# बैंकिंग सिस्टम में 10 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी सोखने के लिए सरकारी बॉन्ड जारी करेगा रिजर्व बैंक

> बैंकिंग प्रणाली में 10 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड अधिशेष को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां नीलाम कर रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/bainkinga-sistama-men-10-lakha-karora-rupaye-ki-atirikta-nakadi-sokhane-ke-lie-sarakari-bonda-jari-karega-rbi-33688 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रिजर्व बैंक, सरकारी बॉन्ड, बैंकिंग तरलता, संजय मल्होत्रा, रेपो रेट, बॉन्ड यील्ड, बैंक ऑफ जापान

भारतीय वित्तीय प्रणाली में मौजूद नकदी के रिकॉर्ड अधिशेष को संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने चरणबद्ध तरीके से सरकारी बॉन्ड जारी करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में बैंकिंग तंत्र में अधिशेष नकदी का स्तर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये (INR 10 ट्रिलियन) आंका गया है, जो 2021 के अंतिम महीनों के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इस अत्यधिक तरलता का एक बड़ा हिस्सा विशेष विदेशी मुद्रा योजनाओं के जरिए जुटाए गए लगभग 127 अरब डॉलर (USD 127 बिलियन) के प्रवाह से बना है। इन पहलों में एफसीएनआर(बी) यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा, बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा विदेशी उधारी (ओएफसीबी) शामिल रही हैं।

## बाजार से तरलता खींचने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी
इस भारी नकदी को टिकाऊ तरीके से सिस्टम से बाहर निकालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक आज 500 अरब रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियां जारी करने की तैयारी में है। इस नीलामी के बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को भी 250-250 अरब रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बाजार में उतारी जाएंगी। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से केंद्रीय बैंक कुल 1 लाख करोड़ रुपये (INR 1 ट्रिलियन) की अतिरिक्त नकदी को सोखने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

शुरुआती चरण की नीलामी में यील्ड कर्व के छोटे और मध्यम अवधि वाले सेगमेंट्स पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। यह व्यवस्था वाणिज्यिक बैंकों को ऐसी संपत्तियां उपलब्ध कराएगी जिनकी परिपक्वता अवधि उनकी एफसीएनआर(बी) जमा देनदारियों की परिपक्वता अवधि के अनुरूप बैठती है। सरकारी बॉन्डों की प्रत्यक्ष बिक्री अल्पावधि के परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) ऑपरेशंस की तुलना में नकदी वापस लेने का अधिक टिकाऊ और प्रभावी जरिया मानी जा रही है।

## वीआरआरआर में कमजोर भागीदारी और नीतिगत रुख
हाल के दिनों में अल्पकालिक रिवर्स रेपो ऑपरेशंस में बैंकों की रुचि काफी कमजोर रही है। बीते दिन आयोजित की गई 1 लाख करोड़ रुपये की वीआरआरआर नीलामी में बाजार से केवल 403 अरब रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। इस तरह की कमजोर प्रतिक्रिया को देखते हुए खुले बाजार में सरकारी बॉन्ड की बिक्री को एक मजबूत विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया गया है।

इसके बावजूद, बाजार की तत्कालीन परिस्थितियों के अनुसार केंद्रीय बैंक वीआरआरआर, खुले बाजार में बॉन्ड बिक्री और विदेशी मुद्रा विनिमय (एफएक्स स्वैप) के मिले-जुले उपकरणों का उपयोग जारी रखेगा। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि रिजर्व बैंक के पास तरलता प्रबंधन के लिए कई साधन उपलब्ध हैं और मुद्रा बाजार दरों को नीतिगत रेपो दर के करीब बनाए रखने के लिए इन साधनों का लचीलेपन के साथ प्रयोग किया जाएगा।

## ब्याज दर परिदृश्य और बॉन्ड यील्ड पर असर
बाजार के जानकारों के अनुसार, 1 लाख करोड़ रुपये की बॉन्ड बिक्री मौजूदा 10 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष का केवल लगभग दसवां हिस्सा ही अवशोषित कर पाएगी। यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक शुरुआत में काफी नपा-तुला और सतर्क कदम उठा रहा है। यदि बाजार में अत्यधिक तरलता की स्थिति बनी रहती है, तो आगे और बॉन्ड बिक्री अथवा अन्य नकदी-अवशोषण कदमों की घोषणा संभव है।

आगामी 7 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक में नीतिगत ब्याज दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखे जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में निकट भविष्य में नीतिगत प्राथमिकताओं का केंद्र मुख्य रूप से नकदी बंध्यीकरण (लिक्विडिटी स्टेरलाइजेशन) पर ही रहने वाला है। नकदी को वापस खींचने की इस कार्रवाई से यील्ड कर्व के लंबी अवधि वाले हिस्से की तुलना में छोटी और मध्यम अवधि वाले हिस्से पर ऊपर की ओर अधिक दबाव देखा जा रहा है। इसी प्रभाव के चलते 5 वर्ष के सरकारी बॉन्ड का यील्ड 24 आधार अंक चढ़कर 6.76% पर पहुंच गया है।

## वैश्विक मुद्रा बाजार और कमोडिटी की हलचल
घरेलू बाजार में इस नकदी प्रबंधन के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में नए खरीदार सक्रिय हुए और यह जोड़ी 0.7100 के स्तर को दोबारा हासिल करने में सफल रही। इस दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के दम पर जुलाई के अंत के बाद के उच्चतम स्तर तक पहुंचे अमेरिकी डॉलर की तेजी में ठहराव आया। साथ ही, ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक (आरबीए) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कयासों और अमेरिका व ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने बाजार के जोखिम उठाने के मिजाज को सहारा दिया।

दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) ने 156.00 के स्तर से नीचे की संक्षिप्त गिरावट से वापसी की। यह जोड़ी पिछले सत्र में दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अपनी तीन दिन की बढ़त को रोकने की स्थिति में दिख रही है। अमेरिकी डॉलर के सात सप्ताह के उच्च स्तर से थमने और बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा नीति सामान्यीकरण की राह पर अधिक सख्त कदम उठाने के आकलनों ने जापानी येन को समर्थन प्रदान किया है। इस जोड़ी का दायरा सीमित बना हुआ है और निवेशकों का पूरा ध्यान शुक्रवार को आने वाले बीओजे के नीतिगत फैसले पर केंद्रित हो गया है।

कमोडिटी बाजार में, गुरुवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत के साथ सोने की कीमतें एक बार फिर 4,300 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को पार कर गईं, हालांकि यह धातु पिछले सत्र में छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर के काफी करीब बनी हुई है। जुलाई के अंत के बाद के नए उच्च स्तर से अमेरिकी डॉलर में आई नरमी ने सर्राफा को कुछ सहारा जरूर दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व का सख्त नजरिया और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव गैर-ब्याज वाली इस सुरक्षित संपत्ति के दायरे को निर्धारित कर रहे हैं।

## जापान की कम ब्याज दर नीति का ऐतिहासिक बदलाव
एक दशक से भी अधिक समय तक जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेशों को वित्तपोषित करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसी सस्ते ऋण के चलते जापानी येन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक माना जाता रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को फिर से कड़ा करने की उम्मीदों के साथ यह दीर्घकालिक लाभ एक नए चरण में प्रवेश करता दिख रहा है, जहां दुनिया के अधिकांश प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा दरें बढ़ाने के बावजूद जापान लंबे समय तक सबसे अलग खड़ा रहा था।

## इसका आप पर असर
रिजर्व बैंक द्वारा सिस्टम से अतिरिक्त नकदी खींचने से अल्पावधि बाजार दरों और बैंकों की जमा व ऋण नीतियों पर सीधा असर देखने को मिलेगा।

- **भारत में:** बैंकिंग तंत्र से 1 लाख करोड़ रुपये की नकदी हटने से बैंकों के पास फंड की लागत बढ़ सकती है। इससे आम नागरिकों को अल्पावधि फिक्स्ड डिपॉजिट पर बेहतर रिटर्न मिलने और होम या ऑटो लोन की ब्याज दरों में नरमी की गुंजाइश सीमित होने के संकेत मिलते हैं।
- **बॉन्ड निवेशकों के लिए:** 5 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 24 आधार अंक बढ़कर 6.76% पर पहुंच गई है। म्यूचुअल फंड के डेट पोर्टफोलियो और बॉन्ड खरीदारों को अब मध्यम अवधि के साधनों में अधिक प्रतिफल प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी डॉलर में ठहराव के साथ सोने की कीमतें 4,300 डॉलर के पार टिकी हुई हैं और जापानी येन में संभावित नीतिगत बदलाव से वैश्विक नकदी प्रवाह प्रभावित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय निवेश करने वाले पोर्टफोलियो प्रबंधकों को विदेशी मुद्रा विनिमय के उतार-चढ़ाव पर कड़ी नजर रखनी होगी।
- **ऋण लेने वालों के लिए:** केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दर को 5.25% पर स्थिर रखने की संभावना के कारण तत्काल आधार पर ईएमआई में बड़ी कटौती की संभावना नहीं है। कर्जदारों को आगामी 7 अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा तक अपनी मौजूदा वित्तीय योजनाओं के अनुसार ही बजट बनाना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
बैंकिंग तंत्र में 10 लाख करोड़ रुपये के विशाल नकदी अधिशेष को नियंत्रित करने और बाजार ब्याज दरों को नीतिगत दर के अनुकूल रखने के लिए रिजर्व बैंक को यह कदम उठाना पड़ा है।

- **विदेशी मुद्रा अंतर्वाह:** विशेष विदेशी मुद्रा योजनाओं जैसे एफसीएनआर(बी) और बाह्य वाणिज्यिक उधारी के माध्यम से देश में लगभग 127 अरब डॉलर की भारी पूंजी आई थी। इस पूंजी प्रवाह ने घरेलू बैंकिंग प्रणाली में तरलता का स्तर 2021 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया।
- **अल्पकालिक साधनों की विफलता:** परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी में बैंकों की भागीदारी बेहद कमजोर रही, जहां 1 लाख करोड़ रुपये की पेशकश पर सिर्फ 403 अरब रुपये की बोलियां आईं। इस सुस्त भागीदारी के कारण केंद्रीय बैंक को सरकारी बॉन्ड की एकमुश्त बिक्री जैसा टिकाऊ उपाय चुनना पड़ा।
- **नीतिगत दरों से सामंजस्य:** अत्यधिक नकदी के कारण मुद्रा बाजार की अल्पकालिक दरें आधिकारिक रेपो दर से नीचे फिसलने का जोखिम बना रहता है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, बाजार दरों को 5.25% की नीतिगत दर के निकट बनाए रखने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग जरूरी हो गया था।

## सवाल-जवाब

### 1. रिजर्व बैंक कितनी राशि के सरकारी बॉन्ड जारी कर रहा है?
रिजर्व बैंक आज 500 अरब रुपये के बॉन्ड जारी कर रहा है, जिसके बाद 21 और 28 सितंबर को 250-250 अरब रुपये के बॉन्ड जारी किए जाएंगे।

### 2. वर्तमान में बैंकिंग सिस्टम में कितना नकदी अधिशेष मौजूद है?
बैंकिंग प्रणाली में वर्तमान तरलता अधिशेष लगभग 10 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो 2021 के अंत के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।

### 3. सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर इस कदम का क्या प्रभाव पड़ा है?
इस घोषणा के बाद 5 वर्ष की परिपक्वता वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 24 आधार अंक बढ़कर 6.76% पर पहुंच गई है।

### 4. रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति बैठक कब है और दर का अनुमान क्या है?
केंद्रीय बैंक की अगली बैठक 7 अक्टूबर को निर्धारित है, जहां नीतिगत ब्याज दर को 5.25% पर स्थिर रखे जाने की उम्मीद है।

### 5. वीआरआरआर नीलामी में बैंकों की प्रतिक्रिया कैसी रही थी?
बीते दिन आयोजित 1 लाख करोड़ रुपये की वीआरआरआर नीलामी में बैंकों ने मात्र 403 अरब रुपये की बोलियां लगाई थीं।

### 6. अतिरिक्त नकदी बढ़ने का प्राथमिक कारण क्या रहा है?
विशेष विदेशी मुद्रा योजनाओं जैसे एफसीएनआर(बी) और बाह्य वाणिज्यिक उधारी के जरिए आए करीब 127 अरब डॉलर के प्रवाह से यह अधिशेष बना है।

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