बैंक इंडोनेशिया के गवर्नर के अचानक इस्तीफे से रूपया धड़ाम, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल इंडोनेशियाई केंद्रीय बैंक के प्रमुख पेरी वारजियो के पद छोड़ने के बाद रूपया दो दिनों से लगातार गिर रहा है, जबकि अमरीकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले डॉलर मजबूत बना हुआ है। इंडोनेशियाई वित्तीय बाजार में उस समय हड़कंप मच गया जब बैंक इंडोनेशिया के गवर्नर पेरी वारजियो ने सोमवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद इंडोनेशियाई रूपया (IDR) दबाव में आ गया और अमरीकी डॉलर के मुकाबले USD/IDR की दर लगातार दूसरे दिन बढ़त बनाती हुई मंगलवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबार के दौरान 18,130 के आसपास पहुंच गई। केंद्रीय बैंक के शीर्ष नेतृत्व में इस अचानक बदलाव ने निवेशकों के मन में मौद्रिक नीति की स्थिरता और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने साफ किया है कि इस प्रशासनिक बदलाव से देश की क्रेडिट रेटिंग पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है। केंद्रीय बैंक में अचानक फेरबदल और रूपया पर बढ़ता दबाव इंडोनेशियाई परिसंपत्तियों पर बैंक इंडोनेशिया के गवर्नर के इस्तीफे का गहरा असर पड़ा है। बाजार के भागीदार इस बात से चिंतित हैं कि शीर्ष पद पर हुए इस बदलाव से देश के वित्तीय तंत्र में अस्थिरता आ सकती है। जब किसी उभरती अर्थव्यवस्था का केंद्रीय बैंक प्रमुख बिना किसी पूर्व सूचना के हटता है, तो विदेशी निवेशक अक्सर अपनी पूंजी निकालने लगते हैं। एसएंडपी जैसी वैश्विक साख निर्धारण एजेंसियों का आंकलन है कि यद्यपि देश का बुनियादी आर्थिक ढांचा और सॉवरेन रेटिंग फिलहाल सुरक्षित है, फिर भी अंतरिम अवधि में नीतिगत दिशा को लेकर बाजार में आशंकाएं बनी रहेंगी। इसके चलते मुद्रा बाजार में रूपया की बिकवाली देखने को मिल रही है और डॉलर के मुकाबले यह निचले स्तरों पर कारोबार कर रहा है। फेडरल रिजर्व का निर्णय और अमरीकी डॉलर का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमरीकी डॉलर अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रहा है। अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की बुधवार को आने वाली नीतिगत घोषणा से पहले निवेशक बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं। ब्याज दरों को लेकर बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 38% संभावना जताई जा रही है, जबकि सितंबर तक दरों में कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की संभावना 81.4% तक पहुंच गई है। सिटाडेल सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों का मानना है कि फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श अपनी मुद्रास्फीति विरोधी छवि को मजबूत करने और मूल्य स्थिरता बहाल करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए ब्याज दर बढ़ाने का कदम उठा सकते हैं। मध्य पूर्व का कूटनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल में राहत दूसरी तरफ, भू-राजनीतिक मोर्चे से कुछ सकारात्मक खबरें आने के कारण वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं को थोड़ी राहत मिली है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि मध्य पूर्व संघर्ष को सुलझाने के लिए अमरीका और ईरान के बीच अच्छी बातचीत चल रही है। वाशिंगटन ने सप्ताहांत में अभियान को रोक दिया, जिसके चलते लगातार तीन दिनों तक कोई सैन्य हमला दर्ज नहीं किया गया। यद्यपि तेहरान के विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि अमरीका के साथ कोई सीधी वार्ता नहीं हो रही है और उनका एकमात्र सक्रिय संवाद Strait को लेकर ओमान के साथ चल रहा है, फिर भी इन कूटनीतिक संकेतों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। तेल के दामों में कमी से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद जगी है। 'रिस्क-ऑन' बनाम 'रिस्क-ऑफ' बाजार की समझ वित्तीय बाजार में 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' दो ऐसे मानक शब्द हैं जो यह दर्शाते हैं कि किसी दिए गए समय में निवेशक कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। 'रिस्क-ऑन' माहौल में निवेशक भविष्य के प्रति आशावादी होते हैं और अधिक जोखिम वाली संपत्तियों में निवेश करते हैं। ऐसी स्थिति में आमतौर पर शेयर बाजार चढ़ते हैं, सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटीज के दाम बढ़ते हैं और कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और रूस जैसी अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं रिस्क-ऑन रुझान के दौरान बेहतर प्रदर्शन करती हैं क्योंकि वैश्विक आर्थिक गतिविधि बढ़ने से कच्चे माल की मांग में इजाफा होता है। इसके विपरीत, जब बाजार में 'रिस्क-ऑफ' का माहौल होता है, तब निवेशक भविष्य की अनिश्चितता से बचने के लिए सुरक्षित निवेश का सहारा लेते हैं। ऐसे समय में सरकारी बॉन्ड, सोना और अमरीकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) व स्विस फ्रैंक (CHF) जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं मजबूत होती हैं। अमरीकी डॉलर को वैश्विक रिजर्व मुद्रा होने का फायदा मिलता है क्योंकि संकट के समय निवेशक अमरीकी सरकारी कर्ज को सबसे सुरक्षित मानते हैं। जापानी येन को घरेलू निवेशकों के मजबूत समर्थन का लाभ मिलता है, जबकि स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून स्विस फ्रैंक को पूंजी सुरक्षा का सबसे बड़ा जरिया बनाते हैं। अन्य प्रमुख मुद्राओं, सोने और डिजिटल एसेट्स का हाल अमरीकी डॉलर की व्यापक मजबूती के कारण अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों पर भी दबाव देखा जा रहा है। यूरो और ब्रिटिश पाउंड दोनों ही डॉलर के मुकाबले रक्षात्मक रुख अपनाए हुए हैं। GBP/USD 1.3300 के करीब संघर्ष कर रहा है, जबकि EUR/USD 1.1300 के मध्य स्तर के पास अपने मासिक निचले स्तरों के आसपास अटका हुआ है। फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक शुरू होने के कारण ट्रेडर्स बड़ी पोजीशन लेने से बच रहे हैं। कीमती धातुओं में सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को $4,100 के स्तर से ऊपर टिकने में विफल रहने के बाद सोना $4,050 के स्तर से नीचे आ गया, जिसमें दिन के दौरान लगभग 0.85% की कमी देखी गई। तकनीकी संकेतकों के अनुसार सोने में आगे भी नरमी का रुझान बना रह सकता है। इसी तरह क्रिप्टो बाजार में भी मंदी का असर दिख रहा है। रिपल और स्टेलर जैसी प्रमुख डिजिटल संपत्तियों में क्रमशः 4% और 5% से अधिक की गिरावट आई है। डेरिवेटिव्स डेटा और कमजोर गति को देखते हुए विक्रेताओं का वर्चस्व बना हुआ है, जिससे इन ऑल्टकॉइन्स में आगे और गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। इसका आप पर असर • वैश्विक निवेशक और ट्रेडर्स: अमरीकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की अनिश्चितता से दुनिया भर के वित्तीय बाजारों और मुद्रा विनिमय दरों पर सीधा असर पड़ता है। • कमोडिटी बाजार और उपभोक्ता: मध्य पूर्व में तनाव घटने से कच्चे तेल के दामों में गिरावट आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई से राहत मिलने के संकेत हैं। • उभरती अर्थव्यवस्थाएं: केंद्रीय बैंक के शीर्ष नेतृत्व में अचानक बदलाव से स्थानीय मुद्रा कमजोर हो सकती है और विदेशी पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ता है। सवाल-जवाब 1. इंडोनेशियाई रूपया क्यों गिर रहा है? बैंक इंडोनेशिया के गवर्नर पेरी वारजियो के अचानक पद छोड़ने के कारण मौद्रिक नीति की स्थिरता और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे रूपया में गिरावट आई। 2. फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर बाजार की क्या उम्मीदें हैं? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार जुलाई में दर बढ़ोतरी की 38% और सितंबर तक कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की 81.4% संभावना जताई जा रही है। 3. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट क्यों दर्ज की गई? अमरीका और ईरान के बीच वार्ता के संकेत मिलने और सप्ताहांत में अमरीकी हमलों के रुकने से मध्य पूर्व में तनाव कम हुआ है, जिससे कच्चे तेल के दाम गिरे हैं। 4. 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' बाजार में क्या अंतर है? रिस्क-ऑन माहौल में निवेशक शेयरों और कमोडिटी जैसी जोखिम भरी संपत्तियों में पैसा लगाते हैं, जबकि रिस्क-ऑफ में सोना, बॉन्ड और डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों को तरजीह दी जाती है। 5. सोने और क्रिप्टोकरेंसी में क्या बदलाव देखा गया? सोना गिरकर $4,050 के नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि रिपल 4% से अधिक और स्टेलर 5% से अधिक टूट चुके हैं। https://trendkia.com/market/bank-indonesia-ke-gavarnara-ke-achanaka-istiphe-se-rupiah-dharama-vaishvika-bajaron-men-anishchitata-ka-mahaula-11296 TrendKia — Har trend, sabse pehle.