ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर दबाव, फेडरल रिजर्व के रुख और चीन के पीएमआई आंकड़ों का असर फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों और चीन के मैन्युफैक्चरिंग आंकड़ों के बीच ऑस्ट्रेलियन डॉलर की चाल सुस्त पड़ गई है। एशियाई सत्र के शुरुआती कारोबार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर यानी AUD/USD में नरमी देखने को मिली और यह करीब 0.7160 के आसपास कारोबार कर रहा था। मुद्रा बाजार में यह सुस्ती अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के रुख और चीन से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों के इंतजार के बीच आई है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के हालिया बयानों ने निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फेडरल रिजर्व के संकेतों का असर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारी ने जैक्सन होल संगोष्ठी में अपने पहले संबोधन के दौरान स्पष्ट किया कि यदि महंगाई में अपेक्षित नरमी नहीं आती है, तो नीति निर्माताओं को अभी और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। इस भाषण में यह स्वीकार किया गया कि मौजूदा वित्तीय परिस्थितियां उतनी सख्त नहीं हैं जितनी महंगाई पर लगाम कसने के लिए जरूरी हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह बयान इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था में कीमत के दबाव को कम करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता पड़ सकती है। CME FedWatch टूल के आंकड़ों के मुताबिक इस संबोधन के बाद बाजार में सितंबर की बैठक में कम से कम 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना बढ़कर लगभग 57.5% तक पहुंच गई है, जो इस भाषण से पहले 35% के आसपास थी। विश्लेषकों का कहना है कि अधिकारी का यह सख्त रुख अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे रहा है और जोखिम वाले असेट्स पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। चीन के आंकड़ों और कमोडिटी बाजार की भूमिका मुद्रा बाजार के व्यापारी अब चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स यानी NBS के पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI आंकड़ों के जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। चूंकि चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए इन आंकड़ों का ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यदि ये आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो इससे ऑस्ट्रेलियन डॉलर को मिलने वाले समर्थन में मदद मिल सकती है और इसकी गिरावट सीमित हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में लोह अयस्क यानी आयरन ओर की कीमतों की भी बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार 2021 के आंकड़ों के मुताबिक आयरन ओर ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात है जिसका मूल्य 118 अरब डॉलर सालाना है और इसका मुख्य गंतव्य चीन है। जब लोह अयस्क के दाम बढ़ते हैं, तो देश के निर्यात की कमाई बढ़ती है और मुद्रा की मांग मजबूत होती है, जबकि इसके विपरीत स्थिति में मुद्रा पर दबाव आता है। इसके अलावा देश का व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस भी विदेशी खरीदारों की मांग के आधार पर मुद्रा के मूल्य को प्रभावित करता है। तकनीकी विश्लेषण और यूओबी ग्रुप के अनुमान यूओबी ग्रुप के विश्लेषकों का कहना है कि ऑस्ट्रेलियन डॉलर में हालिया तेजी अब कुछ सुस्त पड़ती दिख रही है क्योंकि यह महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तरों के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने पिछले सप्ताह इस बात पर ध्यान दिलाया था कि जब यह जोड़ी 0.7125 के आसपास थी, तो इसे 0.7150 के स्तर को पार करना होगा तभी आगे की तेजी की उम्मीद की जा सकती है। इसके बाद दरें 0.7198 के उच्च स्तर तक गईं, लेकिन मोमेंटम इंडिकेटर्स में नेगेटिव डाइवर्जेंस के चलते ऊपरी स्तरों पर दबाव देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक यह जोड़ी मजबूत सपोर्ट स्तर से ऊपर बनी रहती है, तब तक इसमें आगे के उतार-चढ़ाव की गुंजाइश बनी हुई है। अन्य मुद्राओं और कमोडिटी बाजारों में हलचल इस बीच विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी फेरबदल देखा जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी GBP/USD में साप्ताहिक सुधार के बीच कमजोरी आई है और यह 1.3530 के दायरे की ओर फिसल गई है। इसी तरह यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD भी अमेरिकी डॉलर में आई जोरदार तेजी के चलते सप्ताह के अंत में सात दिनों के निचले स्तर 1.1600 के नीचे चली गई है। दूसरी ओर सोने के दाम भी साप्ताहिक निचले स्तरों के करीब पहुंच गए हैं और पीली धातु अमेरिकीTreasury यील्ड में सुधार के बीच दबाव का सामना कर रही है। तेल बाजार में भी डीजल के मोर्चे पर रिकॉर्ड तेजी देखी गई है जहां डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इसका आप पर असर मुद्रा बाजार और वैश्विक आर्थिक संकेतों का सीधा असर निवेशकों, आयातकों और विदेशी मुद्रा में लेनदेन करने वाले लोगों पर पड़ता है। • भारत में: विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से आयातित वस्तुओं, कच्चे तेल और विदेशी व्यापार की लागत प्रभावित होती है, जिससे घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है। • वैश्विक स्तर पर: अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीतिगत रुख और वैश्विक मांग के कारण निवेशकों को अपनी परिसंपत्ति आवंटन रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। • कमोडिटी पर असर: चीन के आर्थिक आंकड़ों से लोह अयस्क और अन्य औद्योगिक धातुओं की मांग तय होती है, जो वैश्विक जिंस बाजारों को दिशा देती है। • व्यापारिक लागत: विनिमय दरों में बदलाव से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लाभ मार्जिन और आयात-निर्यात अनुबंधों की लागत बदल जाती है। सवाल-जवाब 1. AUD/USD जोड़ी में हालिया नरमी की मुख्य वजह क्या है? फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के सख्त बयानों और अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती के कारण इस जोड़ी में नरमी आई है। 2. चीन के पीएमआई आंकड़ों का ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर क्या असर पड़ता है? चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए इसके मजबूत आंकड़े मुद्रा को समर्थन देते हैं जबकि कमजोर आंकड़े दबाव बनाते हैं। 3. फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक को लेकर बाजार की क्या उम्मीदें हैं? CME FedWatch टूल के अनुसार, हालिया बयानों के बाद बैठक में दरों में बदलाव की संभावनाओं को लेकर बाजार नए सिरे से आकलन कर रहा है। 4. ऑस्ट्रेलिया के निर्यात में सबसे बड़ी भूमिका किसकी है? लोह अयस्क यानी आयरन ओर ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात है, जिसका मुख्य गंतव्य चीन है। https://trendkia.com/market/australian-dollar-weakens-near-0-7150-as-fed-rate-hike-signals-and-china-pmi-loom-24783 TrendKia — Har trend, sabse pehle.