ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर आर्थिक मंदी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से गहराया दबाव ऑस्ट्रेलिया में सितंबर पीएमआई आंकड़ों में गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के सामने लगातार चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, जिसका मुख्य कारण घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पादन और सेवा क्षेत्रों की रफ्तार धीमी पड़ना है। सितंबर महीने के ताजा परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी के स्पष्ट संकेत दिए हैं। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने की संभावनाओं ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दोहरा दबाव बना दिया है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में मंदी के आंकड़े ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में मंदी व्यापक स्तर पर दर्ज की गई है। विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई गिरकर संकुचन के दायरे में आ गया है और यह 49.3 के स्तर पर दर्ज किया गया, जो पहले 52.0 के स्तर पर था। वित्तीय और आर्थिक मानकों के अनुसार 50 से नीचे का आंकड़ा संबंधित क्षेत्र में संकुचन का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रकार सेवा क्षेत्र का पीएमआई भी 53.2 से घटकर 51.4 पर आ गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सेवाओं का विस्तार लगातार दूसरे महीने काफी धीमी गति से हो रहा है। इन दोनों प्रमुख क्षेत्रों में आई गिरावट के परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलिया का समग्र कंपोजिट पीएमआई पहले के 52.7 से लुढ़क कर 50.8 पर पहुंच गया है। फेडरल रिजर्व की सख्त नीति और वैश्विक असर दूसरी तरफ अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है। वित्तीय बाजारों में इस बात की प्रबल संभावना आंकी जा रही है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में सख्त मौद्रिक रुख बनाए रखेगा। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 89.2 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ट्रेडर्स अब बुधवार को जारी होने वाले अमेरिका के प्रारंभिक पीएमआई आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फेड अधिकारी कोलिन्स ने अपने संबोधन में अत्यंत सख्त रुख का प्रदर्शन किया, जिसका एफएक्सएस स्पीचट्रैकर स्कोर 8.1 रहा, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 6.6 रहा है। यह स्कोर नीतिगत निर्णयों के पीछे की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। उन्होंने पिछले सप्ताह हुई ब्याज दर बढ़ोतरी का समर्थन किया और मुद्रास्फीति के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर बने रहने की आशंका जताई। फेडरल फंड्स रेट को कुछ अधिक प्रतिबंधात्मक बनाए रखने का संकेत यह बताता है कि केंद्रीय बैंक सख्त आर्थिक परिस्थितियों को जारी रखने के पक्ष में है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब श्रम बाजार अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर यह भाषण इस बात की पुष्टि करता है कि फेडरल रिजर्व अत्यधिक महंगाई के लंबे दौर के बाद मूल्य स्थिरता हासिल करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। यह समग्र परिदृश्य स्वाभाविक रूप से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड को मजबूती प्रदान करता है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रमुख आर्थिक चालक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्यांकन में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की जाने वाली आधिकारिक ब्याज दरों की अत्यंत अहम भूमिका होती है। ऑस्ट्रेलिया एक समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों वाला देश है, इसलिए उसके सबसे बड़े निर्यात उत्पाद लौह अयस्क की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी मुद्रा के उतार-चढ़ाव को सीधे तौर पर निर्धारित करती हैं। इसके अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन की आर्थिक स्थिति, घरेलू मुद्रास्फीति, आर्थिक विकास दर और व्यापार संतुलन भी मुद्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं। बाजार की धारणा, अर्थात निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहे हैं या सुरक्षित संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं, इसका भी असर पड़ता है; जोखिम लेने की स्थिति ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक मानी जाती है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया वाणिज्यिक बैंकों के बीच परस्पर उधार की ब्याज दरें निर्धारित करके समग्र अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत को नियंत्रित करता है। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य ब्याज दरों में आवश्यक फेरबदल करके मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना है। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में यदि ऑस्ट्रेलिया में ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची रहती हैं, तो इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिलता है, जबकि दरें कम रहने पर मुद्रा पर नकारात्मक दबाव पड़ता है। इसके अलावा बैंक मात्रात्मक सहजता या मात्रात्मक सख्ती के माध्यम से भी ऋण परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है, जिसमें सहजता मुद्रा के लिए नकारात्मक और सख्ती सकारात्मक परिणाम देती है। चीन के साथ व्यापार और लौह अयस्क का प्रभाव चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। जब चीनी अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन करती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से अधिक कच्चा माल, वस्तुएं और सेवाएं खरीदती है। इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वैश्विक मांग बढ़ती है और उसकी कीमत में उछाल आता है। इसके विपरीत, यदि चीन की आर्थिक वृद्धि उम्मीद के मुताबिक नहीं होती, तो मांग घटने से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा कमजोर पड़ जाती है। इसी कारण चीनी आर्थिक आंकड़ों में आने वाले सकारात्मक या नकारात्मक उतार-चढ़ाव का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के सभी करेंसी जोड़ों पर दिखाई देता है। लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, जो 2021 के आंकड़ों के अनुसार सालाना 118 अरब डॉलर का योगदान देता है और इसका प्रमुख गंतव्य चीन है। इसलिए लौह अयस्क की कीमतों में बदलाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा तय करने में सक्षम है। आमतौर पर जब लौह अयस्क के दाम बढ़ते हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कुल मांग बढ़ने से मुद्रा मजबूत होती है, जबकि इसके दाम गिरने पर मुद्रा में गिरावट आती है। लौह अयस्क की ऊंची कीमतें ऑस्ट्रेलिया के व्यापार संतुलन को सकारात्मक बनाए रखने में भी मदद करती हैं, जो मुद्रा के लिए अनुकूल स्थिति है। व्यापार संतुलन का तात्पर्य देश द्वारा निर्यात से अर्जित राशि और आयात पर खर्च की जाने वाली राशि के अंतर से है। जब विदेशी खरीदारों द्वारा ऑस्ट्रेलियाई निर्यात की मांग अधिक होती है, तो सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को अतिरिक्त मजबूती देता है। एशियाई कारोबारी सत्र में प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों की स्थिति बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर 0.7100 के दायरे में सीमित रही। ऑस्ट्रेलियाई विनिर्माण क्षेत्र के संकुचन में जाने और सेवा क्षेत्र की गति धीमी रहने के बाद जोड़ी पर दबाव बना रहा। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की तेजी जोड़ी के लिए बाधा साबित हुई, जबकि बाजार प्रतिभागी गुरुवार को होने वाली ट्रंप और शी की महत्वपूर्ण शिखर वार्ता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दूसरी ओर बाजार ने अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता को नजरअंदाज कर दिया है। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी बुधवार के एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर के करीब मंडराती रही, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के बावजूद जापानी येन पर दबाव बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया कदम था और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। अमेरिकी डॉलर की मजबूती इस जोड़ी को सहारा दे रही है, यद्यपि येन में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं आगे की बढ़त को सीमित कर रही हैं। सोने के बाजार में भी सुस्ती का माहौल देखा गया, जहां पीली धातु पिछले कारोबारी सत्र में 4,300 डॉलर से नीचे के स्तर से उबरने के बाद बुधवार को एशियाई सत्र में रक्षात्मक रुख बनाए हुए है। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच अमेरिकी डॉलर 30 जुलाई के अपने उच्च स्तर के पास बना हुआ है, जिससे सोने की बढ़त सीमित हो गई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से महंगाई की चिंताएं कुछ कम हुई हैं, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड दबाव में रही है और बिना ब्याज वाली इस पीली धातु में बड़ी गिरावट रुक गई है। वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में अन्य हलचलें भी ध्यान आकर्षित कर रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई पूंजीगत व्यय फेड की मुद्रास्फीति चिंताओं में शामिल हो गया है, जहां अक्टूबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावना आधी से अधिक आंकी जा रही है। ब्रिटेन में वित्तीय गुंजाइश घटकर आधी रह गई है और बजट पेश होने से पहले फ्रांस का सीडीएस 2020 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस बीच पेजेशकियन न्यूयॉर्क में हैं, जहां उनका खाड़ी देशों के साथ सत्र निर्धारित है लेकिन कोई ईरानी द्विपक्षीय वार्ता शामिल नहीं है। सोमवार को बाजारों ने उसी एआई विस्तार को पूंजी की दो पूरी तरह से अलग-अलग लागतों पर आंका। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय पर सीधा असर डालेगी। • मुद्रा विनिमय दर पर प्रभाव: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले यात्रियों और छात्रों के लिए स्थानीय मुद्रा की लागत प्रभावित हो सकती है। यदि आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा या ट्यूशन फीस जमा करने की योजना बना रहे हैं, तो मुद्रा दरों के उतार-चढ़ाव पर नजर रखना आवश्यक है। • आयात और निर्यात लागत: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण कच्चे माल और आयातित वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय खरीद अधिक महंगी हो सकती है। आयातकों को बढ़े हुए बिलों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी लाभ मिल सकता है। • ब्याज दरों का रुख: फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की करीब 89 प्रतिशत संभावना से वैश्विक उधारी लागत ऊंची बनी रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में पूंजी की लागत बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकता है। • कमोडिटी और सोने के खरीदार: डॉलर की मजबूती के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। खुदरा खरीदारों और निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में स्थिरता या सीमित गिरावट का माहौल रह सकता है। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी घरेलू आर्थिक आंकड़ों में आई मंदी और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त मौद्रिक रुख के संयुक्त प्रभाव के कारण उत्पन्न हुई है। • घरेलू विनिर्माण और सेवा में गिरावट: सितंबर में विनिर्माण पीएमआई घटकर 49.3 पर आ गया, जो संकुचन को दर्शाता है, जबकि सेवा पीएमआई भी धीमी गति से बढ़कर 51.4 पर रहा। इन कमजोर आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था की विकास गति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। • फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत रुख: फेड अधिकारी कोलिन्स के बयानों और दिसंबर में दर वृद्धि की 89.2% संभावना ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की बढ़त ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भारी बिकवाली का दबाव डाला। • प्रमुख व्यापारिक कारक: ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक चीन की मांग और लौह अयस्क निर्यात पर निर्भर है। चीन की आर्थिक गतिविधियों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक जोखिम से बचने की धारणा ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सीमित दायरे में बनाए रखा। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलिया के विनिर्माण पीएमआई में सितंबर में क्या बदलाव देखा गया? सितंबर महीने में ऑस्ट्रेलिया का विनिर्माण पीएमआई घटकर 49.3 पर आ गया, जो पहले 52.0 था और अब यह संकुचन के दायरे में पहुंच गया है। 2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दर बढ़ाने की क्या संभावना जताई जा रही है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, वित्तीय बाजार दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 89.2 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं। 3. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। 4. लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और मुद्रा को कैसे प्रभावित करता है? लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, जो 2021 के आंकड़ों के अनुसार सालाना 118 अरब डॉलर मूल्य का था, और इसकी ऊंची कीमतें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूत करती हैं। https://trendkia.com/market/australian-dollar-para-arthika-mndi-aura-us-federal-reserve-ke-rukha-se-gaharaya-dabava-36802 TrendKia — Har trend, sabse pehle.