बैंक ऑफ इंग्लैंड की सतर्कता से यूरो के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में नरमी, 0.8600 के स्तर पर टिकी निगाहें बैंक ऑफ इंग्लैंड के सतर्क रुख और ब्रिटेन की कमजोर आर्थिक रफ्तार के बीच यूरो बनाम ब्रिटिश पाउंड में मजबूती दर्ज की जा रही है। 0.8600 के रेजिस्टेंस स्तर को पार करने के बाद अब बाजार की नजरें आगे की तकनीकी चाल पर टिकी हैं। मुद्रा बाजार में यूरो और ब्रिटिश पाउंड के बीच जारी उतार-चढ़ाव में इस हफ्ते यूरो का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत रुख को लेकर उपजी अनिश्चितता और ब्रिटेन की आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने पाउंड पर लगातार दबाव बनाए रखा है। कई हफ्तों तक चले सीमित दायरे के कारोबार के बाद अब विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यह क्रॉस 0.8600 के अहम रेजिस्टेंस स्तर को चुनौती दे रहा है। लाइव आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 0.8604 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.8597 से 0.09 प्रतिशत अधिक है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत रुख और ब्याज दरों पर असमंजस ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक के गवर्नर एंड्रयू बेली ने शुक्रवार को वित्तीय हालात पर अहम टिप्पणी की। एंड्रयू बेली ने कहा कि ब्रिटेन में वित्तीय परिस्थितियों में कड़ापन देखने को मिला है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश में ऊर्जा की कीमतों का असर बाजार पर अपेक्षाकृत धीमा रहा है। हालांकि, गवर्नर ने आगाह करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें यदि लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो बैंक रेट में बढ़ोतरी न करने के मौजूदा रुख को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के रणनीतिकारों का मानना है कि वित्तीय बाजार की मौजूदा उम्मीदों और ब्रिटेन के वास्तविक नीतिगत परिदृश्य के बीच एक बड़ा अंतर उभर रहा है। रणनीतिकारों ने ध्यान दिलाया कि स्वैप कर्व अगले बारह महीनों में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में करीब 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी करके इसे 4.75 प्रतिशत तक पहुंचाने का संकेत दे रहा है। इसके विपरीत, विश्लेषकों का तर्क है कि केंद्रीय बैंक को शायद उतनी सख्ती करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जितनी बाजार अभी उम्मीद कर रहा है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के अनुसार, ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पहले से ही अपनी पूर्ण क्षमता से नीचे काम कर रही है। इसके अलावा, मौजूदा बैंक रेट 3.75 प्रतिशत पर है, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड के अनुमानित 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के तटस्थ दायरे के ऊपरी छोर के करीब पहुंच चुका है। साथ ही, राजकोषीय नीति के और अधिक प्रतिबंधात्मक होने के आसार हैं। ये सभी कारक इस बात की ओर इशारा करते हैं कि नीतिगत दरें लंबे समय तक अपेक्षाकृत निचले स्तर पर रह सकती हैं, जो मौजूदा बाजार धारणा के बिल्कुल उलट है। तकनीकी संकेतक और प्रमुख स्तरों का गणित तकनीकी मोर्चे पर, 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI लगभग 60 के स्तर पर बना हुआ है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार में सकारात्मक गति बनी हुई है, लेकिन यह अभी जरूरत से ज्यादा खरीदारी वाले क्षेत्र में नहीं पहुंचा है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD संकेतक भी हल्का सकारात्मक रुख दिखा रहा है। यह तकनीकी बनावट संकेत देती है कि जब तक भाव अल्पकालिक और मध्यम अवधि के मूविंग एवरेज से ऊपर टिके रहते हैं, तब तक किसी भी गिरावट पर लिवाली देखने को मिल सकती है। यदि तेजी जारी रहती है और भाव 0.8600 के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रहते हैं, तो यह तेजी के ब्रेकआउट की पुष्टि करेगा। इसके बाद ध्यान 0.8639 पर स्थित 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज की तरफ शिफ्ट हो जाएगा। लाइव बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 50-दिवसीय EMA 0.8576 और 20-दिवसीय EMA 0.8579 पर है, जबकि 200-दिवसीय SMA 0.8640 और 50-दिवसीय SMA 0.8564 पर मौजूद है। गिरावट की स्थिति में शुरुआती सपोर्ट 0.8592 पर स्थित 100-दिवसीय SMA पर देखा जा रहा है, जिसके बाद 0.8566 पर 50-दिवसीय SMA सहारा दे सकता है। यदि यह दायरा टूटता है, तो भाव नीचे 0.8530 और फिर 0.8450 के स्तर तक फिसल सकते हैं। इस जोड़ी का 52-सप्ताह का दायरा 0.8468 से 0.8865 के बीच रहा है। मुद्रा बाजार की व्यापक हलचल और पाउंड का प्रदर्शन साप्ताहिक प्रदर्शन के लिहाज से ब्रिटिश पाउंड प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अलग-अलग स्तरों पर कारोबार करता दिखा। पूरे हफ्ते के दौरान पाउंड ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के खिलाफ सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। दूसरी तरफ, प्रमुख मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाले करेंसी हीट मैप के अनुसार अमेरिकी डॉलर और यूरो के सामने पाउंड को कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य जोड़ों पर नजर डालें तो शुक्रवार के एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी अगस्त की शुरुआत के बाद से अपने नए निचले स्तर पर आ गई। 200-दिवसीय SMA से नीचे फिसलने के बाद यह जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास बेहद कमजोर नजर आ रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया, जिसने ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की ब्याज दर बढ़ोतरी से जुड़ी उम्मीदों को पीछे छोड़ दिया। अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन के मामले में शुक्रवार के एशियाई सत्र में मामूली नरमी देखी गई। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के अंदेशे के चलते येन में बिकवाली करने वाले ट्रेडर सतर्क हो गए, जिससे डॉलर के मुकाबले येन 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर जाकर ठहर गया। हालांकि, फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और कच्चे तेल की महंगाई के दम पर अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान द्वारा पिछले सप्ताह ब्याज दरों में किए गए नरम इजाफे ने भी जापानी मुद्रा की बढ़त को सीमित करने का काम किया है। कमोडिटी, क्रिप्टो और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य विदेशी मुद्रा बाजारों के अलावा अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों में भी बड़ा फेरबदल देखा गया। सोने की कीमतों में शुक्रवार को कुछ सुधार दर्ज हुआ और यह 4,230 डॉलर के सपोर्ट क्षेत्र से उछलकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के ठीक नीचे कारोबार करता दिखा। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की आशंकाओं और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5 प्रतिशत से ऊपर बने रहने के कारण कीमती धातुओं पर दबाव की व्यापक स्थिति बरकरार है। डिजिटल एसेट बाजार में बिटकॉइन 84,000 डॉलर से थोड़ा ऊपर अपनी गिरावट को थामते हुए कंसोलिडेशन के दौर में दिखाई दिया। बिटकॉइन की चाल के साथ कदम मिलाते हुए एथेरियम में भी गिरावट देखी गई, जबकि एक्सआरपी की बाजार चाल इस सामान्य रुझान से अलग रही। भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में हुई पिछली बातचीत के चार महीने बाद 24 सितंबर को वॉशिंगटन में द्विपक्षीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध विराम को दो महीने और आगे बढ़ाते हुए 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाने पर सहमति जताई और संकेत दिया कि वार्ता आगे भी जारी रहेगी। उधर बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम है और यह निर्णय व्यापक रूप से बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। इसका आप पर असर यूरो और पाउंड के बीच विनिमय दर में बदलाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय करने वालों के बजट को सीधे प्रभावित करता है। • मुद्रा विनिमय लागत: यूरो के मजबूत होने से पाउंड के मुकाबले यूरो खरीदना महंगा हो जाएगा। यूरोप की यात्रा या पढ़ाई करने वालों को अपनी करेंसी बदलने के लिए अधिक पाउंड खर्च करने पड़ेंगे। • आयात और निर्यात: ब्रिटेन के आयातकों को यूरोप से सामान मंगाने पर अब अधिक लागत चुकानी पड़ सकती है। वहीं ब्रिटिश सामान यूरोपीय खरीदारों के लिए थोड़ा सस्ता और प्रतिस्पर्धी बन सकता है। • ब्याज दर उम्मीदें: बैंक ऑफ इंग्लैंड की दरों में कम बढ़ोतरी की संभावना से ब्रिटिश कर्जदारों को राहत मिल सकती है। यदि दरें अनुमान से कम बढ़ती हैं तो नए होम लोन और बिजनेस लोन पर ब्याज का बोझ सीमित रहेगा। • फॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीति: 0.8600 का स्तर टूटने के बाद ट्रेडर्स के लिए तकनीकी स्तर बेहद अहम हो गए हैं। निवेशक 0.8639 के 200-दिवसीय SMA और 0.8592 के सपोर्ट स्तरों को ध्यान में रखकर अपने स्टॉप-लॉस तय कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यूरो के मुकाबले पाउंड में कमजोरी बैंक ऑफ इंग्लैंड के सतर्क रुख और ब्रिटेन की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते आई है। विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन में आगे ब्याज दरों में वैसी बढ़ोतरी नहीं होगी जैसी बाजार उम्मीद कर रहा था। • केंद्रीय बैंक का सतर्क रुख: बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने वित्तीय स्थितियों के सख्त होने और ऊर्जा कीमतों के प्रभाव का उल्लेख किया। इस अनिश्चितता के कारण बाजार में पाउंड को लेकर आक्रामक खरीदारी देखने को नहीं मिली। • आर्थिक सुस्ती और तटस्थ ब्याज दर: ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था अपनी पूरी क्षमता से नीचे काम कर रही है और वर्तमान 3.75 प्रतिशत बैंक रेट पहले ही तटस्थ दायरे के ऊपरी स्तर पर है। इसके साथ ही राजकोषीय नीति सख्त रहने की संभावना ने भी ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की गुंजाइश को सीमित कर दिया है। • तकनीकी ब्रेकआउट का दबाव: कई हफ्तों तक सीमित दायरे में रहने के बाद यूरो ने 0.8600 के स्तर पर जोरदार दबाव बनाया। सकारात्मक आरएसआई और एमएसीडी संकेतकों ने खरीदारों का भरोसा बढ़ाया, जिससे पाउंड पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। सवाल-जवाब 1. यूरो और ब्रिटिश पाउंड के लिए 0.8600 का स्तर इतना महत्वपूर्ण क्यों है? 0.8600 का स्तर कई हफ्तों से एक मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ था। इसके ऊपर टिकने से तेजी के नए दौर की पुष्टि होती है और 0.8639 का लक्ष्य खुलता है। 2. बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था पर क्या कहा? उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थितियां सख्त हुई हैं और यदि ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो दरों में बढ़ोतरी न करने के रुख पर कायम रहना मुश्किल होगा। 3. ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के विश्लेषकों का ब्याज दरों पर क्या नजरिया है? उनका मानना है कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पहले से सुस्त है और बैंक ऑफ इंग्लैंड को बाजार की उम्मीद के मुकाबले दरें कम बढ़ानी पड़ सकती हैं। 4. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में क्या तय हुआ? दोनों नेताओं ने वाशिंगटन में मुलाकात कर अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध विराम को 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाने का फैसला किया। 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। https://trendkia.com/market/bank-of-england-ki-satarkata-se-euro-ke-mukabale-british-pound-men-narami-0-8600-ke-stara-para-tiki-nigahen-38554 TrendKia — Har trend, sabse pehle.