# ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में महंगाई का जोखिम गहराया, रिज़र्व बैंक गवर्नर मिशेल बुलक के बयानों से डॉलर में उछाल

> रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख मिशेल बुलक ने आगाह किया है कि देश में आर्थिक सुस्ती के बावजूद महंगाई के बढ़ते जोखिम सामने आ रहे हैं। इस रुख के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में 0.37 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और मुद्रा 0.7113 के स्तर पर पहुंच गई।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/australian-arthavyavastha-men-mahngai-ka-jokhima-gaharaya-reserve-bank-gavarnara-michele-bullock-ke-bayanon-se-dollar-men-uchhala-33579 · **Language:** Hindi
**Tags:** आरबीए, मिशेल बुलक, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति, ब्याज दरें, विदेशी मुद्रा बाजार, फेडरल रिज़र्व

ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में बढ़ती कीमतों को काबू करने की चुनौती बरकरार है, जहां रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलक ने स्पष्ट किया है कि महंगाई के ऊपर जाने के जोखिम अब हकीकत का रूप ले रहे हैं। अगस्त में हुई बोर्ड बैठक के दौरान नीति निर्धारकों ने पाया था कि आर्थिक परिदृश्य में जोखिम ऊपर की दिशा में झुके हुए थे। उस बैठक के बाद सामने आए आर्थिक आंकड़े दर्शाते हैं कि भले ही देश की घरेलू विकास रफ्तार धीमी पड़ रही है, लेकिन कीमतों में तेजी का दबाव लगातार गहरा रहा है। इस मौद्रिक परिदृश्य के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नई ताकत मिली और यह 0.37 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्ज करते हुए 0.7113 डॉलर पर कारोबार करता दिखा।

## श्रम बाजार और बढ़ती उत्पादन लागत का असर
केंद्रीय बैंक के आकलन के अनुसार विभिन्न आर्थिक संकेतक यह बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया की श्रम बाजार स्थितियां पूर्ण रोजगार के बेहद करीब बनी हुई हैं और वास्तव में पूर्ण रोजगार की तुलना में थोड़ी अधिक सख्त हैं। रोजगार बाजार में यह खिंचाव वेतन और लागत दोनों स्तरों पर दबाव बनाए रखता है। इसके साथ ही, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के उद्योग संपर्क कार्यक्रम यानी लायजन प्रोग्राम से संकेत मिले हैं कि कई व्यावसायिक फर्में अपनी बढ़ी हुई इनपुट लागत का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं। यह प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि उत्पादन स्तर पर होने वाली लागत वृद्धि खुदरा कीमतों में तब्दील हो रही है, जिससे बुनियादी महंगाई को तेजी से नीचे लाने के प्रयासों में रुकावट पैदा हो रही है।

## मांग में नरमी और कमजोर पड़ता हाउसिंग बाजार
नीति निर्धारकों के सामने दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने का संतुलन भी है। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि मांग में वृद्धि का रुख सुस्त हो रहा है, जो 2026 की पहली छमाही तक मांग में नरमी आने के केंद्रीय बैंक के अनुमानों के पूरी तरह अनुकूल है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के रियल एस्टेट क्षेत्र यानी हाउसिंग बाजार की स्थितियों में नरमी देखने को मिली है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि यदि आवास बाजार में अपेक्षा से कहीं अधिक बड़ी गिरावट या नरमी आती है, तो इसका नकारात्मक असर समग्र आर्थिक गतिविधियों और विकास दर पर पड़ सकता है। ऐसे में नीति निर्धारकों को इस बात पर गहराई से विचार करना पड़ रहा है कि क्या अब तक की गई मौद्रिक सख्ती मुद्रास्फीति को उचित समय सीमा के भीतर लक्ष्य पर वापस लाने के लिए पर्याप्त साबित होगी।

## मूल्य स्थिरता और मौद्रिक नीति के उपकरण
रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया देश में ब्याज दरें तय करने और समग्र मौद्रिक नीति का संचालन करने वाला शीर्ष संस्थान है। गवर्नर बोर्ड साल भर में नियमित 11 बैठकों और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन बैठकों में दर संबंधी फैसले लेता है। बैंक का मुख्य कानूनी जनादेश मूल्य स्थिरता कायम रखना है, जिसके तहत महंगाई दर को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना होता है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की स्थिरता, पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना और देशवासियों की आर्थिक समृद्धि एवं कल्याण सुनिश्चित करना भी बैंक का प्राथमिक उद्देश्य है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बैंक ब्याज दरों में बदलाव को मुख्य औजार बनाता है। अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान करती हैं, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा कमजोर होती है।

चरम आर्थिक परिस्थितियों में जब ब्याज दरों में कटौती बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए नाकाफी साबित होती है, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का इस्तेमाल करता है। इस प्रक्रिया में रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने के लिए ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की छपाई करता है, ताकि सिस्टम में तरलता बढ़ाई जा सके। इस कदम से आमतौर पर मुद्रा में कमजोरी आती है। इसके उलट, जब आर्थिक सुधार मजबूती पकड़ लेता है और महंगाई सिर उठाने लगती है, तब बैंक क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी लागू करता है। इसमें बैंक अतिरिक्त परिसंपत्तियां खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व हो चुके बॉन्ड के मूलधन का दोबारा निवेश नहीं करता, जिससे बाजार से अतिरिक्त नकदी धीरे-धीरे सिमट जाती है और यह प्रक्रिया ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक या तेजी लाने वाली मानी जाती है।

## पूंजी प्रवाह और वैश्विक मुद्रा रुझान
परंपरागत रूप से मुद्रास्फीति को किसी भी मुद्रा के लिए नकारात्मक माना जाता था क्योंकि इससे पैसे की क्रय शक्ति घटती है, लेकिन आधुनिक दौर में सीमा पार पूंजी नियंत्रण हटने के बाद स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। आज के समय में मध्यम स्तर पर ऊंची महंगाई केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। जब किसी देश में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बेहतर रिटर्न की तलाश में विदेशी निवेशक वहां भारी पूंजी निवेश करते हैं। ऑस्ट्रेलिया के मामले में इस विदेशी पूंजी प्रवाह से स्थानीय मुद्रा यानी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग में जोरदार बढ़ोतरी होती है। सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण जैसे वृहद आर्थिक संकेतक मुद्रा के मूल्य को दिशा देते हैं।

## वैश्विक बाजारों में फेडरल रिज़र्व और बैंक ऑफ जापान की हलचल
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वापसी को अमेरिकी डॉलर में आई हल्की नरमी से भी समर्थन मिला है। न्यूयॉर्क में गुरुवार को वॉल स्ट्रीट की समाप्ति के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़कर 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार पहुंच गया। बाजार प्रतिभागी फेडरल रिज़र्व के हालिया सख्त संदेश को पचाने में जुटे हैं, जहां अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने सर्वसम्मति से फेड फंड टारगेट रेंज को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 से 4.00 प्रतिशत कर दिया है। फेडरल रिज़र्व का कहना है कि यह निर्णय 2 प्रतिशत मुद्रास्फीति लक्ष्य पर समयबद्ध तरीके से लौटने के मकसद से लिया गया है।

दूसरी ओर, एशियाई बाजार खुलने से पहले यूएसडी/जेपीवाई 156.00 के दायरे में गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया, जिससे उसकी तीन दिवसीय बढ़त का दौर 156.50 के स्तर के ठीक नीचे रुक गया। निवेशकों का पूरा ध्यान अब बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठक पर टिका है, जहां 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की व्यापक उम्मीद की जा रही है। पिछले एक दशक से भी अधिक समय तक जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने वैश्विक निवेशों के लिए खरबों डॉलर का वित्तपोषण किया था, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा फिर से नीति को सख्त करने की उम्मीदों के साथ यह दौर एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। इसके साथ ही सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी जोरदार तेजी देखी गई और यह गुरुवार को तीन दिनों की गिरावट को पलटते हुए 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास नए साप्ताहिक उच्च स्तर पर पहुंचा, जिसे कच्चे तेल में आई कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की नरमी से मदद मिली।

## इसका आप पर असर
ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक के सख्त रुख और मुद्रा बाजार में आई हलचल से वैश्विक निवेशकों तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन करने वालों पर सीधा असर पड़ेगा।

- **मुद्रा विनिमय दर:** ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.37 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। इसके चलते ऑस्ट्रेलिया जाने वाले पर्यटकों या वहां पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए मुद्रा विनिमय लागत पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है।
- **आयात और निर्यात लागत:** मजबूत ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा से विदेशों से ऑस्ट्रेलिया में माल मंगाना अपेक्षाकृत सस्ता होता है जबकि स्थानीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है। व्यवसायों को मुद्रा के इस उतार-चढ़ाव के आधार पर अपने फॉरवर्ड अनुबंधों की समीक्षा करनी होगी।
- **वैश्विक पूंजी प्रवाह:** उच्च ब्याज दरों की संभावना से अंतरराष्ट्रीय निवेशक ऑस्ट्रेलियाई परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इससे वैश्विक बॉन्ड बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी के आवंटन पर असर पड़ता है।
- **जिंस और सर्राफा बाजार:** अमेरिकी डॉलर में नरमी और केंद्रीय बैंकों की सख्ती के बीच सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचा है। निवेशकों को पोर्टफोलियो जोखिम घटाने के लिए कीमती धातुओं और विदेशी मुद्रा के बदलते रुझानों पर नजर रखनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
ऑस्ट्रेलिया में आर्थिक विकास की गति धीमी होने के बावजूद महंगाई के बढ़ते जोखिमों के कारण केंद्रीय बैंक को सख्त मौद्रिक रुख बनाए रखना पड़ रहा है।

- **कड़ा श्रम बाजार:** ऑस्ट्रेलिया की रोजगार स्थितियां पूर्ण रोजगार के स्तर से भी थोड़ी अधिक सख्त बनी हुई हैं। जब रोजगार बाजार में श्रमिकों की मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होती है, तो वेतन और उत्पादन लागत में निरंतर वृद्धि का दबाव बना रहता है।
- **लागत का उपभोक्ताओं पर अंतरण:** केंद्रीय बैंक के संपर्क कार्यक्रम से पता चला है कि कारोबारी फर्में अपनी बढ़ी हुई इनपुट लागत ग्राहकों से वसूल रही हैं। खुदरा स्तर पर कीमतों के बढ़ने से समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
- **मांग और आवास क्षेत्र में असंतुलन:** आर्थिक आंकड़ों से संकेत मिल रहा है कि 2026 की पहली छमाही तक मांग धीमी हो सकती है और आवास बाजार में भी सुस्ती आ रही है। केंद्रीय बैंक इस बात का बारीकी से मूल्यांकन कर रहा है कि क्या वर्तमान दरें महंगाई को 2-3 प्रतिशत के दायरे में लाने के लिए पर्याप्त हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलक ने क्या कहा?
उन्होंने बताया कि आर्थिक विकास धीमा होने के बावजूद महंगाई के ऊपर जाने के जोखिम हकीकत का रूप ले रहे हैं और श्रम बाजार पूर्ण रोजगार से थोड़ा सख्त है।

### 2. बयान के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की क्या स्थिति रही?
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.37 प्रतिशत की तेजी के साथ 0.7113 अमेरिकी डॉलर के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

### 3. रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का मुख्य मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?
केंद्रीय बैंक का प्राथमिक कानूनी दायित्व देश में मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में रखना है।

### 4. आवास बाजार को लेकर केंद्रीय बैंक की क्या चिंता है?
हाउसिंग बाजार में स्थितियां नरम हुई हैं और बैंक का मानना है कि यदि इसमें अपेक्षा से अधिक गिरावट आई तो समग्र आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

### 5. फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया?
फेडरल रिज़र्व ने सर्वसम्मति से फेड फंड टारगेट रेंज को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 से 4.00 प्रतिशत कर दिया है।

### 6. बैंक ऑफ जापान से बाजार क्या उम्मीद कर रहा है?
बाजार प्रतिभागी आगामी नीति बैठक में बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि किए जाने की व्यापक उम्मीद कर रहे हैं।

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