एंडी बर्नहैम के नए प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद से पाउंड में तेजी, वहीं मध्य पूर्व के तनाव से यूरो पस्त ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में एंडी बर्नहैम की संभावित ताजपोशी से ब्रिटिश पाउंड को एक बड़ा सहारा मिला है और बाजार में स्थिरता की उम्मीद जगी है। दूसरी ओर, ईरान विवाद और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण यूरो लगातार दबाव में कारोबार कर रहा है। वैश्विक मुद्रा बाजार में इस सप्ताह दो प्रमुख मुद्राओं के बीच बिल्कुल विपरीत रुझान देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां ब्रिटेन के घरेलू राजनीतिक घटनाक्रमों ने ब्रिटिश पाउंड को एक नई ऊर्जा दी है, वहीं दूसरी तरफ यूरो लगातार बढ़ते बाहरी दबावों से जूझ रहा है। पाउंड में आई इस ताजा मजबूती के कारण EUR/GBP विनिमय दर 0.8500 के अहम स्तर को बरकरार रखने में विफल रही है। सोमवार को कारोबारी सत्र के दौरान यूरो ने अपनी पिछली सारी बढ़त गंवा दी। मुद्राओं का यह उतार-चढ़ाव दोनों क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है, जहां ब्रिटेन की राजनीतिक तस्वीर साफ होने से बाजार उत्साहित है, वहीं यूरोपीय संघ की आर्थिक और भू-राजनीतिक चिंताएं गहरा रही हैं। एंडी बर्नहैम की उम्मीदवारी से बाजार को मिली राहत पाउंड की कीमतों में आई इस व्यापक तेजी का सबसे बड़ा कारण डाउनिंग स्ट्रीट में होने वाला नेतृत्व परिवर्तन है। बाजार अब इस बात के लिए खुद को तैयार कर रहा है कि मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम जल्द ही ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री का पद संभाल सकते हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब कीर स्टार्मर ने केवल दो साल के छोटे से कार्यकाल के बाद ही जून में प्रधानमंत्री पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। बर्नहैम के सत्ता में आने के साथ ही ब्रिटेन की राजनीति में उथल-पुथल का दौर भी जारी रहेगा, क्योंकि वह पिछले एक दशक से भी कम समय में देश के सातवें प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इतनी जल्दी-जल्दी नेतृत्व बदलने के बावजूद, बाजार की प्रतिक्रिया इस बार काफी सकारात्मक नजर आ रही है। द टाइम्स अखबार को दिए गए एक विस्तृत इंटरव्यू में, एंडी बर्नहैम ने देश के लिए अपना विजन साझा किया है। उन्होंने देश की व्यवस्था को पूरी तरह से रीवायर करने और आम लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए 10 साल की एक लंबी आर्थिक योजना जारी करने का संकल्प लिया है। जब से यह साफ हुआ है कि बर्नहैम ही स्टार्मर की जगह लेने के लिए सबसे मजबूत और योग्य उम्मीदवार हैं, तब से उन्होंने लगातार बाजार की चिंताओं को शांत करने का प्रयास किया है। उन्होंने एक बेहद जिम्मेदार राजकोषीय नीति लागू करने का वादा किया है, जिसने निवेशकों का भरोसा जीता है। यही वजह है कि पाउंड का रुख लगातार मजबूत बना हुआ है। हालांकि, निवेशक अभी भी GBP को लेकर थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं, क्योंकि उन्हें बर्नहैम की आने वाली कैबिनेट के सदस्यों के नामों की घोषणा का बेसब्री से इंतजार है। जब तक नए मंत्रियों के नाम साफ नहीं हो जाते, बाजार पूरी तरह से जश्न मनाने से बच रहा है। भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी कमजोरी से जूझता यूरो इंग्लिश चैनल के दूसरी तरफ, यूरो की कहानी बिल्कुल अलग है। यह एकल मुद्रा अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले लगातार कमजोर पड़ रही है। यूरो पर इस समय कई नकारात्मक कारकों का दबाव है, जिनमें सबसे प्रमुख है मध्य पूर्व में ईरान को लेकर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। इस क्षेत्रीय विवाद ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। चूंकि यूरोजोन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें यूरोपीय व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए एक सीधा आर्थिक झटका हैं। यही कारण है कि यूरो के लिए बुनियादी दृष्टिकोण कमजोर हो गया है। लाइव मार्केट डेटा भी यूरो के लिए एक चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश कर रहा है। फिलहाल EUR/USD जोड़ी 1.14 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है, और आज के सत्र में यह अपने पिछले बंद भाव से 0.11% नीचे आ गई है। इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के बराबर (1.00x) बना हुआ है। तकनीकी चार्ट पर एक लंबी मंदी का रुझान साफ दिखाई दे रहा है। इसे 'डेथ क्रॉस' के रूप में देखा जा सकता है, जहां 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) और सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) दोनों 1.15 पर हैं, जो अपने 200-दिवसीय औसत (1.16) के काफी नीचे आ गए हैं। इसके अलावा 20-दिवसीय EMA बिल्कुल मौजूदा कीमत 1.14 पर है। मोमेंटम इंडिकेटर्स भी इस कमजोरी की ही पुष्टि कर रहे हैं। 14-दिवसीय RSI इस समय 44 पर है, जो तटस्थ से कमजोर स्थिति को दर्शाता है। हालांकि MACD हिस्टोग्राम थोड़ा बुलिश (तेजी का) संकेत दे रहा है, लेकिन सिग्नल लाइन -0.00 पर बिल्कुल सपाट है, जो स्पष्ट दिशा के अभाव को दिखाता है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 25 पर है, जो एक कमजोर और सीमित दायरे वाले बाजार की ओर इशारा कर रहा है। इसके साथ ही, स्टोकास्टिक ऑसिलेटर में फास्ट लाइन (39) सिग्नल लाइन (55) से पीछे चल रही है। यह जोड़ी फिलहाल 1.14 के मध्य बिंदु के साथ बोलिंगर बैंड्स के भीतर कारोबार कर रही है। 0.01 के एवरेज ट्रू रेंज (ATR) के साथ, इसके लिए तत्काल समर्थन (सपोर्ट) 1.13 के आसपास मौजूद है, जबकि ऊपर की तरफ 1.15 का स्तर इसके लिए एक मजबूत प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) का काम कर रहा है। इसके प्रमुख पिवट स्तर (R1, R2, S1, S2) भी 1.14 के आसपास ही सिमटे हुए हैं। पिछले 52 हफ्तों का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अभी नए सुरागों का इंतजार कर रहे हैं, और उनके साप्ताहिक पूर्वानुमान के अनुसार यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के आगामी फैसले अकेले यूरो को इस गिरावट से बाहर निकालने के लिए शायद पर्याप्त नहीं होंगे। यूरोजोन की अर्थव्यवस्था और ईसीबी की भूमिका यूरो की वर्तमान दुर्दशा को समझने के लिए इसकी बुनियादी संरचना को समझना जरूरी है। यूरो यूरोपीय संघ के 20 देशों की आधिकारिक मुद्रा है, जो मिलकर यूरोजोन बनाते हैं। वैश्विक स्तर पर इसका महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह अमेरिकी डॉलर के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा ट्रेड की जाने वाली मुद्रा है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31% थी, और इसका औसत दैनिक टर्नओवर 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। इस विशाल बाजार में, EUR/USD मुद्रा जोड़ी सबसे ज्यादा हावी है, जिसकी कुल लेनदेन में करीब 30% हिस्सेदारी है। इसके बाद EUR/JPY का 4%, EUR/GBP का 3% और EUR/AUD का 2% हिस्सा आता है। इस विशाल मुद्रा ब्लॉक की बागडोर जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के हाथों में है। यूरोजोन के रिजर्व बैंक के रूप में, ECB ब्याज दरें तय करने और मौद्रिक नीति के प्रबंधन का अहम काम करता है। इस संस्थान का प्राथमिक लक्ष्य पूरे क्षेत्र में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा मतलब है महंगाई को नियंत्रित करना या फिर जरूरत पड़ने पर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक का सबसे बड़ा हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। आमतौर पर, जब ECB ब्याज दरों को ऊंचा रखता है (या बाजार को भविष्य में दरें बढ़ने की उम्मीद होती है), तो इससे यूरो को काफी फायदा होता है, क्योंकि ऊंचा रिटर्न विदेशी निवेशकों को आकर्षित करता है। दूसरी ओर, विकास को गति देने के लिए दरें कम करने से आमतौर पर मुद्रा का मूल्य घट जाता है। ECB की गवर्निंग काउंसिल मौद्रिक नीति से जुड़े ये अहम फैसले लेती है, जिसकी साल में आठ बार बैठक होती है। इस निर्णायक परिषद में यूरोजोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें ECB की वर्तमान अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं। यूरो को प्रभावित करने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़े विदेशी मुद्रा बाजार के ट्रेडर्स के लिए, महंगाई का डेटा यूरो की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है। यूरोजोन में महंगाई को 'हार्मनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेस' (HICP) के जरिए मापा जाता है। अगर यह महंगाई दर अनुमान से ज्यादा तेजी से बढ़ती है, खासकर जब यह ECB के 2% के तय लक्ष्य को पार कर जाती है, तो यह बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर कर देती है ताकि कीमतों को वापस नियंत्रण में लाया जा सके। दुनिया के बाकी देशों की तुलना में जब यूरोजोन की ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो यह क्षेत्र विदेशी निवेशकों के लिए अपना पैसा लगाने का एक बहुत ही आकर्षक विकल्प बन जाता है, जिसका सीधा फायदा यूरो को मिलता है। महंगाई के अलावा भी कई ऐसे व्यापक आर्थिक आंकड़े हैं जो अर्थव्यवस्था की सेहत का हाल बताते हैं और यूरो के उतार-चढ़ाव को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इनमें GDP वृद्धि दर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए जारी होने वाले PMI आंकड़े, रोजगार की दर, और उपभोक्ता धारणा (कंज्यूमर सेंटीमेंट) सर्वे शामिल हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था यूरो के लिए हमेशा अच्छी होती है। यह न केवल अधिक विदेशी निवेश को खींचती है, बल्कि यह ECB को ब्याज दरें बढ़ाने का हौसला भी देती है, जिससे यूरो को मजबूती मिलती है। इसके ठीक उलट, अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं, तो यूरो के गिरने की आशंका बढ़ जाती है। ट्रेडर्स मुख्य रूप से यूरोजोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन—के आंकड़ों पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं, क्योंकि यूरोजोन की पूरी अर्थव्यवस्था का 75% हिस्सा इन्हीं चार देशों से आता है। एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा जो यूरो की कीमत पर गहरा असर डालता है, वह है व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस)। यह सूचक मापता है कि एक देश ने एक निश्चित अवधि में अपने निर्यात से कितनी कमाई की है और आयात पर कितना पैसा खर्च किया है। इसके पीछे का गणित बहुत सीधा है: अगर कोई देश ऐसे उत्पादों का निर्यात करता है जिनकी दुनिया भर में भारी मांग है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन उत्पादों को खरीदने के कारण उस देश की मुद्रा की मांग अपने आप बढ़ जाती है, जिससे मुद्रा मजबूत होती है। इसलिए, सकारात्मक व्यापार संतुलन (निर्यात का आयात से अधिक होना) किसी भी मुद्रा को मजबूती देता है, जबकि नकारात्मक संतुलन उसे कमजोर बनाता है। क्रिप्टो बाजार की अस्थिरता और कार्डानो का नया अपग्रेड जहां पारंपरिक मुद्राएं राजनीतिक और व्यापक आर्थिक बदलावों पर प्रतिक्रिया दे रही हैं, वहीं डिजिटल एसेट्स का बाजार अपने ही एक अस्थिर रास्ते पर चल रहा है। पिछले एक हफ्ते में, एथेरियम ने काफी शानदार प्रदर्शन किया है और यह क्रिप्टो समुदाय के आकर्षण का केंद्र बन गया है। दुनिया की इस दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी ने अन्य प्रमुख डिजिटल एसेट्स जैसे बिटकॉइन, XRP और सोलाना के मुकाबले काफी मजबूती दिखाई है। पिछले हफ्ते की शुरुआत से लेकर बुधवार के बीच, एथेरियम ने दोहरे अंकों (डबल डिजिट) में शानदार बढ़त दर्ज की। हालांकि, इसके सतह के नीचे देखने पर पता चलता है कि कुछ प्रमुख मेट्रिक्स इशारा कर रहे हैं कि यह तेजी अभी भी काफी नाजुक है। यह कमजोरी तब और साफ हो गई जब गुरुवार को व्यापक क्रिप्टो बाजार में एक बड़ा सुधार (करेक्शन) आना शुरू हो गया, जिसने एथेरियम की इस बढ़त पर ब्रेक लगा दिया। इसी बीच, कार्डानो (ADA) के नेटवर्क पर भी कुछ अहम घटनाक्रम देखने को मिले हैं। पिछले हफ्ते की मामूली रिकवरी के बाद, इसका टोकन फिलहाल $0.165 के स्तर पर ही अटका हुआ है। हालांकि कीमतों में कोई खास तेजी नहीं आई है, लेकिन शनिवार को नेटवर्क ने वान रॉसेम हार्ड फोर्क को सफलतापूर्वक सक्रिय करके एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। कार्डानो के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला ऐसा प्रोटोकॉल अपग्रेड है जिसे पूरी तरह से ऑनचेन गवर्नेंस के माध्यम से मंजूरी दी गई है। इस ऐतिहासिक कदम के जरिए नेटवर्क पर 'प्रोटोकॉल वर्जन 11' को लागू किया गया है। इस नए अपग्रेड में कई महत्वपूर्ण सुधार शामिल किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट की लागत को काफी हद तक कम करना है, जिससे यह नेटवर्क डिसेंट्रलाइज्ड एप्लिकेशन डेवलपर्स के लिए और भी अधिक उपयोगी बन सके। अमेरिकी महंगाई दर में गिरावट का असर अंत में, व्यापक वित्तीय बाजार अमेरिका से आए ताजा महंगाई के आंकड़ों से काफी प्रभावित हुआ है। बहुप्रतीक्षित जून महीने के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) ने सभी को चौंकाते हुए मासिक आधार पर 0.4% की गिरावट दर्ज की है। यह कोई मामूली गिरावट नहीं है, बल्कि अप्रैल 2020 के बाद से किसी भी एक महीने में दर्ज की गई यह सबसे बड़ी गिरावट है। इस मासिक कमी ने वार्षिक महंगाई दर को सीधा 3.5% पर खींच लिया है, जो मई के महीने में 4.2% पर थी। सबसे अहम बात यह है कि इस गिरावट ने लगातार तीन महीनों से बढ़ती आ रही महंगाई के सिलसिले को भी तोड़ दिया है। अगर आंकड़ों की और गहराई में जाएं तो, 'कोर महंगाई' (जिसमें अत्यधिक अस्थिर खाद्य और ऊर्जा कीमतों को शामिल नहीं किया जाता है) ने भी नरमी के साफ संकेत दिए हैं। मासिक आधार पर कोर कीमतें बिल्कुल सपाट रहीं और उनमें कोई बदलाव नहीं आया। वहीं वार्षिक आधार पर यह दर घटकर 2.6% (YoY) पर आ गई है। ये दोनों ही आंकड़े बाजार के विशेषज्ञों के अनुमान से कम रहे हैं। इस उम्मीद से बेहतर महंगाई दर के आंकड़ों का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दर नीतियों की दिशा तय हो सकती है, जो अंततः EUR/USD जैसी प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी गहरा प्रभाव डालती है। इसका आप पर असर • विदेशी मुद्रा ट्रेडर्स के लिए: ब्रिटेन में राजनीतिक स्थिरता और यूरोजोन में भू-राजनीतिक तनाव के बीच का अंतर EUR/GBP जोड़ी में ट्रेडिंग के नए अवसर पैदा कर रहा है। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: कार्डानो नेटवर्क पर वान रॉसेम हार्ड फोर्क के सफलतापूर्वक लागू होने से डेवलपर्स के लिए लागत कम होगी, जिससे लंबे समय में इसका उपयोग बढ़ सकता है। • वैश्विक बाजारों के लिए: अमेरिका में महंगाई दर में उम्मीद से ज्यादा गिरावट आने से ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ गई है, जिससे डॉलर कमजोर हो सकता है और शेयर बाजारों को फायदा मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. एंडी बर्नहैम के नाम से पाउंड को मजबूती क्यों मिल रही है? एंडी बर्नहैम ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए 10 साल की योजना और जिम्मेदार राजकोषीय नीति का वादा किया है, जिससे बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है। 2. यूरो में लगातार गिरावट का मुख्य कारण क्या है? मध्य पूर्व में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण यूरोजोन की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा है, जिससे यूरो कमजोर हो रहा है। 3. यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की मुख्य जिम्मेदारी क्या है? ECB की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यूरोजोन में महंगाई को नियंत्रित करना और मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके लिए वह ब्याज दरों का इस्तेमाल करता है। 4. कार्डानो नेटवर्क पर हाल ही में कौन सा अपग्रेड हुआ है? कार्डानो पर वान रॉसेम हार्ड फोर्क को लागू किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ी लागतों को कम करना है। 5. अमेरिका के जून CPI आंकड़ों ने बाजार को कैसे चौंकाया है? जून में अमेरिका की महंगाई दर में मासिक आधार पर 0.4% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो अप्रैल 2020 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। https://trendkia.com/market/andy-burnham-ke-nae-pradhanamntri-banane-ki-ummida-se-pound-men-teji-vahin-madhya-purva-ke-tanava-se-euro-pasta-9246 TrendKia — Har trend, sabse pehle.