अमेरिकी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, डाउ जोंस 1,068 अंक टूटा जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में रही मजबूती अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद वॉल स्ट्रीट पर मिलाजुला रुख दिखा, जहां डाउ जोंस 1,068 अंक गिर गया, वहीं तकनीकी शेयरों के दम पर नैस्डैक में बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजार के लिए बीता कारोबारी हफ्ता अत्यधिक उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जहां प्रमुख सूचकांकों के बीच भारी असमानता देखने को मिली। पारंपरिक कंपनियों के प्रतिनिधित्व वाले डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में जहां एक हजार से अधिक अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं प्रौद्योगिकी शेयरों की अगुवाई में नैस्डैक कंपोजिट और एसएंडपी 500 हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे। बाजार की इस दिशा को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा मौद्रिक नीतिगत फैसलों ने निभाई। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति के दबाव को आधार बनाकर अपनी प्रमुख ब्याज दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा किया है, जिससे नीतिगत दरें बढ़कर 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में पहुंच गई हैं। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व से जुड़े कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर जारी अनिश्चितता और ट्रेजरी यील्ड के उतार-चढ़ाव ने भी पूरे हफ्ते बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया। साप्ताहिक उतार-चढ़ाव और सूचकांकों का प्रदर्शन पूरे सप्ताह के कुल आंकड़ों का विश्लेषण करें तो डाउ जोंस में भारी बिकवाली का दबाव हावी रहा। हफ्ते के दौरान डाउ जोंस कुल 1,068.24 अंक यानी 2.03 प्रतिशत लुढ़क गया। इसके बिल्कुल विपरीत, नैस्डैक कंपोजिट ने पूरे हफ्ते शानदार मजबूती दिखाई और 504.04 अंक या 1.94 प्रतिशत की बढ़त के साथ सप्ताह के शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में उभरा। व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाले एसएंडपी 500 सूचकांक में भी हफ्ते के दौरान 39.06 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिनों में भी यही विरोधाभासी तस्वीर दिखाई दी। 18 सितंबर के कारोबारी सत्र के दौरान डाउ जोंस 95.40 अंक अथवा 0.2 प्रतिशत गिरकर 51,682.64 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, तकनीकी कंपनियों के दम पर नैस्डैक कंपोजिट 104 अंकों से अधिक यानी 0.4 प्रतिशत की छलांग लगाकर 26,522.54 के स्तर पर पहुंच गया। एसएंडपी 500 सूचकांक भी 13 अंक या 0.2 प्रतिशत के सुधार के साथ 7,650.50 के स्तर पर बंद होने में सफल रहा। फेडरल रिजर्व का दर वृद्धि का निर्णय और आर्थिक संकेत अमेरिकी केंद्रीय बैंक की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने सर्वसम्मति से 12-0 के मत से ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि करने का निर्णय लिया। यह पिछले तीन वर्षों में फेडरल रिजर्व की पहली दर वृद्धि है, जिसने फेड फंड्स लक्ष्य को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत पर ला खड़ा किया है। इस नीतिगत कदम के पीछे लगातार ऊंची बनी हुई महंगाई को मुख्य वजह बताया गया है। कमेटी का नेतृत्व कर रहे केविन वार्श ने स्पष्ट किया कि महंगाई अभी भी असहज रूप से उच्च स्तर पर बनी हुई है और यह स्थिति लंबे समय से जारी है। उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बैंक का प्राथमिक ध्यान अपने अधिदेश के तहत कीमतों में स्थिरता बहाल करने पर केंद्रित है। हालांकि, फेड के इस कठोर कदम की व्हाइट हाउस ने आलोचना की है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दर वृद्धि की यह प्रक्रिया यहीं नहीं रुकने वाली है। 2026 के अंत से पहले नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना खुली रखी गई है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को और गंभीर बना दिया है। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर के अनुसार, फेडरल रिजर्व ने 2023 के बाद पहली बार यह कदम उठाया है। 18 अधिकारियों में से 16 ने अपने अनुमानों में इस वर्ष मौद्रिक सख्ती जारी रखने के संकेत दिए हैं। अमेरिका में अगस्त महीने के सीपीआई आंकड़ों में माह-दर-माह आधार पर 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई थी, जबकि कोर सीपीआई में 0.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद वित्तीय बाजारों में अक्टूबर में एक और दर वृद्धि की संभावना लगभग 55 प्रतिशत तक आंकी जा रही है। इस निर्णय के तुरंत बाद ट्रेजरी यील्ड के 5 प्रतिशत से ऊपर निकलने से गैर-उपज वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ गया, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में दर्ज शुरुआती बढ़त उलट गई। सेक्टरवार स्थिति: बैंकों में गिरावट, चिपमेकर्स ने संभाला नैस्डैक वॉल स्ट्रीट पर अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन भी काफी भिन्न रहा। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में फिर से तेजी आई क्योंकि मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर जारी चिंताओं ने ईंधन और प्राकृतिक गैस के दामों को ऊपर धकेला है। ऊर्जा से संचालित महंगाई की इस आशंका के बीच ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। वित्तीय क्षेत्र, विशेष रूप से बैंकों और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। प्रमुख बैंकिंग शेयरों में बैंक ऑफ अमेरिका के शेयर में 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि गोल्डमैन सैक्स के शेयर 1 प्रतिशत तक टूट गए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हाइपरस्केलर क्षेत्र की कंपनियों पर भी दबाव देखने को मिला। अपने भारी पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर ऋण जुटाने की होड़ के बीच इन कंपनियों के शेयरों में कमजोरी रही। दिग्गज टेक कंपनी मेटा के शेयरों में 2.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि ओरेकल का शेयर 2 प्रतिशत कमजोर हुआ। हालांकि, सेमीकंडक्टर और चिप विनिर्माता कंपनियों में मजबूती ने नैस्डैक को सहारा दिया। ब्रॉडकॉम का शेयर 3 प्रतिशत चढ़ा, जबकि माइक्रोन के शेयरों में 3.9 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की गई, जिसने बड़े टेक शेयरों में हुई गिरावट के असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया। बाजार चक्र और निवेशकों के लिए दृष्टिकोण मौद्रिक सख्ती के इस दौर में ऐतिहासिक रुझानों पर ध्यान देना भी प्रासंगिक है। चार्ल्स श्वाब के एक विश्लेषण के मुताबिक, फेडरल रिजर्व द्वारा जब भी मौद्रिक नीतियों को सख्त किया जाता है, तो अल्पावधि में बाजारों में अस्थिरता का दौर आता है, लेकिन शुरुआती गिरावट के बाद शेयर बाजार आमतौर पर संभलने में कामयाब रहते हैं। ऐतिहासिक आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि धीमी गति से दर वृद्धि के चक्रों ने हमेशा तेज चक्रों की तुलना में बाजार में अपेक्षाकृत कम गिरावट दिखाई है और इनके आर्थिक नतीजे अधिक मजबूत रहे हैं। मजबूत श्रम बाजार और ठोस आर्थिक संकेतक फेडरल रिजर्व के क्रमिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं, जिससे अनुशासित निवेशकों के लिए बाजार की मौजूदा अस्थिरता दीर्घकालिक अवसर भी पैदा कर सकती है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई इस बढ़ोतरी और बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत के पार जाने का सीधा असर वैश्विक लिक्विडिटी और घरेलू बाजार निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ेगा। • भारत में निवेशक: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल आने से भारतीय बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी का दबाव बढ़ सकता है। इसके चलते घरेलू शेयर बाजार में अल्पावधि में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और निवेशकों को सतर्क रुख अपनाना होगा। • कच्चा तेल और महंगाई: मध्य पूर्व के घटनाक्रमों के चलते कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी से भारत में आयात लागत बढ़ सकती है। ईंधन महंगा होने पर आम उपभोक्ताओं के लिए परिवहन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। • सोना और चांदी के खरीदार: बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर निकलने के बाद कीमती धातुओं में बिकवाली दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में यदि अमेरिकी डॉलर और यील्ड मजबूत बने रहते हैं, तो सोने-चांदी की घरेलू कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। • तकनीकी शेयर और आईटी फंड: चिपमेकर शेयरों में मजबूती के बावजूद भारी पूंजीगत व्यय और ब्याज लागत से आईटी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव रह सकता है। टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड निवेशकों को लंबी अवधि का दृष्टिकोण रखना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव और डाउ जोंस में तेज गिरावट के पीछे फेडरल रिजर्व द्वारा तीन साल बाद ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह रही हैं। • ब्याज दरों में तीन साल बाद वृद्धि: फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सर्वसम्मति से दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर उन्हें 3.75 से 4.00 प्रतिशत कर दिया। केविन वार्श ने स्पष्ट किया कि महंगाई लंबे समय से बहुत अधिक बनी हुई है और कीमतों पर नियंत्रण प्राथमिकता है। • ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतें: मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे ईंधन और प्राकृतिक गैस के दाम चढ़ गए। इस ऊर्जा-संचालित महंगाई ने सीधे तौर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को प्रभावित किया, जहां अगस्त में मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। • बॉन्ड यील्ड में उछाल: नीतिगत फैसले और आगे भी दर वृद्धि के संकेतों के बाद 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई। ऊंची यील्ड के कारण बैंकिंग सेक्टर के शेयरों और ऋण लेकर पूंजी जुटाने वाली तकनीकी कंपनियों में बिकवाली शुरू हो गई। सवाल-जवाब 1. बीते सप्ताह डाउ जोंस में कितनी गिरावट दर्ज की गई? बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 1,068.24 अंक यानी 2.03 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। 2. नैस्डैक कंपोजिट ने पूरे हफ्ते में कैसा प्रदर्शन किया? नैस्डैक कंपोजिट सप्ताह का शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहा और इसने 504.04 अंक यानी 1.94 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की। 3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कितना बदलाव किया है? फेडरल रिजर्व ने प्रमुख नीतिगत दरों को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया है। 4. फेडरल रिजर्व की बैठक में दर वृद्धि का फैसला किस तरह हुआ? फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के सभी 12 सदस्यों ने सर्वसम्मति से 12-0 के मत से दर बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया। 5. तकनीकी क्षेत्र में किन शेयरों में तेजी और किनमें गिरावट रही? चिपमेकर कंपनियों में ब्रॉडकॉम 3 प्रतिशत और माइक्रोन 3.9 प्रतिशत चढ़े, जबकि मेटा में 2.4 प्रतिशत और ओरेकल में 2 प्रतिशत की गिरावट रही। 6. क्या इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है? अनुमान प्रस्तुत करने वाले 18 में से 16 नीति निर्माताओं ने और सख्ती का संकेत दिया है, जिससे अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना लगभग 55 प्रतिशत आंकी गई है। https://trendkia.com/market/ameriki-sheyara-bajara-men-utara-charhava-dow-jones-1-068-anka-tuta-jabaki-nasdaq-aura-s-p-500-men-rahi-majabuti-33685 TrendKia — Har trend, sabse pehle.