ऑस्ट्रेलिया का विनिर्माण क्षेत्र अगस्त में 52.0 पर स्थिर, सर्विसेज पीएमआई में गिरावट से सुस्त पड़ा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अगस्त के नवीनतम पीएमआई आंकड़ों में ऑस्ट्रेलिया की विनिर्माण गतिविधि 52.0 पर स्थिर रही, जबकि सर्विसेज और कंपोजिट सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर बना रहा। ऑस्ट्रेलिया के औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को दर्शाने वाले नवीनतम आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। अगस्त महीने के लिए जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी ग्लोबल विनिर्माण परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 52.0 पर स्थिर बना हुआ है। यह आंकड़ा पिछले महीने के समान स्तर को ही दर्शाता है, जिससे संकेत मिलता है कि देश की विनिर्माण गतिविधियों में न तो विस्तार की गति तेज हुई है और न ही इसमें कोई बड़ी गिरावट आई है। हालांकि, सेवा क्षेत्र और समग्र व्यापारिक गतिविधियों में सुस्ती का रुझान देखने को मिला है, जिसने वैश्विक मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल को सीमित रखा है। विनिर्माण, सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण अगस्त के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिलता है। जहां विनिर्माण पीएमआई 52.0 के स्तर पर टिका रहा, वहीं सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन सुस्त पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी ग्लोबल सर्विसेज पीएमआई अगस्त में गिरकर 52.9 के स्तर पर आ गया, जो पिछले महीने 53.6 के स्तर पर दर्ज किया गया था। सेवा क्षेत्र में आई इस नरमी का असर समग्र व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। देश का कंपोजिट पीएमआई, जो विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों के प्रदर्शन को मिलाकर तैयार किया जाता है, अगस्त में घटकर 52.5 रह गया। इससे पिछले महीने कंपोजिट पीएमआई 53.2 पर दर्ज किया गया था। पीएमआई सूचकांक में 50 से ऊपर का अंक आर्थिक विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में 50 से ऊपर बने रहने के बावजूद वृद्धि दर का धीमा होना निवेशकों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति अगस्त महीने के प्राथमिक पीएमआई आंकड़ों का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) की विनिमय दर पर नगण्य प्रभाव देखने को मिला है। वैश्विक मुद्रा बाजार में AUD/USD की जोड़ी दबाव में काम करती दिखी और यह 0.7115 के आसपास नकारात्मक दायरे में कारोबार कर रही थी। विदेशी मुद्रा व्यापार में अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का प्रदर्शन कमजोर रहा। मुद्रा तुलना तालिकाओं के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सबसे ज्यादा नुकसान ब्रिटिश पाउंड (GBP) के मुकाबले उठाना पड़ा, जहां यह दिन की सबसे कमजोर प्रमुख मुद्रा बनकर उभरी। विनिमय दर में आए इस उतार-चढ़ाव से स्पष्ट है कि बाजार प्रतिभागी केवल पीएमआई आंकड़ों तक सीमित न रहकर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की भावी नीतियों और वैश्विक व्यापक आर्थिक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को प्रभावित करने वाले मुख्य आर्थिक कारक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के विनिमय मूल्य और इसकी दीर्घकालिक दिशा को तय करने में कई मौलिक कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें सबसे अहम केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति, जिंसों के वैश्विक भाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन शामिल हैं। केंद्रीय बैंकिंग और ब्याज दरें: रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) देश के वाणिज्यिक बैंकों के बीच परस्पर उधार लेने की ब्याज दरें निर्धारित करता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था की उधारी लागत तय होती है। बैंक का प्राथमिक लक्ष्य वार्षिक मुद्रास्फीति को 2-3% के लक्षित दायरे में स्थिर बनाए रखना है। जब केंद्रीय बैंक अन्य प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों की तुलना में ब्याज दरें ऊंची रखता है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, अपेक्षाकृत कम ब्याज दरें मुद्रा को कमजोर करती हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक द्वारा मात्रात्मक सहजता (QE) लागू करने पर मुद्रा पर दबाव बढ़ता है, जबकि मात्रात्मक सख्ती (QT) से मुद्रा मजबूत होती है। चीन का आर्थिक स्वास्थ्य: चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। जब चीनी अर्थव्यवस्था में तेजी आती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से अधिक मात्रा में कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं का आयात करता है। इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग बढ़ती है और इसका विनिमय मूल्य ऊपर जाता है। इसके विपरीत, यदि चीन की विकास दर उम्मीद से धीमी रहती है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर तुरंत नकारात्मक असर पड़ता है। लौह अयस्क का निर्यात: प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध ऑस्ट्रेलिया के लिए लौह अयस्क (Iron Ore) सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है। वर्ष 2021 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का लौह अयस्क निर्यात 118 अरब डॉलर प्रति वर्ष तक पहुंच गया था, जिसका मुख्य गंतव्य चीन है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौह अयस्क की कीमतों में वृद्धि होने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती आती है, जबकि कीमतें गिरने पर मुद्रा दबाव में आ जाती है। व्यापार संतुलन: किसी देश द्वारा किए जाने वाले कुल निर्यात और आयात के मूल्य के अंतर को व्यापार संतुलन कहा जाता है। जब विदेशी खरीदारों की ओर से ऑस्ट्रेलियाई उत्पादों की मांग अधिक होती है, तो देश का व्यापार संतुलन अधिशेष में रहता है। सकारात्मक व्यापार संतुलन से विदेशी मुद्रा की आवक बढ़ती है, जो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान करती है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार का हाल: पॉउंड और यूरो की स्थिति ऑस्ट्रेलियाई आंकड़े जारी होने के साथ ही वैश्विक मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी हलचल देखने को मिली। ब्रिटिश पॉउंड (GBP/USD) ने अपने दैनिक लाभ को बनाए रखने का प्रयास किया, हालांकि अमेरिकी डॉलर में मामूली सुधार के बाद यह कुछ बढ़त गंवाकर 1.3630-1.3620 के दायरे की ओर वापस आ गया। पॉउंड में यह मजबूती निवेशकों द्वारा शुक्रवार को आने वाले महत्वपूर्ण यूके आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा के बीच दर्ज की गई। दूसरी ओर, यूरो (EUR/USD) की शुरुआती बढ़त पूरी तरह समाप्त हो गई। उत्तरी अमरीकी कारोबारी सत्र के उत्तरार्ध में अमेरिकी डॉलर की रिकवरी ने यूरो को नीचे धकेल दिया, जिससे यह 1.1700 के स्तर से नीचे खिसक गया। कारोबारी सत्र की समाप्ति पर यह जोड़ी व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तित रही। बाजार प्रतिभागी अब शुक्रवार को अमेरिका और यूरोप दोनों क्षेत्रों से जारी होने वाले एसएंडपी ग्लोबल विनिर्माण और सर्विसेज पीएमआई आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार: सोना 4,500 डॉलर के पार, रिपल में उछाल जिंस बाजार में सोने की कीमतों ने अपनी मजबूती फिर से हासिल की। गुरुवार के कारोबार में पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,500 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रही। अमेरिकी डॉलर में आए मामूली सुधार और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में जारी तेजी के बावजूद सोने में यह रिकवरी दर्ज की गई। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में रिपल (XRP) में मजबूत खरीदारी का रुझान देखने को मिला। गुरुवार को रिपल का भाव 1.16 डॉलर के स्तर से ऊपर निकल गया। सोमवार से लेकर अब तक इस डिजिटल संपत्ति में 20% से अधिक की तेजी आ चुकी है, जो बाजार में जोखिम लेने की क्षमता (Risk-on Sentiment) के बढ़ने का संकेत देती है। क्रिप्टो फियर एंड ग्रीड इंडेक्स गुरुवार को सुधरकर 62 अंक (लालच का दायरा) पर पहुंच गया, जो एक दिन पहले 46 अंक पर था। अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा फैसला: बॉन्ड बायबैक तरलता में बढ़ोतरी अमेरिकी ऋण बाजार में ट्रेजरी विभाग ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर ट्रेजरी ने घोषणा की कि वह 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड के लिए अपनी तरलता सहायता बायबैक नीलामी के आकार को दोगुना से अधिक बढ़ाएगा। नए आदेश के तहत, प्रति ऑपरेशन अधिकतम 2 अरब डॉलर की बायबैक सीमा को बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर किया जा रहा है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। अमेरिकी सरकार के इस कदम का उद्देश्य बॉन्ड बाजार में तरलता बनाए रखना और लंबी अवधि की ब्याज दरों को संतुलित करना है। इसका आप पर असर भारत में: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की चाल से भारतीय विनिमय दर पर असर पड़ता है, जिससे आयात-निर्यात लागत और आईटी शेयरों की धारणा प्रभावित हो सकती है। निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए: वैश्विक पीएमआई आंकड़े और अमेरिकी ट्रेजरी की बायबैक योजना जिंसों, विदेशी मुद्रा और क्रिप्टो परिसंपत्तियों की कीमतों में निकट अवधि की अस्थिरता को बढ़ा सकती है। सवाल-जवाब 1. अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का विनिर्माण पीएमआई कितना दर्ज किया गया? अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी ग्लोबल विनिर्माण पीएमआई 52.0 दर्ज किया गया, जो पिछले महीने के समान स्तर पर स्थिर रहा। 2. ऑस्ट्रेलिया के सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई में क्या बदलाव आया? अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का सर्विसेज पीएमआई 53.6 से घटकर 52.9 रह गया, जबकि कंपोजिट पीएमआई 53.2 से गिरकर 52.5 दर्ज किया गया। 3. पीएमआई आंकड़े आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का क्या रुख रहा? पीएमआई आंकड़ों का AUD पर नगण्य प्रभाव पड़ा और AUD/USD जोड़ी 0.7115 के आसपास नकारात्मक दायरे में कारोबार करती दिखी। 4. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कौन-से मुख्य कारक प्रभावित करते हैं? रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरें, लौह अयस्क की कीमतें (जो 2021 में 118 अरब डॉलर थीं), चीन की आर्थिक वृद्धि और व्यापार संतुलन मुख्य कारक हैं। 5. अमेरिकी ट्रेजरी ने बायबैक योजना में क्या बदलाव किया है? अमेरिकी ट्रेजरी ने 10-20 साल और 20-30 साल की अवधि वाले बॉन्ड के लिए बायबैक सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दी है, जो 9 सितंबर से 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। https://trendkia.com/market/australia-s-p-global-manufacturing-pmi-holds-flat-at-52-0-in-august-as-services-activity-cools-19285 TrendKia — Har trend, sabse pehle.