अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को वारंट कन्वर्जन से मिले 18.32 करोड़ रुपये, 21.43 लाख नए शेयर जारी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने वारंट को इक्विटी में बदलकर 18.32 करोड़ रुपये जुटाए और 21.43 लाख नए शेयर अलॉट किए। तीन महीने में करीब 97% रिटर्न देने वाले इस शेयर की पेड-अप कैपिटल अब बढ़कर 37.15 करोड़ इक्विटी शेयर हो गई है। डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस सिस्टम बनाने वाली कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलकर 18.32 करोड़ रुपये जुटाए हैं। ऐसे समय में जब भारतीय निवेशकों की नजर रक्षा और एयरोस्पेस से जुड़ी कंपनियों पर टिकी है, यह कदम कंपनी के पूंजी आधार को और मजबूत करता है। कंपनी की सिक्योरिटीज अलॉटमेंट कमेटी ने 23 जून 2026 को निवेशकों से वारंट एक्सरसाइज की रकम मिलने के बाद 21.43 लाख इक्विटी शेयर अलॉट करने को मंजूरी दी। यह शेयर तीन महीने में करीब 97% का रिटर्न दे चुका है। शेयरधारकों के लिए यह घटनाक्रम मायने रखता है, क्योंकि वारंट कन्वर्जन से कंपनी में नई पूंजी आती है और बाजार में मौजूद इक्विटी शेयरों की संख्या बढ़ जाती है। साथ ही यह भी साफ होता है कि वारंट रखने वालों ने वारंट को लैप्स होने देने के बजाय बाकी रकम चुकाकर इक्विटी शेयरधारक बनना चुना। रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस सिस्टम के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी के लिए ऐसे पूंजी कदमों को फंडिंग और निवेशकों के भरोसे, दोनों लिहाज से देखा जाता है। 21.43 लाख शेयरों का अलॉटमेंट अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने 1 रुपये के फेस वैल्यू वाले 21,43,095 इक्विटी शेयर जारी किए, जो इतने ही वारंट के बदले में दिए गए। ये वारंट पहले प्रेफरेंशियल आधार पर जारी किए गए थे। अलॉटी से कुल 18.32 करोड़ रुपये की वारंट एक्सरसाइज रकम मिलने के बाद कन्वर्जन पूरा हुआ। हर वारंट का इश्यू प्राइस 114 रुपये रखा गया था। इसमें से 85.50 रुपये प्रति वारंट कन्वर्जन के समय बाकी एक्सरसाइज रकम के तौर पर चुकाए गए। अलॉट होने के बाद ये नए इक्विटी शेयर कंपनी के मौजूदा इक्विटी शेयरों के साथ पारी पासू (समान दर्जे के) रहेंगे, यानी इन पर भी मौजूदा शेयरों जैसे ही अधिकार लागू होंगे। इस अलॉटमेंट के बाद अपोलो माइक्रो सिस्टम्स की इश्यूड और पेड-अप शेयर कैपिटल 36.94 करोड़ इक्विटी शेयर से बढ़कर 37.15 करोड़ इक्विटी शेयर हो गई। प्रतिशत के लिहाज से यह बढ़ोतरी भले ही मामूली हो, फिर भी इससे कंपनी का इक्विटी आधार बढ़ता है और पहले जारी प्रेफरेंशियल वारंट से जुड़ी पूंजी की एक और किस्त पूरी होती है। वारंट कन्वर्जन शेयरधारकों के लिए क्यों अहम है वारंट ऐसे इंस्ट्रूमेंट होते हैं जो धारक को एक तय कीमत पर, आमतौर पर एक तय अवधि के भीतर, इक्विटी शेयर खरीदने का अधिकार देते हैं। भारत में कंपनियां अक्सर प्रमोटर, संस्थागत निवेशकों या चुनिंदा गैर-प्रमोटर निवेशकों से पूंजी जुटाने के लिए प्रेफरेंशियल वारंट का इस्तेमाल करती हैं। इस ढांचे में कंपनी को कुछ रकम पहले मिल जाती है और बाकी तब, जब वारंट को शेयरों में बदला जाता है। निवेशकों के नजरिए से कन्वर्जन का चरण इसलिए अहम है, क्योंकि इसमें वारंट धारक को अतिरिक्त रकम लगानी पड़ती है। अगर धारक को कन्वर्जन में ज्यादा फायदा नहीं दिखता, तो वारंट बिना इस्तेमाल के रह सकता है। जब निवेशक कन्वर्जन चुनते हैं, तो इसे आम तौर पर इस बात का संकेत माना जाता है कि वे कंपनी में इक्विटी का जोखिम बनाए रखने को तैयार हैं। हालांकि, वारंट कन्वर्जन से बकाया शेयरों की संख्या भी बढ़ जाती है। अगर मुनाफा बढ़े हुए इक्विटी आधार के अनुपात में नहीं बढ़ता, तो इसका असर प्रति शेयर कमाई (EPS) पर डाइल्यूशन के रूप में पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक आमतौर पर सौदे के दोनों पहलू देखते हैं, कंपनी को मिली पूंजी और बाजार में आने वाले अतिरिक्त शेयर। अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के मामले में कन्वर्जन से जहां नई रकम आई है, वहीं पेड-अप कैपिटल में 21.43 लाख शेयर भी जुड़ गए हैं। नए जारी शेयर कंपनी के बढ़े हुए इक्विटी ढांचे का हिस्सा बनेंगे और लागू नियमों व रिकॉर्ड डेट के अधीन, मौजूदा शेयरों जैसे ही कॉरपोरेट लाभों के हकदार होंगे। इसका आप पर असर • निवेशकों के लिए: कन्वर्जन से कंपनी में 18.32 करोड़ रुपये की नई पूंजी आई, लेकिन शेयरों की संख्या बढ़कर 37.15 करोड़ हो गई, इसलिए मुनाफा उसी रफ्तार से न बढ़ा तो प्रति शेयर कमाई पर हल्का डाइल्यूशन दिख सकता है। • भरोसे का संकेत: वारंट धारकों का बाकी रकम चुकाकर शेयर लेना, वारंट लैप्स होने देने के बजाय, आमतौर पर कंपनी में भरोसे का संकेत माना जाता है। सवाल-जवाब 1. अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने वारंट कन्वर्जन से कितनी रकम जुटाई? कंपनी ने वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलकर कुल 18.32 करोड़ रुपये जुटाए। 2. कितने नए शेयर अलॉट किए गए? कंपनी ने 1 रुपये फेस वैल्यू वाले 21,43,095 यानी 21.43 लाख इक्विटी शेयर अलॉट किए। 3. अलॉटमेंट को कब मंजूरी मिली? कंपनी की सिक्योरिटीज अलॉटमेंट कमेटी ने 23 जून 2026 को इसे मंजूरी दी। 4. हर वारंट का इश्यू प्राइस क्या था? हर वारंट का इश्यू प्राइस 114 रुपये था, जिसमें से 85.50 रुपये प्रति वारंट कन्वर्जन के समय चुकाए गए। 5. अलॉटमेंट के बाद कंपनी की शेयर कैपिटल कितनी हुई? इश्यूड और पेड-अप शेयर कैपिटल 36.94 करोड़ इक्विटी शेयर से बढ़कर 37.15 करोड़ इक्विटी शेयर हो गई। 6. क्या नए शेयरों पर वही अधिकार लागू होंगे? हां, नए शेयर मौजूदा शेयरों के साथ पारी पासू रहेंगे, यानी उन पर समान अधिकार लागू होंगे। https://trendkia.com/market/apollo-micro-systems-ko-varnta-kanvarjana-se-mile-18-32-karora-rupaye-21-43-lakha-nae-sheyara-jari-2716 TrendKia — Har trend, sabse pehle.