बैंक ऑफ इंग्लैंड की सख्त नीति और तेज विकास दर से ब्रिटिश पाउंड को मिलेगी बढ़त ब्रिटेन में तेज आर्थिक विकास और महंगाई के चलते बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकता है, जिससे अमेरिकी डॉलर को छोड़कर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में मजबूती की संभावना बन रही है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड आने वाले दिनों में कई प्रमुख मुद्राओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ब्रिटेन के भीतर आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होने और मुद्रास्फीति का दबाव बने रहने के कारण यह संभावना जताई जा रही है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड नीतिगत मोर्चे पर अधिक सख्त रुख अख्तियार करेगा। अमेरिकी डॉलर को अलग रख दिया जाए, तो जी10 समूह की बाकी मुद्राओं के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड के आगे निकलने के अनुकूल अवसर दिखाई दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त मात्रात्मक सख्ती यानी क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की गति धीमी होने से भी पाउंड को जरूरी तकनीकी और आर्थिक सहारा मिल सकता है। हालांकि अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड अपनी बैंक दर को 3.75% के मौजूदा स्तर पर ही अपरिवर्तित रखेगा। बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और नवंबर का परिदृश्य केंद्रीय बैंक की आगामी बैठकों को लेकर वित्तीय बाजारों में व्यापक स्तर पर संभावनाएं आंकी जा रही हैं। बाजार के वर्तमान रुझानों के मुताबिक नवंबर के महीने में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का पक्ष लेने वाले नीति निर्माता बहुमत में आ सकते हैं, जिसकी संभावना वर्तमान में 94% तक आंकी गई है। इस दृष्टिकोण का मुख्य तर्क यह है कि मुद्रास्फीति को तय लक्ष्य तक वापस नीचे लाने के लिए मौद्रिक नीति को और अधिक प्रतिबंधक बनाना बेहद जरूरी हो गया है। आने वाले आधिकारिक बयानों में भी कड़े नीतिगत कदमों के साफ संकेत मिल सकते हैं। गाई फॉक्स नाइट के आसपास मौद्रिक सख्ती की संभावना और बढ़ सकती है, क्योंकि अगस्त के बाद से ऊर्जा कीमतों में आई तेजी और ब्याज दर वक्र में हुए बदलावों के आधार पर आर्थिक विकास और महंगाई के अनुमानों को संशोधित किया जा सकता है। यूरो और पाउंड विनिमय दर के तकनीकी स्तर मुद्रा बाजार के तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो यूरो और ब्रिटिश पाउंड यानी EUR/GBP की जोड़ी के लिए अहम स्तर चिन्हित किए गए हैं। इस जोड़ी के लिए 0.8530 का स्तर एक प्रमुख समर्थन यानी सपोर्ट स्तर बना हुआ है, जबकि ऊपर की ओर 0.8610 का स्तर एक रुकावट या रेसिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। अर्थशास्त्रियों की आम सहमति के अनुसार बैंक दर 3.75% पर स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे तकनीकी दायरे में कारोबार सीमित रह सकता है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की चाल में उतार-चढ़ाव एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नई खरीदारी देखने को मिली, जिसके दम पर AUD/USD ने 0.7100 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख से प्रेरित होकर अमेरिकी डॉलर जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद डॉलर की तेजी में ठहराव आया। दूसरी तरफ रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ब्याज दरें बढ़ने के दांव और अमेरिका तथा ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों की उम्मीदों ने बाजार के जोखिम उठाने की क्षमता को सहारा दिया, जिससे जोखिम के प्रति संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती मिली। इसी तरह USD/JPY की जोड़ी गुरुवार को एशियाई सत्र में 156.00 के स्तर से नीचे की हल्की गिरावट से उबरने की कोशिश में जुटी रही। यह जोड़ी पिछले दिन लगभग दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अपने तीन दिनों के लगातार बढ़त के सिलसिले को थामने की दिशा में दिखी। फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद डॉलर में सात सप्ताह के उच्च स्तर तक जो रैली देखी गई थी, उस पर ब्रेक लगा है। वहीं बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति सामान्यीकरण की राह पर अधिक सख्त कदम उठाने की अटकलों ने जापानी येन को समर्थन दिया है। इस कारण से USD/JPY की बढ़त सीमित दायरे में बनी रही और बाजार का पूरा ध्यान शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर टिक गया है। सोने की कीमतों में रिकवरी और जापान की मौद्रिक पृष्ठभूमि यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई। पीली धातु पिछले कारोबारी दिन बने अपने करीब छह सप्ताह के निचले स्तर से उबरने में सफल रही। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई मामूली गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे सर्राफा बाजार को राहत मिली। इसके बावजूद फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत परिदृश्य और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सुरक्षित निवेश माने जाने वाले ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर की गिरावट सीमित रहने की संभावना है, जो गैर-उपज वाले सोने की बढ़त पर दबाव बनाए रख सकता है। जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश के वित्तपोषण में अहम भूमिका निभाई है। इस बेहद ढीली मौद्रिक नीति ने जापानी येन को दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बना दिया था। अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह मौद्रिक नीति को फिर से सख्त किए जाने की संभावना है, तो यह सस्ता फंडिंग लाभ एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की, वहीं जापान लंबे समय तक दुनिया में एक अलग अपवाद बना रहा। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजारों में ब्रिटिश पाउंड और अन्य मुद्राओं के उतार-चढ़ाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी निवेश की लागत प्रभावित होगी। • विदेशी मुद्रा कारोबारियों के लिए: प्रमुख मुद्राओं के विनिमय स्तरों में होने वाले बदलाव से ट्रेडिंग रणनीतियों पर असर पड़ेगा। ट्रेडर्स को EUR/GBP में 0.8530 और 0.8610 के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर रखनी होगी। • ब्रिटेन से आयात-निर्यात करने वालों के लिए: पाउंड की संभावित मजबूती से ब्रिटेन के उत्पादों का आयात महंगा हो सकता है। निर्यातकों और आयातकों को अपनी विदेशी मुद्रा विनिमय दरों को सुरक्षित करने के लिए अनुबंधों की समीक्षा करनी चाहिए। • अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए: बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति सख्त करने से वैश्विक सस्ते कर्ज की लागत बदल सकती है। निवेशकों को कई वर्षों से चल रहे येन कैरी ट्रेड के जोखिमों का नए सिरे से मूल्यांकन करना होगा। • सोने के खरीदारों के लिए: डॉलर की चाल और बॉन्ड यील्ड के दबाव के बीच सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। खरीदारों को अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त रुख और भू-राजनीतिक तनावों के संकेतों पर नजर रखनी होगी। ऐसा क्यों हुआ ब्रिटेन में तेज आर्थिक विस्तार और महंगाई का बना रहना मौद्रिक नीति को कड़ा करने के लिए मुख्य उत्प्रेरक बन रहा है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर विभिन्न केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों में आ रहे बदलाव मुद्रा बाजारों को दिशा दे रहे हैं। • ब्रिटेन की विकास दर और महंगाई: ब्रिटेन में आर्थिक गतिविधियों की गति और लगातार दबाव बना रही महंगाई ने बैंक ऑफ इंग्लैंड पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनाया है। इसी कारण से बाजार नवंबर तक मौद्रिक सख्ती की 94% संभावना मानकर चल रहा है। • ऊर्जा कीमतों और यील्ड कर्व में बदलाव: अगस्त के बाद से ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और ब्याज दर वक्र में ऊपर की ओर आए बदलावों से मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान बढ़ रहे हैं। इस पृष्ठभूमि ने नीति निर्माताओं को अधिक सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया है। • जापान की नीति में सामान्यीकरण: बैंक ऑफ जापान द्वारा एक दशक से चली आ रही अत्यंत ढीली नीति को समाप्त करने और दरें बढ़ाने की तैयारी से येन को सहारा मिला है। वर्षों तक दुनिया का सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत रहने के बाद जापान वैश्विक मौद्रिक रुख के साथ तालमेल बिठा रहा है। सवाल-जवाब 1. ब्रिटिश पाउंड के अन्य मुद्राओं से बेहतर प्रदर्शन करने की क्या वजह है? ब्रिटेन में बढ़ती आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के दबाव के चलते बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना है, जिससे पाउंड को मजबूती मिल सकती है। 2. बैंक ऑफ इंग्लैंड की वर्तमान ब्याज दर कितनी है? अर्थशास्त्रियों के अनुसार बैंक ऑफ इंग्लैंड की बैंक दर वर्तमान में 3.75% पर अपरिवर्तित रहने का अनुमान है। 3. नवंबर में ब्रिटेन में ब्याज दर बढ़ने की कितनी संभावना आंकी गई है? वित्तीय बाजारों में नवंबर के महीने में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना 94% तक आंकी गई है। 4. EUR/GBP मुद्रा जोड़ी के लिए अहम तकनीकी स्तर क्या हैं? EUR/GBP के लिए मुख्य सपोर्ट स्तर 0.8530 पर देखा जा रहा है, जबकि ऊपरी स्तरों पर 0.8610 पर रेसिस्टेंस मौजूद है। 5. AUD/USD जोड़ी में गुरुवार को क्या बदलाव देखा गया? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में ताजा खरीदारी के बाद यह गुरुवार को एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर पर वापस पहुंच गया। 6. बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति का वैश्विक निवेश पर क्या असर रहा है? जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को सस्ता वित्तपोषण प्रदान किया है, जो अब नीति सख्त होने से बदल सकता है। https://trendkia.com/market/bank-of-england-ki-sakhta-niti-aura-teja-vikasa-dara-se-british-pound-ko-milegi-barhata-33668 TrendKia — Har trend, sabse pehle.