# एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख, बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल में उछाल से निवेशकों में चिंता

> वैश्विक बॉन्ड यील्ड में दोबारा बढ़त और मध्य पूर्व के तनाव के कारण एशियाई शेयर बाजारों पर दबाव बना हुआ है, हालांकि दक्षिण कोरिया के सेमीकंडक्टर निर्यात ने बाजार को सहारा दिया।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/asian-equities-mixed-as-rising-bond-yields-and-middle-east-conflict-weigh-on-market-sentiment-19565 · **Language:** Hindi
**Tags:** एशियाई शेयर बाजार, निकेई 225, कॉस्पी, स्कॉट बेसेंट, अमेरिका बांड यील्ड, सेमीकंडक्टर निर्यात, ईरान प्रतिबंध, कच्चा तेल, finance

दुनिया भर के बॉन्ड बाजारों में यील्ड के फिर से ऊपर चढ़ने और मध्य पूर्व में गहराते कूटनीतिक तनाव के कारण एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को मिला-जुला कारोबार देखा गया। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन अधिकांश प्रमुख एशियाई सूचकांक अपनी बढ़त बनाए रखने में संघर्ष करते दिखे, जिससे पूरे सप्ताह के आधार पर बाजारों में गिरावट दर्ज की जा रही है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा तरलता सहायता के तहत बांड पुनर्खरीद बढ़ाने के अप्रत्याशित कदम के बाद यील्ड में आई अस्थायी राहत समाप्त हो गई है और अमेरिकी 10-वर्षीय तथा 30-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड एक बार फिर ऊपर की ओर रुख कर चुकी है।

## अमेरिकी ट्रेजरी के कदम और वित्तीय घाटे की चुनौतियां
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने राजकोषीय समेकन का विचार सामने रखा है और सरकारी बॉन्ड पुनर्खरीद की सीमा बढ़ाने की पेशकश की है। ट्रेजरी विभाग ने 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाली प्रतिभूतियों के लिए ऑपरेशन साइज को प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक लागू रहेगी। इसके बावजूद वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बैलेंस शीट के स्तर पर किए गए ऐसे उपाय लंबे समय तक कारगर साबित नहीं हो सकते।

वाणिज्यिक बैंक कॉमर्सबैंक के विश्लेषक क्रिस्टोफ रीगर का आंकलन है कि जब तक सरकार कर्ज कम करने की कोई ठोस योजना नहीं लाती, तब तक बॉन्ड बाजार में स्थिरता आना मुश्किल है। उनका कहना है कि अमेरिकी ट्रेजरी का हस्तक्षेप दीर्घकालिक रूप से तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि इसे सार्वजनिक ऋण को कम करने की विश्वसनीय राजकोषीय नीति का समर्थन प्राप्त न हो। वित्तीय बाजार के भागीदार केवल अस्थायी राहत उपायों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अमेरिकी सार्वजनिक वित्त के समग्र प्रक्षेपवक्र की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।

## मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
खाड़ी क्षेत्र में जारी कूटनीतिक गतिरोध ने ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताएं फिर से गहरी हो गई हैं। वाशिंगटन द्वारा ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा कसने के लिए एक आर्थिक योजना की तैयारी की जा रही है, जिसकी औपचारिक घोषणा सोमवार को होने की संभावना है। इस प्रस्तावित कदम का मुख्य उद्देश्य ईरानी बैंकों, शिपिंग रजिस्ट्री, नकद हस्तांतरण और तस्करी नेटवर्क को लक्षित करना है, ताकि तेहरान को वैश्विक बाजारों से अलग-थलग कर परमाणु और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत के लिए मजबूर किया जा सके।

## दक्षिण कोरियाई बाजार में तेजी: सेमीकंडक्टर का जलवा
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दक्षिण कोरिया का कॉस्पी (KOSPI) सूचकांक 0.74 प्रतिशत की मजबूती के साथ 6,900 के स्तर के पास कारोबार करता दिखा। दक्षिण कोरियाई बाजार को मजबूत व्यापारिक आंकड़ों और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दमदार मांग से समर्थन मिला है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में लगभग 1 प्रतिशत और एसके हायनिक्स के शेयरों में करीब 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। शेयरधारकों को रिटर्न मिलने की उम्मीदों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक की बढ़ती मांग ने इन कंपनियों को मजबूती दी है। अगस्त के पहले 20 दिनों में दक्षिण कोरिया का सेमीकंडक्टर निर्यात लगभग तीन गुना होकर 26 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसने तकनीकी क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

## चीन और जापान के शेयर बाजारों की स्थिति
जापान का प्रमुख शेयर सूचकांक निकेई 225 तकनीकी क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली के कारण दबाव में नजर आया। टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध 225 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला निकेई सूचकांक हालिया सत्रों में 66,034 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि जापान की मूल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) दर 1.8 प्रतिशत पर रही, जो बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुकूल थी, लेकिन टेक सेक्टर के नुकसान ने सूचकांक को नीचे खींच लिया। प्राविधिक संकेतकों के अनुसार निकेई का 14-दिवसीय RSI 49 पर स्थिर है, जबकि 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 58,248 के आसपास बना हुआ है।

चीन के मुख्य भूमि बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क रहा और वे सरकार की ओर से नए आर्थिक प्रोत्साहन उपायों का इंतजार कर रहे हैं। शंघाई कंपोजिट सूचकांक 0.12 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 3,900 के पास आ गया, जबकि शेनज़ेन कंपोनेंट 0.5 प्रतिशत सुधरकर 14,050 के करीब पहुंचा। बाजार सहभागियों की निगाहें 25 से 28 अगस्त को होने वाली नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति की बैठक पर टिकी हैं, जहां जुलाई के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद नई नीतिगत घोषणाओं की संभावना जताई जा रही है।

## एशियाई अर्थव्यवस्था की संरचना और प्रमुख क्षेत्र
वैश्विक आर्थिक विकास में एशियाई क्षेत्र का योगदान लगभग 70 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में विकसित और उभरती दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में जापान का निकेई और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी प्रमुख सूचकांक हैं, जबकि चीन के पास हॉन्ग कॉन्ग हैंग सेंग, शंघाई कंपोजिट और शेनज़ेन कंपोजिट जैसे तीन महत्वपूर्ण सूचकांक हैं। दूसरी ओर, भारत जैसी तेजी से बढ़ती उभरती अर्थव्यवस्था के निफ्टी और सेंसेक्स सूचकांक दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

एशियाई बाजारों का क्षेत्रीय ढांचा अलग-अलग उद्योगों पर आधारित है। जापान, दक्षिण कोरिया और चीन के शेयर बाजारों में प्रौद्योगिकी कंपनियां का दबदबा है। हॉन्ग कॉन्ग और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र वित्तीय सेवाओं के प्रमुख गढ़ बने हुए हैं। चीन और जापान में ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का बड़ा योगदान है, जबकि भारत और चीन में मध्यम वर्ग की बढ़ती आबादी के कारण रिटेल और ई-कॉमर्स कंपनियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।

## एशियाई बाजारों को प्रभावित करने वाले कारक और जोखिम
एशियाई शेयर सूचकांकों की चाल काफी हद तक सूचीबद्ध कंपनियों की तिमाही और वार्षिक वित्तीय रिपोर्टों पर निर्भर करती है। इसके अतिरिक्त, संबंधित देशों की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति, केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी फैसले और सरकारी राजकोषीय नीतियां बाजार को दिशा देती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी शेयर बाजार यानी वॉल स्ट्रीट का प्रदर्शन भी एशियाई बाजारों पर सीधा प्रभाव डालता है।

हालांकि, एशियाई बाजारों में निवेश के साथ कुछ विशिष्ट जोखिम भी जुड़े होते हैं। राजनीतिक प्रणालियों की विविधता (पूर्ण लोकतंत्र से लेकर सत्तावादी शासन तक) के कारण कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता में काफी भिन्नता पाई जाती है। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक विवाद और प्राकृतिक आपदाएं बाजारों में अचानक अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थानीय मुद्रा में उतार-चढ़ाव बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि मजबूत मुद्रा निर्यात को महंगा बनाती है जबकि कमजोर मुद्रा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाती है।

## मुद्रा, सोना और अमेरिकी क्रेडिट बाजार का हाल
विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटेन के कमजोर खुदरा बिक्री आंकड़ों के बावजूद जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) जोड़ी 1.3650 के स्तर के पास सकारात्मक दायरे में बनी रही। अमेरिकी डॉलर में व्यापक कमजोरी ने ब्रिटिश पाउंड को सहारा दिया है। वहीं यूरो/यूएसडी (EUR/USD) 1.1700 के करीब स्थिर रहा, जहां निवेशक जर्मनी, यूरोज़ोन और अमेरिका के आने वाले पीएमआई (PMI) आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,550 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता दिखा, जो जून के बाद का उच्चतम स्तर है। अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों में नरमी के संकेतों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोकने की संभावना से सोने को बल मिला है। इस बीच, अमेरिका का कुल राष्ट्रीय ऋण 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े के करीब पहुंच रहा है। वित्तीय विश्लेषक माइक महारे ने चेतावनी दी है कि 1.4 ट्रिलियन डॉलर का प्राइवेट क्रेडिट बाजार अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है। न्यू दिल्ली स्थित फॉरेक्स विश्लेषक अख्तर फारुकी का मानना है कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों की नीतियां आगामी हफ्तों में मुद्रा तथा इक्विटी बाजारों की चाल तय करेंगी।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय रुपया और घरेलू शेयर बाजार (निफ्टी/सेंसेक्स) पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

**निवेशकों के लिए:** वैश्विक अनिश्चितता और तकनीकी शेयरों में उतार-चढ़ाव के कारण अल्पकालिक पोर्टफोलियो में सतर्कता बरतना आवश्यक है।

## सवाल-जवाब

### 1. एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को गिरावट का मुख्य कारण क्या था?
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में फिर से हुई बढ़त और मध्य पूर्व में ईरान पर नए प्रतिबंधों की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से बाजार पर दबाव बना।

### 2. दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक क्यों बढ़ा?
अगस्त के पहले 20 दिनों में दक्षिण कोरिया का सेमीकंडक्टर निर्यात लगभग तीन गुना होकर 26 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिससे सैमसंग और एसके हायनिक्स के शेयरों में उछाल आया।

### 3. जापान का निकेई 225 सूचकांक किस स्तर पर रहा?
तकनीकी शेयरों में नुकसान के चलते निकेई 225 सूचकांक 66,034 के स्तर पर बंद हुआ, हालांकि जापान की मुख्य मुद्रास्फीति 1.8% पर स्थिर रही।

### 4. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड बाजार के लिए क्या घोषणा की है?
ट्रेजरी विभाग ने 9 सितंबर से 4 नवंबर के बीच 10 से 30 वर्ष की परिपक्वता वाले बॉन्ड की पुनर्खरीद सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दी है।

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