# AUD/USD में शानदार रिकवरी, अमेरिकी डॉलर कमज़ोर पड़ने के बाद 0.7000 के करीब पहुंचा

> अमेरिकी बाज़ार से आए कमज़ोर महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों पर ताज़ा उम्मीदों के बीच ऑस्ट्रेलियन डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शानदार वापसी की है। 0.7000 के अहम स्तर के करीब कारोबार कर रहे इस पेयर को टेक्निकल चार्ट पर बने बुलिश 'गोल्डन क्रॉस' से भी भारी सपोर्ट मिल रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-07-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/aud-usd-men-shanadara-rikavari-us-dollar-kamazora-parane-ke-bada-0-7000-ke-kariba-pahuncha-8954 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऑस्ट्रेलियन डॉलर, अमेरिकी डॉलर, फॉरेक्स ट्रेडिंग, फेडरल रिज़र्व, महंगाई दर, करेंसी बाज़ार, लौह अयस्क, finance

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर (AUD) ने हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स डॉलर के मुकाबले शानदार वापसी की है। पिछले कुछ सत्रों में शुरुआती कमज़ोरी के बाद, यह करेंसी पेयर अब 0.7000 के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गया है। ताज़ा लाइव डेटा के अनुसार, AUD/USD 0.7000 पर ट्रेड कर रहा है और इसने पिछले बंद स्तर 0.6999 के मुकाबले मामूली बढ़त दर्ज की है। ग्लोबल फॉरेक्स बाज़ार में अमेरिकी डॉलर (Greenback) में आई चौतरफा कमज़ोरी ने इस तेज़ी को हवा दी है। बड़े निवेशक और ट्रेडर्स इस रिकवरी पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिका से आए ताज़ा महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिज़र्व की भविष्य की नीतियों से जुड़ा हुआ है। दुनिया की दो बड़ी मुद्राओं के बीच का यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि कैसे एक देश के आर्थिक आंकड़े पूरी दुनिया के वित्तीय बाज़ारों में तुरंत हलचल मचा सकते हैं।

 अमेरिकी डॉलर में आई ताज़ा गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका से आए कमज़ोर महंगाई दर (US CPI) के आंकड़े हैं। जून महीने के कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया, क्योंकि इसमें महीने-दर-महीने के आधार पर 0.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल 2020 में आई भारी आर्थिक उथल-पुथल के बाद से यह उपभोक्ता कीमतों में एक महीने के भीतर आई सबसे बड़ी गिरावट है। इस भारी मासिक गिरावट के कारण, वार्षिक महंगाई दर भी खिसककर 3.5 प्रतिशत पर आ गई है, जो मई महीने में 4.2 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी। इस तरह, पिछले तीन महीनों से लगातार बढ़ रही महंगाई का सिलसिला आखिरकार टूट गया है, जिसने नीति निर्माताओं और बाज़ार के जानकारों को काफी राहत दी है।

 महंगाई कम होने की इस तस्वीर को कोर कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स (Core CPI) के आंकड़ों ने और पुख्ता कर दिया है। कोर इंडेक्स, जिसमें खाने-पीने की चीज़ों और ऊर्जा जैसी अस्थिर कीमतों को शामिल नहीं किया जाता, बाज़ार के अनुमानों से भी कम रहा। मासिक आधार पर कोर कीमतें पूरी तरह से सपाट रहीं, जबकि वार्षिक दर घटकर 2.6 प्रतिशत पर आ गई। इन कमज़ोर आंकड़ों को देखते ही बाज़ार ने तेज़ी से प्रतिक्रिया दी। ट्रेडर्स ने तुरंत यह भांप लिया कि फेडरल रिज़र्व को अब लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर रखने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इसी अनुमान के चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापता है, शुरुआती उछाल के बाद भारी दबाव में आ गया और 100.70 के स्तर के आसपास मामूली गिरावट के साथ ट्रेड करने लगा।

 

## फेडरल रिज़र्व की नीतियों में बदलाव की उम्मीद

जून महीने के इन कमज़ोर महंगाई आंकड़ों का सबसे गहरा असर फेडरल रिज़र्व की आगामी मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदों पर पड़ा है। बाज़ार के जानकारों का भरोसा अब इस बात पर बढ़ गया है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने के बजाय वर्तमान स्थिति को ही बनाए रखना पसंद करेगा। CME FedWatch टूल के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में होने वाली बहुप्रतीक्षित नीतिगत बैठक में ब्याज दरों के अपरिवर्तित रहने की संभावना अब उछलकर 85.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महज़ एक हफ्ता पहले यह संभावना सिर्फ 65.8 प्रतिशत थी। यह भारी उछाल स्पष्ट करता है कि मुद्रा बाज़ार महंगाई के हर छोटे-बड़े आंकड़े को कितनी गंभीरता से लेते हैं और उसी के अनुसार अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं।

 अगर फेडरल रिज़र्व इस महीने के अंत में अपनी ब्याज दरों को स्थिर रखता है, तो यह अमेरिका में चल रहे आक्रामक दर वृद्धि चक्र के संभावित अंत का एक बड़ा संकेत होगा। जब दरें बढ़ना रुक जाती हैं, तो अमेरिकी डॉलर को मिलने वाला अतिरिक्त लाभ कम हो जाता है। इससे ग्लोबल निवेशकों के लिए ऑस्ट्रेलियन डॉलर जैसी अन्य मुद्राएं अधिक आकर्षक बन जाती हैं, क्योंकि वे बेहतर रिटर्न की तलाश में रहते हैं। ब्याज दरों के इस अंतर में आया यह बदलाव ही वर्तमान में AUD/USD के एक्सचेंज रेट को ऊपर धकेल रहा है। जब तक बाज़ार को यह लगता रहेगा कि फेड अपनी दरें और नहीं बढ़ाएगा, तब तक अमेरिकी डॉलर के लिए अपनी पुरानी तेज़ी वापस पाना बेहद मुश्किल होगा।

 

## रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की घरेलू भूमिका

हालांकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का इस पेयर पर भारी असर होता है, लेकिन ऑस्ट्रेलियन डॉलर की ताकत पूरी तरह से घरेलू कारकों पर भी निर्भर करती है, जिनमें रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की नीतियां सबसे अहम हैं। RBA देश की आधिकारिक ब्याज दरें तय करके राष्ट्रीय मुद्रा के मूल्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। यही मुख्य दर यह तय करती है कि ऑस्ट्रेलियाई बैंक एक-दूसरे को रातों-रात दिए जाने वाले लोन पर कितना ब्याज वसूलेंगे, जिसका सीधा असर पूरे बैंकिंग सिस्टम, व्यवसायों और आम लोगों पर पड़ता है। केंद्रीय बैंक का सबसे मुख्य लक्ष्य मध्यम अवधि में देश की महंगाई दर को 2 से 3 प्रतिशत के स्थिर दायरे में बनाए रखना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ही नीति निर्माता अर्थव्यवस्था की चाल देखकर ब्याज दरों को घटाते या बढ़ाते हैं।

 जब रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में अपनी ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखता है, तो यह विदेशी पूंजी को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिससे ऑस्ट्रेलियन डॉलर को मज़बूती मिलती है। इसके विपरीत, अपेक्षाकृत कम ब्याज दरें मुद्रा के अवमूल्यन का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) या क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) जैसे बड़े कदम भी उठा सकता है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग आमतौर पर मनी सप्लाई बढ़ाता है और इसे ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए नकारात्मक माना जाता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग मनी सप्लाई को सिकोड़ता है और इसे मुद्रा के लिए सकारात्मक माना जाता है। निवेशक भविष्य की चाल भांपने के लिए RBA के हर छोटे बयान का बारीकी से विश्लेषण करते हैं।

 

## चीन की अर्थव्यवस्था और लौह अयस्क का सीधा संबंध

मौद्रिक नीतियों के अलावा, ऑस्ट्रेलियन डॉलर इस बात से भी काफी प्रभावित होता है कि ऑस्ट्रेलिया कमोडिटी एक्सपोर्ट करने वाला एक विशाल देश है। एक संसाधन-संपन्न देश होने के नाते, इसकी आर्थिक स्थिति पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है, खासकर इसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन के साथ। हाल ही में पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए अपनी प्राइम लेंडिंग रेट्स (PLRs) में कोई बदलाव नहीं किया है। चीन के इस बड़े फैसले के तुरंत बाद, ऑस्ट्रेलियन डॉलर ने अपने कई प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया, जो इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के गहरे संबंध को दर्शाता है।

 जब चीन की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती है, तो वहां के कारखानों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को चालू रखने के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारी मात्रा में कच्चे माल और सेवाओं की मांग पैदा होती है। एक्सपोर्ट में आया यह भारी उछाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर की बुनियादी मांग को सीधे तौर पर बढ़ा देता है, जिससे इसकी कीमतें ऊपर जाने लगती हैं। इसका उल्टा भी उतना ही सच है; अगर चीन में आर्थिक मंदी या सुस्ती के कोई भी संकेत मिलते हैं, तो ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर तुरंत भारी दबाव आ जाता है। इसीलिए, चीन की आर्थिक विकास दर के आंकड़ों में कोई भी सकारात्मक या नकारात्मक চমক सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियन डॉलर और इसके ट्रेडिंग पेयर्स को प्रभावित करता है।

 इस पूरे व्यापारिक रिश्ते की सबसे अहम कड़ी लौह अयस्क (Iron Ore) है। लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट उत्पाद है। साल 2021 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक ही साल में लौह अयस्क का एक्सपोर्ट 118 बिलियन डॉलर रहा था और इसका सबसे बड़ा हिस्सा सीधे चीन के स्टील कारखानों में गया था। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में लौह अयस्क की कीमतें ऑस्ट्रेलियन मुद्रा की दिशा तय करने में एक बड़ा रोल निभाती हैं। सामान्य शब्दों में समझें तो, जब ग्लोबल कमोडिटी बाज़ार में लौह अयस्क के दाम बढ़ते हैं, तो अक्सर ऑस्ट्रेलियन डॉलर में भी तेज़ी आती है क्योंकि इन महंगे उत्पादों को खरीदने के लिए खरीदारों को अधिक ऑस्ट्रेलियन डॉलर की ज़रूरत पड़ती है। अगर लौह अयस्क के दाम गिरते हैं, तो इसका विपरीत असर होता है। साथ ही, ऊंचे दाम ऑस्ट्रेलिया के लिए एक सकारात्मक ट्रेड बैलेंस (व्यापार संतुलन) बनाने की संभावनाओं को भी काफी बढ़ा देते हैं।

 

## व्यापार संतुलन और ग्लोबल मार्केट सेंटिमेंट

देश का ट्रेड बैलेंस एक बेहद अहम आर्थिक सूचकांक है, जो यह मापता है कि किसी देश ने अपने एक्सपोर्ट से जो पैसा कमाया है और अपने इंपोर्ट पर जो पैसा खर्च किया है, दोनों के बीच कितना अंतर है। यह आंकड़ा ऑस्ट्रेलियन डॉलर की लंबी अवधि की कीमत तय करने वाला एक और बुनियादी कारक है। जब ऑस्ट्रेलिया दुनिया भर में भारी मांग वाले एक्सपोर्ट उत्पाद तैयार करता है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा पैदा की गई इस सरप्लस मांग के कारण इसकी मुद्रा का मूल्य अपने आप बढ़ जाता है। इन अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को अपना सामान खरीदने के लिए अपनी स्थानीय मुद्रा को ऑस्ट्रेलियन डॉलर में बदलना पड़ता है। इसलिए, जब एक्सपोर्ट इंपोर्ट से ज्यादा होता है (यानी सकारात्मक ट्रेड बैलेंस), तो यह सीधे तौर पर AUD को मज़बूती देता है। वहीं, नकारात्मक ट्रेड बैलेंस मुद्रा के लिए भारी साबित हो सकता है।

 कठोर आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलियन डॉलर पूरी दुनिया के मार्केट सेंटिमेंट (बाज़ार के मूड) के प्रति भी बहुत संवेदनशील है। वित्तीय बाज़ार हमेशा आशावाद और निराशावाद के बीच झूलते रहते हैं। जब निवेशक आत्मविश्वास से भरे होते हैं और ज़्यादा जोखिम वाले एसेट्स (risk-on) में निवेश करके भारी मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो ऑस्ट्रेलियन डॉलर को इसका सीधा फायदा मिलता है। क्योंकि यह मुद्रा ग्लोबल ग्रोथ और कमोडिटी से जुड़ी है, इसलिए इसे जोखिम लेने की भूख का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, जब दुनिया में कोई आर्थिक संकट, युद्ध या भारी अनिश्चितता छा जाती है, तो निवेशक घबराकर पारंपरिक सुरक्षित निवेश (risk-off) की ओर भागने लगते हैं, जिसका AUD पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

 

## टेक्निकल एनालिसिस और अहम ट्रेडिंग लेवल्स

अगर हम टेक्निकल एनालिसिस के नज़रिए से देखें, तो AUD/USD करेंसी पेयर फिलहाल बेहद अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस ज़ोन के बीच से गुज़र रहा है। लाइव मार्केट डेटा यह साफ तौर पर बताता है कि यह पेयर एक लंबे समय के अपट्रेंड (बढ़त) में बना हुआ है, क्योंकि हाल ही में चार्ट पर एक बुलिश 'गोल्डन क्रॉस' बन चुका है। इस गोल्डन क्रॉस में 0.7011 पर मौजूद 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 0.6875 पर मौजूद 200-दिन के EMA को पार कर ऊपर आ गया है। इसके साथ ही, बाज़ार की गति नापने वाला प्रसिद्ध इंडिकेटर, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI), फिलहाल 54 के स्तर पर बना हुआ है। RSI का यह मध्य स्तर यह दर्शाता है कि बाज़ार अभी ना तो ओवरबॉट (अत्यधिक खरीदा हुआ) है और ना ही ओवरसोल्ड (अत्यधिक बेचा हुआ) है, जिससे यह आने वाले उत्प्रेरकों के आधार पर किसी भी दिशा में जाने के लिए तैयार है। MACD इंडिकेटर पूरी तरह से सपाट (-0.00) है, जो बाज़ार के मौजूदा कंसोलिडेशन दौर की पुष्टि करता है।

 गिरावट की स्थिति में, बाज़ार को सबसे पहला और अहम सपोर्ट 20-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज पर मिल रहा है, जो लाइव आंकड़ों के मुताबिक 0.6969 के स्तर पर मौजूद है। यह मूविंग एवरेज किसी भी छोटी अवधि की गिरावट को रोकने के लिए सबसे पहली रक्षा पंक्ति की तरह काम करेगा। अगर बाज़ार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है और सेलर्स फिर से हावी हो जाते हैं, तो अगला बड़ा सपोर्ट 0.6950 के नीचे हालिया निचले स्तरों पर मिलेगा। तकनीकी रूप से दूसरा सपोर्ट (S2) 0.6953 पर खड़ा है। अगर बाज़ार और टूटता है, तो 30 मार्च का निचला स्तर 0.6874 एक बेहद अहम स्ट्रक्चरल सपोर्ट होगा, जो इस लंबी अवधि के ट्रेंड की दिशा तय कर सकता है। जब तक यह पेयर दैनिक क्लोज़िंग के आधार पर 0.6970 के इलाके से ऊपर टिका हुआ है, तब तक इसका तकनीकी रुझान सकारात्मक बना रहेगा। ऊपर की ओर नज़र डालें, तो पहली रुकावट (R1) 0.7012 पर स्थित है। अगर खरीदार ताज़ा ज़ोर लगाते हैं और यह पेयर 15 जुलाई के उच्च स्तर 0.7021 को निर्णायक रूप से पार कर लेता है, तो यह अपनी तेज़ी को आगे बढ़ाते हुए 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक का सफर तय कर सकता है।

 

## क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार की अहम हलचलें

व्यापक डिजिटल एसेट बाज़ार में भी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसीज़ के बीच भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। एथेरियम (Ethereum) ने पिछले एक हफ्ते में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जो यह संकेत देता है कि अन्य टॉप डिजिटल एसेट्स के मुकाबले यह तकनीकी रूप से अपनी ताकत बढ़ा रहा है। हालांकि, अगर हम गहराई में जाकर देखें, तो कई अहम ब्लॉकचेन मेट्रिक्स यह चेतावनी दे रहे हैं कि यह ताज़ा उछाल अभी भी थोड़ा कमज़ोर है और यह कभी भी तेज़ी से रिवर्स (उलट) हो सकता है। पिछले हफ्ते से लेकर बुधवार के बीच, एथेरियम ने दोहरे अंकों में भारी बढ़त दर्ज की और बिटकॉइन (Bitcoin), XRP और सोलाना (Solana) जैसे दूसरे बड़े क्रिप्टो दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। यह भारी तेज़ी उस वक्त आई जब गुरुवार को पूरा क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार तकनीकी करेक्शन (गिरावट) का शिकार होने वाला था।

 दूसरी तरफ, दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन को लगातार भारी रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को बिटकॉइन की कीमत अपने बेहद अहम 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के नीचे ही दबी रही, जो फिलहाल 65,026 डॉलर के निशान के आसपास मौजूद है। इस मूविंग एवरेज को पार ना कर पाना इस बात का सीधा संकेत है कि बाज़ार में फिलहाल बियर्स (मंदी लाने वाले) का दबाव बना हुआ है। बिटकॉइन की इस जद्दोजहद के बिल्कुल विपरीत, छोटे ऑल्टकॉइन प्रोजेक्ट्स जैसे पाई नेटवर्क (Pi Network) और पंप डॉट फन (Pump.fun) ने सोमवार के कारोबारी सत्रों में स्थिर रिकवरी दिखाई है। पिछले 24 घंटों में इन खास डिजिटल एसेट्स ने अधिकांश क्रिप्टो बाज़ार से बेहतर प्रदर्शन किया है, जो इस बात को साबित करता है कि क्रिप्टोकरेंसी इकोसिस्टम में कीमतें कितनी अलग-अलग और बंटी हुई हो सकती हैं।

## इसका आप पर असर
- **ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए:** फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने की बढ़ती संभावनाओं के कारण अमेरिकी डॉलर में भारी कमज़ोरी आई है, जिससे फॉरेक्स और कमोडिटी बाज़ारों में निवेश करने वालों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करने और नए मौकों का फायदा उठाने का मौका मिल रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. AUD/USD पेयर फिलहाल किस स्तर पर ट्रेड कर रहा है?
ताज़ा लाइव आंकड़ों के अनुसार, यह पेयर 0.7000 के बेहद अहम स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियन मुद्रा में शानदार रिकवरी को दर्शाता है।

### 2. अमेरिकी डॉलर में ताज़ा गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
जून महीने में अमेरिका की महंगाई दर (CPI) में 0.4 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जिसके कारण बाज़ार को लगता है कि फेडरल रिज़र्व अब ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा, और इसी वजह से डॉलर कमज़ोर हुआ है।

### 3. चीन की अर्थव्यवस्था ऑस्ट्रेलियन डॉलर को कैसे प्रभावित करती है?
चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जब चीन की अर्थव्यवस्था बढ़ती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से भारी मात्रा में कच्चे माल (जैसे लौह अयस्क) की खरीदारी करता है, जिससे ऑस्ट्रेलियन डॉलर की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।

### 4. इस करेंसी पेयर के लिए अहम टेक्निकल सपोर्ट लेवल क्या है?
टेक्निकल चार्ट के अनुसार, इस पेयर को पहला और सबसे अहम सपोर्ट 0.6969 के स्तर पर मिल रहा है, जो 20-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) है।

### 5. बिटकॉइन फिलहाल किस अहम टेक्निकल लेवल के नीचे फंसा हुआ है?
बिटकॉइन लगातार अपने 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के नीचे दबाव का सामना कर रहा है, जो फिलहाल 65,026 डॉलर के स्तर के आसपास मौजूद है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._