ऑस्ट्रेलिया के रोज़गार आंकड़ों में भारी उछाल, ब्याज दरों पर RBA के रुख से लेकर बिटकॉइन तक का पूरा बाज़ार अपडेट ऑस्ट्रेलिया में जून महीने के शानदार रोज़गार आंकड़ों ने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है। इस बीच, भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल में उछाल आया है, जबकि बिटकॉइन ने पारंपरिक बाज़ारों की तुलना में मज़बूती दिखाई है। वैश्विक वित्तीय बाज़ार इस समय केंद्रीय बैंकों की नीतियों, भू-राजनीतिक तनावों और एसेट्स के प्रवाह में हो रहे बदलावों के बीच एक जटिल दौर से गुज़र रहे हैं। आश्चर्यजनक रूप से बेहद मज़बूत लेबर मार्केट रिपोर्ट के सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलियन डॉलर इस समय मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है। जैसे-जैसे ट्रेडर दुनिया भर के मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों का आकलन कर रहे हैं, विदेशी मुद्रा, कमोडिटी और क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अनुमान से कहीं अधिक तेज़ गति से नई नौकरियां पैदा करने की ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था की क्षमता ने वहां ब्याज दरों को लेकर नज़रिया पूरी तरह से बदल दिया है। इसी दौरान, प्रमुख मौद्रिक नीति फैसलों से ठीक पहले यूरोपीय करेंसियां भी अलग-अलग रुझान दिखा रही हैं। इसके अलावा, पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्प और ऊर्जा बाज़ार अंतरराष्ट्रीय तनाव पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जबकि डिजिटल एसेट्स पारंपरिक टेक इंडेक्स से अलग एक नई राह पकड़ते दिख रहे हैं। ऑस्ट्रेलियन लेबर मार्केट ने तोड़े सारे अनुमान ऑस्ट्रेलियन डॉलर फिलहाल अपने अमेरिकी समकक्ष के मुकाबले 0.7000 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। बाज़ार में यह हलचल ऑस्ट्रेलिया के जून लेबर फोर्स सर्वे के तुरंत बाद देखने को मिली है, जिसने बाज़ार को एक बड़ा सकारात्मक झटका दिया है। केवल 15,000 नई नौकरियों के सर्वसम्मत अनुमान को धता बताते हुए, घरेलू अर्थव्यवस्था ने इस महीने शानदार प्रदर्शन किया और 76,300 नई नौकरियां जोड़ीं। यह मजबूत आंकड़ा मई की तुलना में भी तेज़ वृद्धि को दर्शाता है, जब 44,000 नौकरियां पैदा हुई थीं। रोज़गार के इन आंकड़ों की गहराई में जाने पर पता चलता है कि यह वृद्धि चौतरफा है। कुल नौकरियों में 29,300 फुल-टाइम पदों का योगदान रहा, जबकि 47,000 पार्ट-टाइम नौकरियां पैदा हुईं। आम तौर पर, रोज़गार के मोर्चे पर इतने बड़े उछाल से बेरोज़गारी दर में तुरंत गिरावट आनी चाहिए। हालांकि, आधिकारिक बेरोज़गारी दर लगातार दूसरे महीने 4.4% पर पूरी तरह से अपरिवर्तित रही। यह स्थिर दर वर्तमान में रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के 4.2% के अनुमान से थोड़ी ऊपर बनी हुई है। बंपर हायरिंग के बावजूद बेरोज़गारी दर में गिरावट न आने का मुख्य कारण वर्कफोर्स के बदलते समीकरण हैं। आंकड़े बताते हैं कि काम की तलाश में बड़ी संख्या में लोग लेबर पूल में शामिल हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप, पार्टिसिपेशन रेट 0.3 प्रतिशत अंक बढ़कर 67.0% हो गया है, जो लगभग एक साल का उच्चतम स्तर है। कामगारों की इस नई आमद ने नई पैदा हुई नौकरियों को आसानी से खपा लिया, जिससे एक तरफ हेडलाइन बेरोज़गारी दर स्थिर रही और दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की कुल उत्पादन क्षमता का विस्तार हुआ। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरों पर बदलाव जून के इन ज़बरदस्त रोज़गार आंकड़ों ने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर बाज़ार की उम्मीदों को पूरी तरह से बदल दिया है। लेबर डेटा जारी होने से पहले, फ्यूचर्स मार्केट ने मौद्रिक नीति के और सख्त होने की लगभग 60% संभावना जता रखी थी। लेकिन इस रिपोर्ट के बाद, RBA कैश रेट फ्यूचर्स ने साल के अंत तक ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी को लगभग पूरी तरह से प्राइस इन कर लिया है, जिससे दर 4.60% तक पहुंचने की उम्मीद है। फ्यूचर्स मार्केट में इस आक्रामक रीप्राइसिंग के बावजूद, करेंसी की आगे की गति को लेकर बाज़ार के जानकारों में अभी भी कुछ हद तक सतर्कता बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि RBA के टाइटनिंग साइकल में अभी भी एक लंबे ठहराव का जोखिम मौजूद है। अगर केंद्रीय बैंक अनुमानित बढ़ोतरी लागू करने के बजाय दरों को स्थिर रखने का विकल्प चुनता है, तो निष्क्रियता की यह लंबी अवधि विदेशी मुद्रा बाज़ार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर के मूल्यांकन के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है। यूरो और ब्रिटिश पाउंड के लिए अलग-अलग रास्ते जहां ऑस्ट्रेलियाई बाज़ार घरेलू आंकड़ों को पचाने में लगा है, वहीं यूरोपीय करेंसियां क्षेत्रीय दबावों के बीच अपनी अलग राह बना रही हैं। गुरुवार के यूरोपीय ट्रेडिंग सेशन के दौरान यूरो ने लगातार दूसरे दिन अपनी सकारात्मक गति को बरकरार रखा है और यह 1.1400 के स्तर से ऊपर मज़बूती से टिका हुआ है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के आगामी ब्याज दर फैसले से ठीक पहले इस साझी करेंसी को अच्छा सपोर्ट मिल रहा है। ट्रेडर और निवेशक केंद्रीय बैंक के बयानों पर बारीकी से नज़र रखेंगे ताकि यूरोज़ोन में भविष्य में होने वाली दर बढ़ोतरी के बारे में कोई संकेत मिल सके। इसके विपरीत, ब्रिटिश पाउंड अपनी बढ़त को कायम रखने में संघर्ष कर रहा है। GBP/USD पेयर की हालिया रिकवरी रुक गई है और यह प्रभावी रूप से 1.3400 के आंकड़े से नीचे ही सीमित रह गया है। पाउंड के ऊपर न जा पाने के पीछे कई कारक ज़िम्मेदार हैं, जिनमें अमेरिकी डॉलर की ताक़त में आया मामूली उछाल शामिल है। इसके अतिरिक्त, यूनाइटेड किंगडम के ताज़ा मुद्रास्फीति आंकड़े अर्थशास्त्रियों की उम्मीदों से कम रहे, जिससे बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा किसी आक्रामक कदम उठाए जाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। पाउंड को लेकर बाज़ार की धारणा मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण भी कमज़ोर पड़ रही है, क्योंकि ऐसे हालात हमेशा पूंजी को जोखिम वाली करेंसियों से दूर ले जाते हैं। कमोडिटीज़: कच्चे तेल में उछाल, सोने पर दबाव मध्य पूर्व के तनावों का वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर बहुत गहरा और सीधा असर पड़ रहा है। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और यह $90 प्रति बैरल के निशान की ओर बढ़ते हुए छह सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। कीमतों में इस आक्रामक तेज़ी को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से और हवा मिल रही है। ऊर्जा की बढ़ती लागत एक बार फिर वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा रही है, जिससे इस बात की उम्मीदें मज़बूत हो रही हैं कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व को कीमतों पर लगाम कसने के लिए अपनी ब्याज दरें बढ़ाने की नीति को बनाए रखना या और तेज़ करना पड़ सकता है। फेडरल रिज़र्व से जुड़ी इन आक्रामक उम्मीदों ने कीमती धातुओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल तैयार कर दिया है। गुरुवार के यूरोपीय सेशन के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है और यह $4,100 के अहम राउंड फिगर के आसपास पहुंच गया है। चूंकि सोना एक बिना यील्ड वाली एसेट है, यानी इसे होल्ड करने वालों को कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए जब केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरें बढ़ रही होती हैं, तो निवेश पूंजी को अपनी ओर आकर्षित करना इसके लिए स्वाभाविक रूप से मुश्किल हो जाता है। जैसे-जैसे ट्रेडर एक ज़्यादा आक्रामक फेड पर दांव लगा रहे हैं, बुलियन को होल्ड करने की अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट बढ़ रही है, जिससे सोने की कीमतों पर भारी दबाव पड़ रहा है। क्रिप्टोकरेंसी में दिखा लचीलापन और संस्थागत दिलचस्पी डिजिटल एसेट सेक्टर में एक अलग ही कहानी सामने आ रही है। बिटवाइज़ के CIO मैट होगन के अनुसार, अगले बड़े क्रिप्टोकरेंसी बुल मार्केट को गति देने वाला मुख्य कारक ब्लॉकचेन-आधारित वित्तीय बुनियादी ढांचे और पारंपरिक फाइनेंस के बीच बढ़ती समानता हो सकता है। यह सेक्टर पहले ही कुछ ऐसे रुझान दिखा रहा है जिन्हें बाज़ार के निचले स्तर के शुरुआती संकेत माना जा रहा है। यह लचीलापन हालिया तुलनात्मक प्रदर्शन में साफ़ दिखाई देता है। 1 जुलाई के बाद से, बिटकॉइन ने 9% की बढ़त हासिल की है, और वह भी ऐसे समय में जब पारंपरिक टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट आई है। इसी समयावधि में नैस्डैक 100 में 6% की गिरावट देखी गई है, जो बिटकॉइन की मज़बूती को रेखांकित करता है। वर्तमान में, बिटकॉइन एक शॉर्ट-टर्म करेक्शन के दौर से गुज़र रहा है और पिछले दिन की मामूली गिरावट के बाद यह $65,800 के स्तर से नीचे ट्रेड कर रहा है। हालांकि, इस कमज़ोर पड़ते प्राइस मोमेंटम ने बड़े निवेशकों को पीछे नहीं धकेला है। बुधवार को अमेरिका में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन ETF में भारी संस्थागत निवेश देखने को मिला। पूंजी के इस प्रवाह ने इन निवेश विकल्पों के लिए लगातार सातवें दिन बढ़त दर्ज की, जो इस बात का संकेत है कि दैनिक अस्थिरता के बावजूद संस्थागत खिलाड़ी इस डिजिटल एसेट में निवेश करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। इसका आप पर असर • निवेशकों के लिए: मजबूत ऑस्ट्रेलियाई लेबर मार्केट के कारण ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिसका सीधा असर करेंसी और बॉन्ड मार्केट के रिटर्न पर पड़ेगा। • उपभोक्ताओं के लिए: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों पर दबाव बन सकता है, जिससे महंगाई दर में इज़ाफ़ा संभव है। • क्रिप्टो ट्रेडर्स के लिए: पारंपरिक टेक शेयरों में गिरावट के बावजूद स्पॉट ETF में लगातार आ रहा निवेश बिटकॉइन के लिए एक मज़बूत आधार तैयार कर रहा है। सवाल-जवाब 1. जून महीने में ऑस्ट्रेलिया ने कितनी नौकरियां जोड़ीं? ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था ने जून में 76,300 नई नौकरियां जोड़ीं, जो 15,000 नौकरियों के सर्वसम्मत अनुमान से कहीं अधिक है। 2. नौकरियां बढ़ने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया की बेरोज़गारी दर 4.4% पर क्यों स्थिर रही? ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ज़्यादा लोगों ने काम की तलाश शुरू कर दी, जिससे पार्टिसिपेशन रेट बढ़कर लगभग एक साल के उच्चतम स्तर 67.0% पर पहुंच गया और नए कामगारों ने नई नौकरियों को खपा लिया। 3. क्या रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) ब्याज दरें बढ़ाएगा? मज़बूत रोज़गार आंकड़ों के बाद, वायदा बाज़ार अब साल के अंत तक RBA द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की पूरी उम्मीद कर रहा है। 4. कच्चे तेल की कीमतें $90 के करीब क्यों पहुंच गई हैं? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और इससे जुड़ी महंगाई की चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। 5. बिटकॉइन में मौजूदा ट्रेंड क्या है? 1 जुलाई से बिटकॉइन में 9% की तेज़ी आई है, और स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार सातवें दिन संस्थागत निवेश का आना जारी रहा है। 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