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  "type": "article",
  "title": "महंगाई के मोर्चे पर राहत नहीं, बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने दी चेतावनी",
  "summary": "बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका नहीं है, लेकिन ऊर्जा और खाद्य कीमतों के कारण महंगाई के जोखिम ऊपर बने हुए हैं।",
  "content": "ब्रिटेन के आर्थिक हालात को लेकर बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने मंगलवार को अपने विचार रखे। उनके मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था फिलहाल किसी भी तरह की मंदी की जद में नहीं है और हालिया आंकड़े थोड़ा बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा करते हैं। इसके बावजूद, उन्होंने यह भी साफ किया कि ऐतिहासिक पैमानों पर अभी भी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी बनी हुई है और महंगाई को लेकर जोखिम लगातार ऊपर की तरफ झुके हुए हैं। ऊर्जा और खाद्य पदार्थों के बढ़ते दाम इस स्थिति को और जटिल बना रहे हैं, खासकर जब दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव कीमतों को और अधिक हवा दे रहे हैं।\n\nअर्थव्यवस्था और मंदी की स्थिति पर रुख\nएंड्रयू बेली का मानना है कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मंदी के कगार पर नहीं है। उनके अनुसार, नवीनतम आंकड़े पहले से कुछ मजबूत नजर आ रहे हैं और आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, हालांकि ऐतिहासिक मानकों के मुकाबले यह कमजोरी का संकेत भी देती हैं। बाजार में बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरों का कर्व इस बात को दर्शाता है कि निवेशकों को भविष्य में ऊर्जा की कीमतों में और तेजी आने की गहरी चिंता सता रही है। गवर्नर ने इस बात को भी खारिज करने की कोशिश की कि केंद्रीय बैंक के पास दरों को बिना किसी शर्त के तेजी से बढ़ाने की कोई गुप्त योजना मौजूद है।\n\nमहंगाई को बढ़ावा देने वाले वैश्विक कारक\nखाद्य और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई के जोखिम ऊपर बने रहने की मुख्य वजहें वैश्विक उथल-पुथल से जुड़ी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने ऊर्जा की कीमतों को ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है, और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में यह और भी ऊपर जा सकती हैं। इसके अलावा, यूक्रेन की तरफ से रूसी रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों के कारण रिफाइंड तेल उत्पादों के दाम भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इन तमाम दबावों के बीच ब्रिटेन में होम लोन यानी मॉर्गेज दरों में हुआ इजाफा जी-7 देशों के मुकाबले लगभग सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है, जिससे आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ गया है।\n\nकेंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली और मौद्रिक नीति\nबैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम की मौद्रिक नीति तय करने वाली प्रमुख संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में मूल्य स्थिरता यानी कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत दो प्रतिशत की स्थिर महंगाई दर का लक्ष्य रखा जाता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक बेस लेंडिंग दरों में बदलाव करता है। बैंक वह दर तय करता है जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है और बैंक आपस में एक-दूसरे को उधार देते हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों का स्तर तय होता है। इसका सीधा असर पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य पर भी पड़ता है। जब महंगाई बैंक ऑफ इंग्लैंड के तय लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके जवाब देता है, जिससे लोगों और व्यवसायों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। यह पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक माना जाता है क्योंकि ऊंची ब्याज दरें ब्रिटेन को वैश्विक निवेशकों के लिए अपनी पूंजी लगाने के लिहाज से एक आकर्षक विकल्प बनाती हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई लक्ष्य से नीचे फिसल जाती है, तो यह सुस्त आर्थिक विकास का संकेत होता है और बैंक अर्थव्यवस्था में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर सकता है।\n\nक्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग\nअतिरिक्त असाधारण परिस्थितियों में बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग नामक नीति को भी लागू कर सकता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक किसी संकट में फंसे वित्तीय तंत्र में कर्ज के प्रवाह को काफी हद तक बढ़ा देता है। यह एक आखिरी विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली नीति है जब सामान्य तरीके से ब्याज दरों में कटौती से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं। इसमें बैंक सरकारी या उच्च रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने के लिए नए नोट छापकर वित्तीय संस्थानों से परिसंपत्तियां खरीदता है, जिसका असर आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग को कमजोर करने के रूप में सामने आता है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग इसका ठीक उल्टा रुख है, जिसे तब अपनाया जाता है जब अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही हो और महंगाई बढ़ने लगे। इसमें बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद बॉन्ड की मूल राशि का पुनर्निवेश करना रोक देता है, जो आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग के लिए मजबूत स्थिति पैदा करता है।\n\nविदेशी मुद्रा बाजारों और जिंसों का हाल\nमंगलवार के एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7200 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा था, जो 14 मई के बाद से इसका सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी डॉलर पर लगातार दबाव बना हुआ है क्योंकि जापानी येन में आई तेजी ने फेडरल रिजर्व की सख्त दरों और भू-राजनीतिक तनावों से मिलने वाले समर्थन को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही, इस महीने के अंत में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा एक और ब्याज दर बढ़ाए जाने की मजबूत होती उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए मददगार साबित हो रही हैं। हालांकि, चीन के मिले-जुले व्यापार संतुलन के आंकड़े इस जोड़े की तेजी को सीमित रखते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सत्र के दौरान डॉलर-येन का जोड़ा 154.00 के आसपास झूलता रहा, जो दिन के शुरुआती कारोबार में 153.00 से नीचे छूए गए छह महीने के निचले स्तर से उबरने के बाद की स्थिति है। इसके बावजूद, येन को जापान की मजबूत मजदूरी वृद्धि के आंकड़ों और दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के संशोधित आंकड़ों से लगातार समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, ऊर्जा बाजार में अमेरिकी डीजल का क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है और यह 102.00 डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है।\n\nइसका आप पर असर\nबैंक के गवर्नर के बयानों और वैश्विक आर्थिक रुझानों का असर सीधे तौर पर आम नागरिकों और निवेशकों पर पड़ता है।\n\n• भारत में: वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और खाद्य कीमतों में तेजी का असर भारत के आयात बिल और घरेलू मुद्रास्फीति पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है।\n• ग्लोबल बाजारों में: ब्रिटिश पाउंड और विदेशी मुद्रा बाजारों में कारोबार करने वाले निवेशकों को ब्याज दरों से जुड़े उतार-चढ़ाव के लिए सतर्क रहना होगा।\n• कर्ज और होम लोन: ब्रिटेन में बढ़ रही मॉर्गेज दरों और वैश्विक स्तर पर सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण उधार लेना महंगा बना हुआ है।\n• ऊर्जा की कीमतें: डीजल और तेल के बढ़ते दामों का सीधा असर परिवहन और माल भाड़े की लागत पर पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकेंद्रीय बैंक के रुख और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों में बदलाव के पीछे कई अहम कारण और भू-राजनीतिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।\n\n• ऊर्जा और खाद्य दबाव: अमेरिका-ईरान संघर्ष और यूक्रेनी हमलों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा और रिफाइंड उत्पादों के दाम ऊपर गए हैं।\n• आर्थिक लचीलापन: हालिया आंकड़े उम्मीद से थोड़े बेहतर रहे हैं, जिसके कारण अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका फिलहाल टल गई है।\n• मूल्य स्थिरता लक्ष्य: बैंक ऑफ इंग्लैंड दो प्रतिशत के लक्षित मुद्रास्फीति स्तर को बनाए रखने के लिए सख्त मौद्रिक रुख अपनाने पर विचार कर रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर कौन हैं?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली हैं।\n\n2. क्या यूके की अर्थव्यवस्था मंदी के कगार पर है?\nएंड्रयू बेली के अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था फिलहाल मंदी के कगार पर नहीं है और नवीनतम आंकड़े थोड़े मजबूत हैं।\n\n3. महंगाई के जोखिम किन चीजों से जुड़े हैं?\nमहंगाई के जोखिम मुख्य रूप से ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों से जुड़े हुए हैं।\n\n4. बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य लक्ष्य क्या है?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य लक्ष्य दो प्रतिशत की स्थिर महंगाई दर के साथ मूल्य स्थिरता हासिल करना है।\n\n5. कच्चे तेल और डीजल की कीमतों में तेजी क्यों आई है?\nअमेरिका-ईरान युद्ध और यूक्रेनी हमलों के कारण रिफाइंड तेल उत्पादों और डीजल के दाम काफी बढ़ गए हैं।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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