अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल के बीच डॉलर इंडेक्स 101.80 के स्तर की ओर अग्रसर फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीतियों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार तेजी के चलते अमेरिकी डॉलर सूचकांक 101.80 के प्रतिरोध स्तर की तरफ बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती का दायरा लगातार बढ़ाता हुआ दिख रहा है, जहां प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक में तेज खरीदारी दर्ज की गई है। इस उछाल के पीछे अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यानी ट्रेजरी यील्ड में आई जबर्दस्त तेजी और फेडरल रिजर्व की ओर से निकट भविष्य में नीतिगत दरों में और इजाफा किए जाने की ठोस उम्मीदें मुख्य वजह बनी हुई हैं। छह प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 101.29 के आसपास कारोबार करता दिखा, जो गुरुवार को दर्ज किए गए आठ हफ्तों के उच्च स्तर 101.30 के बेहद करीब बना हुआ है। इसके साथ ही बेंचमार्क 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.23 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जो 19 वर्षों का नया उच्चतम शिखर है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और बॉन्ड बाजार का दबाव वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल के बीच आईएनजी के विश्लेषकों का स्पष्ट आकलन है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उधारी लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। बाजार ऊर्जा कीमतों में हालिया उछाल और इस व्यापक धारणा पर प्रतिक्रिया दे रहा है कि फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीतियों को और कड़ा करने तथा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सरकार के बड़े वित्तीय घाटे और सरकारी कर्ज की स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंताओं के माहौल में लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई है। कर्ज के बढ़ते अंबार और लगातार बने हुए बजट घाटे ने निवेशकों को लंबी अवधि के ऋण पत्रों पर अधिक जोखिम प्रीमियम मांगने के लिए मजबूर किया है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का सख्त रुख फेडरल रिजर्व के नीति निर्धारकों की हालिया टिप्पणियों से साफ संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक के भीतर जिद्दी महंगाई को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। इसके साथ ही अधिकारी श्रम बाजार की परिस्थितियों में आने वाले सुधार को लेकर लगातार आश्वस्त नजर आ रहे हैं। फेडरल रिजर्व से जुड़े अधिकारी विलियम्स ने एक बेहद सख्त और आक्रामक रुख पेश किया, जहां उनका भाषण पिछले ऐतिहासिक औसतों की तुलना में अधिक आक्रामक यानी हॉकिश संकेत दे रहा था। विलियम्स के संबोधन का एक विश्लेषण स्कोर 7.2/10 आंका गया, जो ऐतिहासिक औसत 6.2/10 से कहीं अधिक सख्त रुख को दर्शाता है। विलियम्स ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में दिख रहे उल्लेखनीय लचीलेपन, अधिकतम रोजगार के मोर्चे पर घटते जोखिमों और एआई से जुड़ी मजबूत मांग का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल के अंत तक नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी की उचित संभावना पूरी तरह खुली हुई है। यह रुख दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक अभी भी मुद्रास्फीति पर पूरी तरह काबू पाने पर केंद्रित है। हालांकि, फेडरल रिजर्व ने अपने पहले के सख्त मार्गदर्शन को थोड़ा सीमित किया है और लंबी अवधि तक ऊंची यील्ड बने रहने की अनिश्चितता को स्वीकार किया है। मजबूत मांग, महंगाई का डर और दर वृद्धि की संभावना का यह मिलाजुला असर डॉलर को लगातार ठोस सहारा दे रहा है, जबकि भविष्य के ब्याज दर मार्ग को लेकर विदेशी मुद्रा बाजार में अनिश्चितता का माहौल भी बन रहा है। डॉलर इंडेक्स का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर दैनिक चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का हाजिर भाव 101.29 के स्तर पर स्थिर दिखाई दे रहा है। तकनीकी संरचना को देखें तो छोटी अवधि का रुझान पूरी तरह से तेजी की ओर झुका हुआ है क्योंकि सूचकांक अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 100.11 से काफी ऊपर बना हुआ है। हाल ही में 99.00 के नीचे से शुरू हुई रिकवरी के बाद इस मूविंग एवरेज के ऊपर टिके रहने से डॉलर में मजबूती का ढांचा और पुख्ता हुआ है। हालांकि, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI (14) का स्तर 73.05 पर पहुंच गया है, जो ओवरबॉट यानी अत्यधिक खरीदारी के क्षेत्र में प्रवेश का संकेत देता है। इसका मतलब है कि ऊपर की ओर गति काफी तेज है, लेकिन आने वाले कारोबारी सत्रों में एक सुधारात्मक ठहराव या कंसॉलिडेशन देखने को मिल सकता है। गिरावट की स्थिति में डॉलर इंडेक्स को पहला तात्कालिक सहारा 101.29 के पिवट क्षेत्र के आसपास मिलेगा। यदि मुनाफावसूली हावी होती है, तो अधिक मजबूत मांग 20-दिवसीय EMA के करीब 100.11 के स्तर पर उभरने की उम्मीद है, जहां खरीदार व्यापक सुधार ढांचे की रक्षा करने का प्रयास कर सकते हैं। इसके विपरीत, ऊपर की ओर जारी तेजी को वार्षिक उच्च स्तर 101.80 के करीब कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में प्रमुख मनोवैज्ञानिक बाधा साबित होगा। ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर अमेरिकी डॉलर की भूमिका अमेरिकी डॉलर (USD) संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के समानांतर चलने वाली वास्तविक वैश्विक मुद्रा है। वैश्विक वित्तीय लेनदेन के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर दुनिया में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखती है। यह प्रतिदिन औसतन लगभग 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेनदेन का प्रतिनिधित्व करता है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने लंबे इतिहास के अधिकांश समय में अमेरिकी डॉलर सोने द्वारा समर्थित था। यह व्यवस्था 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने तक जारी रही, जिसके बाद स्वर्ण मानक समाप्त कर दिया गया और फिएट मुद्रा प्रणाली लागू हो गई। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर की दिशा अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक कारक फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के पास दो प्रमुख कानूनी अधिदेश हैं: पहला कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी महंगाई पर नियंत्रण पाना, और दूसरा अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को साधने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में सामयिक बदलाव करना है। जब अर्थव्यवस्था में कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। कर्ज महंगा होने से मांग घटती है, जो विदेशी पूंजी को आकर्षित कर डॉलर के मूल्य को मजबूती प्रदान करती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर खतरनाक स्तर तक बढ़ जाती है, तो केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करता है, जिसका सीधा नकारात्मक असर ग्रीनबैक के मूल्य पर पड़ता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का असर अत्यंत विकट और असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त नकदी छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) की नीति लागू करता है। यह एक ऐसी गैर-मानक मौद्रिक नीति है, जिसके जरिए केंद्रीय बैंक संकटग्रस्त वित्तीय प्रणाली में नकदी और कर्ज के प्रवाह को बड़े पैमाने पर बढ़ाता है। इसका सहारा उस समय लिया जाता है जब बाजार में ऋण प्रवाह पूरी तरह सूख जाता है क्योंकि वित्तीय संस्थान एक-दूसरे के डिफॉल्ट होने के डर से कर्ज देने से कतराने लगते हैं। यह अंतिम उपाय तब अपनाया जाता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करना वांछित परिणाम देने में नाकाम रहता है। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान उपजे क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व ने इसी हथियार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इसके तहत केंद्रीय बैंक अतिरिक्त डॉलर छापकर मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे वित्तीय प्रणाली में नकदी पहुंचती है। क्वांटिटेटिव ईजिंग की इस प्रक्रिया से अक्सर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) वह विपरीत प्रक्रिया है जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि को नई प्रतिभूतियों में दोबारा निवेश नहीं करता। बाजार से नकदी सोखने वाली यह प्रक्रिया आमतौर पर अमेरिकी डॉलर की कीमतों के लिए सकारात्मक मानी जाती है। वैश्विक मुद्राओं और कमोडिटी बाजार पर व्यापक प्रभाव डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का सीधा असर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों पर साफ देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी अगस्त की शुरुआत के बाद के अपने नए निचले स्तर पर आ गई। रातों-रात 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे टूटने के बाद यह जोड़ी 0.7000 के स्तर के पास काफी कमजोर नजर आ रही है। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी से भड़की महंगाई की चिंता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने डॉलर को दो महीने के शिखर पर पहुंचा दिया है, जिसने ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की दर वृद्धि संबंधी उम्मीदों को पीछे छोड़ दिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) शुक्रवार के सत्र में थोड़ा नीचे फिसला, जिससे 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर की ओर जारी उसकी हालिया तेज रफ्तार पर विराम लग गया। संभावित सरकारी हस्तक्षेप के डर से जापानी मुद्रा के मंदड़िए सतर्क रुख अपना रहे हैं। इस बीच, बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो बाजार की उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा। हालांकि, फेड के सख्त रुख के कारण डॉलर-येन में तेजी का रुझान बना हुआ है। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों पर भी कड़े दबाव के संकेत मिले हैं। सोना गुरुवार देर शाम 4,244 डॉलर प्रति औंस के साप्ताहिक निचले स्तर से उबरने की कोशिश करता दिखा, लेकिन यह 4,300 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही सीमित रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और वैश्विक बॉन्ड बाजार में जारी बिकवाली के कारण सोना चार सप्ताह में अपने सबसे खराब प्रदर्शन की ओर अग्रसर दिखा। इस बीच, ट्रेजरी यील्ड में जारी उछाल को थामने के प्रयासों के तहत अमेरिकी वित्त विभाग ने 6 अरब डॉलर मूल्य के दीर्घावधि ट्रेजरी बॉन्ड की दोबारा खरीद करने का फैसला किया है, जिसकी घोषणा ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने की है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी से वैश्विक वित्तीय बाजारों, भारतीय रुपये और आयात-निर्यात लागत पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। • भारत में: डॉलर की मजबूती के चलते रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। आयात महंगा होने से घरेलू बाजार में खुदरा मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना रहती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर जाने से विदेशी संस्थागत निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में लगा सकते हैं। इससे इक्विटी बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बॉन्ड आवंटन की समीक्षा करनी पड़ सकती है। • सोना और कमोडिटी खरीदारों के लिए: मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बना रहेगा, जिससे यह 4,300 डॉलर के नीचे सीमित रह सकता है। हालांकि, यदि घरेलू मुद्रा कमजोर होती है तो भारतीय बाजारों में आयात शुल्क और मुद्रा अवमूल्यन के कारण सोने की स्थानीय कीमतें अपेक्षाकृत ऊंची बनी रह सकती हैं। • विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर के मुकाबले स्थानीय मुद्रा में कमजोरी आने से अमेरिका में पढ़ाई और विदेश यात्रा का खर्च बढ़ सकता है। छात्रों और यात्रियों को ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रावधान करने की जरूरत होगी। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में भारी उछाल के पीछे आर्थिक आंकड़ों का लचीलापन, बढ़ती ऊर्जा लागत और फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियां मुख्य कारण हैं। • ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका: अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव लगातार बने हुए हैं और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने साल के अंत तक एक और दर वृद्धि की संभावना जताई है। सख्त मौद्रिक नीति की इस उम्मीद ने अमेरिकी संपत्तियों में यील्ड की मांग को बढ़ा दिया है। • ऊर्जा कीमतों में हालिया तेजी: कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने बाजार में महंगाई के दोबारा भड़कने का डर पैदा कर दिया है। इससे केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। • अमेरिकी वित्तीय घाटा और ऋण चिंताएं: अमेरिकी सरकार के भारी बजट घाटे और कर्ज की स्थिरता को लेकर उपजी चिंताओं ने 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड को 19 साल के उच्चतम स्तर 5.23 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। निवेशक सरकारी ऋण पत्रों को धारण करने के एवज में अधिक रिटर्न की मांग कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) वर्तमान में किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? डॉलर इंडेक्स 101.29 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो इसके आठ हफ्तों के उच्च स्तर 101.30 के बेहद करीब है। 2. 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड किस स्तर पर पहुंच गई है? 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.23 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले 19 वर्षों का उच्चतम स्तर है। 3. डॉलर इंडेक्स के लिए अगला प्रमुख प्रतिरोध स्तर कौन सा है? तकनीकी विश्लेषण के अनुसार डॉलर इंडेक्स के लिए अगला बड़ा प्रतिरोध इसका वार्षिक उच्च स्तर 101.80 है। 4. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। 5. ट्रेजरी यील्ड को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी वित्त विभाग क्या कदम उठा रहा है? ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की घोषणा के अनुसार अमेरिकी वित्त विभाग 6 अरब डॉलर मूल्य के दीर्घावधि ट्रेजरी बॉन्ड की दोबारा खरीद करेगा। 6. डॉलर में तेजी का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा है? मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण सोना 4,300 डॉलर के नीचे बना हुआ है और चार हफ्तों में अपने सबसे खराब प्रदर्शन की ओर है। https://trendkia.com/market/ameriki-trejari-yilda-men-uchhala-ke-bicha-dollar-index-101-80-ke-stara-ki-ora-agrasara-38234 TrendKia — Har trend, sabse pehle.