# अमेरिकी मौद्रिक नीति रहेगी सख्त, मुद्रास्फीति के मिले-जुले आंकड़ों के बीच कॉलिन्स ने दिए संकेत

> फ़ेडरल रिजर्व की अधिकारी कॉलिन्स का कहना है कि हालिया PCE मुद्रास्फीति आंकड़ों के बावजूद मौद्रिक नीति सख्त बनी रहेगी। यदि महंगाई फिर बढ़ती है तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी संभव है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/ameriki-maudrika-niti-rahegi-sakhta-mudrasphiti-ke-mile-jule-ankaron-ke-bicha-collins-ne-die-snketa-23363 · **Language:** Hindi
**Tags:** फ़ेडरल रिजर्व, मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति, PCE आंकड़े, ब्याज दरें, अमेरिकी डॉलर, जैक्सन होल

फ़ेडरल रिजर्व अपनी सख्त मौद्रिक नीति पर कायम है और उसका कहना है कि हालिया मुद्रास्फीति के आंकड़ों से केंद्रीय बैंक के दीर्घकालिक दृष्टिकोण में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। फ़ेडरल रिजर्व की अधिकारी कॉलिन्स ने स्पष्ट किया कि यद्यपि व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक से मिले-जुले संकेत मिले हैं, लेकिन बुनियादी नीति का मुख्य लक्ष्य मुद्रास्फीति को धीरे-धीरे नीचे लाना ही है। मुख्य मुद्रास्फीति दर उम्मीद से थोड़ी अधिक रहने के बावजूद आंकड़े के आंतरिक विवरण मूल्य स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत दिखाते हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मौद्रिक नीति को तब तक सख्त बनाए रखना आवश्यक है जब तक कि महंगाई दर पूरी तरह से नियंत्रित न हो जाए।

## मुद्रास्फीति के हालिया आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण
पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) रिपोर्ट का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि मुख्य मुद्रास्फीति में आई तेजी के पीछे कुछ अस्थायी कारकों का बड़ा हाथ था। विशेष रूप से पोर्टफोलियो प्रबंधन शुल्क में हुई बढ़ोतरी ने इस आंकड़े को ऊपर चढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई। यदि बाजार-आधारित कीमतों पर ध्यान केंद्रित किया जाए, जिनमें ऐसे उतार-चढ़ाव वाले शुल्क शामिल नहीं होते, तो मुद्रास्फीति का रुझान फ़ेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य के काफी करीब नजर आता है। यही कारण है कि नीति निर्माता इस आंकड़े को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं।

वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ बातचीत में कॉलिन्स ने यह भी कहा कि यदि आने वाले समय में महंगाई दर में फिर से बढ़ोतरी होती है तो ब्याज दरों में वृद्धि पर विचार किया जा सकता है। यदि मुद्रास्फीति की दर अनुमान के अनुरूप नीचे नहीं आती है तो दरों को बढ़ाना जरूरी हो जाएगा। हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय व्यापार शुल्क या कच्चे तेल के वैश्विक बाजार में कोई नया झटका नहीं लगता है, तो इस बात के मजबूत आसार हैं कि आने वाले महीनों में महंगाई दर अपने आप धीरे-धीरे कम होने लगेगी।

## बॉन्ड यील्ड में बदलाव और आर्थिक संभावनाएं
सॉवरेन बॉन्ड बाजार में भी हाल के दिनों में हलचल देखी गई है, जहां अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस पर टिप्पणी करते हुए कॉलिन्स ने कहा कि बॉन्ड यील्ड में यह तेजी मूल्य स्थिरता के व्यापक सिद्धांतों के अनुकूल ही है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि बॉन्ड यील्ड का बढ़ना इस बात का संकेत बिल्कुल नहीं है कि बाजार में मुद्रास्फीति की दीर्घकालिक आशंकाएं बढ़ रही हैं।

वित्तीय बाजार भले ही यील्ड कर्व की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान समष्टिगत आर्थिक स्थिरता पर केंद्रित है। स्कॉट बेसेंट के हालिया बयानों या बाजार हस्तक्षेप पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉलिन्स ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनका ध्यान केवल फ़ेडरल रिजर्व के आधिकारिक मापदंडों तक सीमित है। मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय स्थितियां मुद्रास्फीति को कम करने के लक्ष्य के अनुकूल बनी रहें।

## फ़ेडरल रिजर्व के मुख्य उद्देश्य और मौद्रिक उपकरण
केंद्रीय बैंक के फैसलों को गहराई से समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि फ़ेडरल रिजर्व किस प्रकार अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है। फ़ेडरल रिजर्व के पास अमेरिकी कांग्रेस द्वारा निर्धारित दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं: पहली, अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखना और दूसरी, अधिकतम रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक अपनी बेंचमार्क फेडरल फंड्स दर का इस्तेमाल करता है, जो अर्थव्यवस्था में ऋण की लागत को सीधे प्रभावित करती है।

जब अर्थव्यवस्था में महंगाई दर 2% के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर जाने लगती है, तो फ़ेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। दरें बढ़ने से उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे कुल मांग में कमी आती है और आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ती हैं। इसका सीधा परिणाम अमेरिकी डॉलर (USD) की मजबूती के रूप में दिखाई देता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत जब महंगाई बहुत कम हो जाती है या बेरोजगारी दर बढ़ने लगती है, तो केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करता है ताकि आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा सके।

## फ़ेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) का संगठनात्मक ढांचा
फ़ेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति संबंधी फैसले फ़ेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) द्वारा लिए जाते हैं। यह समिति साल में आठ नियमित बैठकें आयोजित करती है, जिनमें आर्थिक आंकड़ों, रोजगार की स्थिति और वैश्विक बाजार के रुझानों की विस्तृत समीक्षा की जाती है। समीक्षा के बाद ही ब्याज दरों और संपत्ति खरीद संबंधी नीतियों पर मतदान होता है।

FOMC में कुल 12 मतदान सदस्य होते हैं। इनमें फ़ेडरल रिजर्व सिस्टम के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य और फ़ेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष शामिल होते हैं, जिनके पास स्थायी वोटिंग अधिकार होता है। शेष चार वोटिंग पद अन्य 11 क्षेत्रीय फ़ेडरल रिजर्व बैंकों के अध्यक्षों के बीच एक-एक वर्ष की अवधि के लिए बारी-बारी से बदले जाते हैं। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रीय फैसलों में क्षेत्रीय आर्थिक परिप्रेक्ष्य को भी स्थान मिले।

## क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की कार्यप्रणाली
अत्यधिक आर्थिक मंदी या वित्तीय संकट के समय, जब पारंपरिक ब्याज दर उपकरण बेअसर होने लगते हैं, तब केंद्रीय बैंक गैर-पारंपरिक तरीकों का सहारा लेता है। इनमें सबसे प्रमुख क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) है। इसका उपयोग अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए किया जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान फ़ेडरल रिजर्व ने इस नीति का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था।

क्वांटिटेटिव ईजिंग के तहत केंद्रीय बैंक नई मुद्रा जारी करके वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड और अन्य उच्च स्तरीय परिसंपत्तियां खरीदता है। इस प्रक्रिया से वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ती है और लंबी अवधि की ब्याज दरें नीचे आती हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर डॉलर की आपूर्ति बढ़ने के कारण वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर के मूल्य में गिरावट देखने को मिलती है।

इसके विपरीत क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक अपनी बैलेंस शीट को छोटा करता है। इसके तहत फ़ेडरल रिजर्व नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का पुनर्निवेश नहीं करता। इससे बाजार से अतिरिक्त नकदी वापस खिंच जाती है, जिससे वित्तीय स्थितियां सख्त होती हैं और अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है।

## वैश्विक वित्तीय बाजारों और परिसंपत्तियों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय बैंक के बयानों और आर्थिक संकेतकों के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में विविध बदलाव देखे गए। विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) शुरुआती कारोबार में छह दिनों के निचले स्तर तक गिरने के बाद सुधरकर 1.3600 के स्तर के पास पहुंच गया। निवेशकों के सतर्क रुख के कारण डॉलर को समर्थन मिलता नजर आया।

इसी तरह यूरो (EUR/USD) भी शुरुआती गिरावट से उबरने में सफल रहा और 1.1600 के मध्य स्तर पर वापस आ गया। शुक्रवार को आने वाले नॉन-फार्म पेरोल (NFP) आंकड़ों के संशोधन और जैक्सन होल सम्मेलन में केंद्रीय बैंक के प्रमुख के भाषण से पहले बाजार में मिला-जुला रुख बना हुआ है।

कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में बुधवार की गिरावट के बाद फिर से खरीदारी देखी गई। स्पॉट गोल्ड गुरुवार को सुधरकर $4,600 प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के करीब पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बावजूद सोने में तेजी का रुझान बना रहा।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी गुरुवार को बढ़त दर्ज की गई, जिसकी अगुवाई बिटकॉइन (BTC) ने की और यह $80,000 के स्तर के करीब कारोबार करता दिखा। अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों में भी तेजी रही, जहां एथेरियम (ETH) $2,500 से ऊपर और रिपल (XRP) $1.40 के अपने मुख्य समर्थन स्तर से ऊपर बना रहा।

ऊर्जा बाजार में रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI क्रूड ऑयल के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम) पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया और $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

## जैक्सन होल सम्मेलन और नीतिगत दृष्टिकोण पर नजर
वित्तीय बाजारों की निगाहें अब जैक्सन होल इकोनॉमिक सिम्पोजियम पर टिकी हैं, जहां शुक्रवार को फ़ेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉश अपना संबोधन देंगे। अध्यक्ष के रूप में जैक्सन होल सम्मेलन में यह उनका पहला भाषण होगा।

निवेशक इस सम्मेलन से केवल सितंबर की ब्याज दर नीति का संकेत ही नहीं तलाश रहे हैं, बल्कि केंद्रीय बैंक की दीर्घकालिक मौद्रिक रूपरेखा, बैलेंस शीट प्रबंधन और मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए अपनाई जाने वाली भविष्य की रणनीति को भी समझने का प्रयास कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को सख्त बनाए रखने के फैसले का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों, विदेशी मुद्रा दरों और आम निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ेगा।

- **भारत में:** अमेरिकी डॉलर के मजबूत रहने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित वस्तुएं महंगी होने की संभावना है। हालांकि वैश्विक बाजारों में स्थिरता रहने से भारतीय शेयर बाजार में बड़ी उथल-पुथल की आशंका कम है।
- **ग्लोबल मार्केट में:** ऊंची ब्याज दरों के कारण वैश्विक स्तर पर कर्ज लेना महंगा रहेगा, जिसका असर कॉरपोरेट मुनाफे और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। निवेशकों को बॉन्ड यील्ड और कमोडिटी बाजार पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या फ़ेडरल रिजर्व आने वाले समय में फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है?
हां, फ़ेडरल रिजर्व की अधिकारी कॉलिन्स के अनुसार, यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक नीचे नहीं आते हैं तो ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी की जा सकती है।

### 2. PCE रिपोर्ट में मुख्य मुद्रास्फीति बढ़ने की क्या वजह थी?
PCE रिपोर्ट में पोर्टफोलियो प्रबंधन शुल्क में बढ़ोतरी का मुख्य प्रभाव रहा, जबकि बाजार-आधारित कीमतें 2% के लक्ष्य के अधिक अनुकूल नजर आती हैं।

### 3. बॉन्ड यील्ड में तेजी का फ़ेडरल रिजर्व पर क्या असर पड़ता है?
केंद्रीय बैंक का मानना है कि बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी मूल्य स्थिरता के अनुकूल है और इससे यह संकेत नहीं मिलता कि मुद्रास्फीति की प्रत्याशाएं बढ़ रही हैं।

### 4. जैक्सन होल सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण है?
जैक्सन होल सम्मेलन में फ़ेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉश अपना पहला संबोधन देंगे, जहां बाजार प्रतिभागी भविष्य की मौद्रिक नीति और बैलेंस शीट रणनीति के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

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