{
  "type": "article",
  "title": "बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान, पाउंड पर निवेशकों की नजर",
  "summary": "ब्रिटेन का केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है, जबकि मुद्रास्फीति का दबाव और ऊर्जा बाजार से जुड़ी अनिश्चितताएं मौद्रिक नीति समिति के सामने कड़ी चुनौती पेश कर रही हैं।",
  "content": "ब्रिटेन का केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ इंग्लैंड गुरुवार को वर्ष 2026 की अपनी छठी नीतिगत समीक्षा बैठक के नतीजे घोषित करने जा रहा है। वित्तीय बाजारों और अर्थशास्त्रियों को व्यापक रूप से यह अपेक्षा है कि नियामक अपनी मानक उधारी दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखेगा। यदि ऐसा होता है, तो यह पिछली दिसंबर में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद लगातार छठा मौका होगा जब ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के आंकड़े अब भी केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से काफी ऊपर बने हुए हैं, जिससे नीति निर्माताओं के लिए आगे की राह बेहद संवेदनशील हो गई है।\n\n मौद्रिक नीति समिति की इस अहम बैठक के फैसले के तुरंत बाद विस्तृत मिनट्स भी जारी किए जाएंगे। इन मिनट्स से यह साफ हो सकेगा कि समिति के सदस्यों के बीच नीतिगत रुख को लेकर क्या आंतरिक बहस हुई और मतदान का सटीक विभाजन क्या रहा। जुलाई के महीने में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा था, लेकिन उस दौरान मौद्रिक नीति समिति का 6-3 का मतदान काफी आक्रामक और सख्त माना गया था। तीन सदस्यों ने दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया था, जिससे यह संकेत मिला था कि ईरान संघर्ष के कारण पैदा हुए मुद्रास्फीति संबंधी जोखिमों को लेकर नीति निर्माताओं में गहरी चिंता है।\n\n \n\nआंतरिक मतभेद और भू-राजनीतिक दबाव\n\nबैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने स्पष्ट किया था कि फिलहाल अर्थव्यवस्था में दूसरे दौर के मूल्य प्रभावों के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद, उनका मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और व्यापक मूल्य दबाव बढ़ता है, तो भविष्य में उच्च ब्याज दरों की आवश्यकता पड़ सकती है। हाल ही में 8 सितंबर को ट्रेजरी सेलेक्ट कमेटी की सुनवाई के दौरान नीति निर्माताओं ने उन अटकलों को खारिज करने की कोशिश की जिनमें ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी को अनिवार्य बताया जा रहा था। फिर भी, उन्होंने स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति का समग्र परिदृश्य भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार के घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।\n\n गवर्नर एंड्रयू बेली का यह भी तर्क था कि बाजार में जो दर वृद्धि की उम्मीदें बढ़ रही हैं, वे आंशिक रूप से ऊर्जा की कीमतों में नए उछाल से जुड़े जोखिम प्रीमियम को दर्शाती हैं, न कि केंद्रीय बैंक के सबसे संभावित नीतिगत मार्ग को। मौद्रिक नीति समिति के भीतर विचारों का संतुलन काफी नाजुक बना हुआ है। डिप्टी गवर्नर डेव राम्सडेन ने श्रम बाजार में नरमी के बीच घरेलू रूप से उत्पन्न मुद्रास्फीति के दबाव को अपेक्षाकृत सौम्य करार दिया है। दूसरी ओर, एलन टेलर का कहना है कि दरों को प्रतिबंधात्मक स्तरों पर बनाए रखना बाहरी मुद्रास्फीति जोखिमों के खिलाफ एक प्रकार के बीमा का काम करता है। जुलाई में दर को 3.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.00 प्रतिशत करने के पक्ष में मतदान करने वाली मेगन ग्रीन ने चेतावनी दी कि तेल की कीमतों में लंबा झटका मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को हमेशा के लिए उच्च स्तर पर जमा सकता है।\n\n \n\nमुद्रा बाजार और पाउंड की तकनीकी स्थिति\n\nनीतिगत निर्णय के अतिरिक्त, वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान मौद्रिक नीति समिति के मतदान विभाजन पर टिका हुआ है। यदि इस विभाजन में कोई अप्रत्याशित बदलाव दिखता है, तो यह ब्रिटिश पाउंड के लिए बड़ा उत्प्रेरक साबित हो सकता है। निर्णय से पूर्व, पाउंड बनाम अमेरिकी डॉलर यानी GBP/USD हाल के हफ्तों के निचले दायरे में 1.3400 के मध्य स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो इसके महत्वपूर्ण 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज के बेहद करीब है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में पाउंड पर नया दबाव मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण देखने को मिला है।\n\n तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, यदि पाउंड में और कमजोरी आती है, तो अल्पकालिक अवधि में 1.3440 के आसपास स्थित 100-दिवसीय एसएमए का फिर से परीक्षण हो सकता है। इसके नीचे 28 जुलाई के निचले स्तर 1.3273 तक कोई मजबूत समर्थन स्तर उपलब्ध नहीं है। दूसरी तरफ, यदि पाउंड में सुधार होता है, तो 9 सितंबर को बना 1.3567 का मासिक उच्च स्तर पहला महत्वपूर्ण प्रतिरोध होगा, जिसके बाद 21 अगस्त का 1.3675 का स्तर अहम माना जा रहा है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, GBP/USD वर्तमान में 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.34 से 0.27 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 14-दिवसीय आरएसआई 38 पर है, जबकि एमएसीडी मंदी के संकेत दे रहा है और एडीएक्स 22 पर सीमित दायरे का रुझान दिखा रहा है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 1.34 से 1.37 के बीच स्थित हैं, जहां मुख्य पिवट स्तर 1.34 तथा 20-दिवसीय समर्थन स्तर 1.33 और प्रतिरोध 1.37 के आसपास बना हुआ है।\n\n \n\nमौद्रिक नीति के उपकरण और आर्थिक प्रभाव\n\nबैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम के लिए संपूर्ण मौद्रिक नीति निर्धारित करता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता यानी 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर हासिल करना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए केंद्रीय बैंक अपनी मानक उधारी दर को घटाता या बढ़ाता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड वह दर तय करता है जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है और बैंक आपस में लेनदेन करते हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों का सामान्य स्तर तय होता है। यह नीतिगत दर सीधे तौर पर पाउंड स्टर्लिंग के विनिमय मूल्य को भी प्रभावित करती है।\n\n जब मुद्रास्फीति बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो नियामक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। इससे आम लोगों और व्यवसायों के लिए कर्ज लेना अधिक महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और कीमतों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है। उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करती हैं क्योंकि वे ब्रिटेन में अधिक प्रतिफल प्राप्त करने के लिए अपनी पूंजी लगाते हैं, जिससे आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे गिर जाती है, तो यह आर्थिक वृद्धि में सुस्ती का संकेत होता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि सस्ता ऋण उपलब्ध कराकर व्यवसायों को निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, जिससे पाउंड स्टर्लिंग पर नकारात्मक दबाव पड़ता है।\n\n अत्यधिक विषम परिस्थितियों में जब केवल ब्याज दरों में कटौती से वित्तीय प्रणाली को गति नहीं मिल पाती, तब बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है। क्यूई एक अंतिम उपाय नीति है जिसके तहत केंद्रीय बैंक धन सृजित करके वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड या उच्च गुणवत्ता वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है ताकि प्रणाली में नकदी का प्रवाह बढ़ सके। इस प्रक्रिया से सामान्यतः पाउंड स्टर्लिंग कमजोर होता है। इसके उलट, जब अर्थव्यवस्था तेजी से सुधर रही हो और मुद्रास्फीति बढ़ने लगे, तब क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी लागू की जाती है। क्यूटी में केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश रोक देता है, जो आम तौर पर पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक साबित होता है।\n\n \n\nवैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी रुझान\n\nब्रिटेन के नीतिगत निर्णय से ठीक पहले वैश्विक वित्तीय बाजारों में अन्य संपत्तियों में भी दिलचस्प हलचल देखी जा रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD में नए खरीदार सक्रिय हुए और यह 0.7100 के स्तर पर वापस पहुंच गया, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद डॉलर में आई तेजी कुछ समय के लिए थमी थी। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं और अमेरिका तथा ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों की उम्मीदों ने जोखिम धारणा को सुधारा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को गति मिली।\n\n दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी 156.00 के नीचे संक्षिप्त गिरावट से उबरती दिखी और अपनी तीन दिनों की बढ़त की श्रृंखला को रोकने की कोशिश में रही। अमेरिकी डॉलर के सात सप्ताह के उच्च स्तर पर ठहरने के साथ-साथ बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति सामान्यीकरण की राह तेज करने की उम्मीदों ने जापानी येन को समर्थन दिया है। दशकों तक जापान की अत्यंत कम ब्याज दरों ने वैश्विक निवेशों के लिए खरबों डॉलर के सस्ते वित्तपोषण का काम किया, जिससे जापानी येन दुनिया का सबसे सस्ता वित्तपोषण स्रोत बन गया था। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सख्ती की संभावनाओं के साथ यह दौर एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक बयानों के बाद 4,235 डॉलर के छह सप्ताह के निचले स्तर से उबरने के बाद 4,300 डॉलर प्रति औंस के ऊपर नए बिकवाली दबाव का सामना कर रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nबैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखने से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार और आयात-निर्यात लागतों में तात्कालिक स्थिरता बनी रहेगी।\n\n• भारत में विदेशी मुद्रा पर प्रभाव: पाउंड स्टर्लिंग में संभावित स्थिरता से ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों और वहां यात्रा करने वाले नागरिकों के खर्चों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं आएगा। जो परिवार ट्यूशन फीस या जीवनयापन के लिए धनराशि भेज रहे हैं, उन्हें विनिमय दरों में भारी अस्थिरता का सामना नहीं करना पड़ेगा।\n• वैश्विक निवेशकों और उधारकर्ताओं के लिए: दरों में कटौती न होने से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में ऋण लागत अधिक बनी रहेगी। वैश्विक स्तर पर विदेशी मुद्रा में उधारी लेने वाली कंपनियों को फिलहाल सस्ती ब्याज दरों की राहत का इंतजार करना होगा।\n• ऊर्जा कीमतों की निगरानी: भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आयातित मुद्रास्फीति का जोखिम बना हुआ है। आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को आने वाले महीनों में परिवहन और उत्पादन लागत पर करीबी नजर रखनी होगी।\n• मुद्रा कारोबारियों के लिए दायरा: पाउंड बनाम डॉलर में तकनीकी स्तर 1.3400 के करीब बने रहने से ट्रेडर्स को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अप्रत्याशित मतदान विभाजन से मुद्रा विनिमय में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय घरेलू श्रम बाजार में नरमी और बाहरी भू-राजनीतिक मुद्रास्फीति जोखिमों के बीच संतुलन बनाने की नीति का हिस्सा है।\n\n• लगातार उच्च बनी मुद्रास्फीति: ब्रिटेन में मुद्रास्फीति की दर अभी भी केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से काफी ऊपर है। इस कारण नीति निर्माता समय से पहले ब्याज दरों में कटौती करके कीमतों को दोबारा भड़काने का जोखिम नहीं लेना चाहते।\n• मध्य पूर्व तनाव और ऊर्जा संकट: ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल और ऊर्जा बाजार में मूल्य वृद्धि का अंदेशा बना हुआ है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल घरेलू मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को बढ़ा सकता है।\n• श्रम बाजार में धीमी पड़ती रफ्तार: डिप्टी गवर्नर डेव राम्सडेन के अनुसार घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति के दबाव अपेक्षाकृत शांत हैं क्योंकि श्रम बाजार में सुस्ती आ रही है। इस आर्थिक नरमी के कारण केंद्रीय बैंक फिलहाल अतिरिक्त दर वृद्धि से भी बच रहा है।\n• मौद्रिक नीति समिति में बंटे विचार: समिति के भीतर कुछ सदस्य external जोखिमों से बचाव के लिए दरों को सख्त रखने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य पहले ही दर बढ़ाने का प्रस्ताव रख चुके हैं। इन परस्पर विरोधी परिस्थितियों में दर को मौजूदा स्तर पर रोकना ही सर्वमान्य विकल्प बना हुआ है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर को लेकर क्या अनुमान लगाया जा रहा है?\nबाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखेगा।\n\n2. बैंक ऑफ इंग्लैंड का आधिकारिक मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक लक्ष्य ब्रिटेन में 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर हासिल करना है।\n\n3. जुलाई की बैठक में नीति समिति के सदस्यों का मतदान क्या था?\nजुलाई में ब्याज दर 3.75 प्रतिशत पर रखने का निर्णय 6-3 के आक्रामक मतदान से हुआ था, जिसमें तीन सदस्यों ने दर बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया था।\n\n4. GBP/USD मुद्रा जोड़ी के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं?\nGBP/USD के लिए 1.3440 और 1.3273 महत्वपूर्ण समर्थन स्तर हैं, जबकि ऊपर की ओर 1.3567 और 1.3675 मुख्य प्रतिरोध स्तर बने हुए हैं।\n\n5. क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) क्या हैं?\nक्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदकर वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ाता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बॉन्ड की खरीद रोककर प्रणाली से अतिरिक्त नकदी वापस ली जाती है।",
  "url": "https://trendkia.com/market/bank-of-england-ki-byaja-dara-3-75-pratishata-para-sthira-rahane-ka-anumana-pound-para-niveshakon-ki-najara-33717",
  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-19",
  "tags": [
    "बैंक ऑफ इंग्लैंड",
    "ब्याज दरें",
    "ब्रिटिश पाउंड",
    "मुद्रास्फीति",
    "विदेशी मुद्रा",
    "वैश्विक अर्थव्यवस्था",
    "मौद्रिक नीति",
    "वित्त"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}