आरबीए के नीतिगत फैसले से पहले 0.7000 के स्तर पर दबाव में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, जानें तकनीकी संकेत अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं के चलते AUD/USD में मंदी का रुख देखा जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीतिगत फैसले से पहले निवेशक सतर्क हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) पर दबाव बना हुआ है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर बने रहने और फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने डॉलर इंडेक्स को मजबूत किया है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी सुरक्षित ठिकाने के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ा दी है। निवेशक अब मंगलवार को आने वाले रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जो इस मुद्रा जोड़े की अल्पकालिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तकनीकी परिदृश्य: 0.7000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी संकेतकों का विश्लेषण करने पर AUD/USD में मंदी का स्पष्ट रुझान दिखाई देता है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 35 के आसपास बना हुआ है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र की ओर इशारा कर रहा है। इसके अलावा, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) संकेतक शून्य से नीचे बना हुआ है और इसका हिस्टोग्राम भी नकारात्मक रुख दिखा रहा है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 0.7025 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.7008 से थोड़ा ऊपर है। हालांकि, यदि कीमत 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे टूटती है, तो 78.6% फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर 0.6945 पर गहरा समर्थन देखने को मिल सकता है। इससे नीचे जाने पर पिछला निचला स्तर 0.6866 एक प्रमुख संरचनात्मक समर्थन का कार्य करेगा। दूसरी ओर, तेजी की स्थिति में पहली रुकावट 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) पर 0.7026 के आसपास देखी जा रही है। यदि यह जोड़ी इस स्तर को पार करने में सफल होती है, तो 50.0% फाइबोनैचि स्तर 0.7051 अगला प्रतिरोध बनेगा। इसके बाद 38.2% स्तर 0.7094 और 23.6% रिट्रेसमेंट स्तर 0.7148 की ओर रास्ता खुल सकता है। हालांकि, जब तक कीमत 0.7235 के मुख्य उच्च स्तर से नीचे रहती है, तब तक व्यापक मंदी का ढांचा बना रहेगा। डॉलर/येन में उछाल और बैंक ऑफ जापान का रुख विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में, USD/JPY में शुक्रवार की गिरावट के बाद फिर से खरीदारी देखी गई है। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को संभालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की अटकलों के बावजूद, बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नरम रुख वाली बैठक के मिनट्स ने जापानी येन की बढ़त को सीमित कर दिया। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी डॉलर को मजबूत किया है, जिससे यह जोड़ी फिर से 158.00 के स्तर की ओर बढ़ती दिख रही है। सोने की कीमतों में गिरावट और केंद्रीय बैंकों की नीतियां अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती का सीधा असर सोने की कीमतों पर भी पड़ा है। सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिसलकर $4,200 के करीब पहुंच गया है, जो इसके मासिक दायरे की निचली सीमा के करीब है। अक्टूबर में फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने की मजबूत उम्मीदों और मुद्रास्फीति के जोखिमों ने सोने की अपील को कम कर दिया है। हाल के दिनों में फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने अपनी ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है। दोनों केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के खतरों से जूझ रहे हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि उनके भविष्य के फैसले पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं का असर भारतीय निवेशकों और फॉरेक्स ट्रेडर्स दोनों पर पड़ सकता है। • भारत में: विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर दबाव देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती हैं। • फॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए: AUD/USD जोड़े में 0.7000 का स्तर एक महत्वपूर्ण समर्थन बना हुआ है। इस स्तर के नीचे ब्रेकडाउन होने पर शार्ट पोजीशन वाले ट्रेडर्स को फायदा हो सकता है। • कमोडिटी निवेशकों के लिए: डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। कमोडिटी में निवेश करने वालों को केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों पर नजर रखनी चाहिए। • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से वैश्विक महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की मजबूत संभावनाओं ने डॉलर को और मजबूती दी है। • फेड की सख्त नीति: फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर रहने से डॉलर इंडेक्स में तेजी बनी हुई है। • अमेरिका-ईरान तनाव: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है। • आरबीए का आगामी फैसला: रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की मौद्रिक नीति घोषणा से पहले बाजार प्रतिभागी सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना हुआ है। • जापान की मौद्रिक स्थिति: बैंक ऑफ जापान के नरम रुख वाले मिनट्स और जापानी येन में कमजोरी ने भी अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान की है। सवाल-जवाब 1. AUD/USD में 0.7000 का स्तर क्यों महत्वपूर्ण है? 0.7000 एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन स्तर है। यदि यह स्तर टूटता है, तो AUD/USD में 0.6945 और 0.6866 तक और गिरावट देखने को मिल सकती है। 2. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के फैसले का क्या असर होगा? आरबीए का नीतिगत फैसला ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की ब्याज दरों की दिशा तय करेगा, जिससे इस मुद्रा जोड़े की अल्पकालिक चाल प्रभावित होगी। 3. अमेरिकी डॉलर में तेजी का मुख्य कारण क्या है? अक्टूबर में फेड द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना, ऊंची बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल में उछाल से डॉलर को सुरक्षित ठिकाने के रूप में समर्थन मिल रहा है। 4. सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आ रही है? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर और डॉलर की मजबूती के कारण सोने पर दबाव बना हुआ है, जिससे इसकी कीमतें $4,200 के करीब आ गई हैं। https://trendkia.com/market/arabie-ke-nitigata-phaisale-se-pahale-0-7000-ke-stara-para-dabava-men-australian-dollar-janen-takaniki-snketa-39737 TrendKia — Har trend, sabse pehle.