# बैंक ऑफ इंग्लैंड के एंड्रयू बेली ने दी चेतावनी, लंबे समय तक महंगी ऊर्जा से ब्याज दरों को स्थिर रखना होगा मुश्किल

> बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने आगाह किया है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों का असर लंबे समय तक बना रहा तो नीतिगत दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/bank-of-england-ke-andrew-bailey-ne-di-chetavani-lnbe-samaya-taka-mahngi-urja-se-byaja-daron-ko-sthira-rakhana-hoga-mushkila-38487 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैंक ऑफ इंग्लैंड, एंड्रयू बेली, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा बाजार, पाउंड स्टर्लिंग, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान, वित्त

ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को लेकर बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने आगाह किया है कि अगर ईंधन की लागत लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों को अपरिवर्तित रख पाना काफी कठिन हो सकता है। शुक्रवार को अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया ऊर्जा मूल्य वृद्धि का व्यापक असर फिलहाल काफी धीमा रहा है, लेकिन अभी शुरुआती चरण होने के कारण स्थिति पर कड़ी नजर रखना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक को अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक आपूर्ति सुधारक के रूप में रेखांकित किया है, जो भविष्य की उत्पादकता को गति दे सकता है।

## ब्रिटेन में ब्याज दरें तय करने का केंद्रीय ढांचा और मुद्रास्फीति लक्ष्य
यूनाइटेड किंगडम के भीतर मौद्रिक नीति का निर्धारण बैंक ऑफ इंग्लैंड की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बैंक का मुख्य वैधानिक उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना और मुद्रास्फीति दर को 2% के अनिवार्य लक्ष्य पर बांधकर रखना है। इस आर्थिक संतुलन को साधने के लिए केंद्रीय बैंक अपनी आधार उधार दरों में फेरबदल को मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है।

बैंक ऑफ इंग्लैंड वह आधिकारिक दर तय करता है जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है और जिस दर पर बैंक आपस में लेन-देन करते हैं। यही आधार दर अंततः ब्रिटेन की पूरी अर्थव्यवस्था में ऋण की सामान्य लागत को नियंत्रित करती है। ब्याज दरों में यह रणनीतिक उतार-चढ़ाव ब्रिटिश पाउंड की वैश्विक कीमत को भी व्यापक रूप से प्रभावित करता है।

जब खुदरा महंगाई बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2% के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक तुरंत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके कदम उठाता है। इस सख्ती से आम लोगों और व्यावसायिक घरानों के लिए बैंक कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे उपभोक्ता मांग घटती है। वैश्विक मुद्रा बाजार के लिहाज से ऊंची ब्याज दरें पाउंड स्टर्लिंग को सहारा देती हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेशक आकर्षक रिटर्न की तलाश में ब्रिटेन में पूंजी लगाना अधिक पसंद करते हैं।

इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति तय सीमा से नीचे खिसक जाती है, तो यह आर्थिक मंदी का संकेत माना जाता है। ऐसे हालात में विकास को गति देने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड दरों में कटौती करता है ताकि सस्ता कर्ज मिलने पर कंपनियां नए निवेश करें। हालांकि, दरों में यह ढील आम तौर पर पाउंड की विनिमय दर को कमजोर कर देती है।

## क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का मौद्रिक तंत्र
आर्थिक संकट के असाधारण दौर में बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है। यह एक ऐसा आपातकालीन नीतिगत कदम है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक जाम हो चुकी वित्तीय व्यवस्था में भारी नकदी का प्रवाह बढ़ाता है। जब नीतिगत दरों में शून्य के करीब कटौती करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते, तब अंतिम उपाय के तौर पर क्यूई लागू की जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक नई मुद्रा जारी करके बैंकों और बड़े वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड या एएए-रेटेड कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है। संस्थानों के पास अतिरिक्त नकदी पहुंचने से वे बाजार में कर्ज बांटने के लिए प्रेरित होते हैं, हालांकि इस बड़े पैमाने की मुद्रा आपूर्ति से अक्सर पाउंड स्टर्लिंग कमजोर पड़ता है।

इसके उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी की प्रक्रिया तब शुरू की जाती है जब अर्थव्यवस्था तेजी से सुधर रही हो और मुद्रास्फीति का दबाव दोबारा उभरने लगे। क्यूई के विपरीत, क्यूटी के तहत बैंक ऑफ इंग्लैंड नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पोर्टफोलियो में पहले से मौजूद बॉन्ड की परिपक्वता पर मिलने वाले मूलधन का दोबारा निवेश नहीं करता। बाजार से तरलता समेटने वाला यह कदम सामान्य तौर पर पाउंड के मूल्य के लिए सकारात्मक साबित होता है।

## वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और विभिन्न मुद्राओं की चाल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती ने कई प्रमुख जोड़ियों पर दबाव बना दिया है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD टूटकर अगस्त की शुरुआत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और रातों-रात 200-दिवसीय एसएमए के नीचे खिसकने के बाद 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास काफी कमजोर नजर आया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के बीच कच्चे तेल में दो दिनों की तेजी ने महंगाई की चिंताएं दोबारा जगा दी हैं, जिससे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनावों ने डॉलर को दो महीने के शिखर पर पहुंचा दिया, जिसने ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को दबा दिया।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी USD/JPY में शुक्रवार को कुछ ठहराव देखा गया। जोड़ी अपने 159.00 के तीन सप्ताह के शीर्ष स्तर से थोड़ा नीचे आई क्योंकि टोक्यो द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के डर से जापानी मुद्रा के विक्रेता सतर्क हो गए। हालांकि, फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और तेल की वजह से बढ़ती महंगाई के चलते अमेरिकी प्रतिफल में आया उछाल डॉलर को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। इसके अलावा बैंक ऑफ जापान द्वारा पिछले सप्ताह दरों में की गई नरम वृद्धि ने येन की बढ़त को सीमित रखा है।

इसी बीच बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में एक नया कदम है, जो कई हफ्तों से बनी बाजार की आम उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा।

## सोने की कीमतों में सुधार का प्रयास और धातु बाजार का रुख
कमोडिटी बाजार में सोने ने शुक्रवार को अपनी गिरावट को थोड़ा थामने की कोशिश की। कीमती धातु $4,230 के मजबूत सपोर्ट क्षेत्र से उछलने के बाद $4,300 के स्तर से ठीक नीचे कारोबार करती दिखी। हालांकि, व्यापक मंदी का रुख अब भी बरकरार है, क्योंकि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंकाएं तथा दीर्घावधि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 5% के पार बने रहना सर्राफा बाजार पर लगातार भारी दबाव बना रहा है।

## पाउंड बनाम डॉलर का तकनीकी विश्लेषण और बाजार स्थिति
मुद्रा बाजार के लाइव आंकड़ों के अनुसार, पाउंड बनाम अमेरिकी डॉलर यानी GBP/USD 1.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 1.32 के बंद भाव के मुकाबले +0.03% की मामूली बढ़त दर्शाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि वर्तमान ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के ठीक 1.00 गुना पर दर्ज किया गया।

तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 27 के स्तर पर है, जो इस मुद्रा जोड़ी के ओवरसोल्ड क्षेत्र में होने की पुष्टि करता है। एमएसीडी -0.01 पर है जबकि इसका सिग्नल -0.00 पर दर्ज है, जो हिस्टोग्राम पर -0.00 के साथ मंदी का रुझान दिखा रहा है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में 20-दिवसीय ईएमए 1.34, 50-दिवसीय ईएमए 1.35 और 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए और 200-दिवसीय एसएमए दोनों 1.35 पर हैं। लंबी अवधि में कीमत में गिरावट का रुझान है, हालांकि ईएमए 50 के ईएमए 200 से ऊपर निकलने से गोल्डन क्रॉस की स्थिति भी बनी हुई है।

बोलिंजर बैंड का 20-दिवसीय दायरा 1.33 से 1.37 के बीच फैला है जिसका मध्य बिंदु 1.35 है, और वर्तमान कीमत निचले बैंड के नीचे चल रही है। 14-दिवसीय एडीएक्स 30 पर एक स्पष्ट ट्रेंड की मौजूदगी का संकेत दे रहा है, वहीं स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 10 और सिग्नल लाइन 16 पर दर्ज है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर है। आगामी सत्रों के लिए 20-दिवसीय सपोर्ट 1.32 और रेजिस्टेंस 1.36 पर बना हुआ है, जबकि मुख्य पिवट स्तर 1.32, रेजिस्टेंस स्तर क्रमशः 1.33 और 1.33 तथा सपोर्ट स्तर 1.32 और 1.32 पर स्थित हैं।

## इसका आप पर असर
ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख से वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल बढ़ने और उधारी लागत ऊंची बने रहने की संभावना है।

- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय इक्विटी और बॉन्ड बाजारों में अस्थिरता जारी रहेगी। लंबी अवधि के निवेश पोर्टफोलियो पर यील्ड के ऊंचे स्तरों का सीधा असर देखने को मिलेगा।
- **विदेशी मुद्रा व्यापारियों के लिए:** डॉलर की मजबूती और पाउंड की तकनीकी कमजोरी से मुद्रा जोड़ों में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा। वर्तमान 1.32 के स्तर पर पाउंड तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड स्थिति में पहुंच गया है।
- **वस्तु बाजार के प्रतिभागियों के लिए:** कच्चे तेल में तेजी मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा रही है जबकि सोने की कीमतों पर दबाव कायम है। 5% से अधिक की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बुलियन में किसी भी बड़ी तेजी को सीमित रख सकती है।
- **आम कर्जदारों के लिए:** वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा दरें ऊंची रखने से कर्ज की लागत में जल्द राहत मिलने के आसार कम हैं। होम लोन और व्यावसायिक ऋणों पर ऊंची ब्याज दरों का बोझ बना रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
वैश्विक ऊर्जा बाजार में हालिया मूल्य वृद्धि और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की विभिन्न मौद्रिक नीतियों के टकराव से वैश्विक मुद्रा और ऋण बाजारों में तनाव बढ़ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल ने एक बार फिर मुद्रास्फीति को भड़काने की चिंताएं पैदा कर दी हैं।

- **कच्चे तेल में तेजी:** तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने मुद्रास्फीति के फिर से बढ़ने की आशंकाओं को जन्म दिया है। इसने केंद्रीय बैंकों की दरों में कटौती की योजनाओं को झटका दिया है।
- **फेडरल रिजर्व का सख्त रुख:** अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रवैये ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके चलते डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
- **बैंक ऑफ इंग्लैंड की सतर्कता:** ऊर्जा की ऊंची कीमतों का दीर्घकालिक प्रभाव ब्रिटेन में मुद्रास्फीति को 2% के लक्ष्य से ऊपर बनाए रख सकता है। इसी जोखिम के कारण एंड्रयू बेली ने दरों को अपरिवर्तित रखने की कठिनाइयों की चेतावनी दी।
- **जापान का ऐतिहासिक नीति बदलाव:** बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।

## सवाल-जवाब

### 1. एंड्रयू बेली ने ब्याज दरों को लेकर क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने कहा कि अगर ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए ब्याज दरों को बिना बदले स्थिर रख पाना कठिन हो सकता है।

### 2. बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?
बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य वैधानिक लक्ष्य ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखना और मुद्रास्फीति को 2% के स्तर पर सीमित रखना है।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में क्या निर्णय लिया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 4. वर्तमान में GBP/USD की तकनीकी स्थिति क्या है?
GBP/USD 1.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा है और इसका 14-दिवसीय आरएसआई 27 है, जो दर्शाता है कि यह जोड़ी तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड है।

### 5. सोने की कीमतों पर मौजूदा दबाव का क्या कारण है?
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका और 5% से ऊपर बनी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड सोने की कीमतों पर दबाव बना रही है।

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