा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फेडरल रिजर्व के लिए नया ब्याज दर अनुमान क्या है?\nताजा अनुमान के मुताबिक फेडरल रिजर्व दिसंबर 2026 में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है और फिर 2027 के अंत तक दरों को स्थिर रखेगा।\n\n2. 2027 के बाद ब्याज दरों में कटौती कब शुरू होने की उम्मीद है?\nअनुमान है कि 2028 से 2030 के दौरान फेडरल रिजर्व प्रति वर्ष केवल एक बार ब्याज दरों में कटौती करेगा।\n\n3. डॉलर के मुकाबले सोने और बिटकॉइन का ताजा स्तर क्या है?\nसोना लगभग $4,167 प्रति औंस पर सीमित दायरे में है, जबकि बिटकॉइन $82,500 के सपोर्ट और $85,000 के रेजिस्टेंस के बीच कारोबार कर रहा है।\n\n4. जापानी येन और यूरो के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की क्या स्थिति है?\nअमेरिकी डॉलर येन के मुकाबले 158.00 के पार बना हुआ है, जबकि यूरो गिरकर 1.1312 पर आ गया है, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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