ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में जापानी येन के मुकाबले लगातार दूसरे दिन फिसलन, कमजोर रोजगार आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता ऑस्ट्रेलिया में अगस्त के दौरान बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई है, जिससे मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव गहरा गया है और यह जापानी येन के सामने 110.80 के पास आ गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सेहत नरम बनी रही। घरेलू स्तर पर जारी रोजगार रिपोर्ट में पूर्णकालिक नौकरियों में गिरावट दर्ज होने के बाद मुद्रा विनिमय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जापानी येन के मुकाबले कमजोर होकर 110.80 के स्तर के आसपास पहुंच गया। दोनों मुद्राओं के बीच इस विनिमय दर में गिरावट का यह लगातार दूसरा दिन रहा, जिससे निवेशकों के बीच रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के आगामी नीतिगत फैसलों को लेकर नई चर्चाएं छिड़ गई हैं। ऑस्ट्रेलियाई श्रम बाजार में मिले-जुले रुझान और पूर्णकालिक नौकरियों में कमी ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार अगस्त में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत तक पहुंच गई। जुलाई में यह आंकड़ा 4.5 प्रतिशत पर दर्ज किया गया था, जबकि बाजार विश्लेषकों का अनुमान भी 4.5 प्रतिशत पर टिके रहने का ही था। हालांकि समग्र रोजगार बदलाव के आंकड़े में सकारात्मक सुधार देखने को मिला और कुल 39.5 हजार नई नौकरियां जुड़ीं। यह संख्या बाजार के पूर्वानुमानों से बेहतर रही और जुलाई के संशोधित 15.9 हजार नौकरियों के नुकसान के मुकाबले तेज सुधार दर्शाती है। सतही तौर पर नौकरियों की कुल संख्या में उछाल दिखने के बावजूद आंतरिक विवरणों ने आर्थिक चिंताओं को बढ़ा दिया। आंकड़े बताते हैं कि समीक्षाधीन अवधि में पूर्णकालिक नौकरियों में 6.3 हजार की कमी दर्ज की गई, जबकि अंशकालिक पदों में 45.8 हजार की भारी वृद्धि हुई। इसी के साथ श्रम भागीदारी दर भी मामूली रूप से बढ़कर 67.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। जानकारों के मुताबिक जब पूर्णकालिक रोजगार सिकुड़ता है और केवल अंशकालिक पदों की बदौलत कुल आंकड़ा बढ़ता है, तो यह घरेलू श्रम बाजार के कमजोर होने का संकेत देता है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्थिक संकेतकों का महत्व ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो श्रम बाजार से जुड़ा यह व्यापक मासिक विवरण हर महीने के समापन के लगभग 15 दिन बाद सार्वजनिक करता है। मुद्रा नीति निर्धारकों के लिए बेरोजगारी दर एक अत्यंत संवेदनशील और करीबी नजर रखे जाने वाला संकेतक माना जाता है। यद्यपि यह एक पिछड़ा हुआ संकेतक है, फिर भी उपभोक्ता खर्च और मुद्रास्फीति की भावी दिशा तय करने में इसकी सीधी भूमिका रहती है। मजबूत श्रम आंकड़े आमतौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा देते हैं, जबकि मौजूदा कमजोर आंतरिक संरचना ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा ब्याज दरों के निर्धारण में नरमी की संभावनाओं को हवा दे दी है। इसी बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर पड़ता दिखाई दिया। एशियाई सत्र में यह विनिमय दर 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ खिसक गई। मुद्रा व्यापारी न केवल श्रम बाजार की कमजोर गुणवत्ता से सतर्क हैं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित अहम बैठक से पहले भी सतर्कता बरत रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते की समयसीमा आगे बढ़ी भू-राजनीतिक और वैश्विक व्यापार मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिली है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की है कि अमेरिका और चीन अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की समयसीमा को आगे बढ़ाकर 10 जनवरी तक करने पर सहमत हो गए हैं। वाशिंगटन में चीनी उप-प्रीमियर हे लिफेंग के साथ हुई एक अनिर्धारित बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया, जिससे नवंबर की मूल समयसीमा को टाल दिया गया है। चूंकि चीन और ऑस्ट्रेलिया बेहद करीबी व्यापारिक साझेदार हैं, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था में होने वाला कोई भी उतार-चढ़ाव या नीतिगत बदलाव सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य को प्रभावित करता है। व्यापार तनाव में अस्थायी राहत से जुड़े इस विस्तार को वैश्विक व्यापार के लिहाज से देखा जा रहा है, हालांकि मुद्रा बाजारों में इसका असर व्यापक घटनाक्रमों के साथ आंका जा रहा है। जापानी येन को मिला बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंक के फैसलों का सहारा दूसरी तरफ जापानी येन की चाल पर टोक्यो में जारी नीतिगत बदलावों का स्पष्ट असर देखा जा रहा है। जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि हाल ही में जापान और अमेरिका के बीच समन्वित मुद्रा हस्तक्षेप के दौरान तय किए गए विदेशी मुद्रा सिद्धांत पूरी तरह से प्रभावी हैं। संयुक्त नीतिगत ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कातायामा ने किसी खास विनिमय दर स्तर पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। उधर बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने भी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में नया कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय व्यापक रूप से बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप ही रहा। जापानी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के बीच येन को लगातार समर्थन मिल रहा है, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 158.00 के करीब अपनी पकड़ बनाए हुए है और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भी दबाव बढ़ा रहा है। हालांकि जापान के निजी क्षेत्र से सितंबर के शुरुआती पीएमआई आंकड़े विनिर्माण और सेवाओं दोनों में सुस्त विस्तार तथा धीमी होती विकास गति का संकेत दे रहे हैं। वैश्विक बाजार, सोना और कच्चे तेल की बदलती चाल विदेशी मुद्रा बाजारों के अलावा अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों में भी उठापटक जारी है। सोने की कीमतें एशियाई सत्र में 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे जूझती दिखीं और मंदी के बुनियादी माहौल में कमजोर नजर आईं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली और बिना ब्याज वाली बुलियन परिसंपत्तियों पर असर पड़ा। शेयर बाजारों में भी सप्ताह की मजबूत शुरुआत के बाद बिकवाली का माहौल बना। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और चढ़ते बॉन्ड यील्ड ने वैश्विक इक्विटी रैली को पटरी से उतार दिया है, जिससे प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए हैं। निवेशक इस समय उच्च ब्याज दरों, ऊर्जा कीमतों में उछाल और ट्रंप-शी की आगामी मुलाकात के नतीजों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं। इसका आप पर असर विदेशी मुद्रा दरों में आए इस बदलाव और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक सख्ती का असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा, व्यापार और निवेश पर पड़ेगा। • मुद्रा विनिमय लागत: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नरमी से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले यात्रियों और छात्रों के लिए करेंसी एक्सचेंज थोड़ा अनुकूल हो सकता है। दूसरी तरफ जापानी येन में आई मजबूती से जापान यात्रा और वहां से आयात की लागत बढ़ सकती है। • आयात और निर्यात: पूर्णकालिक नौकरियों में कमी ऑस्ट्रेलिया में घरेलू मांग पर असर डाल सकती है। इससे वैश्विक कमोडिटी बाजार और व्यापारिक साझेदार देशों के निर्यात ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं। • निवेशक और ट्रेडर: फॉरेक्स ट्रेडिंग में शामिल निवेशकों को सतर्कता बरतनी होगी। बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें 1.25 प्रतिशत किए जाने के बाद येन से जुड़े जोड़ों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। • ऊर्जा और वस्तुएं: कच्चे तेल में तेजी और बॉन्ड यील्ड में उछाल से इक्विटी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। आम खुदरा निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट और जापानी येन में मजबूती मुख्य रूप से कमजोर घरेलू श्रम आंकड़ों, मौद्रिक नीतियों में अंतर और वैश्विक भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण हुई है। • कमजोर रोजगार संरचना: ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई और पूर्णकालिक नौकरियों में 6.3 हजार की गिरावट आई। कुल नौकरियों में बढ़त केवल अंशकालिक भूमिकाओं की वजह से रही, जिससे आर्थिक मजबूती पर सवाल खड़े हुए। • बैंक ऑफ जापान की सख्ती: बैंक ऑफ जापान ने नीतिगत दरों को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही जापानी बॉन्ड यील्ड में तेजी और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के डर ने येन को मजबूत सहारा दिया। • भू-राजनीतिक घटनाक्रम: अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते की समयसीमा 10 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। हालांकि ट्रंप और शी जिनपिंग की आगामी बैठक से पहले बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट का मुख्य कारण क्या रहा? अगस्त में ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई और पूर्णकालिक नौकरियों में 6.3 हजार की कमी आई, जिससे मुद्रा पर दबाव बढ़ गया। 2. अगस्त में ऑस्ट्रेलिया में कुल कितनी नई नौकरियां जुड़ीं? अगस्त के दौरान कुल रोजगार में 39.5 हजार की बढ़ोतरी हुई, जिसमें अंशकालिक पदों में 45.8 हजार की वृद्धि शामिल थी। 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। 4. अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते को लेकर क्या फैसला हुआ? दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की समयसीमा को आगे बढ़ाकर 10 जनवरी तक करने पर सहमति जताई है। 5. जापानी वित्त मंत्री ने मुद्रा हस्तक्षेप पर क्या कहा? वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने कहा कि अमेरिका-जापान के बीच पूर्व में तय किए गए विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप के सिद्धांत पूरी तरह से लागू हैं। 6. एशियाई सत्र में सोने की क्या स्थिति रही? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर की मजबूती के चलते सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे दबाव में रहा। https://trendkia.com/market/australian-dollar-men-japanese-yen-ke-mukabale-lagatara-dusare-dina-phisalana-kamajora-rojagara-ankaron-ne-barhai-chinta-37508 TrendKia — Har trend, sabse pehle.